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Articles By Bhisma Kukreti - श्री भीष्म कुकरेती जी के लेख

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 26, 2009, 12:54:53 PM

Bhishma Kukreti

गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य                                 



                   कैच देम यंग



              चबोड्या-  भीष्म कुकरेती


[हास्य व्यंग्य साहित्य;गढ़वाली हास्य व्यंग्य साहित्य; उत्तराखंडी भाषौ हास्य व्यंग्य साहित्य;  मध्य हिमालयी क्षेत्रीय भाषौ हास्य व्यंग्य साहित्य; हिमालयी भाषौ हास्य व्यंग्य साहित्य; उत्तर भारतीय भाषौ हास्य व्यंग्य साहित्य; भारतीयभाषौ हास्य व्यंग्य साहित्य;  दक्षिण एशियाई भाषौ हास्य व्यंग्य साहित्य; एशियाई  भाषौ हास्य व्यंग्य साहित्य]


(स्टाफ रिपोर्टर, इंडिया )  एक दस सालौ नौनु भारत तै बडी परेशानी झेलण पोडींन . बिचारा क ब्व़े बाबु सरकारी नौकरी मा छया कि द्वी घूस लींद पकडे गेन . खैर छै मैना परांत दुयुंक  फिर से नौकरी  बहाल ह्व़े ग्याई पण  अब भारत का ब्व़े बाब नी चांदन कि भविष्य मा उंको  नौनु बि बेवकूफी मा घूस लींद पकडे जावो. घूस लेण जरुरी च पण पकड्याण महाबेव्कूफी च. त भारत का ब्व़े बाबुं न अब वै तै क्रुकेडनेस  डेवलपमेंट कोचिंग क्लास मा भेजी दे. अब भारत अपण ब्व़े बाबु तै सिखांद कि कनकैक घूस लीण चएंद

अर घूस लींद दै क्या क्या सावधानी बरतण चएंदन .

          भारती क बुबा जी  पी.डब्ल्यू डी. को एक ठेकेदार च . वै दिन ठेकेदार जीक बणयूँ एक पुळ बण्यु द्वी दिन नि ह्व़े छौ कि भम से , भाचाक से पुळ भ्युं पोड़ी गे. भारती क बुबा तै बडी परेशानी दिखण पोड़ीन , भारती क बुबा नि चांदो कि भविष्य की ठेकेदारिण  भारती इन बेकार का मामला मा फंसी जा. अब भारती क ब्व़े बुबा तै क्वी चिंता नी च . भारती क्रुकेड नेस डेवलपमेंट कोचिंग क्लास मा क्रुकेड नेस की ट्रेनिंग लीणि च. क्रुकेड नेस डेवलपमेंट कोचिंग क्लास का फाउण्डर डाइरेक्टर पंडित विष्णु शर्मा बुल्दन बल जु बच्चों तै बेईमानी, गलतबयानी  बाळपन मा इ सिखाये जाओ त जु दुर्दिन भारत अर भारती क ब्व़े बाबु न देखिन वो नवाड़ी साख (नई जनरेसन ) तै नि दिख ण पोड़ल . भारत अर भारती क ब्व़े बाब पंडित विष्णु शर्मा क बातु से सहमत छन बल बच्चो तै धुर्या बणाण त वूं तै समौ रैक इ ट्रेनिंग मिलण चएंद अर पंडित  विष्णु शर्मा क सोच की बडी बडै हूण चएंद कि ऊन हिन्दुस्तान की समस्याओं निदानौ बान क्रुकेड नेस डेवलपमेंट कोचिंग क्लास खोलि.

    पंडित विष्णु शर्मा क दगड चाणक्य, विदुर, जेवियर  जन भागीदार बि छन .  जेवियर न बिस्तार से हमर खबर्या तै बताई बल अच्काल ब्व़े बाबु मा अपण बच्चों तै अनाचार, ब्यभिचार की शिक्षा  दीणौ  समौ नि मिलद त परेंट्स अपण नई साखि तै घूसखोरी, झूट बुलणो सही तरीका, झूट तै सच साबित करणो कूवत/सक्यात, चोर का चर चर  बचन, जन  जरुरी गुण नि सिखै  सकणा छन.  त जु यू गैप आयुं  च वैकी भरपै  जरूरी च. क्रुकेड नेस डेवलपमेंट कोचिंग क्लास ईं रिक्तता तै भरण मा हिंदुस्तान तै मदद दीणो च. फिर जौं ब्व़े बाबू मा टैम बि च त वो  वैज्ञानिक ढंग से सरल शब्दों मा अपण बच्चो तै धुर्या पन, चोरी जारी नि सिखै सकणा छन. जेवियर न  लाइब डेमो से बताई कि कै तरां से क्रुकेड नेस डेवलपमेंट कोचिंग क्लास का विशेषग्य बच्चों तै दुस्टाचरण. कुरीति, आचारहीनता सिखान्दन. 

  जख तक कोचिंग कलासु कोर्स  कु सवाल च क्लास का डाइरेक्टर चाणक्य न बताए बल बड़ा बढिया छन. इखमा प्रशाशन मा कै कै तरां से भ्रष्टाचार करण चएंद, फिर को को सावधानी जरूरी छन  जु भविष्य मा काम ऐ सकदन; राजनीति मा कु कु मुख्य टुटब्याग  छन अर कु कु बाटू छन जां से कि नेता हर समय शाशन मा इ राओ, भाई भतीजा बाद, बकळि जिकुड़ी, शरम बेचिक खाण , पद लोलुपता तै कन कैक अग्वाड़ी लाण, प्रशासन मा इमानदार कारिंदों तै कनै भ्रष्ट  बणाण अर दुन्या का सबसे बुरा कर्म कौरिक बि बेदाग़ छवि कन कैक रखण इत्यादि विषयूँ   ट्रेनिंग दिए जांदी. चाणक्य न संदेस्टी बताई बल  यांक बान कोचिंग संस्थान मा  भूतपूर्व दागी मंत्री अर खुन्कार अपराध्युं  (जु कबि बि पुलिस की पकड़ मा नि ऐन ) की सेवा लियाणि च जाण से कि बच्चों तै व्यवहारिक शिक्षा मील सको. 

   कोचिंग  संस्थान समौ समौ पर परीक्षा बि लींद जां से कि बच्चा दुष्टता, अरंचपन(असंतोषी) , उतड्यू(अशिष्ट) , छकटणु (ठग)   मा पारंगत ह्व़े जावन.पंडित विष्णु शर्मा न परीक्षा पत्र कि एक कापी बि दिखाई जो वास्तव मा दुनया मा अपणो   आप मा एक अभिनव परीक्षा पत्र च.

  किताबु क विषय सब विशेग्यो की सहायता से लिखे गेन . या सूचना क्रुकेडनेस डेवलपमेंट कोचिंग क्लास का किताबुं  लिख्वार वेद व्यासन दे.  वेद व्यास  महाभारत का अनुवाद दस बारा भाषाओं करणो बान प्रसिद्ध छन.

   विष्णु शर्मा न बताए बल हम चाँदवां बल हमर कोचिंग क्लास कि बदौलत बच्चा नौकरी लगण या व्यापार मा आण से पैलि प्रवीण ह्व़े जाओ. यांक वास्ता क्रुकेडनेस डेवलपमेंट कोचिंग क्लास वळा बच्चो तै जेल, पोलिस स्टेसन, वैस्यालय, भ्रष्ट नेताओं, बेईमान अधिकार्युं   क ड्यार जन जगा लीजान्दन.

        जख तलक इन क्लासों मांग को सवाल च इन क्लासों माग भौत च. क्रुकेडनेस डेवलपमेंट कोचिंग क्लास क इख द्वी साल की वेटिंग चलणि च.

हमारो दुसर खबर्या न रैबार दे कि हरेक शहर इ ना गांवु मा बि  क्रुकेडनेस डेवलपमेंट कोचिंग क्लास जन क्लासुं बड़ी मांग च अर भौत सा लालची , बेईमान व्यापारी ये बिजिनेस मा आणो तैयारी मा छन.



Copyright@ Bhishma Kukreti , 25/7/2012



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Bhishma Kukreti

                                Sanso: Story of Women Heroism

(Review of Garhwali Story Collection 'Bwari' by Durga Prasad Ghildiyal)

[Let us Celebrate Hundredth Year of Modern Garhwali Fiction]

                                      Bhishma Kukreti
'Sanso' is the story of relationship between brothers and sisters(Narendra- Surendra and Shanti) and the women heroism.  The daughters of Surendra and Shanti go to Lucknow for taking higher education and live there alone in a rented room. 
The story ends with heroic acts of two Garhwali female students in Lucknow
वो बोलनु छौ, "इनी साँसों गढ़वालै वीर कन्या ही कर सकदन"
  The end is sudden and the end part does not provide any hint to the readers in the first part of story.
Reference-
1-Abodh Bandhu Bahuguna, Gad Myateki Ganga
2-Dr Anil Dabral, 2007 Garhwali Gady Parampara
3-Bhagwati Prasad Nautiyal, articles on Durga Prasad Ghildiyal l in Chitthi Patri
4-Dr. Nand Kishor Dhoundiyal, Garhwal Ki Divangat Vibhutiyan
5-Notes of Prem lal Bhatt on the Stories of Durga Prasad Ghildiyal
Copyright@ Bhishma Kukreti, 26/7/2012

Let us Celebrate Hundredth Year of Modern Garhwali Fiction!

Bhishma Kukreti

गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य



                               देवि  दिवतौं पैथोलोजिकल रिपोर्ट

                                     चबोड्या-  भीष्म  कुकरेती



                 स्वर्ग लोक मा चिकित्सा सुविधौं हाल  जाणणो परसि मै तै देवी दिवतौं वैद वैदराज धन्वन्तरी मतबल डा. धन्वन्तरी क अस्पताल ग्यों. डा. धन्वन्तरी वीर हनुमान तै देखिक आणा छया.  मंदिरूं  मा हर जगा लिख्युं   रौंद  बल जनान्यूँ तै  हनुमान जीक छौं बरतण चएंद पन सौब जगा जनानी हनुमान जी पर भिड्यान्दन जां से हनुमान जी तै नयाण पड़द. अब एक दै ह्वाओ  द्वी दै ह्वाओ त क्वी बि नए   जाओ इख त हर  बगत मंदिरूं मा क्वी ना क्वी   जनानि हनुमान जीक खुट पर हाथ लगाणि रौंद अर बिचारा हनुआन जी तै छौं मिटाणो बान तलौ मा इ पड्यू रौण पड़द. अब इन मा बड़ा  बड़ा  चल्लि तक घिसे  जान्दन त हनुमान जी त दिवता छन. बिचारा  वीर  ब्रह्मचारी  बि  निमोनिया  का  बीमार  चलणा छन .

              डा. धन्वन्तरी न पैथोलोजिकल रिपोर्ट देखिक  श्रीनगर गढवाल का कमलेश्वर जी तै  बताई  बल तुम तै खड़ दिया पर बेवहज धुवां ,  अर नकली, बेकार घी ,  खड़ दिया क बाद  इना उना पड्यु  घी अर लिचड़  पिचड़ होण से अजीव सि एलर्जी ह्व़े गे. फिर आप पूरो साल भर ड़र्याँ बि रौंदा कि अब फिर से कीच -पीच  होण. मी अंटी  मड -कीच अर एलर्जी क इंजेक्सन  अर अंटी नकली घीयक गोळि दीणु छौ सैत च कुछ असर ह्वे जाओ।

       पंढरपुर बिटेन बिठोबा देव त घबरयाँ छ्या. उंकी लम्बी मेडिकल  रिपोर्ट देखिक   डा. धन्वन्तरी न बोल, ' कुछ नि ह्व़े सकुद. इथगा सालू से वै मन्दिर मा द्यू बाति  अर लोगुंक धूप बाति जळाण  से उखाक दिवालु पर दु दु फुट म्वासो- काजल जम्युं च अर आप वै फगोसण्या , अमानुषिक  वातावरण तै अब पचाण मा लाचार ह्व़े गेवां  .मनिखुन सुदन नी च ,  मनिखुन अफु साफ़ रौण पण मन्दिर गंदो इ रखण . बस आप तै अब हमेशा योग मा याने  साँस रोकिक अर आँख मूजिक  इ इ रौण पोडल."

  सौणौ  मैना जौं जौं दिवतौं पूजा होंदी वु बेहोशी मा सि छया ।    डा. धन्वन्तरी न ब्वाल बल इखमा मि क्या कौर सकुद . कै बि तरां से तुम दूध मा नयाण अर दूद तै पचाण लैक ह्व़े गे छया. पण अब त अदा से जादा दूद मा चूना, इनसेक्टिसाइड, भौं भौं रसायन  मिल्यु रौंद   अर याँ से आप पर सद्यनौ खजी-रोग ह्व़े ग्याई .बस मलम वगेरा लीणा रावा  बस थोड़ा देरौ कुण सेळि पोडि जाली। असल म यु रोग आपक डी.एन. ए. मा बसी गे त मीन हकीम लुकमान से बि पूछ वी बि बुलणा छया कि  एक दै य़ी रसायन डी.एन.ए. मा चलि गे त तब  कुछ नि ह्व़े सकुद.

  भौत सा दिवता जौं जौं मा अच्काल मनिख मिठाई चढ़ान्दन ऊं पर मिठाई से त ना पर साइड इफेक्ट से यि  दिवता बीमार इ चलणा छन. धरती क डाकटरो तरां  डा. धन्वन्तरी बि जब ऊं तै क्वी बीमारी बिंगण मा  नि आन्द त वो बोली दींदन कि वाइरल इन्फेकसन हुयुं च. डा. धन्वन्तरी न खुलासा कार बल चूंकि मंदिरूं  मा मिठाई चढ़ान्दन अर फिर सालो तलक मंदिरूं  मा   सफै त हुंद नी च त वां से भौं भौं किस्मौ कीड मक्वड़ , बैक्टीरिया, वाइरस पैदा होणु रौंद अर फिर यि किसम किसम का बीमारी सौरान्दन . मनिख त यूँ कीड मक्वडु से  ढबे  गेन  पण दिबतौं न त यो सोचि इ नि छौ मनिखों से  पूज़ा कराण पर दिबतौं तै भौं भौं बीमारी से सामना करण पोडल

   गंगा, जमुना त रुणी छ्या इन लग णु छौ जन बुल्यां यि द्वी बैणि खबेस ह्वावन . रंग बदरंग, कुरंग  छौ. यूंक सरैल से गुवाण, चिराण , मुताण. केमिकल्याण  आणि छे .डा. धन्वन्तरी  न  वूं दुयूं तै दूर एक छ्वाड़ मा  बिठाल्यु छौ . अर नाक पर बड़ो सी कपड़ा बांधिक दूर से इ गंगा, जमुनाक दगड बचळयाणा छया. दुयुंक एकी राड़ घाळि  छे  कि हम दुयुं तै सूर्य मण्डल ना कखी दुसर ब्रह्मांड म ट्रांसफर कारो, जख इ द्वी अपणी पवित्रता  बरकरार रखि सौकन .

  छ्वटा छ्वटा  मंदिरूं  करोड़ो दिवता मानसिक रोगी हुयाँ छया. युं दिबतों रोग च दुसर से जळण. कुछ मन्दिरों मा त लोग लाखो तादात मा जान्दन पण यू तै पुछदि इ नी छन.  बस यू दिबतौ पर जळणो रोग लगी गे. इखमा करोड़ो कुल दिबता बि छन . ऊँ तै जलन होंद कि जन  गढ़वळि अपुण कुल दिबता त बिसरी गेन पण बड़ा बड़ा मंदिरूं मा हर साल चाट घाळिक जान्दन. डा. धन्वन्तरी क कौन्सिलर डाक्टर यूँ दिबतौ ढाढस दिलाण मा लग्याँ छन कि फिकर नि कारो एक दिन यूंक बि बौडिक आलु.

  इना बड़ा बड़ा मंदिरों दिबता ऐड़ाट भुभ्याट करणा छया बल हे इश्वर हम तै पाप से बचाओ , हम तै पाप से बचाओ . अब जब पापी अनाचारी, भ्रस्टाचारी भक्त यूंक मंदिरों मा सोना जेवरात का मुकुट चढ़ाणा छन  अर जब यि दिवता भ्रष्ट, अनाचार्यू  चढ़यूँ  मुकुट पैर्दन त इ दिबता अफु तै पापी समजण बिसे जान्दन . डा. धन्वन्तरी क कौन्सिलर डाक्टर यूँकि बि कौनसेलिंग मा लग्यां  छन

    आदि देव महादेव तै दूध, घी, फलों  अर फूलों से एलर्जी छे त ऊन मनिखो तै बताई छौ कि ऊंको लिंग मा पाणी अर बिल्पतरी चढायो जाव .पण मनिख दुसरों तै  रौब दाब दिखाणो बान दूध, फल, फूल कुछ बि चढ़ाणा रौंदन अर देवाधिदेव एलर्जी से भैर इ नि ऐ सकणा छन.

  भौत सा दविता जन कि  गणेश जी, देवी जी तै कंदूड़ो रोग ह्व़े ग्याई.  भक्तो क  दिनरता, जगरता को घ्याळ से यूँ दिबतौं क कंदूड़ो जळपटि फटि गे.

   सब दिवता अर डा धन्वन्तरी न फैसला कार बल अब त ईश्वर से इ मिलण चएंद . तैबारी नारद जी दिखे गेन. बिचारा !  सुखिक कठक बण्या छन ., इन्टरनेट क आण से अब ऊं मा कुछ काम त रै नि गे  त थ्वड़ा भौत कूरियर इना उना ली जान्दन. सबि दिवतौं न ब्वाल कि हम सौब ईश्वर से मिलण चाणा छंवां  त जरा ईश्वर जीक दगड अप्वाइंटमेंट फिक्स कारो.

नारद जीन एक पन्ना दिखाई. पन्ना मा ईश्वर को एक रैबार छौ- मि यूँ  मनिखो चाल चलन, आचरण  से परेशान ह्व़े ग्यों त मि अब कै हैंको ब्रह्माण्ड बणाणो दूर भौत दूर जाणो छौं अर यीं दै मीन मनिख नि बणाण .



Copyright@ Bhishma Kukreti 26/7/2012


Bhishma Kukreti

Alag Dhangu jila Parishad ki athon barsi : Exposing  working of Uttarakhand Movement leadership

(Review of Representative Garhwali Prose satire Literature)

                                Bhishma Kukreti
        Bhishma Kukreti attacked on the working style of Uttarakhand movement through the article "Alag Dhangu jila Parishad ki athon barsi' (Garh Aina, 25/6/1989. In this article, the satirist exposes many weaknesses among leadership of the movement. For example, the movement is centered at the places as Delhi, Mumbai and not in rural Uttarakhand.       
  There were many organizations fighting for separate Uttarakhand state and they were not Seeing Eye to Eye with each other. Kukreti blasted on the non- unity among organizations for the same cause.
" त मी ए मंच बिटेन ढांगू आँचल का प्रधान संयोजक स्वांरी लाल तै बथै दींदु कि ठीक च तुमम तेरा सदस्य छन अर हमम बारा सदस्य छन. पण हमम यूँ बारा सदस्यो की तीस कमेटी छन जब कि स्वांरी लाल जीक संस्था मा सिर्फ बारा कमेटी छन."
This author was witness for listening same old sayings from the top leadership in each of meetings. The satirist shows his anger as
" मेरी समज मा पोरुक साल बि मीन यू ही अध्यक्ष क भाषण सुणै छौ . मी आपौ सौं घौटिक बुल्दु बल ये साल बि मी वी इ भाषण सुणौल़ू "
the write up is direct attack on functioning of top leadership of Uttarakhand movement humorously.
References-
1-Abodh Bandhu Bahuguna, Kaunli Kiran
2-Dr Anil Dabral, 2007, Garhwali Gady Parampara 
3- Dhad, Garh Aina, Paraj publications.

Copyright @ Bhishma Kukreti, 26/7/2012

Bhishma Kukreti

Bwari; Story for Respect to Daughter in law

(Review of Garhwali story Collection 'Bwari' by Durga Prasad Ghildiyal)
[Let us Celebrate Hundredth Year of modern Garhwali Fiction]
                                      Bhishma Kukreti
   Bwari has many subjects webbed with each other. There is importance of educating new generation, there is envy problem. However, there is main theme of 'Bwari 'story to respect daughter in laws as
" ब्यटा ! मि एक बात हौर बोललु कि जै कुटुम मा ब्वार्युं अलास, पलास, प्यार अर इज्जत होणी राली वो कुटुंब हमेशा फलदो फूलदो रालू अर फल -फोल बि मट्ठा निकळला ..."

Reference-
1-Abodh Bandhu Bahuguna, Gad Myateki Ganga
2-Dr Anil Dabral, 2007 Garhwali Gady Parampara
3-Bhagwati Prasad Nautiyal, articles on Durga Prasad Ghildiyal l in Chitthi Patri
4-Dr. Nand Kishor Dhoundiyal, Garhwal Ki Divangat Vibhutiyan
5- Notes of Prem Lal Bhatt on Durga Prasad Ghildiyal
Copyright@ Bhishma Kukreti, 27/7/2012

Let us Celebrate Hundredth Year of modern Garhwali Fiction !

Bhishma Kukreti

गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य

                                                 

                                                       हुस्यार कुखड़ी



                                              चबोड्या - भीष्म कुकरेती



   परसि मी दर्शनु बाड़ा क नाति क इख कुखडी लीणो ग्यों . पता णि कथगा साखी ह्व़े गेन धौं ! हम गढ़वळि बामण कुखुड़ खाण मा सबसे अग्वाड़ी रौंदा, जड्डू  मा दूद मा अंडा खांदा  , जंगळ बिटेन दूसरों मार्याँ चूजा तक चपट कौरी जांदा पण मजाल च कि हम बामण कबि एक कुखुड़ बि पाळि लेवां . कुखुड़ पाळण से हमारो ब्रह्म तेज कम ह्व़े जान्दो अर कुखड़ो शिकार खाण से ब्रह्मत्व बढाई दीन्दा. . हम गुड़ से परेज करदवां पण गुलगुला अर गुड़जोळी सपोडिक  खांदा. अब चूंकि हम बामण मार्याँ  चिकन पर इ हथ  लगौंदा अर ज़िंदा मुर्गी से छौं करदवां त सैकड़ो मुर्गी खाणो  उपरान्त बि मि तै कुखड़ो आचारण,  जीवन शैली बारा मा क्वी ज्ञान नी च. आज मीन स्वाच जरा कुखड़ो बारा  म ज्ञान अर्जित करे जाओ.

मीन एक अनुभवी मुर्गी द्याख अर वीं तै पूछ - तुम कुखड़ो जिन्दगी मकसद क्या हूंद.

मुर्गी- जु हम जंगळ मा हूंदा त हमर मकसद रौंद बल हम खूब म्वाटो ह्व़े जौंवां अर फिर खूब म्वाटो ताजा चूजा पैदा कौराँ .उख जंगळ मा हम कुखड़ो कुण  म्वाट हूण जिंदा रौणै गारेंटी होंद  अर इख मुर्गीखाना या पोल्ट्री फ़ार्म मा म्वाट हूण मतलब ये नरक से जल्दी सोराग जाण . उख जंगळ मा हम प्रेम  का  वास्ता  हैंकि मुर्गी या मुर्गा  क तलास मा रौंदा इख मुर्गीखाना मा हम बचणो बान ढंढो (नाटकीय तरकीब) क  तलास मा रौंदा.

मि- अरे ! इथगा फरक ?

मुर्गी - हाँ उख हम अपण चूजो या बच्चों बचाणो बान भौत सा लड़ाई लड़दवां . इख मुर्गीखाना मा हम यि हजार कोशिश करदां  कि मनिख हम से पैल हमारो बच्चो की बळि  चढै द्याओ

मि- अच्छा ! त इख तुमम  बचणो क्या क्या ब्युंत / उपाय हून्दन ?

मुर्गी- जन कि जनि  क्वी तुम सरीखा शिकर्या  दिख्याई कि मि त कुण्या पर झुप ह्वेक लुकि जांद फिर म्यार बेटा या बेटी मारे जाओ मै तै दुःख नि होंद.

मि- तुम कुखड़ो तै कन कैक पता लगद कि आज भोळ तुमारि मौणि  पर  चक्कु  चलण वाळ च?

मुर्गी- जब बि क्वी गाँ वाळ कै मिलिटरी वाळ तै खुज्याओ त समजी ल्याओ कि दारु पार्टी हूण वाळ च अर हमारि बळि चड़णो समौ   ऐ गे. या जब प्रवासी गाँ मा अन्दन त हमारि बडी संख्या मा मौत आन्द. फिर कखी डौंर थकुलि क  आवाज आओ त वां से बि अंदाज लगद कि मनिखो मा चिकन लेग पीस कि इच्छा जागी गे.

मी - त फिर तू अबि तलक कनकै बचीं छे

मुर्गी- एक त मि बरत धरणु रौंद.  जां से मि म्वाटु नि  ह्व़े जौं. चर्बीदार खाणक से मि परेज करदु .

मि- भौत बढ़िया

मुर्गी- फिर मि आउट डुवर ड्यूटी पर जादा जान्दो 

मि -आउट डुवर ड्यूटी ?

मुर्गी- हाँ. जनि क्वी हम मुर्ग्युं तै दिखणो आन्द मि भैर कखि भाजि जान्दो.

मि- सही तरकीव!

मुर्गी- फिर कैजुअल लीव मि भौत लीन्दु .

मि -क्या ?

मुर्गी - हाँ , मि क्वी ना  क्वी बहाना  लेक मी कैजुअल लीव लीन्दु. जन कि हम मुर्गी जाणि जांदवां कि कै अंडा बिटेन चूजा ह्वालू अर कु अंडा बांज रालो.  जंगळ मा हम बांज अन्डो क छोप मा नि बैठदां  . पण इख मुर्गीखाना मा मि नॉन फर्टाइल अन्डो क  छोप मा कथगा इ दिन बितै दींदु .   फिर मेकअप कौरिक अपण सरैल पर खजी जन चकता पैदा करी लीन्दा या अपण फंकर झाड़ी दीन्दा जां से क्वी बि शिकर्या  हम तै नि  खरीदो. .

मी- क्लास !

मुर्गी -फिर मी मनिखो फिंक्यां  बीडी सिग्रेटो टुकडा  लगैक खै  जांदू अर मै फर खांसी लग जांदि  . इन मा ना त मेरो मालिक बेचीं सकदु अर ना इ क्वी खरीददार मै तै खरिदुद.

मि- एक्सलेंट !

मुर्गी- मर्त्यणा दिखाण त रोजाना क काम च .

मि- मनिख अर जानवरूं मा क्या अंतर च, भेद च .

मुर्गी- हम शाकाहारी जानवर कबि बि मांश नि खांदा. मान्शाहारी जानवर  अपण जन्दगी बचाणो बान हैंक तै मारदो. तुम मनिख शाकाहारी ह्वेक बि मांसाहारी ह्व़े गेवां.अर तुम अपण जिन्दगी बचाणो बान  ना अपण अहम या सवाद को बान जीवहत्या करदां .

मि- हाँ. अच्छा . हैंक जिन्दगी मा मनिख बणण चैलि  क्या ?

मुर्गी- कबि बि ना .

मि- त हैंक जनम मा क्या बणण चांदि ?

मुर्गी- झांझ !

मि- हैं ! तू हैंक जनम मा मछर बणण चांदि ?

मुर्गी - बिलकुल मछर बणण चांदु

मि - अजीब नी च. मनिख क जोनी छोडि क मछर बणणो गाणि- स्याणि ?

मुर्गी- तुम मनिखुन जून ( चाँद)  मंगल जीति याल भोळ परस्यूं सूरज तै बि जीति देला. पण तुम मनिखों मा मच्छर  जीतणो पुन्यात नी च



Copyright@ Bhishma Kukreti 27/7/2012

Bhishma Kukreti

Hari Kunjo: a Garhwali Folk songs respecting Kunaj an auspicious and aromatic plant
            (Review of Garhwali folk Songs and Traditional Literature)

                  Bhishma Kukreti
[Notes on folk songs about Aromatic plants; Garhwali folk songs about Aromatic plants; Uttarakhandi  folk songs about Aromatic plants; Mid Himalayan folk songs about Aromatic plants; Himalayan folk songs about Aromatic plants; north Indian folk songs about Aromatic plants; Indian folk songs about Aromatic plants; Asian folk songs about Aromatic plants]
[लोक गीत; सुगन्धित पौधा सम्बन्धी लोक गीत; सुगन्धित पौधा सम्बन्धी गढ़वाली लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी उत्तराखंडी लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी मध्य हिमालयी लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी हिमालयी लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी उत्तर भारतीय लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी भारतीय लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी दक्षिण एशियाई लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी एशियाई लोक गीत लेखमाला]
               Kunaj is an auspicious plant for Garhwalis and Kumaunis. The small plant is aromatic and is anti insects too. The leaves of Kunaj are used in worshiping rituals. The plant is an essential ingredient for Pooja .
The following folk song is respecting the kunaj plant
हरि कुणजो
हरि कुणजो कै मैना फूललो ? हरि कुणजो कै मैना फूललो ?
हरि कुणजो मौ मैना मौळलो .हरि कुणजो मौ मैना मौळलो
हरि कुणजो मौळण लगि गे ,हरि कुणजो मौळण लगि गे
हरि कुणजो मौळण लगि गे ,हरि कुणजो मौळण लगि गे
हरि कुणजो चैत मा फूललो,हरि कुणजो कै मैना फूललो
हरि कुणजो चैत मा फूललो,हरि कुणजो कै मैना फूललो
हरि कुणजो फूलण लगि गे, हरि कुणजो फूलण लगि गे
हरि कुणजो फूलण लगि गे, हरि कुणजो फूलण लगि गे
हरि कुणजो कै मैना फूललो ? हरि कुणजो कै मैना फूललो ?
हरि कुणजो मौ मैना मौळलो .हरि कुणजो मौ मैना मौळलो
xxxx
जाति- झोड़ा
(तोताराम ढौंडियाल संकलित , गढवाली गीत संग्र , धाद प्रकाशन , देहरादून से साभार)

The meaning of Hari kunaj folk song is –

When will the auspicious kunaj blossom?
Hari kunaj will bud in mau month
When will the auspicious kunaj bud?
The auspicious Kunaj started budding.
The auspicious Kunaj will blossom in Chait month


Copyright@ Bhishma Kukreti 27/7/2012
Notes on folk songs about Aromatic plants; Garhwali folk songs about Aromatic plants; Uttarakhandi  folk songs about Aromatic plants; Mid Himalayan folk songs about Aromatic plants; Himalayan folk songs about Aromatic plants; north Indian folk songs about Aromatic plants; Indian folk songs about Aromatic plants; Asian folk songs about Aromatic plants to be continued..
. लोक गीत; सुगन्धित पौधा सम्बन्धी लोक गीत; सुगन्धित पौधा सम्बन्धी गढ़वाली लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी उत्तराखंडी लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी मध्य हिमालयी लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी हिमालयी लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी उत्तर भारतीय लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी भारतीय लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी दक्षिण एशियाई लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी एशियाई लोक गीत लेखमाला जारी

Bhishma Kukreti

   Story Style of a Garhwali fiction writer Durga Prasad Ghildiyal
[Let us Celebrate Hundredth Year of Modern Garhwali Fiction!]
                                                 Bhishma Kukreti

[Notes on Story style of fiction writer; Story style of Garhwali fiction writer; Story style of Uttarakhandi fiction writer; Story style of Mid Himalayan fiction writer; Story style of Himalayan fiction writer; Story style of North Indian regional language fiction writer; Story style of Indian regional language fiction writer; Story style of South Asian regional language fiction writer; Story style of Asian regional language fiction writer]

   Durga Prasad Ghildiyal published forty stories in three fiction collections –Gari, Mwari and Bwari .
Story subject: all the subject of stories by Ghildiyal are the life and life style of Garhwalis. A few stories are based on folk style where moral teaching becomes more prominent than the story. Dr Dabral states that Ghildiyal is expert of issues of Garhwal. Ghildiyal wrote fine modern stories taking Garhwali theme.
Characters and Characterization: Durga Prasad takes both male and female characters in his varied topic stories. Males are of varied characters but females are invariably secular; religious; sensitive; courageous; hard worker and tolerant;   and the lover of society and nature. Ghildiyal establishes Garhwali women as idealistic women. Ghildiyal develops his characters very expertly. Characters are of varied nature.
Background and atmosphere: Durga Prasad Ghildiyal paid less attention on geographical environment of Garhwal or cities. Ghildiyal paid more attention on the human behavior or human psychology.
Language and style: Ghildiyal became successful in developing characters and their characterization but could not become successful in language. He describes the thought of characters than explicit them automatically. The emotions are not of high intensity due to descriptive style.
Motive or moral: Each story by Ghildiyal is aimed for a moral.
Durga Prasad does not believe in creating extra ordinary characters and he focuses more on common characters of Garhwal and Garhwalis.
  Durga Prasad Ghildiyal has special position in modern Garhwali fiction for common characters; developing characters; subject of Garhwal; psychological description and descriptive style of story.

Reference-
1-Abodh Bandhu Bahuguna, Gad Myateki Ganga
2-Dr Anil Dabral, 2007 Garhwali Gady Parampara
3-Bhagwati Prasad Nautiyal, articles on Durga Prasad Ghildiyal l in Chitthi Patri
4-Dr. Nand Kishor Dhoundiyal, Garhwal Ki Divangat Vibhutiyan
5- Notes of Prem Lal Bhatt on Durga Prasad Ghildiyal
Copyright@ Bhishma Kukreti, 27/7/2012
Notes on Story style of fiction writer; Story style of Garhwali fiction writer; Story style of Uttarakhandi fiction writer; Story style of Mid Himalayan fiction writer; Story style of Himalayan fiction writer; Story style of North Indian regional language fiction writer; Story style of Indian regional language fiction writer; Story style of South Asian regional language fiction writer; Story style of Asian regional language fiction writer to be continued ..

Let us Celebrate Hundredth Year of Modern Garhwali Fiction!

Bhishma Kukreti

Ko chhai Batoi: a Garhwali folk Song for Values of tree Plantation
               Bhishma Kukreti
The following folk song is again proof that Garhwalis understand the importance of tree plantation. The following folk song discusses that every person should plant trees.
को छै बटोई ---- गढ़वाली लोक गीत

---------------१---------------------
को छै बटोई घाम च तैलु ? को छै बटोई घाम च तैलु ?
झट बैठी जा डाळि का छैलु, झट बैठी जा डाळि का छैलु
ठन्डू बथौं घौणु च छैलु ,
झट बैठी जा डाळि का छैलु, झट बैठी जा डाळि का छैलु
को छै बटोई घाम च तैलु ?
घुघति घुरदी डाळि का छैलु,घुघति घुरदी डाळि का छैलु
पाणि पंदेरि , तीस मुजेइ
ठन्डू बथौं , पळेक बिसैई, ठन्डू बथौं , पळेक बिसैई
छैलु बैठिलो डाळि ना तोड़ी
फांकी त रै क्या, पाति ना तोड़ी को छै बटोई घाम च तैलु ?
-------------२----------------
गजना डाळि कु बकुळु छैलु
को छै बटोई डाळि का छैलु,को छै बटोई डाळि का छैलु
छैलु बैठिलो पाति ना तोड़ी , छैलु बैठिलो पाति ना तोड़ी
दाजि कि मेरा डाळि लगयीं च
दादी को मेरि पाणि चार्युं च ,दादी को पाणि चार्युं च ,
बुबा जि कि मेरि डाळि लगयीं च
ब्व़े बैण्यु मेरि पाणि चार्युं च, ब्व़े बैण्यु पाणि चार्युं च,
भैजी कि मेरि डाळि लगयीं च
बौजी कि मेरि पाणि चार्युं च
गजना डाळि कु बकुळु छैलु
को छै बटोई डाळि का छैलु,
----
लय- चौंफळा
(तोताराम ढौंडियाल संकलित , गढवाली गीत संग्र , धाद प्रकाशन , देहरादून से साभार)

Bhishma Kukreti

Dhar maki Gaini: Criticizing Marriage by dowry to Girl Side

            [Let us Celebrate Hundredth year of Modern Garhwali Fiction]


                            Bhishma Kukreti
          Dr Shiva Nand Nautiyal wrote five Garhwali stories (Bahuguna, 1975).  Dhar maki Gaini is one of those stories by Dr Nautiyal. The story is about Jasuli . her father took three thousand bucks from father in law of Jasuli. Jasuli's father in law Jethuva took one thousand bucks as loan from a rich man.  Jethuva dies. Jasuli's husband Govind ran away from home for earning. Jasuli has to suffer a lot
The story is unusual and that is the exclusivity of story. Dr Shiva Nand uses different story style than his contemporary Garhwali fiction writer.  The story has smooth flow. The story has pleasure for readers and motive too.
Reference-
1-Abodh Bandhu Bahuguna, Gad Myateki Ganga
2-Dr Anil Dabral, 2007 Garhwali Gady Parampara
3-Bhagwati Prasad Nautiyal, articles on Durga Prasad Ghildiyal l in Chitthi Patri
4-Dr. Nand Kishor Dhoundiyal, Garhwal Ki Divangat Vibhutiyan
5-Notes of Prem lal Bhatt on the Stories of Durga Prasad Ghildiyal
Copyright@ Bhishma Kukreti, 29/7/2012

            Let us Celebrate Hundredth year of Modern Garhwali Fiction