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Tribute To Movement Martyrs - उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि

Started by Anubhav / अनुभव उपाध्याय, October 03, 2007, 02:14:22 PM

हेम पन्त

आज मसूरी काण्ड की बरसी है. 2 सितम्बर 1994 के दिन मसूरी में हुए बर्बर गोलीकाण्ड में सात उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारी व पुलिस के कप्तान मारे गये. हम मसूरी के शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए भावभीनी श्रद्धांजली देते हैं.

हेम पन्त

कवि- जगमोहन जी

विदा मां ......विदा !!

जाते समय झार पर छोड़ आई थी, वह माँ कहकर आई थी अभी आती हूँ
ज...ल्दी बस्स.....तेरे लिए, एक नई जमीन,एक नई हवा, नया पानी ले आऊं ले आऊं
नई फसल, नया सूरज, नई रोटी
अब्बी आई....बस्स पास के गांधी-चारे तक ही तो जाना है,झल्लूस में
चलते समय एक नन्ही हथेली, उठी होगी हवा में- विदा ! मां विदा!!
खुशी दमकी होगी,दोनो के चेहरे पर माथा चूमा होगा मां ने- उन होठो से,
जिनसे निकल रहे थे नारे वह मां सोई पडी़ है सड़क पर पत्थर होंठ है,
पत्थर हाथ पैर पथराई आँखे पहाडों की रानी को, पहाड़ देखता है
अवा्क - चीड़ देवदार, बाँज -बुराँस, खडें है सन्न-
आग लगी है आज.
आदमी के दिलो में खूब रोया दिन भर बादल रखकर सिर पहाड़ के कन्धे पर
नही जले चूल्हे, गांव घरो में उठा धुआ उदास है खिलखिलाते बच्चे,
उदास है फूल वह बेटा भी रो-रोकरसो गया है- अभी नही लौटी मां......
लौटेगी तो मैं नही बोलूंगा लौटी क्यों नही अभी तक....!
उसे क्या पता, बहरे लोकतन्त्र में वह लेने गई है,अपने राजा बेटे का भविष्य

खीमसिंह रावत


मसूरी गोलीकाण्ड के वीर शहीदो को कभी भुलाया नही जा सकता है....इन वीर सपुतो को श्रधाजलि अप्रित करते है..  शत-शत नमन...करते है....




Anubhav / अनुभव उपाध्याय

2 October ko Uttarakhand ki khaatir shaheed hue logon ki aaj barsi hai. Uttarakhand Rajya Andolan main aaj ka din bahut aham hai. Aaj jab Desh Ahinsa ke pujari Baapu ka janmadin mana raha tha to humare bhai baheno pai police julm dhaha rahi thi.

Uttarakhand ke amar shahedoon ko shat shat naman.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


उत्तराखंड राज्य के संघर्ष के दौरान अपनी कुर्वानी देने वाली शहीदों को नमन ! आज अगर उत्तराखंड राज्य भारत एक अलग राज्य बना है तो इसमें इन शहीदों की अहम् भूमिका रही थी !

इन शहीदों का योगदान सदा -२ ले लिए अमर रहेगा !

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2 अक्टूबर 1994 को अलग उत्तराखण्ड राज्य की मांग के समर्थन में दिल्ली में आयोजित होने वाली विशाल रैली के लिए पूरे उत्तराखण्ड से लोग बसों मे भर कर दिल्ली पहुंच रहे थे, इनमें से कुछ बसें जो गढवाल से आ रही थीं उन्हें मुज्ञफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर पी.ए.सी. व यू.पी. पुलिस द्वारा रोक कर लोगों को गोलियों से भून दिया गया. इतने पर ही यह सब नही रुका, भीड मे शामिल महिलाओं से अभद्रता की गयी और लोगों का सामान लूट लिया गया. इस काण्ड ने पूरे उत्तराखण्ड को हिला कर रख दिया. अलग उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन इस घटना के बाद चरम पर पहुँच गया. सी.बी.आई. की रिपोर्ट के अनुसार इस घटना में 6 लोग मौके पर मारे गये और राजेश नेगी का कोई पता नही चल पाया.17 लोग घायल हुए, 4 महिलाओं के साथ दुष्कर्म हुआ. वास्तविक गणना निस्संदेह अधिक ही रही होगी.



जय उत्तराखंड !




Barthwal

मेहता जी  उतराखंड के लिये दिये गये शहीदो के इस बलिदान को कभी भुलाया नही जा सकता. वे सदैव ही इस राज्य के लिये एक शहीद पुत्र या पुत्री कहलायेगे. पर काश आज के स्वार्थी और भ्रष्ट नेता इन्को केवल नाम के लिये ना याद करे और राज्य की खुशहाली के लिये कार्य करने का प्रयत्न करे.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720












इन अमर शहीदों को शत-शत नमन
८ अगस्त, १९९४, पौडी.
जीत बहादुर गुरुंग
१ सितम्बर, १९९४ - खटीमा.
प्रताप सिंह
भुवन सिंह
सलीम
भगवान सिंह
धर्मानन्द भट्ट
गोपी चंद
परमजीत सिंह
रामपाल
२ सितम्बर, १९९४ - मंसूरी
श्रीमती बेलमती चौहान
श्रीमती हंसा धनाई
राय सिंह बंगारी
धनपत सिंह
मदन मोहन मंमगांई
बलबीर सिंह नेगी
उमाशंकर त्रिपाठी (पुलिस उप-अधीक्षक)
गुड्डू
२ अक्टूबर, १९९४ (रामपुर तिराहा - मुजफ़्फ़रनगर)
रवीन्द्र रावत
गिरिश कुमार भद्री
सतेन्द्र सिंह चौहान
सुर्य प्रकाश थपलियाल
राजेश लखेडा
अशोक कुमार
राजेश नेगी (इनका शव आज तक प्राप्त नहीं हो सका है)
३ अक्टूबर, १९९४ - देहरादून
राजेश रावत
दीपक वालिया
बलवन्त सिंह जगवाण
३ अक्टूबर, १९९४ - कोटद्वार
प्रथ्वी सिंह बिष्ट
राकेश देवरानी
३ अक्टूबर, १९९४ - नैनीताल
प्रताप सिंह बिष्ट
१० नबम्बर, १९९५ (श्रीयंत्र टापू - श्रीनगर)
राजेश रावत
यशोधर बेजवाल