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Articles By Bhisma Kukreti - श्री भीष्म कुकरेती जी के लेख

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 26, 2009, 12:54:53 PM

Bhishma Kukreti

*********पैलि अपणु मुख ऐना मा त देख -गढ़वाली कविता



कवि -डॉ नरेन्द्र गौनियाल

[गढ़वाली गीत , गढ़वाली कविताएँ, गढ़वाली पद्य साहित्य]


हैंका मुख पर झुवाल देखि, तू ख़ित्त ना हैंस.
अरे लाटा ! पैलि अपणु मुख,ऐना मा त देख.

इन ना चुटावा सिक्कों तै, सुद्दी जख-तख.
तुमारा ये शौक से त ,ग़दर-गै मची जाली.

अब त कटेणी च जिंदगी,बस उदास सी.
हंसण-ख्यलणा का दिन, अब त चलिगीं

तू वख मि यख त बोल, मिलि सकला कख.
एक लपाग बि भैर आणु ,कैका बस मा नीं.

कुछ मन मा च त्यारो त ,बोलि दे तू चट.
ये लाटा ! फिर कबि ,मौका मिल ना मिल

आंदा-जान्दों तै पुछ्दां,ऊंतई बि देखि कखि.
नि बि दिखेंदा त गाणि त, हम कैरि सकदां.

मिटे सक दुन्या कु अन्ध्यरू,इनु त क्वी नि करदू.
बस सुद्दी सब अपणि-अपणि,दुकान चलाणा छन.

उंकी फितरत च कि ऊ, सिर्फ अपणा मन कि कर्दिन.
अपणा मन कि बात च कि मि, कुछ बोलि नि सकदु..

डॉ नरेन्द्र गौनियाल..सर्वाधिकार सुरक्षित   


गढ़वाली गीत , गढ़वाली कविताएँ, गढ़वाली पद्य साहित्य

Bhishma Kukreti

आधुनिक गढवाली कथा के सौ साल


       हे बौ



कथाकार- पूरण पंत पथिक



--- हे बौ !

----हाँ

---कथगा बडी गडोली धरीं च तेरी मुंडि मा

--हाँ अ

--गरु नि होणु च ?

--जरा थौ ले लेदि धौं !

--अच्छु

--बिसाण लगाण ?

--हाँ

--तू त कुछ बुलणि नि छै भै, बौ !

--क्या बवान

--भैजी चिट्ठी बि आय?

---हाँ अ

--कब औणा छन घौर ?

--कुजाण

--हे बौ ! मी तै त सरै गौं मा सबसे भलि त्वी लगदी

----.......

--पर त्वे तै मि कनो लगदु ?

--अपण छ्वटु भुला बीरू सि.

सन्दर्भ- चिट्ठी - अंक -३ १९८९

सर्वाधिकार - पूरण पंत पथिक , देहरादून २०१२



आधुनिक गढवाली कथा के सौ साल

आधुनिक उत्तराखंडी कथा

Bhishma Kukreti

 Talu Mixchar: Satire attacking on dishonesty
(Critical review of Representative Garhwali Satirical Articles and Satirists)

                            Bhishma Kukreti
[Notes on satire attacking dishonesty; Garhwali satire attacking dishonesty; Uttarakhand satire attacking dishonesty; mid Himalayan satire attacking dishonesty; Himalayan satire attacking dishonesty; North Indian satire attacking dishonesty; Indian satire attacking dishonesty; south Asian satire attacking dishonesty; Asian satire attacking dishonesty]
[व्यंग्य में बेईमानी , असत्य पर प्रहार; गढवाली व्यंग्य में बेईमानी , असत्य पर प्रहार; उत्तराखंडी व्यंग्य में बेईमानी , असत्य पर प्रहार; मध्य हिमालयी व्यंग्य में बेईमानी , असत्य पर प्रहार; हिमालयी व्यंग्य में बेईमानी , असत्य पर प्रहार; उत्तर भारतीय व्यंग्य में बेईमानी , असत्य पर प्रहार; भारतीय व्यंग्य में बेईमानी , असत्य पर प्रहार; दक्षिण एशियाई व्यंग्य में बेईमानी , असत्य पर प्रहार; एशियाई व्यंग्य में बेईमानी , असत्य पर प्रहार लेखमाला ].

                    Dhad magazine published a Garhwali satirical article 'Talu Mixchar 'by Naveen Chandra Nautiyal in its September 1988 issue.
  The satire attacks on the dishonest behavior of today's human beings. The Garhwali satire also deals with the persons who don't abide their promises. The satire searches that people have ambitions for accepting responsibilities more than their capacity.
     According to Anil Dabral the satire is an average satire in terms of language style and story line.
Reference-
Dr. Anil Dabral, Garhwali Gady Parampara, 2007, (pp425).

Copyright@ Bhishma Kukreti, 17/7/2012
Notes on satire attacking dishonesty; Garhwali satire attacking dishonesty; Uttarakhand satire attacking dishonesty; mid Himalayan satire attacking dishonesty; Himalayan satire attacking dishonesty; North Indian satire attacking dishonesty; Indian satire attacking dishonesty; south Asian satire attacking dishonesty; Asian satire attacking dishonesty to be continued...
व्यंग्य में बेईमानी , असत्य पर प्रहार; गढवाली व्यंग्य में बेईमानी , असत्य पर प्रहार; उत्तराखंडी व्यंग्य में बेईमानी , असत्य पर प्रहार; मध्य हिमालयी व्यंग्य में बेईमानी , असत्य पर प्रहार; हिमालयी व्यंग्य में बेईमानी , असत्य पर प्रहार; उत्तर भारतीय व्यंग्य में बेईमानी , असत्य पर प्रहार; भारतीय व्यंग्य में बेईमानी , असत्य पर प्रहार; दक्षिण एशियाई व्यंग्य में बेईमानी , असत्य पर प्रहार; एशियाईव्यंग्य में बेईमानी , असत्य पर प्रहार लेखमाला जारी ..

Bhishma Kukreti

दर्शन सिंह बिष्ट की (जन्म १९६०)  गढवाली  कविताएँ

[भीष्म कुकरेती की गढवाली पद्य , गढवाली कविताएँ, गढ़वाली गीत. उत्तराखंडी पद्य, उत्तराखंडी गीत, उत्तराखंडी पद्य लेखमाला से ]



शक्ति

शब्दों कि शक्ति

दिल से भक्ति

राजनीति कि तख्ति

'बम से भी खतरनाक होंदी

****

स्याणि

मी ब्व्न्नू छौं बुड्या जि कि

तुम साक्युं तक ज्यून्दा रयाँ

पर ह्यां

तुमारि आंखि बुजी जयां

अर तुम

खटुलिम बटि भयां नि अयाँ

मि थैं

छक्वै पिन्सन खलाणा रयां

पर भारे

मि जै ख्वाळा जौंलू

मीखुण कुछ नि ब्वल्यां

***

सन्दर्भ- केर, दर्शन सिंग बिष्ट का  गढवाली कविता संग्रह धाद प्रकाशन , देहरादून

सर्वाधिकार - दर्शन सिंह बिष्ट , अगरोड़ा , पौड़ी गढ़वाल

गढवाली पद्य , गढवाली कविताएँ, गढ़वाली गीत. उत्तराखंडी पद्य, उत्तराखंडी गीत, उत्तराखंडी पद्य लेखमाला जारी....

Bhishma Kukreti

*******जिकुड़ी मा लग्यूं तीर ******
         कवि--डॉ नरेन्द्र गौनियाल
जिकुड़ी मा लग्यूं तीर अब त,प्राण लेकि ही रालो.
जब तलक चुभ्यूं च रैणि दे,इनि बूज सि छेद पर.

वींकी याद धरीं,जिकुड़ी का एक कूणा मा कुटरी सि.
अब  क्वी घचोर्याँ ना,फूटि जालि नासूर बणिकि.

मि बुनूं छौं त बुन दे,यु मेरो दिल कु गुबार च.
त्वे तै पीड़ च त सैले ज़रा,यु तेरो इम्तहान च.

इनु ना रुसै तू हमसे,कबि गलती से बि.
याद आलि जब त्वे,त तू सुरुक ऐ जै.

द्याखा छा जु सुपिना,ऊ सुपिना ही रैगीं.
जौंका बाना छौ खटेणू,ऊ आग बणिगीं.

य दुन्य बि कनि च,अपणोंन ही मारि लूट.
आंखि खुली पता चलि,माया जाळ यु झूठ.
          डॉ नरेन्द्र गौनियाल ...सर्वाधिकार सुरक्षित 

Bhishma Kukreti

                          Gani: Garhwali Story about Generation Gap
                      (Review of Stories of Durga Prasad Ghildiyal)

                                                 Bhishma Kukreti

                       (Let us Celebrate -Hundredth year of Modern Garhwali Fiction)

[Notes on Stories about Generation Gap; Garhwali Stories about Generation Gap; Uttarakhandi Stories about Generation Gap; Mid Himalayan Stories about Generation Gap; Himalayan Stories about Generation Gap; North Indian Stories about Generation Gap; Indian Stories about Generation Gap; Indian sub continent Stories about Generation Gap; South Asian Stories about Generation Gap; Asian Stories about Generation Gap]

                             The generation gap is not about the differences of emotions but the generation gap is the differences of physical means between two generations for achieving the goal.
    There is a generation gap between Ghanshyam and his son Sattu.  Sattu comes to understand that his and his father's desires were same and the differences between him and his dad were about means of achieving the target.
Reference-
1-Abodh Bandhu Bahuguna, Gad Myateki Ganga
2-Dr Anil Dabral, 2007 Garhwali Gady Parampara
3-Bhagwati Prasad Nautiyal, articles on Durga Prasad Ghildiyal l in Chitthi Patri
4-Dr. Nand Kishor Dhoundiyal, Garhwal Ki Divangat Vibhutiyan

Copyright@ Bhishma Kukreti, 14/7/2012
Notes on Stories about Generation Gap; Garhwali Stories about Generation Gap; Uttarakhandi Stories about Generation Gap; Mid Himalayan Stories about Generation Gap; Himalayan Stories about Generation Gap; North Indian Stories about Generation Gap; Indian Stories about Generation Gap; Indian sub continent Stories about Generation Gap; South Asian Stories about Generation Gap; Asian Stories about Generation Gap to be continued....

   Let us Celebrate -Hundredth year of Modern Garhwali Fiction!


Bhishma Kukreti

गढवाली -हास्य व्यंग्य साहित्य

                        राजनीति मा हंसाण वळा वीर


                        चबोड्या - भीष्म कुकरेती



(राजनैतिक हास्य-व्यंग्य; गढवाली राजनैतिक हास्य-व्यंग्य; कुमाउनी राजनैतिक हास्य-व्यंग्य; उत्तराखंडी राजनैतिक हास्य-व्यंग्य; मध्य हिमालयी राजनैतिक हास्य-व्यंग्य; हिमालयी राजनैतिक हास्य-व्यंग्य; उत्तर भारतीय राजनैतिक हास्य-व्यंग्य; भारतीय राजनैतिक हास्य-व्यंग्य; एशियाई राजनैतिक हास्य-व्यंग्य लेख्मला ]



    अच्काल मि जख बि जांदु लोकार बुल्दन भै भीषम जी जरा हंसै  देन. अब बतावदि   टी .वी. चैनलुं मा इथगा हंसण वळ प्रोग्राम छन पण हौंसौ  मांग पूरी नि होंदी. हूण बि कन कैक च महगाई जन , भ्रष्टाचार जन अंस्दारी गैस जब भारत मा फैलीं राल्या  त  लोगूँ तै हरदम हंसणो ग्वाळा चयांदी छन.

-- अब परसि उखम एकन पूछि दे बल अच्काल राजनीति मा सबसे जादा हंसाण वाळ कु कु छन, कु कु छया ?

--अब जन कि  बात गंभीर छे त जबाब दीणि पोड़ .

--पंवार जी बि खूब हंसांदन .

--कनो ?

--ए भै कृषि मंत्री ह्वेक बुल्दन बल सरकार मंहगाई ख़तम करणो कुछ नि करणि च . अब जब मंत्री इ ब्वालल बल सरकार कुछ नि करणि च त मुर्दों तै बि हौंस  आलि कि ना.

--जी बात त सै च भै

- जी इन लगद लाल कृष्ण अडवाणी जी बि हंसौण वाळ भड़ छन

-- क्या बुना छंवां गुरु गंभीर लाल कृष्ण अडवाणी जी अर कौमेडियन  ?

-- कौमेडी करण मा ले क्या च? अब द्याखो ना अडवाणी जी छै साल तलक लौह पुरुष का भेष मा भारत का गृह मंत्री रैन   तब त मा बैणि तलाक  जु अडवाणि जी तै उन्ना देसुं मा (विदेस) काळो धन कि जरा एक डै  बि याद आई होलि  धौं  अर अच्काल ऊं पर रबत लग्युं च बल  भारत कु काळो धन उन्ना देसुं मा च . अब इन मा कै बि गरीब क्या मातबर रून्दा तै .हौंस आई जालि कि ना?

---हाँ !  हाँ!  हौंस त आई जालि. हाँ अडवानी जी बि राजनीति का भला कौमेडियन छन .

-- भारतीय जनता पार्टी बुल्दी बल उत्तर प्रदेश मा उंकी मुख्य विरोधी पार्टी समाजवादी पार्टी च .

---- हाँ ! इखमा   कै तै गलत फहमी नी च बल उत्तर प्रदेश मा भारतीय जनता पार्टी  कि  मुख्य विरोधी पार्टी समाजवादी पार्टी च.

---हाँ ! पण जब डिम्पल यादव निर्विरोध लोक सभा मा पौंछि ग्याई त इन लगद कि भारतीय जनता पार्टी जोकरूं  पार्टी च अर लोगुं तै हंसाण मा सबसे  अग्वाडि  च 

--चौधरी चरण सिंग जी जब ज़िंदा छा अर उत्तर प्रदेश क मुख्य मंत्री छा त छकैक हंसांदा  छया  हिंदी फिल्मो कोमेदियाँ महमूद जी बि चरण सिंग जी से जळदो छा .

-- हैं ! क्या बुन्ना छंवां ? चौधरी जी त गुरु गम्भीर मनिख छया . हौंस त oonk  न्याड़ ध्वार बि नि आँदी छे.

-- हाँ इनी लगद छौ पण..

---पण क्या ?

---  चौधरी जी न फरमान निकाळ बल उत्तर प्रदेश बिटेन अंगरेजी अर अंग्रेजियत तै गबये जाओ, अंगरेजी अर अंग्रेजियत को jad  नाश करे जाओ .

--त ये भै चरण सिंग जी पवित्र भारतीय छया

-- हाँ  चरण सिंग जी न इना उत्तर प्रदेश की स्कूलों-कौलेजों मा  अंग्रेजी पढ़ण- पढ़ाण बन्द कराई अर उना दुसर दिन अपण नौनु तै अमेरिका भेजी द्याई

-- औ तबि त मि बोलूं! कि अजय सिंग तै इथगा फुकानी अंगरेजी कनै आँदी

--हाँ अर इनी मुलायम सिंग जी  बि गुरु क पद चिन्हों पर चलिन. उत्तर प्रदेश मा अंगरेजी क विरोध कार  अर उख अपण नौनौं तै डिल्ली मा अंग्रेजी स्कूल -कौलेजूं  मा भर्ती करे द्याई 

-औ !

--- मुलायम सिंग जी त भौत दै हंसांदा  छया.

--अच्छा ?

--हाँ ! अंग्रेजी भजाणौ  बान मुलायम सिंग जीन उत्तरप्रदेश मा तमिल, तेलगु , कन्नड़ अर मलियालम सिखाणौ संस्थान खोलिन

-- पण या त बडी बढिया बात च बल उत्तर भारतीय द्रविड़ भाषा सीखन . इखमा हंसणौ बात क्या च ?

-- हंसणो बात या च कि  उत्तर प्रदेश कि अपणि भाषाओं जन कि गढ़वळि , कुमाउनी या ब्रज की छ्वीं बात मुलायम सिंग जी न कबि नि कार

-- हाँ हाँ या त हंसणा बात च .

-- अब इनी एक हंसोड्या कलाकार छन अपण डा. रमेश पोखरियाल 'निशंक' जी

-- तन ना बोल भै ! निशंक जीक  सौब किताब त गंभीर अर उपदेश सिखाण वळि छन

-- न्है न्है, निशंक जी बड़ा कौमेडियन  छन भै आर मुलायम सिंग जीक खास च्याला छन !

-- मि  तै त विश्वास नि आन्द . कख मुलायम सिंग जी  कख निशंक जी. दुयूंक मेल होई नि सकुद

--द ब्वालो ! मुलायम सिंग जी न उत्तर प्रदेश की अपणी   बोलि -गढव ळी - कुमाउनी, ब्रज जन भाषा बिसरिक  द्रविड़ भाषाओं विकासौ  बान सरकारी कोष खाली कार . त इख उत्तराखंड मा निशंक जी  न गढवळि अर कुमाउनी भाषाओं तै तिरैक संस्कृत तै राज भाषा  घोषित करी.

-- हो , हो, हां, हा  इन हौंस त मै तै पड़ोसन फिलम देखिक बि नि आई जन हौंस मुलायम सिंग जी अर निशंक जीक स्वांग अर करतब सूणिक आणि च. हु -हु हा- हा --कौमेडियनो फौज .. .हा हू हा हू

- हाँ अर इखि ना  अमेरिका मा बि भौत सा हंसाण वळ स्टेन्डिंग  पौलिटिकल कौमेडियन छन

-- जन कि ?

-- जन कि क्या ! अपण ओबामा जी बि बड़ा पौलिटिकल कौमेडियन छन

--नै नै अमेरिका क राष्ट्रपति अर  कौमेडियन ?

-- ए भै जु अपुण देसौ   आर्थिक स्तिथि ठीक करणौ  बान भारत पर भगार लगाओ कि भारत मा उन्ना देसी ( विदेशी ) निवेश नि हूणु च वै से बड़ो अंतररास्ट्रीय कौमेडियन ku ह्वालो ?

--- हू ! हू ! हां ! हां ! बस भै  अब बन्द कारो पोलिटिकल कौमेडियनो छ्वीं . जख सनी, छन्नी , गौशाला को  हरेक कूण्याम ,  हरेक  आळम स्याळ   बैठया ह्वावन वीं  सनी क चिनखौं  क्या हाल होला ?



Copyright@ Bhishma Kukreti, 18/7/2012



राजनैतिक हास्य-व्यंग्य; गढवाली राजनैतिक हास्य-व्यंग्य; कुमाउनी राजनैतिक हास्य-व्यंग्य; उत्तराखंडी राजनैतिक हास्य-व्यंग्य; मध्य हिमालयी राजनैतिक हास्य-व्यंग्य; हिमालयी राजनैतिक हास्य-व्यंग्य; उत्तर भारतीय राजनैतिक हास्य-व्यंग्य; भारतीय राजनैतिक हास्य-व्यंग्य; एशियाई राजनैतिक हास्य-व्यंग्य लेख्मला  जारी ....


Bhishma Kukreti

गढवाली -हास्य व्यंग्य साहित्य



                                       कॉलेजौ पढाई से नुकसान

                                            चबोड्या - भीष्म कुकरेती


[ हास्य व्यंग्य साहित्य; गढ़वाली हास्य व्यंग्य साहित्य; उत्तराखंडी हास्य व्यंग्य साहित्य; मध्य हिमालयी हास्य व्यंग्य साहित्य; हिमालयी हास्य व्यंग्य साहित्य; उत्तर भारतीय हास्य व्यंग्य साहित्य; भारतीय हास्य व्यंग्य साहित्य; एशियाई हास्य व्यंग्य साहित्य लेख]

-- बाबा जी ! पता च तुम तै ?

-- क्या ?

--- तुम त अंदाज बि नि लगै सकला ! 

--क्या भै ?

-- मै तै आई. आई. टी. मुंबई, आई. आई. टी. खडगपुर इ ना इन्डियन इंस्टिच्युट  अहमदाबाद मा बि ऐडमिसन मिलि ग्याई.

-- अरे वाह ! या त पुळयाणो बात च.खुसी मनाणो बात च . पण ..?

- क्या पण ?

--- तू अछेकी यूं कॉलेजूं मा जाण चांदि  क्या ?

--पण बाबा जी तुमि त बुल्दा छा बल हरेक बच्चा तै बढिया से बढिया कॉलेज मा पढ़ण चयेंद .

-- ब्य्टा !  बात त सै च पण कुछ बात बस बुलणो कुण हुन्दन . फिर कथगा इ बड़ा आदिम छन जौन  बड़ा कौलेजुं मा नि पौड़ पण छना त  मतवार . मै नि लगद अपणा शरद पंवार जीन कै बड़ो नामी कॉलेज मा पौड़ी ह्वाऊ  . अपण घनश्याम दास बिड़ला  जी क इतियास बाँचो त मै नि लगद वो बड़ा कॉलेज मा पढ़न से इथगा बड़ा उद्यमी  - इथगा महान उद्योगपति ह्वेन.

-- चुचो ! सि वीडियोकोन का  मालिको तै दिखदि. तिनि भयुंन  अहमदनगर या  पूना क कॉलेजूं   मा पौड़ पण आज दिखदि सि आई .आई.  टी अर आई. आई. ऐम का पड्या लिख्यां लोगूँ तै नौकरी दीन्दन.

--पण आप बि त कॉलेज मा गे छया .

--हाँ गे छौ. पण जु मै जाणदु थौ कि कॉलेज की पढ़ाई  लिखै से कुछ नि होंद त मि इंटर  कौलेज मा बि नि जान्दो. वैबरी अकल इ नि छे . फोकट मा म्यार छै सात साल बर्बाद ह्वेन .  अरे कखी सरकारी दफ्तर मा चपड़ासी बि लगदो त  आज घूसौ पैसौ न  अपण कूड होंद अर रिटायर होणो परांत पेंसन पट्टा अलग. अब क्वी बि बाप नि चालो बल वैकी सन्तान बि वै इ गल्थी कार जु बुबा से ह्व़े छे.

--पण तुमन कबि बि नि ब्वाल कि आप न कॉलेज जैक गल्ति कार. उल्टो आप बुल्दा छ्या कि कॉलेज कि पढाई मतबल बिग मैन

--ओ त मि त्वे से इलै लुकान्दो छौ  कि तू मै तै  छ्वटु म्वटु नि मानि. हरेक बुबा अपण नौन्याळो से अपण गल्ति लुकांद. गल्ति से बि अपण गल्ति नि  बथान्द.अब तु बड़ो ह्व़े गे तमी बथै इ  द्यूंद  कि   नौकरी लगणि  नि छे त मीम कॉलेज जाणो अलावा टैम पास करणो  क्वी हैंक  काम नि छौ . इख तलक कि पी.एच .डि क फ़ार्म बि इलै इ भौर छौ कि टाइम पास करणो कुछ हौरी काम इ नि छौ.  अर जनि मै तै काम मील मैन  इ नि द्याख कि पी.एच डी. होंद क्या च.

-- मीन त सोची छौ कि तुम भौत पुळेलि (खुश) हवेल्या कि टॉप कौलेजूं न बि मान कि मि भारत का होशियार अर होनहार  छात्र छौं.

-- ओहो खुस त मि छौं. अरे हौर्युं स्वीकृति से हम होशियार थुका हूंदा . तू त अपणो आप मा होनहार छे. तू कै बि ऐरा गैरा  कॉलेज मा बि पढ़लि त वै कौलेजौ नाम बड़ो ह्व़े जालो .

-- पण ब्व़े कि बड़ी गाणि च बल मि कै नामी गिरामी विश्व प्रसिद्ध कॉलेज मा तालीम ल्यूं .

--अरे ब्यटा   यि सौब दिखाणा बात हून्दन. भै जब कैकु नौनु नामी कॉलेज मा पढ़दो त ब्व़े क अहंकार मा हौस मा वृद्धि होंद अर न्याड़ ध्वारो लोगूँ अर रिश्तेदारों पर धौंस जमाणो एक जरिया हुंद  . या बात त दुसरो पीठ मा सत्तू छोळणो बात ह्व़े .

--- त बुबा जी मि क्या कौरू ?

-- अरे अब त तू समजदार नागरिक ह्व़े गे भै. गांवक सि बात हूंद त  तीन अर मीन दगड़ी बैठिक हुक्का पीण छौ. अब त त्वे तै खुद निर्णय लीण चएंद. तेरी जगा मि ले हूंद त मीन कै एन. जी. ओ. की मदद से भारत भ्रमण पर जाण छौ . जिन्दगी का असली अनुभव दूसरों पैसा से भ्रमण से हुंद.

-- बुबा जी एक बात पूछूं ?

--हाँ हाँ एक ना द्वी पूछ बेटा.

आपक कुड़कि त नि ह्व़े ग्याई ?

-- ना ना ब्यटा अबि तलक कुड़कि त नि ह्वाई पण हां जु तू इथगा बड़ा कॉलेज म एड्मिसन लेलि त फीस इ फीस मा इखक एक रूमौ फ़्लैट अर गढ़वाळौ कूड़ी पुंगड़ी बिकि जाला  अर बकै खर्चा  बान कुज्याण क्य होलु धौं .

-- त ठीक च , पापा मि कै म्युनिसपैलिटी क कॉलेज मा भर्ती ह्व़े जान्दो.

-- साबास ब्यटा. तीन मै तै कुडकी होण बचै द्याई.


Copyright@ Bhishma Kukreti 18/7/2012


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Bhishma Kukreti

********याद जब तू करणी रैलि********


               कवि-डॉ नरेन्द्र गौनियाल



[कविताएँ व  गीत, गढ़वाली कविताएँ  व गीत; उत्तराखंडी कविताएँ व गीत; मध्य हिमालयी कविताएँ व गीत; हिमालयी कविताएँ व गीत; उत्तर भारतीय कविताएँ व गीत;  भारतीय कविताएँ व गीत; दक्षिण एशियाई कविताएँ व गीत; एशियाई कविताएँ व गीत लेखमाला ]
जिकुड़ी य धक-धक, धड़कणी रैलि,
तेरो नौं य जब तक,इनि लीणी रैलि.
त्वे बिसरणु च अब, भौत मुश्किल,
जिंदगी य बस इनि,कटिणी रैलि.

उनु त कतगे होला,फिरबी तू होलि यखुली,
मि सदनि दगड़ मा,जब तू याद करणी रैलि.
तेरि याद का सहारा,इनि कटि जाला यु दिन,
मन की पीड़ मन मा,जिंदगी ख़ुशी से कटेली.

सुख कि जूनी इनि चमकणी रैलि,
दुःख कि बदळी इनि हटणी रैलि.
जिंदगी कु बाग़ इनि महकणू रालो,
प्रेम कि खुशबू इनि आणी रैलि.

मन का फूल इनि खिलणा राला,
धीत कि प्वतळी इनि उड़णी रैलि.
दुःख का दिन मि इनि बिसरि जौंलु.
याद जब तू इनि  करणी रैलि.

    डॉ नरेन्द्र गौनियाल..सर्वाधिकार सुरक्षित   
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Bhishma Kukreti

Jab Mai yampuri Gayo:  Speaking Contemporary Problems satirically
(Analysis of Representative Garhwali Satirical essays and Satirists)
                             
                        Bhishma Kukreti
Nathi Cahnd is the writer of a Garhwali satire 'Jab Mai yampuri Gayo' published in September Dhad 1988).
    Ghimandu could not get seat for heaven as being a Garhwali laborer living in plains. However, bribe is a must for getting seat in hell too. Nathi Chand tries to push contemporary issues without required imagination. The satire is an average satire.
Reference-
1--Dr. Anil Dabral, Garhwali Gady Parampara, 2007, (pp425).
2-Dhad, September, 1988, issue
Copyright@ Bhishma Kukreti, 18/7/2012