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Articles By Bhisma Kukreti - श्री भीष्म कुकरेती जी के लेख

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 26, 2009, 12:54:53 PM

Bhishma Kukreti

********गढ़वाली छिटगा *********


कवि-डॉ नरेन्द्र गौनियाल

    ***बोर्ड इम्तहान***


सळ इनैं
सळ फुनैं
भैर-भितर
दौडा-दौड़
पटासुल्कणि
अर
छित्यकी
धारा एक सौ चवालीस.

***पुलिस***


कठबांस
मांकी-धीकी
आंसू गैस
तैड़ गोली
अर
मैना-मैना
च्या पाणि.


***पाणि विभाग****


फ्री टोंटी
यकुल्य़ा बाण
ब्लीचिंग पौडर
अर 
माछयों कु सुरा.


***सरकारि अस्पताळ***


भैर बंगला
भितर कंगला
सफ़ेद गोळी
अर
सफ़ेद गुबारा.


***दारू***


पीणु-पिलाणु
लड़णु-झगडणु
बकणु-बहकणु
लटगिणु-फरकिणु
निकमी गाळी
गन्दी नाळी
अर
खीसा खाली.

     डॉ नरेन्द्र गौनियाल..सर्वाधिकार सुरक्षित

Bhishma Kukreti

गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य   



                          राजकर्ण्या  रैबार  (राजनैइक /राजनैतिक संदेश )



                                  भीष्म कुकरेती



[ व्यंग्य माला, गढवाली व्यंग्य, उत्तराखंडी भाषाई व्यंग्य, हिमालयी क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य,उत्तर भारतीय क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य, भारतीय क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य, दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य, एशियाईक्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य]





                इन नी च कि  पैल राजनैतिक या राजनैइक रैबार नि भिजे जांदा छया. पण राजकर्ण्या वळु हिसाब से तबारी मीडिया इथगा उच्छदि नि छया  । नेतौं हिसाब से वैबरी मीडिया बंचनेरूं  तै बस रैबार दींदु छौ. अब त मीडिया  बंचनेरूं तै  भकलाणा (सिखाणा) बि छन. हाँ त वै बगत मीडिया  कम होण से आम लोग (मतलब जु वै बगत आम खाण लैक छया) राजनैतिक रैबारो मतबल जाणदा  नि छया. अब मीडिया क जोर से आम लोग (मतलब जौंक पुन्यात अब आम खाण लैक नी च ) बि राजनैतिक रैबारो मतबल  बिंगण मिसे गेन.

  जन कि एक दै जब भारत बंगला देसौ स्वतंत्रता लडै  मा फंस्यूं छौ त अमेरिका न स्टों बेड़ा / सेवन्त फ्लीट भेजी छौ . यू रैबार भारत तै डराणो छौ. अब कुछ दिन पैल   बंगला देशन भारत तै इ डराणो अमेरिका बिटेन सेवन्त फ्लीट भट्याइ . अमेरिका बड़ो देस च त वैक रैबार बि मैंगा होन्दन. नेपाल छ्वटु देश च त वु इन हथियारों से भर्युं रैबार नी पठान्दु बल्कण मा अपण मंत्री चीन भेजी दींदु अर आठ दस लाखौ खर्चा करी दीन्दो. याँ से रैबार भारत पौंची जान्दो कि नेपाल हमसे नाराज च. इनी जब पाकिस्तान अमेरिकी आकाओं तै कुछ रैबार भिजण चाँद त पाकिस्तान क राष्ट्रपति लाब लस्कर दगड चीन चली  जान्दन. अमेरिका म रैबार पौंची जांद अर फटाक से अमेरिका बिटेन हथियार पाकिस्तान पौंछि जान्दन. जी ! मातबर  देसूं रैबार अर ब्यौ मा खर्चा त हूंद इ च.

    भारत बि इनी कथगा इ रैबार भेज्दु .

जन कि मुख्य विदेस सचिवक फोन  विदेश मंत्री कुण आन्द, " सर ! बरमा क सचिव चीन जाणा छन !"

विदेस मंत्री क जबाब होंद," त इन कारो एक पाणी जहाज भौरिक चौंळ कम्बोडिया  भेजी द्याओ."

बरमा/म्यिमार  मा रैबार पौंछि जान्द बल जथगा मदद चीन बिटेन मीलली वां से जादा इमदाद भारत दीणो तैयार च .

चीन मा बि भारतौ रैबार पौछ जांद बल तू बरमा  तै भकलैलि  ऐली त मि कम्बोडिया मा बि चुप रौण वाळ नि छौं.  अच्काल कुछ बि ब्वालो रैबार दीण आम मनिखों अर देसूं कुण मैंगा ह्व़े गेन 

फिर अमेरिका तै भारत तै दनकाण  ह्वाओ त अमेरिका पाकिस्तान तै डौलर  त नि दीन्दो पण नया नया बण्या  अश्त्र अर शस्त्र भेजि दींदु  अर भारत संयुक्त राष्ट्र मा अमेरिका क दगड लंका तै दगड़ी दनकै दीन्दन.

कबि कबि अमेरिका भारत तै दनकाणो खबर भिजणो श्री लंका तै सैनिक सहायता कि बात करदो त भारत बि अपण खबर भिजदो पण दुसर तरीका से. भारत इरान मा अनाज कि खेप बढ़े दीन्दो  अर अमेरिका बि खबरो अर्थ बींगिक पाकिस्तान तै धमकै दीन्दो. पकिस्तान से नाराजी क रैबार अमेरिका अफगानिस्तान  मा जादा सेना भिजण से देंदो. दनकाण पुराणो रिवाज च अर दनकाणो रैबार भिजणो तरीका कबि कबि इनी होंद जन  कि बुल्दो बेटी कु छौं अर सुणान्दो ब्वारी तै छौं

  पैलाक बात दुसर छे. इजरायल जब पेलिस्तानी लोगूँ  पर बम्ब ग्व़ाळा चुलाओ त रूस अपण सौ टैंक मिसायलों दगड क्यूबा भेजी दीन्दो छौ. अमरीका म रुसौ रैबार पौंछि जांदू छौ अर इजरायल पेलिस्तान्यू पर बमबारी बन्द करी दींदु छौ.

फिर चीन कुण रैबार  भिजण ह्वाओ त अमेरिका ताइवानऔ  खुणि कुछ ना कुछ सैनिक सौगात पठे   दीन्दो छौ. त चीन बि अपण रैबार भेजी दीन्दो छौ अर तरीका होंद छौ उत्तरी कोरिया तै कुछ टैंक दीण.

  जब अमेरिका रूस तै रैबार दीणो बान सैनिक असला कुवैत भेजदु  छौ त रूस बि कम नि छौ वो ईराक कुणि  लौन्चर भेजी दींदु छौ. बड़ा लोगूँ बड़ा शौक.

तब एक देश दुसर देस तै सन्देश सैनिक असला भिजण या लीण से दिए जांद  छौ. फ़्रांस जब अमेरिका से नाराज होंद छौ त अमेरिका क नुकसान नि करदो छौ पण  अफ्रीका मा सैनिक असला भेजी दींदु छौ. देस कु स्वार्थ दगड्यो से बड़ो हूंद..

अब एक देस दुसर देस तै रैबार भिजणो बान कुछ हौर बि करदन. अब जन कि चीन अमेरिका तै  नाराजगी क रैबार सैनिक असला से नि भिजदो  अब वो जिम्बाबवे  क दगड आर्थिक जुगल बंदी करदो अर जिम्बाबवे क खांडी (खान, माइन्स  ) क अधिकार खरीद लीन्दो. त अमेरिका कजिक्स्तान मा अपण इन्वेस्टमेंट बढ़ाई देंद. या दक्षिणी कोरिया क माल पर टैक्स कम करी दींद. रैबार वी छन बस चिट्ठी क रूप अर इबारत बदल्याणा रौंदन.

इन  बुले जांद बल  मानो क्वी देस जन कि भारत अमेरिकी  न्यूक्लियर पालिसी  नि माणदो त अमेरिका या यूरोप का देस भारत तै अपण रैबार दीणो बान भारत का कति एन.जी.ओ तै इमदाद बढ़ाई दीन्दन अर इ एन.जी ओ न्यूक्लियर प्लांटो विरोध मा भारतीय जनता तै भकलाण मा जोर मारण  लगि जान्दन. राजदूत भौं भौं किस्मौ हून्दन. इन बुल्दन बल पैल भारत का कम्युनिस्ट अर बामपंथी लिख्वार रूस का अघोसित राजदूत छया जो भारत मा भारत का ना रूस का स्वार्थ पूर्ति करदा छा. अघोसित राजदूत बि रैबार का काम करदन.

  अच्काल क्या पैल बि भौत दै इन ह्वाई च. अमेरिका अपण इखाक अन्तराष्ट्रीय पत्रिकाओं मा भारत या हौर देसु क प्रधान मंत्री या राष्ट्रपत्यूं बारा मा अनाप सनाप बात छपवांद  अर अपण रैबार भेजदु. छवि खराब कराण बि एक रैबार हूंद. 

डिप्लोमेसी क रैबार भौं भौं किस्मौ हून्दन.

अमेरिका दादागिरी से रैबार भेजदु त हौर देस क्वी हौरी तरीका से रैबार भेजदन जन कि पाकिस्तान चीनऐ  खुकली मा बैठणो जांद अर इन तरीका से रैबार भेजदु.

अच्काल जादातर रैबार पेट्रोल अर भूमि संसाधनों पर अधिकारों बान दिएणा छन. भोळ रैबार पाणि कुंवों पर अधिकार का बान बि ह्व़े सकदन .

रैबारो क कीमार वे ही होंद बस समौ अर औकात का हिसाब से रैबारों आकार बदल्याणो रौंद

उन मै पता नी च मेरो रैबार आपम ठीक से  पौंछ च कि ना ?

ज़रा यू रैबार कन लग पर अपणो रैबार चौड़ भेजि दियां भैरों !



Copyright@ Bhishma Kukreti 21/7/2012

व्यंग्य माला, गढवाली व्यंग्य, उत्तराखंडी भाषाई व्यंग्य, हिमालयी क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य,उत्तर भारतीय क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य, भारतीय क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य, दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य, एशियाईक्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य लेखमाला जारी ...


Bhishma Kukreti

Vikasau pahiya Motor: Striking new evils from Modern development
           (Review of Garhwali satire of twentieth century)

                                   Bhishma Kukreti
[Notes on satire of twentieth century; Garhwali satire of twentieth century; Uttarakhandi language satire of twentieth century; Mid Himalayan regional language satire of twentieth century;  North Indian regional language satire of twentieth century;   Indian regional language satire of twentieth century;  South Asian regional language regional language satire of twentieth century;  Asian regional language satire of twentieth century]

    Jagdish Badola had very good potentiality for creating satire. His article 'Vikasau pahiya Motor' (Dhad, magazine, 1989) is an example of his sharp satire creation. The people of Garhwal shout for development. The kind government offers motor road and other roads as development representation.
   Now for developing Garhwal, people use roads for taking unauthorized wood logs to cities. Now liquor can reach easily from one region to other region. The roads are now the source of tea stalls etc.
The author makes readers aware about non productive development in Garhwal.

Copyright@ Bhishma Kukreti , 21/7/2012 
Notes on satire of twentieth century; Garhwali satire of twentieth century; Uttarakhandi language satire of twentieth century; Mid Himalayan regional language satire of twentieth century;  North Indian regional language satire of twentieth century;   Indian regional language satire of twentieth century;  South Asian regional language regional language satire of twentieth century;  Asian regional language satire of twentieth century to be continued...

Bhishma Kukreti

Harin kakhadi: Story Portraying the Importance of Experience and Sharing Experience

(Review of Garhwali Story collection 'Bwari' (1987) by Durga Prasad Ghildiyal)

                             Bhishma Kukreti

             [Let Us Celebrate Hundredth Year of Modern Garhwali Story Literature]

     Durga Prasad Ghildiyal was of that generation that was born before independence. Therefore, his each story has the importance of village development of cooperation and social values. There is extreme desire for youth getting education employment.
  'Hari kakhdi 'is about a common habit of boys stealing cucumber from other's field. However, the story makes Ganeshi an honest police man by stealing cucumber.  The important character experienced 'Bodi 'changes the thinking pattern of Ganeshi.
             
Reference-
1-Abodh Bandhu Bahuguna, Gad Myateki Ganga
2-Dr Anil Dabral, 2007 Garhwali Gady Parampara
3-Bhagwati Prasad Nautiyal, articles on Durga Prasad Ghildiyal l in Chitthi Patri
4-Dr. Nand Kishor Dhoundiyal, Garhwal Ki Divangat Vibhutiyan
5- Notes by Prem Lal Bhatt on Ghildiyal
Copyright@ Bhishma Kukreti, 21/7/2012

[Let Us Celebrate Hundredth Year of Modern Garhwali Story Literature]

Bhishma Kukreti

गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य   



                      मुर्गि पैलि कि अंडा पैलि ?


                     चबोड्या - भीष्म कुकरेती


[गढवाली हास्य व्यंग्य; उत्तराखंडी हास्य व्यंग्य साहित्य   ]


-- हलो !  श्रीमती भारतीय उपभोक्ता ?

- ह्यां जरा हिंदी मा ब्वालो. फ्लुएंट अंग्रजी बिंगण मा परेशानी हूंद.

- ओ सॉरी ! मिसेज इंडियन कंज्युमर  ?

- हाँ अब बिंगण  मा ऐ गे. ब्वालो मि इ मिसेज इंडियन कंज्यूमर छौं.

-- जरा आप से द्वी मिनट  बात करण छे आधा घण्टा लगी जाला .

--हाँ हाँ ब्वालो

-- आप कब से दुबर खर्चण शुरू करण वाळ छंवां. जां से  हमारि अर्थ व्यवस्था सुधर  साको .

--बस जब मनमोहन सिंग जी चाल  .वो त द्वी साल बिटेन बुलणा छन बस भोळ इ ठीक ह्व़े जालि

- मन मोहन सिंग जी  ई त चाणा छन बल  तुम दुबर खरीदी शुरू करील्या अर अर्थ व्यवस्था जगा मा ऐ जालि.

--पण  जब अर्थ व्यवस्था बाट मा आलि तबि त मि दुबर  खरीदण लैक होलू?

-- ह्यां तन  ना ब्वालो ! मनमोहन सिंग जीक फजीत ह्व़े जाली. सोनिया गांधी इ ना अमेरिका, फ्रांस, जापान अर चीन का नेता बि मनमोहन सिंग जी पर रूसे(क्रोधित )  जाला

-ह्यां पण वूं कुण  ब्वालो अर्थ व्यवस्था सुधारों त हमारि खरीदी तागत बढ़लि

-- त इन  कारो तुम क्वी अमेरिकी कार खरीद ल्याओ

-- अरे पैलि इ हमारि  कार तैं बैंक उठैक ली ग्याई किलैकि हमन एक साल से लोन इंस्टालमेंट नि भौरी छौ. हाँ जु अर्थ व्यवस्था सुधरलि  त हम पैलि पुराणि कार छुडै क लौला.

-पर कुछ अंदाज त बथाओ कि तुम दुबर कब खरीदी शुरू करील्या

--अब वित्त मंत्री त बुलणा छया कि ए इ मैना मा हम अर्थ व्यवस्था ठीक करदवां

-- असल मा ऊन घडे छौ, सोचि छौ कि तुम आज कुछ परचेज करिल्या त अर्थ व्यवस्था आजि  ठीक ह्व़े जालि. त कार ना सै त क्वी नै घौर खरीद ल्याओ .

-- घौर कि त अर्जंट जरूरत च . हम त चाणा  बि छ्या कि एक घौर खरीद इ लिवां 

-- वेरी फाइन .  तुम दुसर घौर खरीदल्या त जरूर इंडियन इकोनोमी अपण जगा मा ऐ जालि.

-- वो पण जु पैलाक घौर छौ वैक इंस्टालमेंट नि भौर  त बैंक न वु घौर नीलाम  करी दे. अर अबि बि बैंक बुलणा छन कि अधा  रकम उधार बकै  च

-- त इन कारो तुम एक एल.सी.डी इ खरीदी ल्याओ.

---ह्यां खरीदण त छौ पण रकम कख च .अर उनि बि अच्काल बैंक व्याज भौत बढ़ी गे

-- उना देसी (विदेसि) बैंक बुलणा छन कि जु अर्थ व्यवस्था जगा मा आलि त वो इंटरेस्ट रेट कम करी द्याला इलै तुम तै कुछ खरीदी करण इ पोडल

--हाँ सुचणा त हम बि छंवां , हम बि मनमोहन सिंग जीक नई अर्थ व्यवस्था क जग्वाळ मा छंवां

-- अच्छा त एक काम कारो ना !

-- ब्वालो हम त देशभक्त इंडियन छंवां, इंडिया क बान कुछ ना कुछ त करण इ पोडल कि ना.

-- त कुछ तेल फुलेल याने कोस्मेटिक इ खरीदि ल्याओ 

-- कोस्मेटिक खरीदणो ज्यू  त म्यार बि बुल्यांद पण साड्यू दाम इ इथगा बढ़ी गेन कि कोस्मेटिक खरीदणो पैसा इ रौंदन.

--त कुछ फर्नीचर इ खरीद ल्याओ जां से इंडियन इकोनोमी मा इजाफा ह्वाओ

-- अरे खरीदण त द्वी  कुर्सी छौ पण बच्चो फीस अर किताबु क कीमत इथगा बढ़ी गे कि कुर्सी कखन खरीदण

-- पण आप कुर्सी नि खरिदल्या त भारतीय अर्थ व्यवस्था कनकैक सुधरलि .

-- ह्यां मिन ब्वाल नी च मनमोहन सिंग जी द्वी साल बिटेन बुलणा इ छन कि अगला मैना इकोनोमी इम्प्रूव ह्व़े जाली. बस जनि वु इम्प्रूवमेंट कु मैना आलु मि दुबर खरीदी करण बिसे जौलु

--त इन कारो मिनरल   वाटर जादा पीओ  अर आइस  क्रीम  बिंडी खाओ जां से अर्थ व्यवस्था सुदरी जाओ

-- हाँ चिदम्बर जीक ख़ास रैबार ऐ त छयो   पण क्या कौराँ   ग्युं -चौंळ- दाळ का भाव इथगा बढ़ी गेन  कि साफ़ पाणि अर आइस क्रीम का बजट हमन अपण होम बजेट बिटेन ख़तम इ  करी दे.

-- त इन कारो साक- भुजी जादा खरीदो वां से बि इकोनोमी मा सुधार की गुन्जैस च

-  साक भुज्यूँ दाम इथगा बढ़ी गेन कि  हमन त अब सब्जी मंडी जाण इ बन्द कौर याल . हम त मनमोहन सिंग जीक नई अर्थ नीति क जगवाळ मा छंवां कि जनि अर्थ व्यवस्था मा उछाला आओ अर हम दुबर साक भुजी खाण मिसे जंवां.

-- मनमोहन सिंग जी बि त जग्वाळ मा छन   कि तुम खरीदी शुरू कारो त इकोनोमी इम्प्रूव होली .

-- त तुमि बथाओ कि हम इंडियन कन कौरिक खरीदी बढौवां ?

-- आपम क्रेडिट कार्ड  त ह्वाला ?

--हाँ हमम कुल मिलैक आठ बैंकु क्रेडिट कार्ड छन

-- अरे वाह त फिर त इंडियन इकोनोमी इम्प्रूव ह्वेई जालि

-- अच्छा बताओ बताओ ...हम  बि जग्वाळ मा छंवां

-- तुम इन कारो क्रेडिट कार्ड से दुबर खरीदी शुरू कारो जन कि टी.वी फ्रिज, फर्नीचर  आदि आदि , बस जनि तुम उधार मा खरीदी शुरू करल्या इंडियन इकोनोमी मा उछला ऐ जालो

- आट का आठ क्रेडिट कार्ड  बन्द छन हमन जब क्रेडिट कार्ड वळु पैसा नि चुकाई त ऊंन हम तै डिफौलटर घोषित करी दे.अब हम जग्वाळ मा छंवां कि कब इंडियन इकोनोमी इम्प्रूव ह्वाओ अर हम क्रेडिट कार्डू पैसा  बौड़ावां /वापस  दिवां.

--अर मनमोहन सिंग जी जग्वाळ मा छन कि कब आप लोक खरीदी शुरू करील्या  जां से भारत सरकार वर्ल्डबैंक क  लोन इंटेरेस्ट  दीण लैक ह्व़े जाओ.



Copyright@ Bhishma Kukreti 22/7/2012



   गढवाली हास्य व्यंग्य; उत्तराखंडी हास्य व्यंग्य साहित्य   जारी ...

Bhishma Kukreti

गढवळि साहित्य खबर /समाचार (२२/७/२०१२ )


News Views about contemporary Garhwali Literature



खबर्या - भीष्म कुकरेती



१- तोताराम ढौंडियाळौ गीत खौळ (संग्रह ) - धाद प्रकाशन बिटेन गढवळि क सयाणा कवि क किताब 'गढवळि गीत संग्र' अबि छपी क बजार मा आई. यीं पोथि मा लोक गीत अर ढौंडियाळौ रच्याँ गीत संकलित छन .

२- गढ़वाली भाषा प्रशिक्षण कार्यशाला - ११० साल पुराणि संस्था अखिल भारतीय गढवाली सभा , देहरादून न ३ जून २०१२ अर २० जूनो खुण गढ़वाली भाषा प्रशिक्षण कार्यशाला उरये गे. इख्मा लोगूँ तै गढवळी भाषौ ज्ञान दिए गे.

3-रंत रैबार , गढवाली साप्ताहिक देहरादून ४/६/२०१२

अ- इश्वरी प्रसाद उनियालाऊ नरेंद्र सिंग नेगी क गीतुं समीक्षा लेखमाला

ब- दया नन्द बहुगुणा, प्रेम बल्लभ पुरोहित , डा सुरेन्द्र सेमलटि , काली प्रसाद घिल्डियाल कि कविता

स- प्रकाश धस्माना अर नरेंद्र कठैत कु व्यंग्य ख़ास छन

४- खबर सार , गढवाली पाक्षिक , पौड़ी (१५/५/२०१२ --३०/५/२०१२)

अ- विमल नेगी ट्रांसफर नीति , विमल नेगी क कुमाउनी कवि भग्यान कवि शेर दा दगड मुखाभेंट

ब- भीष्म कुकरेती क व्यंग्य, नरेंद्र कठैत अर त्रिभुवन उनियाल को व्यंग्य .

स- शेर दा अर गोविन्द सिंग रावत की कुमाउनी कविता

द- चिन्मय सायर कि गढवाली कविता

इ- वीरेन्द्र पंवार कि 'भीष्म कुकरेती क व्यंग्य संग्रह 'कब्लाट ' की समीक्षा

फ- संदीप रावत का खबर अर विचार

ज- सुशील पोखरियाल का क्रोस वर्ड

झ- भीष्म कुकरेती क 'आवा गढवाली सीखा' लेखमाला

५- खबर सार (१/६/२०१२

अ- विमल नेगी क 'शिक्षा माफिया सम्बन्धी लेख, शाति प्रकाश जिज्ञासु क 'खैर लिंग' समन्धि लेख,

ब- भीष्म कुकरेती क 'आवा गढवाली सीखा' लेखमाला

स- नरेंद्र कठैत कु लेख ' क्वी औडी कीटी पूछ ...'  वीरेंद्र पंवार अर भीष्म कुकरेती पर साहित्यिक भगार (लांछन )

द- नरेंद्र कठैत अर त्रिभुवन उनियाल को व्यंग्य

इ- सुशील पोखरियाल का क्रोस वर्ड

फ- बी.मोहन नेगी को बाबा नागार्जुन कविता क अनुवाद कविता पोस्टर मा

ज- डा.आशा रावत कि कथा

झ- हरीश जुयाल कि कविता

ट- संदीप रावत कु लेख -गढवाली गद्य परम्परा

ठ- संदीप रावत की नरेंद्र सिंग नेगी क 'जै भोले भंडारी' कैसेट कि समीक्षा

6-गढ़वाली जागर, देहरादून (१४ जून - ३० जून २०१२ ) पाक्षिक मा यीं दै

अ- डा.अचला नन्द जखमोला क हिंदी लेख 'गढ़वाली भाषा में ध्वनिगत अर रूपगत वैभिन्य ' लेख लिखवारूं कुण काफी कामौ च

ब- अबोध बंधु बहुगुणा कि कथा 'डैकण ', व्यंग्य ( कठैत ) छप्यां छन

3- शैलवाणी कोटद्वार (१/७/२०१२) भग्यान कन्हयालाल को गढवाली शब्द कोष अर भीष्म कुकरेती क 'कथा संसारो कथा' लेखमाला प्रकाशित छन

Bhishma Kukreti

                    Garhwali Satire of Twentieth century by Bhishma Kukreti – 1
(Review of Garhwali satire and Satirists of twentieth Century) 
               Satire of Kukreti about standardization of Garhwali language those created stir

                                              Bhishma Kukreti

[Notes on regional language satire and satirists; Garhwali satire and satirists; Uttarakhandi regional language satire and satirists; Mid Himalayan regional language satire and satirists; Himalayan regional language satire and satirists; North Indian regional language satire and satirists; Indian regional language satire and satirists; South Asian regional language satire and satirists; Asian regional language satire and satirists]

                    Bhishma Kukreti used to write on daily basis for first Garhwali daily Garh Aina , Dehradun. Kukreti also used to create cartoons for the same daily newspaper. Kukreti also published his satirical articles in Paraj , Mumbai; Matri pad , Shri Nagar and anjwal, Buransh, Ghati  ke Garejate swar , Dehradun etc.
  Bhishma Kukreti published his first satire 'Been Barobar Garhwali' or Garhwali for the sake of Garhwali in Dhad (1987-88) against the concept of standardization of Garhwali. His second satire against standardization of Garhwali was 'ch, Chh Thau' (dhad and Garh Aina, July, 1990). 'Asli Nakli Garhwali was published in Dhad (June July 1991). Though his other satire against standardization were also published in Garh Aina as 'whe t gyai smanakikaran' etc   
          The concept of standardization is a noble idea. However, Kukreti stressed that when there is problem of Garhwali literature publication and readership increment the mere talk of standardization is of no use.
          Dr. Dabral provides details of discussion started after the above satirical write ups. Bhagwati Prasad Nautiyal published his satire against 'ch, chh thau' and Abodh Bandhu Bahuguna, Mohan Babulkar came against article 'Asli Nakli Garhwali' Kukreti.  In 'Asli Nakli Garhwali', Kukreti humorously and satirically claims that Salani is best for standard Garhwali.
  Dr Dabral states that 'ch, chh , thau is an excellent example of satire. It is successful experiment that created hot discussion in contemporary Garhwali literature. The satire is sharp and is having best uses of word plays. Dr Dabral claims that there less energy in the satire.

References-
1-Abodh Bandhu Bahuguna, Kaunli Kiran
2-Dr Anil Dabral, 2007, Garhwali Gady Parampara 
3- Dhad, Garh aina publications.

Copyright @ Bhishma Kukreti, 22/7/2012
Notes on regional language satire and satirists; Garhwali satire and satirists; Uttarakhandi regional language satire and satirists; Mid Himalayan regional language satire and satirists; Himalayan regional language satire and satirists; North Indian regional language satire and satirists; Indian regional language satire and satirists; South Asian regional language satire and satirists; Asian regional language satire and satirists to be continued...

Bhishma Kukreti

गढ़वाली लोक गीत

          पयाँ डाळि

   संकलन -तोता राम ढौंडियाल

  इन्टरनेट प्रस्तुति - भीष्म कुकरेती

[लोक गीत; गढ़वाली लोक गीत, उत्तराखंड क्षेत्रीय भाषाई लोक गीत; मध्य हिमालयी क्षेत्रीय भाषाई लोक गीत; हिमालयी क्षेत्रीय भाषाई लोक गीत; उत्तर भारतीय क्षेत्रीय भाषाई लोक गीत; भारतीय क्षेत्रीय भाषाई लोक गीत; दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय भाषाई लोक गीत;  एशियाई  क्षेत्रीय भाषाई लोक गीत; लेखमाला ]
सेरा कि मि डोळयूँ , नै डाळि  पयाँ जामी , नै डाळि पयाँ जामी

द्यबतूं का सतन,  नै डाळि पयाँ जामी , नै डाळि पयाँ जामी

कूलि कि सि बेड्वळि ,नै डाळि पयाँ जामी , नै डाळि पयाँ जामी

सेरा कि ढीस्वळि  ,नै डाळि पयाँ जामी , नै डाळि पयाँ जामी

चला दीदी भूल्यो ,  ,नै डाळि पयाँ जामी , नै डाळि पयाँ जामी

घ्यू दूद चारि  औंला,   ,नै डाळि पयाँ जामी , नै डाळि पयाँ जामी

एक पत्ती ह्व़े ग्याई , ,नै डाळि पयाँ जामी , नै डाळि पयाँ जामी

द्वी पत्ती ह्व़े ग्याई, ,नै डाळि पयाँ जामी , नै डाळि पयाँ जामी

फूटी गेनी फांकि  , ,नै डाळि पयाँ जामी , नै डाळि पयाँ जामी

द्यू कारो धुपणो ,,नै डाळि पयाँ जामी , नै डाळि पयाँ जामी

कै देव शोभलि ,,नै डाळि पयाँ जामी , नै डाळि पयाँ जामी

छितरपाल शोभलि  ,नै डाळि पयाँ जामी , नै डाळि पयाँ जामी

कवी घांडी चड़ोला, ,नै डाळि पयाँ जामी , नै डाळि पयाँ जामी

निसाण चड़ोला  ,   ,नै डाळि पयाँ जामी , नै डाळि पयाँ जामी

द्यब्तळि  भीतर  , नै डाळि पयाँ जामी , नै डाळि पयाँ जामी

को देव ल्या होलो , नै डाळि पयाँ जामी , नै डाळि पयाँ जामी

ओ दीबा द्यूरड़ी नै डाळि पयाँ जामी , नै डाळि पयाँ जामी

ओ नंदा भरड़ी , नै डाळि पयाँ जामी , नै डाळि पयाँ जामी

ओ लाटु भैरव , नै डाळि पयाँ जामी , नै डाळि पयाँ जामी

ओ हीत नरसिंग , नै डाळि पयाँ जामी , नै डाळि पयाँ जामी


जाति- थड्या, झोडा

(तोताराम ढौंडियाल संकलित , गढवाली गीत संग्र   , धाद प्रकाशन , देहरादून से साभार)



लोक गीत; गढ़वाली लोक गीत, उत्तराखंड क्षेत्रीय भाषाई लोक गीत; मध्य हिमालयी क्षेत्रीय भाषाई लोक गीत; हिमालयी क्षेत्रीय भाषाई लोक गीत; उत्तर भारतीय क्षेत्रीय भाषाई लोक गीत; भारतीय क्षेत्रीय भाषाई लोक गीत; दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय भाषाई लोक गीत; एशियाई क्षेत्रीय भाषाई लोक गीत; लेखमाला  जारी ....

Bhishma Kukreti

Panchhundo: Women and New generation Finishing Old Enmity

(Review of Garhwali Story Collection 'Bwari' (1987) by Durga Prasad Ghildiyal)
                             Bhishma Kukreti

             [Let Us Celebrate Hundredth Year of Modern Garhwali Story Literature]
     There is indissoluble enmity between the families of Hari Pradhan and Nortu Seth for two generations. The enmity started from the time Sheru Pradhan and Bhagtu Seth grand fathers of Hari and Naurtu respectively. Panchhundo means when there is no talking terms between two families.
             Educated and experienced Jagdish Seth asks his mother the reason for not ending the family enmity. His mother replies," Byata, jaun haman dharna ki bat bwan , t ham hwe geyaan janani jat..." the story is about the easy way for  finishing disputes.
   Reference-
1-Abodh Bandhu Bahuguna, Gad Myateki Ganga
2-Dr Anil Dabral, 2007 Garhwali Gady Parampara
3-Bhagwati Prasad Nautiyal, articles on Durga Prasad Ghildiyal l in Chitthi Patri
4-Dr. Nand Kishor Dhoundiyal, Garhwal Ki Divangat Vibhutiyan
5- Notes by Prem Lal Bhatt on Ghildiyal
Copyright@ Bhishma Kukreti, 23/7/2012

                 Let Us Celebrate Hundredth Year of Modern Garhwali Story Literature   !                       

Bhishma Kukreti

*******तेरि तकदीरकु मिन बि क्य कन********
                   कवि-डॉ नरेन्द्र गौनियाल

मि चांदु कि तू खुश रहे सदनि इनी.
पण तेरि तकदीरकु मिन बि क्य कन.

हवामहल बि त्वे नि दिखै कबी.
भूखो-प्यासो बि त्वे नि रखो कबी.
मि चांदु तेरि हर हसरत हो पूरी इनी.
पण तेरि तकदीरकु मिन बि क्य कन.

गिच गफा अर मुंड ढकणो एक कूड़ी बि हो.
बदन पर लैरी-लती बि हो इनि भलि-भली.
मि त चांदु कि तू नूर,सदनि इनि नूर ही रहे.
पण तेरि तकदीरकु मिन बि क्य कन.

कबी दुःख नि दे,न कबी सताई त्वे.
न कबी कर्म से न मर्म से, दुखाई त्वे.
हर दिन हर घड़ी तेरो ख्याल करे.
पण तेरि तकदीरकु मिन बि क्य कन.

मितै रैंद सदनि तेरि अंसधरी कि फिकर.
मितै रैंद सदनि तेरि भावना कि कदर.
इनि चांदु सदनि मि मेरि सरि जिंदगी.
पण तेरि तकदीरकु मिन बि क्य कन.

मेरो सुख बि घटद,त्वे दुखी देखिकी.
मेरो दुःख बि घटद,त्वे सुखी देखिकी.
इनि चांदु मि मेरि कटे भली जिंदगी.
पण तेरि तकदीरकु मिन बि क्य कन.

तन कि रीत य सदनि रहे इनी.
मन कि प्रीत य सदनि रहे इनी.
इनी चांदु मि मेरि सुखी जिंदगी.
पण तेरि तकदीरकु मिन बि क्य कन.

       डॉ नरेन्द्र गौनियाल..सर्वाधिकार सुरक्षित