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Articles By Bhisma Kukreti - श्री भीष्म कुकरेती जी के लेख

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 26, 2009, 12:54:53 PM

Bhishma Kukreti

गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य



                             क्रिक्यटरूं कमै अर कमेंटरी



                                चबोड्या - भीष्म कुकरेती



     अचकाल टी.वी. चैनेलुं मा , अखब़ारूं मा, भारतौ या भैराक पत्रिकाओं मा क्रिक्यट  खिलाड्यू  खेल पर कम ऊंक कमाई अर दुसर कामु चर्चा छ्वीं जादा होन्दन . ऊ दिन दूर नि छन जब क्रिक्यट कमेंटरी इन ह्व़े जाली .

गुड मोर्निंग ! आज भारत अर पकिस्तान कु एक दिनों क्रिक्यट मैच  च . पकिस्तान की टीम मा तीन पुराणा चेहरा टीम मा ऐ गेन. यि तिनी ब्याळि इ मैच फिक्षिंग का जुर्म मा द्वी सालो जेल काटी क अयाँ छन . चूंकि यूंक सजा पूरी ह्व़े ग्याई त यि खिलाड़ी जोर शोर से खिलणो तियार छन. जेल मा इ यूँ खिलाड्यू कुण मैच प्रक्टिस अर मैच फिक्सिंग को पूरो इंतजाम छौ. ख़ास बात या च कि प्रसिद्ध बैक -बैंक ऑफ़ मनि न यूँ तिन्यु तै अपण ब्रैंड अम्बैसडर घोषित करी आल अर तीन सालो खुण तीन करोड़ सालाना करार पर यि अब बैंक का विज्ञापन मॉडल बि राला. कति भारतीय सामाजिक संस्थान यूँ तिनि खिलाड्यू अजेंटू क संपर्क मा छन कि यि यूँ सामजिक संस्थानों  ब्रैंड  अम्बैसडर बौणि जवान.   

   भारत की तरफ से बि टीम मा तीन बदलाव ह्वेन . मोहित शर्मा अर महिपाल  बिन्टू जु रेव पार्टी मा चरस गांजा पींद पकडे गे छ्या ,  जेल मा छया अर उ द्वी अच्काल पेरोल मा अयाँ छया त  क्रिक्यट बोर्ड की इजाजत से भारतीय टीम मा यूंक चुनाव ह्वाई. तिसरो खिलाड़ी उदंकार  कैलास सिगरेट कम्पनी क झूलो ब्रैंड कु ब्रैंड अम्बैसडर च अर वैकी सालाना कमै सौ करोड़ सिर्फ विज्ञापनों से च .

     भारतीय खिलाड्यू न अपण अपण पोजीसन ल़े आल .

   पैलि स्लिप मा वीरेन्द्र वाहबाग च जैकी सालाना कमाई द्वी सौ करोड़ सालाना  च अर अच्काल जरा कैच जादा छोड़ना छन  त कमै कम ह्व़े ग्याई

दुसरी स्लिप मा अछेकी तेंदुलकर च जु सचिन कु चचेरा भतिजु   च . वैक कुर्ता अर पैंट पर इथगा ऐड स्पौट  छन कि इन पता इ नि चलणु च कि अछेकी तेंदुलकर भारतीय खिलाड़ी च. सालाना  अछेकी तेंदुलकर तीन सौ करोड़ इनकम टैक्स भरदो पण इनकम टैक्स वाळ सच नि मानणा छन अर चार केस ट्रिब्यूनल मा जयां छन.

   चार सौ करोड़ सालाना  कमै वळु भारतीय कप्तान विराट मोहली न  गेंद भारत मा सबसे जादा कमाण वाळ बै  हथो गिन्देर  अल्जहीर खान तै द्याई. अल्जहीर गिंदी तै अपण पैंट क हरेक ऐड   स्पौट पर घुसुद घुसुद जाणु च अर अल्जहीर खास ध्यान दीणु च  च कि  टी.वी. मा हरेक ऐड स्पोट दिखयाणु राउ.

   बिकेट पर पाकिस्तानी खिलाड़ी च जैक सालाना कमाई क बारा मा पाकिस्तान क्रिक्यट बोर्ड अर पाकिस्तान इनकम टैक्स वळु तै बि नि पता च पर सौब तै पता च कि वैकी कमाई क्यां क्यां से हूंद.

अर अर ...अर पाकिस्तान मा सबसे जादा कमाण वळ  खिलाड़ी न जोर से छक्का मार . अर अब गिंदी भारत मा सबसे कम कमाई वाळ गिन्देर म च  . आज हमर संवाददाता न खबर दे कि जनि यू बौलर दस विकेट ले ल्यालु एक कमाई बि दस लाख रूप्या प्रति दिन  ह्व़े सकद.

अब सी लंच टैम ह्व़े ग्याई .

हमारो स्टेटिसियन  न हम तै बताई कि आज अल्जहीर न बगैर विकेट का सात ओवर मा बयालीस रन देन याने कि  प्रति रन पचास लाख

दुसर गिन्देर न तीस रन देन त यू खर्चा ह्वाई प्रति रन चालीस लाख

आज सबसे कम रन उदंकार न देन बस उनतीस रन अर खरचा आये एक लाख प्रति रन . याने कि उदंकार आज सबसे किफायती गिन्देर साबित ह्वाई.

जख तलक फील्डिंग कु सवाल च फील्डिंग मा आज रमेश रैना अग्वाड़ी राई अर वैन पैसों कु हिसाब से बीस करोड़ रूप्या क रन बचैन

अर द्वी कप्तानो सहमती से अम्पारो न  खेल टैम से एक घंटा पैलि इ ख़तम करी दे. कारण  च बल द्वी टीम आज दुनिया की मशहूर शराब ब्रैंड क विज्ञापन शूटिंग मा जाणा छन.

आज दिन भारत को भी ठीकि राई भारत तै चालीस लाख रूप्या प्रति रन पोड़ त पकिस्तान कु खरचा ह्वाई एक करोड़ रूप्या  प्रति विकेट.



Copyright@ Bhishma Kukreti 7/8/2012



गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य  जारी  ...

Bhishma Kukreti

                       Raibar: a Love story
(Review of Garhwali Story Collection 'Gaitri ki Bwe' by Sudama Prasad Premi

Let us celebrate Hundredth year of modern Garhwali Fiction!
                           Bhishma Kukreti
[Notes on Modern Love Story; Modern Garhwali Love Story; Modern Uttarakhandi Love Story; Modern Mod Himalayan language Love Story; Modern Himalayan language Love Story; Modern North Indian regional language Love Story; Modern Indian regional language Love Story; Modern Asian regional language Love Story]
  Raibar is very lovely love story by Sudama Prasad Premi
  There is sensation, sensuality in the story. The story has many symbols for creating various images of Garhwali village. The love story deals with non meeting of lovers.
Reference-
1-Abodh Bandhu Bahuguna, Gad Myateki Ganga
2-Dr Anil Dabral, 2007 Garhwali Gady Parampara
3-Bhagwati Prasad Nautiyal, articles on Durga Prasad Ghildiyal l in Chitthi Patri
4-Dr. Nand Kishor Dhoundiyal, Garhwal Ki Divangat Vibhutiyan
5-Notes of Prem lal Bhatt on the Stories of Durga Prasad Ghildiyal
6- Gaytri Bwe, 1985 Gadh Bharati Sanstha, Delhi,
Copyright@ Bhishma Kukreti, 8/8/2012 
Let us celebrate Hundredth year of modern Garhwali Fiction!
Notes on Modern Love Story; Modern Garhwali Love Story; Modern Uttarakhandi Love Story; Modern Mod Himalayan language Love Story; Modern Himalayan language Love Story; Modern North Indian regional language Love Story; Modern Indian regional language Love Story; Modern Asian regional language Love Story to be continued ...

Bhishma Kukreti

गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य



                              मंदी  कि मार मा होशियार !





                          चबोड्या - भीष्म कुकरेती



  मार कत्ति तरां कि होंद . ब्व़े बाबू मार, मास्टरूं मार, मर्खुड्या दगड्यों मार, मर्खुड्या बल्दुं  मार, कज्याण्यु मार . अर अच्काल  सबसे बडी मार च मंदी की मार   मतबल रिसेसन की मार. बकै मार थ्वडा देरी होंदी अर फिर बिसरये जांदि  . पण मंदी की मार अर गुमचोट मा जादा फरक नि होंद. 

भौत सा बंचनेरु चिट्ठी ऐन बल रिसेसन से बच णो उपाय बथाओ.

बंचनेरु सुविधा बान मीन मंदी क मार से बचणो कुछ ब्युंत खुजेन. यि ब्युंत इन छन

सबसे पैल त अपण  घौरम मंदी क अर्थ सब्यूँ तै बथाओ. किलै अफिक सरा बोझ उठाये जाओ! संयुक्त परिवार मा रौण ह्वाओ त सब्यूँ तै  परेसान हूण चयेंद .

दगड्यो अर रिश्तेदारों तै बर्थ डे गिफ्ट दीण सफाचट बन्द कारो अर यूँ मागन जथगा ह्व़े साको गिफ्ट की मांग कारो. गिफ्ट की मांग मा शर्माणो क्वी काम नी च .

गिफ्ट बचाणो बान दूसरों बर्थ डे मा नि जाण पण  अपण बर्थ डे या अपण बच्चों brth  डे मा  सब्यु तै भट्याण.

जु कैक बर्थ डे मा जाण बि ह्वाओ त ब्वालो mi   गिफ्ट मा विश्वास नि करदो बस आशीर्वाद मा विश्वास करदो.

अपण पैसों न पीण बन्द कारो अर दुसरो पीठ मा सत्तु छोळण सीखो . क्वी  पिलाओ त पूरो मैना क कोटा एकी बैठक मा पूरो कारो .

पौण बणो पण पौण नि भट्याओ .

उधार मांगो पण उधार नि द्याओ

जु तुम नेता छंवां त मंदी कुण  दुसर देस पर भगार लगाओ, भगार जोर से लगाओ की वु देस बि घबरै जाओ.  जन की हमारा वित्त मंत्री भारत की मंहगाई तै अफ्रीका अर यूनान क दगड जुड़दन .

मंदी मा खुश होण जरूरी च . अफु आशा करण पण हैंको तै निराशा मा डाळण जरूरी च यां से आप दुसरो दुःख मा खुश होण से संतोष प्राप्ति करी सकदवां .

संयुक्त परिवार ह्वाओ त भायुं बच्चों कुणि खर्चा पर लगाम लगाओ अर अपण बच्चो तै मिठाई या चाकलेट रात द्याओ

औफ़िस मा अपण सबोर्डिनेटु  तनखा कम करणो याँ से बड़ो बहाना नि ह्व़े सकुद. सबोर्डिनेटु तनखा कम कारो अर यां से अपण बौस  तै पुळेक अपण तनखा बढ़ाओ। 

जु तुमम कार च त सस्तो पेट्रोल डाळो  . मंदी क बगत पर पर्यावरण कि फिकर बन्द कारो.

अपण क्रडिट कार्ड तै बैकं बोलिक ख़तम कराओ.  पण दगड्यो क्रेडिट कार्ड से मौज कारो .

जु डुबण वाळ बैंक च वै बैंक से उधार ल़े ल्याओ कुज्याण ह्व़े सकद च उधार चुकाणो मौक़ा इ नि आओ

ब्यौ नि कारो बल्कण मा कंपैनियन शिप मा विश्वास कारो अर द्वी झण बगैर ब्यावक दगड़ी राओ

जु ब्यौ करण जरूरी ह्वाओ त टकों ब्यौ क संस्कृति दुबर शुरू कारो.

दाड़ी नि बणाओ बल्कण मा दाड़ी बढाओ अर प्रसिद्ध कारो  कि यू नयो फैसन च

पुराणा धुराणा झूलों तै letest फैसन का नाम देकि पैरो .

नयाण धुयाण कम कारो अर शरीर की गंध -दुर्गन्ध तै पेरिश से लयुं परफ्यूम की गंध सिद्ध कारो.

उधार ल्याओ अर घी प्याओ अर घौरम डंडा धारो . उधार ल़ीण वाळ आवन त ऊं  तै डंडा दिखाओ 



Copyright@ Bhishma Kukreti 8/8/2012


गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य , जारी ...

Bhishma Kukreti

Review of Garhwali Satirical Prose – 8
   Dyaradoon Puran: Satire on Dehradun as city
(Review of Satire by Bhishma Kukreti)

                           Bhishma Kukreti


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    Kukreti published a satirical series on Dehradun city in Garh Aina (27th April 1st May 1989). This author as student of ninth standard comes to Dehradun from a remote village of Garhwal. He finds human litter on the road and cries," Kwi gan ai ge" (It seems a village started). The author compares the village where there is human litter at the entry of a village. His senior tells that it is not a village but a Muhalla of Dehradun city. By logic, finding human litter here and there, the author thinks that Dehradun is bunches of villages.
  The writer is not surprised for finding the class difference in Dehradun as he describes
गौं मा जु संस्कृत मा पूजा करूद  ओ  पंडित हूंद अर जु गढ़वाळी मा दिवता पुजदु  उ जागरी होंद. त इख शाहरू मा जु अंग्रेजी मा गाळी द्याओ उ बडू साब .जु हिंदी मा अब्यूज करदो उ क्लर्क अर जु अपण ड्यारम  अपण नौनु तै गढ़वळि सिखांद वु चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी माने जांद.
  As in village people throw dust on the common place, people throw dust on the road or public places as
अब चूंकि अपुड़ सुर्युं खौड़ दुसरक चौक मा चुलाण मा कवी पाप नि होंद t  सर्वप्रथम हम अपण खौड़ दुसरक चौक ज़िना चुलान्दा, अर यदि पड़ोसी रागसी प्रवृति कु होऊ त  सार्वजनिक स्थल कूडादान का रूप मा प्रयोग होंद . चूंकि हरेक पडोसी रावण होंद ट गाँ मा सुबेर क गड्यु रंगुड सार्वजनिक स्थल याने बीच रस्ता मा चुलै दीन्दा . आम रस्ता मा पंचायती चौक द्रौपदी च , हरेक पांडव कि भोग्या....
  About transferring a strict district magistrate as if he has done a crime, Kukreti explains that it is the democracy which is more important than health of the people. The satirist compares Parushram and Lakshman of Ramayan era as the municipal corporate of opposite parties
मी तै इन लगणु च रामयण काल मा इ प्रजातंत्र का बीज बोये गे होला. श्री लक्ष्मण बि नगर सेवक का चुनाव जीति होला अर परुशराम जी अपोजिसन का रै होला तबि त ऊन ब्वाल
सेवक जो करे सेवकाई , अरि करन करे जो लराई
  This way, Kukreti attacks humorously on the culture of Dehradun and ridicules those minus points .
References-
1-Abodh Bandhu Bahuguna, Kaunli Kiran
2-Dr Anil Dabral, 2007, Garhwali Gady Parampara 
3- Dhad, Garh Aina, Paraj publications.

Copyright @ Bhishma Kukreti, 8/8/2012

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Bhishma Kukreti

गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य



                                  बाढ़ दिखणो बिगरौ ! 



                                       चबोड्या - भीष्म कुकरेती       



   " सुणना छंवां ! आज मीन बाढ़  दिखणो जाण !'

" ममी ! प्लीज ! बाढ़ दिखणो तीन अर बुबा जीन जाण. अर जाजन दुफरा मा जाण . हम तै छै बजी किलै तंग करणि छे?"

" अरे ! टैम पर उठो . दिखणा नि छंवां कि कुज्याण कथगा सालुं बाद  इथगा  बढिया दिन आई कि जब मी त्यार बुबा जीक दगड बाढ़ या सुखा ग्रसित क्षेत्र  कु दौंरा   पर  जाणु छौं. पांच साल विरोधी दल मा  मा रैक त कुछ बि नि द्याख.अब जब वो मंत्री बौणि गेन अर वु बि आपदा मंत्री त ..."

" ममी अबि भौत टैम च हम तै सीण दे."

" अरे पर में बथाओ त सै कि मीन कु साड़ी पैरण ? कु कु जर जेवर पैरण?"

" ममी ! प्लीज आया तै पूछ  कि क्या करण ? हम तै सीण दे. "

" वा बि त नि आई अबि . अरे में खुणि त उकरांत हुंईं च अर तुम अर त्यार बुबा जी सियाँ छंवां . अर तुमर डैडि क ल़े क्या च . वी खदर कु  झुल्ला. परेशानी त मेखुण च कि क्या क्या पैरण?"

"ममी प्लीज .."

" अरे नौकरानी तू अब छे बिजणि ?"

"मेम साब आज त मि आधा घंटा पैलि ऐ ग्यों !'

" अच्छा सूण ! आज जरा स्वाळ पक्वड़ बणा ..."

" हैं ! मंत्र्याणि जी  !  आज कौंटीनेंटल ब्रेकफास्ट नि पकाण  ?"

" ना! ना !  आज स्वाळ पक्वड़ बणा "

" मंत्र्याणि जी ! आज गढ़वल्यु क क्वी त्यौहार च ? जु स्वाळ पक्वड़ पकाण ?"

'नै नै आज क्वी त्यौहार नी च . आज मि अर मंत्री जी बाढ़ ग्रसित क्षेत्र कु दौंरा पर जि जाणा छंवां. त ज़रा सगुन ह्व़े जाओ त ठीक च कि ना ?"

" हाँ ! हाँ ! मेम साब,  फिर त आज  त्यौहार से बि बड़ो दिन च . त कुछ स्वीट बि पकाण पोडल ?"

" ना ना स्वीट साट उ घंटाघर कु स्वीट सौप बिटेन मंगाई लीन्दा !"

" हाँ हाँ उ ठीक च ."

' अरे या आया कख मोरी ह्वेली ?"

" पण मेम साब आया त आठ बजी आँदी अर आप अबि बिटेन .."

" अरे पर इन शुभ दिन कब कब आन्द बड़ी मुस्किल से त इथगा बड़ी बाढ़ आई कि हम तै बाढ़ ग्रसित क्षेत्र  दिखणो मौक़ा हाथ आई."

" हाँ मेम साब . इन दिन त भग्यान मंत्र्यु  अर मंत्र्याणियूँ  भाग मा इ आन्द .सी उ नि छ्या पैलाक मंत्री. बिचारी उंकी घर्वळी पांच साल तलक जग्वाळणि  राई कि कबि त आली बाढ़ पण गौ बुरी चीज च कि एक दिन बि ये प्रदेश मा बाढ़ ऐ ह्वाऊ धौं."

" हाँ अब त वा मै  देखिक जळणि होलि"

"  जळणो बात इ च . वै क्या हौर मंत्र्युं घर्वळि  बि जळणि होलि कि आपक कजे तै मंत्री बण्या छै मैना बि नि होई कि इथगा बडी बाढ़ ऐ ग्याई. "

" हाँ ! ग्विल दैण ह्व़े ग्याई"

' मेम साब !  उठाणो गाडि  याल कि ना ?"

" हाँ हाँ! उठाणो त मीन वै दिन  इ गाडि याल छौ जै दिन यि आपदा मंत्री बौणि छा कि  हे ग्विल्ल, नरसिंग जु ए साल बाढ़ आली त मी खाडु  सिरौलु ."

" औ त अब दशहरो मा खाडु मारे जाला."

' हाँ किलै ना "

" ये ल्याओ. आपकि आया बि ऐ ग्याई . मी त रूस्वड़ मा जान्दो "

' अच्छा सूण ज़रा स्वाळ पक्वड़ दिवता क ठौ मा धरणो अलग से धौरी दे . कखि बिसरी नि जै हाँ ! "

" हाँ .. हाँ जी, पैल दिवता ...मी त रूस्वड़ मा जान्दो "

' आया !  भलो ह्वाई टु आज पैलि ऐ गे."

" हाँ मीन जनि सूण कि आज आप अर मंत्री जी बाढ़ दिखणो जाणा छंवां त मि समजी ग्यों कि आप तै मेरी जरूरत होली. पैल त बधाई हो कि आप तै छै इ मैना मा बाढ़ दिखणो मौक़ा मिलणो च."

" थैंक यू !  यि सौब ग्विल, नरसिंग की मेहरबानी च ."

" अच्छा मेम  साब ! कति  बजे जाण जाजन ?"

" बारा बजि "

"औ त अबि त छै घंटा छें छन "

" अच्छा सूण ! वार्ड रोब बिटेन जरा बढिया सी साड़ी छांटी क ला जरा  "

"मेम साब साड़ी त सुफेद इ पैरण पोडल ."

" क्या सुफेद साड़ी ! अर मि ?"

" हाँ मेम साब ! उ क्या च बाढ़ मा लोक मोर्याँ छन ना त आप तै बरजातक  सोग जताण पोडल ."

" ओ हाँ ! त इन कौर ज्वा सबसे मैंगी सुफेद साड़ी  च ना वीं तै ला."

"हाँ वा साड़ी चौलली ."

" अच्छा सूण जर जेवरात खूब पैरण पोडल . हैं! "

" नै नै मेम साब !  जर जेवरात उथगा जादा नि दिखे सकदा आज ."

' अरे त फिर यि जेवरात कब दिखौल मि ?"

" मेम साब ! आज त आप तै इन दिखाण कि आप भौत दुखी छन."

" त जरा इन बथादी कि दुःख मा कु कु जेवरात दिखाए सक्यान्दन ? त्वे तै त भौत सी मंत्र्युं घौर काम कु तजुर्बा च "

"मेम साब ! ए बगत पर जेवर सादा इ होन्दन . जादातर मंत्र्याणि इन बगत पर चांदी क सादा  जेवर पैरदन. चंदी क जेवर  सादा अर सरल दिख्यान्दन ना !"

" ठीक च जु बि जेवर पैरण जरा भैर गाडि  दे अर फिर मि दिखुद कि कै तरां से पैरण  .. जरा तब तलक मि अपण दगड्याण्यु तै फोन करदु कि मि बाढ़ दिखणो जाणु छौं "

" हलो !  रोड ठेकदानी जी ! मि मंत्र्याणि बुनु छौं . अछा सुणो मि बाढ़ दिखणो जाणु छौं जरा  सहेल्यूं तै लेकि एयर  पोर्ट ऐ जयां हाँ ! "

" बधाई हो ! ठीक च हम सौब तुम तै सी औफ़ करणो एयर पोर्ट ऐ जौंला !

" हलो ! सिंचाई विभाग कि ठेकादानी मि  आज बाढ़ दिखणो जाणु छौं ."

" अरे मंत्र्याणि  जी  ! बधाई हो .इथगा  बड़ो मौक़ा इथगा जल्दी मीलि   गे."

" अच्छा सुणो ! जब मि  बाढ़ देखिक एयर पोर्ट पर औंलू आप तै अपण सहेलीयूँ लेकी स्वागत कु बान ऐ जयां "

" मंत्र्याणि जी, इ बि क्वी बुलणो बात च . आपक स्वागत क बान बरात खड़ी   राली . वोमेन मैगजीन  की रिपोर्टर बि राला "

"आया जरा मि ब्यूटीपार्लर वळि  तै बुलान्दु  तु तब तलक सौब तैयारी कौर हाँ .हलो ! ब्यूटी पार्लर .. अछा जरा भली सी ब्यूटीसियन भ्याजो हाँ .. मीन आज बाढ़ दिखणो जाण त मेक अप देर तलक रौण चयेंद हाँ..""

"ए मुना क पिता जी  ! मि जरा ब्यूटी पार्लर वळि तै भट्याणु छौं .आप क मेक अप बि करण कुछ?"

" मुना कि ब्व़े एक परेशानी च . ज़रा "

" द्याखो हाँ . बाढ़ दिखणो त जाणि च , चाहि कुछ बि ह्वाओ "

" हाँ भै हाँ. आपदा मंत्री ह्वेक मि इथगा बि नि कौर सकुद क्या ? पण जरा एक घंटा देर ह्व़े जाली "

" किलै मुना क पिताजी ?"

" जरा वो  केन्द्रीय आपदा मंत्री क परिवार बि बाढ़ दिखणो आणु च बस एक घंटा देर से.."

" जु बि आणु च आण द्याओ.अब आपदा मंत्री क परिवार च त परिवार तै बाढ़ दिखणो बिगरौ त ह्वालो  कि ना ? "



Copyright@ Bhishma Kukreti 10/8/2012



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Bhishma Kukreti

Akhalya: A Love Story between upper and untouchable classes

(Review of Garhwali Story Collection 'Gaitri ki Bwe" by Sudama Prasad 'Premi')
Let us celebrate Hundredth year of modern Garhwali Fiction!
                           Bhishma Kukreti
[Notes on love story between upper and untouchable classes; Garhwali love story between upper and untouchable classes; Uttarakhandi language love story between upper and untouchable classes; Mid Himalayan language love story between upper and untouchable classes; Himalayan language love story between upper and untouchable classes; North Indian language love story between upper and untouchable classes; Indian language love story between upper and untouchable classes; South Asian language love story between upper and untouchable classes; Asian language love story between upper and untouchable classes]
               Akhlya was alone when he comes to know this world. His parents die early. His Fufu took him with her but unfortunately she also expired. His kin did not take responsibility for his nurturing. A Harijan family started taking care for him. He started cordial relation with Baishakhi the daughter of a Harijan Gampla. They come to know that they are in love. However, it was unheard a upper class boy marrying a Harijan girl.  The love is not for body but for an eternal purpose.
   There is struggle between class wars in the story too.
Reference-
1-Abodh Bandhu Bahuguna, Gad Myateki Ganga
2-Dr Anil Dabral, 2007 Garhwali Gady Parampara
3-Bhagwati Prasad Nautiyal, articles on Durga Prasad Ghildiyal l in Chitthi Patri
4-Dr. Nand Kishor Dhoundiyal, Garhwal Ki Divangat Vibhutiyan
5-Notes of Prem lal Bhatt on the Stories of Durga Prasad Ghildiyal
6- Gaytri Bwe, 1985 Gadh Bharati Sanstha, Delhi,
Copyright@ Bhishma Kukreti, 10/8/2012 


Notes on love story between upper and untouchable classes; Garhwali love story between upper and untouchable classes; Uttarakhandi language love story between upper and untouchable classes; Mid Himalayan language love story between upper and untouchable classes; Himalayan language love story between upper and untouchable classes; North Indian language love story between upper and untouchable classes; Indian language love story between upper and untouchable classes; South Asian language love story between upper and untouchable classes; Asian language love story between upper and untouchable classes to be continued..

Let us celebrate Hundredth year of modern Garhwali Fiction!

Bhishma Kukreti

Fiction Style of Sudama Prasad 'Premi'

                                    (Review of Modern Garhwali Fiction)
Let us celebrate Hundredth year of Modern Garhwali Fiction!

                                 Bhishma Kukreti
                  Sudama Prasad 'Premi' is one of the important signatures of Garhwali poetry and fiction.  His stories are mirror of Garhwal and Garhwalis with sufficient imagination. Imaginary webbing is specialty of Premi.
                 Ghanghtol is in autobiography style. The main characters of Sudama Prasad are sensitive, emotional and have love for something. l Most of his main characters are ideal and aware about their responsibilities.  Creating emotional characters is again specialty of Sudama Prasad. Premi create love scene with emotion.
          The Garhwali fiction writer Sudama Prasad Premi create There is the contemporary Garhwali situation atmosphere and characters in his stories. Premi uses of symbols are appropriate with the situation.
  Premi uses description of situation and the characters dialogues parallel for making strong characterization. Premi uses common Garhwali words and not city words. He uses proverbs abundantly. The stories related to migrated Garhwali subject are mostly having pain of separation.  There is no doubt that Premi uses Hindi words abundantly for smooth flow of stories.  Dialogues are to accelerate the flow of stories in stories of Sudama Prasad Premi.
The place of Sudama Prasad Premi is important in Garhwali literature.
Reference-
1-Abodh Bandhu Bahuguna, Gad Myateki Ganga
2-Dr Anil Dabral, 2007 Garhwali Gady Parampara
3-Bhagwati Prasad Nautiyal, articles on Durga Prasad Ghildiyal l in Chitthi Patri
4-Dr. Nand Kishor Dhoundiyal, Garhwal Ki Divangat Vibhutiyan
5-Notes of Prem lal Bhatt on the Stories of Durga Prasad Ghildiyal
6- Gaytri Bwe, 1985 Gadh Bharati Sanstha, Delhi,
Copyright@ Bhishma Kukreti, 11/8/2012
Let us celebrate Hundredth year of Modern Garhwali Fiction!

Bhishma Kukreti

गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य



                          युद्ध असला बजार मा तीसरी दुनिया क देस





                          चबोड्या - भीष्म कुकरेती

[हास्य व्यंग्य साहित्य ; गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य ; उत्तराखंडीहास्य व्यंग्य साहित्य ; मध्य हिमालयीहास्य व्यंग्य साहित्य ; हिमालयी हास्य व्यंग्य साहित्य ;उत्तर भारतीय भाषा हास्य व्यंग्य साहित्य ; भारतीय भाषा हास्य व्यंग्य साहित्य ; दक्षिण एशियाईभाषा हास्य व्यंग्य साहित्य ; एशियाई भाषा हास्य व्यंग्य साहित्य लेखमाला ]




एक असला ब्यौपारी- अरे सावधान ! सि तीसरी दुनिया क गरीब देस युद्ध असला बजार मा आणा छन.

दुसर ब्यौपारी- अरे हाँ सावधान. सौब एक जुट ह्व़े जाओ . हाँ ! यूँ तै डिस्काऊन्ट दीणै जरूरात नी च हाँ !

एक हैंकु युद्ध असला  ब्यौपारी - अरे यार बीच मा यि द्वी तीन मानव कल्याण कारी कौंळ का ब्यापारी किलै हमारा बजार मा दुकान लगैक बैठ्या छन. फ़ोकट मा हमारो सौदा -नफा खराब करी दीन्दन.

चौथू असला ब्यौपारी - रौण द्याओ रै यूँ तै बि. बरडाणा इ त रौंदन इ.  धंधा त यूँ से हूंद नी च बस भांची मारणो रौंदन बैठ्या

एक- अरे शरू कारो . धंधा . उनि बि अच्काल हमारो देस मा रिसेसन याने मंदी च त तिसर देसु तै युद्ध अस्त्र शास्त्र बेचिक मंदी ख़तम करे जाओ.

एक व्योपारी- ले लो नया नया मिसाइल ले ल्याओ

हैंक  ब्यापारी- ले ल्याओ ! नया नया ऐटम बम ले ल्याओ

तिसरो ब्यौपारी- आज इ बण्यु ताजा टैंक ले ल्याओ

चौथू ब्युँपारी- केमिकल औजार ले ल्याओ . पड़ोस्यू जनता तै मारणो पूरी गारेंटी

एक मानव कल्याणकारी विक्रेता- भूक मिटाणो औजार ले ल्याओ

हैंक कल्याण कारी ब्यौपारी- हमर इखन  कुल्याणो औजार ल़ी जाओ

तिसर दुनिया क एक देस  (असला ब्यौपारी क समणि ) - अच्छा सूण ब्याळि , म्यार पडोसी न त्वे मांगन आधुनिक मिसाइल ल्याई . त मी तै उनि मिसाइल वै से दुगुण संख्या मा  दे अर दगड मा एंटी मिसाइल मिसाइल बि बाँधी दे.

असला ब्यापारी- ठीक च . मि आधुनिक मिसाइल अर एंटी मिसाइल बाँधी दींदु . जरा भितर त आ कुछ नया नया  टैंक अयाँ छन अर अबि तलक त्यार पडोसी तै पता बि नी च . जु तू हजार टैंक लेली त मि शर्तिया त्यार पडोसी तै यि टैंक नि द्योलु.

तिसर दुनियाक देस - पडोसी क सेना अर जनता तै तै मारणो बढिया टैंक छन ना ?

असला ब्यापारी- अरे पड़ोस्यू सेना अर जनता  मारणो याँ से बढिया टैंक बौणि इ नि छन अबि तलक .

तिसर दुनिया क देस-  भलो भलो ! इन कारो त द्वी हजार टैंक बि बाँधी द्याओ . कुछ डिसकौंट ?

ब्यापारी- ना डिसकौंट त हम नि दीन्दा पण मि एंटी टैंक मशीन  आधा दाम पर दे द्योलु

तिसर दुनिया देस- ठीक च चालीस पचास एंटी टैंक बि बाँधी द्याओ . अच्छा सूणो ओ सेना तै लिजाणो ट्रक कख मिल्दन.

ब्युँपारी- इख बिटेन दसवीं दुकान च वा दुकान मेरो साडो भाई क इ च . मि वैकुण फोन कौरी दींदु .

[तिसर दुनिया क देस वै मिलिट्री  ट्रक क दुकान ज़िना जान्दो , बीच मा वै तै मानव कल्याण कारि दूकान्यू क  रस्ता म ह्वेक  जाण पोड़द ]

एक मानव  कल्याणकारी दुकानदार (अवाज दींद) - हमर इख सिक्षा बढ़ाणो सामान मिल्दो . च क्वी...

हैंक मानव कल्याण कारी दुकानदार -  अर किलै छै अपण मुख बिगाड़णो. यूँ तिसर दुन्या वाळु न  कुछ नि लीण ।

तिसर दुनया क देस एक मिलिट्रीट्रक  क दुकानदारो इख- जरा मिलिट्री ट्रक त दिखा ..

दुकानदार- भै म्यार ट्रक त सौब बिकी गेन . तयार चारी पडोसी ऐ छया अर जथगा बि ट्रक छया सि ली गेन. बुकिंग करण पोडल.

तिसर दुनया क देस - ठीक च जथगा उं चरी देसूं न ट्रक खरिदेन  उथगा ट्रक मी तै चयाणा छन. इ ले एडवांस .

दुकानदार (मन इ  मन मा ) - कैन ब्वाल बल आर्थिक मंदी च युद्ध असला बजार मा त खूब चहल पहल च.

दुकानदार- अब कना जाणु छे ? कुछ पैसा बच्यां छन क्या ?

तिसर दुनया क देस- ना अब पैसा त बच्यां नि छन . म्यार  साल भरो बजट त रक्षा खरीदी मा चलि गे.

युद्ध असला दुकानदार (मन इ मन मा ) तुमारो रक्षा बजेट  से त हमार देस कु बजट चल्दो

दुकानदार- जब पैसा नी छन त कना जाणो छे?

तिसर  दुनया क देस- जरा कल्याणकारी बजार बि त जाण . दिखुद छौं कुछ उधार पगाळ मा कुछ मील जाओ .

असला दुकानदार - अच्छा सूण . कुछ नई तकनीक का मिलिट्री ट्रक चार पांच मैना मा बि आण वाळ छन हाँ !

तिसर दुनया क देस- ठीक च बुक कौरी ल्याओ . अच्छा अब मि जरा जन कल्याणकारी बजार जाणु छौं

असला दुकानदार - ठीक च

जन कल्याणकारि  दुकानदार - हाँ भै ह्व़े ग्याई सौब खरीदी

तिसर दुनिया क देस - अरे कख ह्वाई . अबि बि रक्षा बजट मा कमी च . पता नि क्या ह्वाल जु पडोसी देस में से जादा युद्ध असला जमा कौरी द्याला त ?

जन कल्याणकारि दुकानदार - अच्छा ब्वालो !  क्या चयाणु  च ?

तिसर दुनिया क देस - चयाणु त क्या  नी च? अच्छा भुकमरी  रुकणो तकनीक बचीं च ? उन त चयाणो सिंचाई, शिक्षाबिरधि. कूड़ बणाणो सामान, रोड बणाणो ब्यूंत  विधि सौब चयाणु च

जन कल्याणकारी दुकानदार - कुछ कैश बि च कि ना ?

तिसर दुनिया क देस - कख बच्युं च .उधार मीलल  क्या?

जन कल्याणकारी दुकानदार - ना. हम उधार त नी दीन्दा पण जु ऐ.एम् ऍफ़ या वर्ल्ड बैंक वाळ गारेंटी दयावान त ..!

तिसर दुनिया क देस - अरे यूँ सौब बैंकु  मांगन उधार पगाळ ले छ्यायो . पण पवा से कम कु  काम ह्वाई. बकै आधा पौणा से जादा त उ  करप्सन फंड मा चलि ग्याई . अब त ब्याज भरणो बान बि मी दुबर कर्ज मांगणु छौं.

जन कल्याणकारी दुकानदार -  त ठीक च तुम इन कारो अपण जमीन गिरबी धौरो त  जन कल्याण कु वास्ता तकनीक मीलि  जाली

तिसर दुनिया क देस - अब क्या बुलण . इकोनौमिक रिफौर्म का नाम पर हमारी सौब जमीन बिकि  ग्याई . अब  जल , जमीन , जंगळ,कुछ बि हमारो नी च, सौब मल्टी नेशनल कम्पन्यू को नाम पर ह्व़े ग्यायी. 

जन कल्याणकारी दुकानदार - त मि बि कुछ नि कौर सकुद. अब त यू .एन ओ मा जाओ त सैत  च उ कुछ मदद कौरी द्याओ.

तिसर दुनिया क देस- ठीक च अब जन कल्याण कु बान भीक इ मांगण पोडल .





Copyright@ Bhishma Kukreti 10/8/2012

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Bhishma Kukreti

Review of Garhwali Satire Prose – 9
(Review of Representative Satire by Parashar Gaur -3)

                           Bhishma Kukreti
Breaking News –Bhulla Gol: Parashar Gaur satires the condition of Garhwali youth famous for hotel work or kitchen works at prosperous houses.
Adat se majboor: taking the example of dog speaks that old habits die hard
Copyright@ Bhishma Kukreti, 9/8/2012


Review of Representative Satire by Parashar Gaur to be continued.....

Bhishma Kukreti

Amai Dani: Story about Kind hearted Man killing a boy

(Review of Garhwali Story Collection 'Katha Kumud' by Abodh Bandhu Bahuguna)
Let us Celebrate Hundredth year of Modern Garhwali Fiction!

                             Bhishma Kukreti
[Hundredth year of modern fiction; Hundredth year of modern Garhwali fiction; Hundredth year of modern Uttarakhandi language fiction; Hundredth year of modern Mid Himalayan regional language fiction; Hundredth year of modern Himalayan  regional language fiction; Hundredth year of modern North Indian regional language fiction; Hundredth year of modern Indian regional language fiction; Hundredth year of modern Asian regional language fiction]
  There are forty stories in 'Katha Kumud' a story collection by Abodh Bandhu Bahuguna.
      The man does not want to indulge in crime but may indulge by mistake or accident. By mistake, a kind hearted old man kills a notorious boy while he is stealing mangos. The story is tense as the old man is not able to bear the pain though, he did not kill the boy intentionally. The fiction writer Abodh Bandhu Bahuguna creates tension for the readers too.
Reference-
1-Abodh Bandhu Bahuguna, Gad Myateki Ganga
2-Dr Anil Dabral, 2007 Garhwali Gady Parampara
3-Bhagwati Prasad Nautiyal, articles on Durga Prasad Ghildiyal l in Chitthi Patri
4-Dr. Nand Kishor Dhoundiyal, Garhwal Ki Divangat Vibhutiyan
5-Notes of Prem lal Bhatt on the Stories of Durga Prasad Ghildiyal
6- Gaytri Bwe, 1985 Gadh Bharati Sanstha, Delhi,
Copyright@ Bhishma Kukreti, 12/8/2012 
Hundredth year of modern fiction; Hundredth year of modern Garhwali fiction; Hundredth year of modern Uttarakhandi language fiction; Hundredth year of modern Mid Himalayan regional language fiction; Hundredth year of modern Himalayan  regional language fiction; Hundredth year of modern North Indian regional language fiction; Hundredth year of modern Indian regional language fiction; Hundredth year of modern Asian regional language fiction to be continued...
Let us Celebrate Hundredth year of Modern Garhwali Fiction!