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Articles By Bhisma Kukreti - श्री भीष्म कुकरेती जी के लेख

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 26, 2009, 12:54:53 PM

Bhishma Kukreti

गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य



                         बच्चों नजर मा भारतै  खेती



                             चबोड्या - भीष्म कुकरेती

[हास्य व्यंग्य साहित्य; गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य ; उत्तराखंडी हास्य व्यंग्य साहित्य ; मध्य हिमालयी हास्य व्यंग्य साहित्य ;हिमालयी हास्य व्यंग्य साहित्य ; उत्तर भारतीय हास्य व्यंग्य साहित्य; भारतीय हास्य व्यंग्य साहित्य, एशियाई हास्य व्यंग्य साहित्य लेखमाला ] 


   " चलो चलो, सावधान ह्व़े जाओ. मी स्कूल इन्स्पेक्टर छौं . बच्चो आज  मि   भारत मा कृषि पर सवाल पुछलु . अब तक जु बि  मास्टरूं न तुम तै रटाई वां से सम्बंधित सवाल पुछुलु. ब्वालो बच्चो तैयार"

" जी हम तैयार छंवां "

" भौत बढिया. भारत एक कृषि प्रधान देस च. अर हमारा किसान भाई इख भौत सा अनाज, खाणो चीज पैदा करदन. बोल जनार्दन उर्फ़ जौनी तु बता. नक्वळ/नास्ता क  क्वी चीज बता जु हमारा किसाण पैदा करदन"

" जी केलोंग कु राईस फ्लेंक  "

' बिलकुल गलत "

"पण इसंपेक्टर  जी ! हम त सुबेर सुबेर केलोंग राईस फ्लैंक्स कु ब्रेकफास्ट  खांदा."

" वो ठीक च कि तुम सुबेर सुबेर नक्वळ/ब्रेकफास्ट मा  राईस फ्लैंक्स खांदा पण किसाण फ्लैंक्स पैदा नि करदन "

'मास्टर जी ! जु किसान    फ्लैंक्स पैदा नि करदन त फिर कखन फ्लेंक आंदो?"

" अबे ! किसान सट्टी पैदा करदन अर फिर याँ से अमेरिकी कंपनी फैक्टर्युं मा फ्लैंक्स बणान्दी "

"सौरी इन्स्पेक्टर  जी म्यार घौरम केल्लोंग की बडै होंदी . म्यार मौम- डैडी  सौब रोज बुल्दन बल हम किलौंग का आभारी छंवां जैन इथगा स्वास्थ्य वर्धक फ्लेंक बणाइ "

" चलो छोडो अब निर्मला उर्फ़ निम्मु तु बता कि नक्वळ मा कु  मान्शाहरी चीज च जु किसान पैदा करदन ."

" हम त सुबेर सुबेर नास्ता मा नॉन वेज मा सिर्फ ऑमलेट खांदा बस."

" बेटा निम्मु ! किसान ऑमलेट पैदा नि करदन बल्कण मा अंडा पैदा करवांदन"

"पण इन्स्पेक्टर  जी ! अंडा त घोंसला मा होन्दन फिर किसान ..?"

  "बच्चो ! किसान पोल्ट्री फ़ार्म मा मुर्गी पालन करद अर फिर मुर्गी  पोल्ट्री फ़ार्म मा अंडा दीन्दन . "

" इन्स्पेक्टर  जी ! दैट्स  वेरी इंट्रेस्टिंग "

" गबरू ! तु बता वु को अनाज च जु किसान पैदा करद अर हम वै तै बुकान्दा छंवां "

' यू त सरल सवाल च . बटर पौप कोर्न "

" ओह! तुम मी तै लगणु च कि कृषि विषय  पर ध्यान नि दीन्दा . बटर पौप कौर्न क्वी फसल नी च . पौप कौर्न मुंगरी से बणदु अर किसान मुंगरी पुंगड़ो मा पैदा करदन . "

" पण म्यार ब्व़े बाबु न कबि नि बताई कि मुंगरी बि क्वी फसल होंद. हम त इ समजदा छया कि पौप कौर्न पुंगड़ो मा पैदा होंद."

" ठीक च अब त समजी गेवां कि पौप कौर्न पुंगड़ो मा पैदा नि होंद"

"जी"

" अच्छा बंटू तुम बताओ कि क्वा फसल च जो मिट्ठू बणाण मा काम आन्द "

" कोको चौकलेट"

" भै, कोको चौकलेट भारतीय नी च. तु बता संटू"

" जी सुगर क्यूब्स"

" ओहो बच्चो ! सूगर क्यूब्स क्वी फसल नी च "

"त सूगर !'

' नहीं . सूगर गन्ना से बणदो अर भारतीय किसान गन्ना कि खेती करदन."

" पण सूगर त अग्रो प्रोडक्ट इ च ?"

" ओ ठीक च कि सूगर कृषी पदार्थ च पण सूगर पुंगड़ो मा पैदा नि होंद . पुंगड़ो मा गन्ना पैदा होंद."

" सरप्राइज ! "

" अच्छा बथाओ कि तुम नॉन वेज का बारा मा क्या जाणदवां जु किसान पालित  होंद "

"कंटकी चिकन, मैक  डौल .."

" अरे म्यार बुबौं ! यि त ब्रैंड छन."

" पण हम त इ जाणदा कि कंटकी चिकन ..."

" नही यि क्वी किसान नि पैदा करदन. किसान मुर्गी पालन करदन अर फिर यि विदेसी ब्रैंड अपण नाम से यूँ तै बिचदन."

" दैट्स व्ह्याई सो टेस्टी . सवादी ..."

" अछा कुछ अनाज क बारा बथाओ जो तुम खांदा छंवां "

"ब्रेड, बन्स, पाँव , बिस्कुट आदि "

' अरे सालो ! यि सौब फैक्टर्युं मा बणदन . असली फसल होंद ग्युं की "

" सर ! अब्युजिव भाषा असंवैधानिक  च ."

' ओ. सौरी ! अच्छा बताओ कि साग, दाळ क्या होंद जु किसान पैदा करद ."

" जी बडी, पापड, चाऊ माऊ,  बिरयानी, पुलाव, फिंगर चिप्स, फिंगर फ्राई पुलाव   आदि "

'म्यार बुबाओ ! यि किसान नि पैदा करदन बल्कण मा किसान उड़द ,ग्युं, सट्टी, अल्लू   पैदा करदन ."

'सौरी सर !"

' अच्छा इन बताओ कि दूध कख बिटेन आन्द ."

" हम त नि जाणदा  कि दूध क्या होंद अर कु पैदा करद."

" अरे रोज इख स्कुलम तुम तै सरकार को तरफ से एक गिलास दूध मिल्दो फिर कनै बुलणा छंवां कि दूध क्या होंद ?"

' पण हेड मास्टर जी अर ज्वा खाणक  बणान्दी वो रोज बुल्दन बल कनो काण्ड लगी कि  स्कूलक बिराळो सौब दुध चट कौरी ग्याई."

' एस सर !  जरा आप   ये बिरळ तै भगवै द्याओ .जु हम तै  दूध मीलल त हम दूध का बारा मा बतै द्योला"

' अछा बताओ कि बिराळु क्या होंद ?"

"जी बिरळो काम स्कुलम स्कुलो बच्चों दूध पीणो हुंद ."

' ओह हे भगवान्! . अछा मी हेड मास्टर जी तै  पूछिक बतान्दो कि ये बिरळो क क्या करे जाओ."


Copyright@ Bhishma Kukreti 12/8/2012

हास्य व्यंग्य साहित्य  ; गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य ; उत्तराखंडी हास्य व्यंग्य साहित्य ;  मध्य हिमालयी हास्य व्यंग्य साहित्य ;हिमालयी हास्य व्यंग्य साहित्य ; उत्तर भारतीय हास्य व्यंग्य साहित्य  ; भारतीय  हास्य व्यंग्य साहित्य  , एशियाई हास्य व्यंग्य साहित्य  लेखमाला   जारी ..

Bhishma Kukreti

Jyundar: The struggle by Poor widow
(Review of Garhwali Story collection 'Katha Kumud 'by Abodh Bandhu Bahuguna)
Let Us Celebrate Hundredth Year of Modern Garhwali Fiction!
                 Bhishma Kukreti
(Notes on story of struggle by poor widow; Garhwali story of struggle by poor widow; Uttarakhandi story of struggle by poor widow; Mid Himalayan story of struggle by poor widow; Himalayan story of struggle by poor widow; North Indian story of struggle by poor widow;  Indian story of struggle by poor widow;  Asian story of struggle by poor widow]
  There are forty stories in ''Katha Kumud' by Bahuguna.
  Jyundar is story of struggle of a poor widow. She has to struggle against all odds for her survival. There is no food for her but she is forced to pay gift or food to government servant. She does not have cereal but it is important that she feeds the government servant. She offers him curd.
Reference-
1-Abodh Bandhu Bahuguna, Gad Myateki Ganga
2-Dr Anil Dabral, 2007 Garhwali Gady Parampara
3-Bhagwati Prasad Nautiyal, articles on Durga Prasad Ghildiyal l in Chitthi Patri
4-Dr. Nand Kishor Dhoundiyal, Garhwal Ki Divangat Vibhutiyan
5-Notes of Prem lal Bhatt on the Stories of Durga Prasad Ghildiyal
6- Gaytri Bwe, 1985 Gadh Bharati Sanstha, Delhi,
Copyright@ Bhishma Kukreti, 13/8/2012
Let Us Celebrate Hundredth Year of Modern Garhwali Fiction!
Notes on story of struggle by poor widow; Garhwali story of struggle by poor widow; Uttarakhandi story of struggle by poor widow; Mid Himalayan story of struggle by poor widow; Himalayan story of struggle by poor widow; North Indian story of struggle by poor widow;  Indian story of struggle by poor widow;  Asian story of struggle by poor widow to be continued....

Bhishma Kukreti

गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य





                        भ्रष्टाचार  खतम करणौ  आन्दोलन



                         चबोड्या - भीष्म कुकरेती





   [भ्रष्टाचार पर व्यंग्य साहित्य;  भ्रष्टाचार पर गढ़वाली व्यंग्य साहित्य; भ्रष्टाचार पर उत्तराखंडी व्यंग्य साहित्य;  भ्रष्टाचार पर मध्य हिमालयी क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य साहित्य; भ्रष्टाचार पर हिमालयी क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य साहित्य;   भ्रष्टाचार पर उत्तर भारतीय क्षेत्रीय भाषाई  व्यंग्य साहित्य;  भ्रष्टाचार पर भारतीय क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य साहित्य;  भ्रष्टाचार पर एशियाई  क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य साहित्य लेखमाला ] 



     

" पी.ए.जी ! सब तैयारी ह्व़े ग्याई कि ना ?"

"हाँ नेता जी ! सबि तरां  मीडिया तै खबर कौरि आल.  सबि टी.वी चैनेलुं मा धूम मचीं च कि नेता जी याने आप  दस दिन उपरान्त भ्रष्टाचार उन्मूलन क्रान्ति लाणो बान रामलीला मैदान मा  उपवास करणा छंवां"

" पी.ई जी! द्याखो हाँ ! मेरी खबर अडवाणी जी, अन्ना जी अर  बाबा रामदेव से बड़ी होण चएंद हाँ ! "

"आप फिकर कतै  नि कारो मीन अपण ख़ास जर्नालिस्ट एजेंटू कुण बोलि आल कि सफल  आन्दोलन का बाद सौब तै राज्य मा पत्रकार कौलोनी क फ़्लैट  मिल  जाल "

" अच्छा त खबर पूरी जोर शोर से चलणि छन. "

" जी सब जगा घ्याळ हुयूँ च बल आपक भ्रष्टाचार उन्मूलन आन्दोलन अडवाणी, अन्ना हजारे अर बाबा रामदेव से बड़ो च , आपक विरोधी डर्याँ  छन कि कुज्याण क्या होंद धौं "

" अर वु भीड़ क इंतजाम ह्व़े ग्याई कि ना ?"

" बस आबि से वै इ काम पर लगणु छौं."

" चलो मी बि तुमर दगड हाथ बंटान्दु  "

'अजी फिर त लाख द्वी लाख लोग रोज रामलीला मैदान मा आला इ ."

" हलो! मी नेता जी बुलणु छौं. बधाई ह्वाओ ब्याळि आप चीनी घोटाला म जेल से भैर ऐ गेवां। "

"नेता जी यू सौब आपक मेहरबानी च. कि मि जेल से भैर  ऐ ग्यों.ब्वालो काम ब्वालो !"

" अरे भै भ्रष्टाचार उन्मूलन सम्मलेन कि तैयारी चलणि च "

हाँ. मीन टी.वी चैनलुं मा खबर देखी आल. ठीक च सौ  ट्रक लोग म्यार समजो.सुबेर स्याम इ लोग पंडाल मा इ राला . अर यूंक खाणो पीणो इंतजाम मि इ करुल."

' .पण मी तै पांच सौ बस या ट्रक  मा लोग चयाणा छन "

" पांच सौ ट्रक मा लोग आई जाला जी . बस  भीड़ का बनिस्पत आप  से जाओ . मि अपण सौब भाई बन्धो तै बोलिक भीड़ जुटाई  देलु"

"धन्यवाद. भीड़ खूब होण चएंद हाँ 

" हलो ! अरे बिल्डर जी. मि नेता जी बुलणु छौं. अच्छा सुणो जमीन घोटाला कि अपराधिक  सुणवै बन्द ह्व़े ग्याई कि ना ?"

" नेता जी. जै मुंड मा  आपक हाथ ह्वाओ वै पर क्यांकि अपराधिक  सुणवै ."

" अछा बिल्डर जी . वो यार भ्रष्टाचार उन्मूलन सम्मेलन  को  पंडाल पर भौत खर्च हूणु च . जरा.."

" वांक चिंता नि कारो. आपकी मदद से इ त मीन करोड़ो अरबों कमाई.त ठीक च पंडाल आदि क इंतजाम ह्व़े जालो."

" चलो धन्यवाद ."

" हलो ! मि नेता जी बुलणु छौं  . कॉल गर्लूं   धंदा कन चलणु च ."

" नेता जी आपकी मेहरबानी से काल गर्लूं धंदा बढिया चलणु च . टी.वी मा द्याख कि आप भ्रष्टाचार उन्मूलन आन्दोलन चलाण वाळ छंवां "

"हाँ अच्काल भ्रष्टाचार पर बुलणो फैसन चलण मिसे ग्याई त मीन स्वाच कुछ नाम कमाए जाओ."

" भौत बढिया कार आपन. हाँ ! अच्काल सौब भ्रष्टाचार ख़तम करणो पैथर पड्या छन "

" एक काम छौ."

"आप हुकुम त कारो सैकड़ो  कनीज आपक बिस्तरा मा पड़ालि द्यूं ."

" अरे वु काम नी च आज"

" त फिर ?"

" मैं तै भ्रष्टाचार उन्मूलन सम्मेलन  का वास्ता सौएक जनानी वोईलेंटर चयाणा छन."

" अजी सौ क्या पांच सौ जनानी वोईलेंटर  चयाणा छन तोभी भेजी द्योलू  ."

' नै नै सिरफ़ सौ स्वयं सेविका इ चयाणा छन

" ठीक च आपक भ्रष्टाचार उन्मूलन सम्मेलन  मा सौ जनानी वोईलेंटर पौंची जाला"

" अच्छा सूण ! यि सौब जनानी सोसल वर्कर लगण चयान्दन हाँ. इन नि ह्वाओ कि कॉल  गर्ल लगन .."

"नेता जी ! आप बि ना ! सौब सती का रूप मा राला अर इन लगल जन कि  इं दुनिया मा यूँ से जादा क्वी धार्मिक जनानी नी ह्वेली  .आज से इ मि सौ काल गर्लू तै सोसल वर्करो हभ्यास करांदु  "

" थैंक  यू डार्लिंग ! "

" सर !"

' हाँ ! पी.ए  जी ! "

"सर कुछ भजन आदि "

"हाँ !  इन कौर ओ जो कलाकारों तै बेईमानी से विदेश लिजाण मा फंसी छया ना ?"

" समजी ग्यों वूं कुण मि बोली दींदु कि भजन कीर्तन का वास्ता कलाकारु  इंतजाम कौरी देन "

" हलो ! मि नेता जी बुलणु छौं .क्या हाल छन ?"

"आपकी मेहरबानी से परसि इ  जेल से भैर औं। नेता जी हुकुम कारो."

" अरे भाई यू त म्यार धरम च. अच्छा सुणो ,  भ्रष्टाचार सम्मेलन का वास्ता कुछ  सौएक स्वयं सेवक चयाणा छन "

'नेता जी ठीक च म्यार सौ गुंडा स्वयं सेवक का भेस मा आपक सम्मेलन मा पौंची जाला .आजी मी ऊंकुण बुल्दु कि तमीज का हभ्यास करणा रावन.""

"पी.ए. जी! मै लगद सौब इंतजाम ह्व़े ग्याई. अब जरा भासण लिखणो कै  फ़िल्मी राइटर तै बुलाई द्याओ."

' जी! एस नेता जी! आपक भाषण इन ह्वाला क भ्रष्टाचार डरण बिसे जाल कि इख भारत मा रौं कि कखि हौर चलि जौं "



Copyright@ Bhishma Kukreti 12/8/2012 

भ्रष्टाचार पर व्यंग्य साहित्य; भ्रष्टाचार पर गढ़वाली व्यंग्य साहित्य; भ्रष्टाचार पर उत्तराखंडी व्यंग्य साहित्य; भ्रष्टाचार पर मध्य हिमालयी क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य साहित्य; भ्रष्टाचार पर हिमालयी क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य साहित्य; भ्रष्टाचार पर उत्तर भारतीय क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य साहित्य; भ्रष्टाचार पर भारतीय क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य साहित्य; भ्रष्टाचार पर एशियाई क्षेत्रीय भाषाई व्यंग्य साहित्य लेखमाला जारी ...

Bhishma Kukreti

 Review of Garhwali Satire Prose -10 
Review of Representative Garhwali Satire by Bhishma Kukreti -6
                        Bhishma Kukreti
(Notes on regional language satirical essays; Garhwali satirical essays; Uttarakhandi satirical essays; Mid Himalayan regional language satirical essays; Himalayan regional language satirical essays; North Indian regional language satirical essays; Indian regional language satirical essays; South Asian regional language satirical essays; Asian regional language satirical essays]
    From numbers point of view, Bhishma Kukreti is credited for publishing highest numbers of satirical essays, prose, write up in Garhwali language.
Garhwali Likhanderki halat (Garh Aina, 1 April 1989)—Bhishma Kukreti sadly and satirically shows the problems of Garhwali writers who spend their time and money in creating modern literature but our society , social workers does not push Garhwali literature as it deserved.
Hadtal ku Nafa Nuksan (Garh Aina, 16/6/1989)—in this satire, Kukreti states that that who participates in strike but never wants that other departmental government servant should participate in strike. Postman of postal department goes on strike but he becomes angry that doctors are going on strike as he has to take his in law for crucial medical checkup.
Doordarshan ma Vipakshi ( Garh Aina23/6/1989)—When Indira Gandhi and Rajiv  Gandhi were prime minister  of India, most of the people and media used to blame that Doordarshan means Indira or Rajiv Darshan.  Kukreti satirically shows that Doordarshan or air India provides space for opposition political parties negatively.
Voonki Pareshani (Garh Aina 19/5/1989)—Bhishma Kukreti sarcastically attacks on opposition parties that they don't take or do research for the benefits of people but start opposing government when the news papers find any negative points.
Hainki Kismaki daur (Garh Aina 20/5/1989) - The opposition parties start praising the chief minister and Chief Minister feels a fear that his chief minister ship days are over. Kukreti finds the answer of fear of the worthy chief minister and satirizes on the political pyramid in the country.
Ayurveidik Talu (Garh Aina 3/6/1989)- Kukreti lambasts the businessmen who are branding their products on pseudo techniques and doing loss to communities as by branding a lock as Ayurveidik Lock. 
Asli kriative Lekhak(Garh Aina 5/7/1989) – Kukreti shows that many writers copy foreign materials and become intellectual writers in this satirical write up.
Bhaiji Ek Katha Lekhi dyao(Garh Aina 6/7/1989) – Humorously, Kukreti depicts perception of people for a story writer .
  References-
1-Abodh Bandhu Bahuguna, Kaunli Kiran
2-Dr Anil Dabral, 2007, Garhwali Gady Parampara 
3- Hilans, Dhad, Garh Aina, Paraj publications.
Copyright @ Bhishma Kukreti,13/8/2012
Notes on regional language satirical essays; Garhwali satirical essays; Uttarakhandi satirical essays; Mid Himalayan regional language satirical essays; Himalayan regional language satirical essays; North Indian regional language satirical essays; Indian regional language satirical essays; South Asian regional language satirical essays; Asian regional language satirical essays

Bhishma Kukreti

Chor and Ijjat : Stories about Cultural Explanation 
(Critical Review of Garhwali Story Collection 'Katha Kumud by Abodh Bandhu Bahuguna)
Let Us Celebrate Hundredth Year of Modern Garhwali Fiction!
                      Bhishma Kukreti
    Both the stories are about new characteristics arising from time to time. If she is prostitute that does not mean she does not have flesh, she does not have blood and soul. A prostitute proofs that class is our created classification but humanity is our prime religion or class.
Reference-
1-Abodh Bandhu Bahuguna, Gad Myateki Ganga
2-Dr Anil Dabral, 2007 Garhwali Gady Parampara
3-Bhagwati Prasad Nautiyal, articles on Durga Prasad Ghildiyal l in Chitthi Patri
4-Dr. Nand Kishor Dhoundiyal, Garhwal Ki Divangat Vibhutiyan
5-Notes of Prem Lal Bhatt on the Stories of Durga Prasad Ghildiyal
6- Special Issues on Abodh Bandhu Bahuguna, Chitthi Patri and other periodicals
7- Abodh Bandhu Bahuguna, Garhwali Kahani, Garhwal ki Jeevit Vibhutiyan
Copyright@ Bhishma Kukreti, 14/8/2012
Let Us Celebrate Hundredth Year of Modern Garhwali Fiction!

Bhishma Kukreti

गढवाली हास्य व्यंग्य साहित्य



                                    उन्ना देसी (विदेशी) हाथ   



                                   चबोड्या - भीष्म कुकरेती   


[ विदेसी हाथ और  व्यंग्य; विदेसी हाथ और गढ़वाली व्यंग्य;विदेसी हाथ और उत्तराखंडी व्यंग्य; विदेसी हाथ और मध्य हिमालयीभाषाई  व्यंग्य;विदेसी हाथ और हिमालयी भाषाई व्यंग्य;विदेसी हाथ और उत्तर भारतीय भाषाई व्यंग्य;विदेसी हाथ और भारतीय भाषाई व्यंग्य;विदेसी हाथ और एशियाई भाषाई व्यंग्य]


    मि तै लगुद सरा देस  ये उन्ना देसी हाथ से बड़ो परेसान च . सि अपण महाराष्ट्र का मुख्य मंत्री पृथ्वी राज चौहाण का बयान त बाँचो. ग्यारा तारीख सन बारा क दिन आजाद मैदान मुंबई मा प्रदर्शनकार्युं न पाकिस्तानी झंडा फैराई  अर तोड़ फोड़ कार त महाराष्ट्र का मुख्य मंत्री चौहाण जीन फट से बयान दे द्याई बल दंगा फिसाद मा   क्वी उन्ना देसी (विदेशी) हाथ च .

  सन  सैंतालीस से पैल त हम तै पता छौ कि भारत कि गरीबी बदहाली मा उन्ना देसी हाथ च अर वु हाथ छौ ब्रिटिश हाथ.

पण गुरा लगिन  कि देस स्वतंत्र ह्वाई अर हम तै हमर बर्बादी मा  विदेशी हाथ इ दिख्यांद पण गौ बुरी चीज जु यु उन्ना देसी हाथ टैम पर दिख्याऊ धौं !  हमर देस का खैरख्वाह अर मंत्र्युं तै विदेशी हाथ का बारा मा तब पता चलद कि जब गुनाह ह्व़े जांद.

  चीन न हम पर आक्रमण कार त पता चौल कि हम तै चीन कि मंशा क बारा मा पैल पता इलै नि  चौल कि क्वी विदेशी हाथ नि चांदो छौ कि हम तै पता चौल कि चीन कि मंशा क्या च. विचारा कृष्ण मेनन अर नेहरु वै अज्ञात, अनाम, अविग्य , धुर्या  विदेशी हाथ तै खुज्यान्दा खुज्यान्दा सोराग चलि गेन पण अब तक वै विदेशी हाथ कु पता नि चौल जैन हम तै पेशगी  मा पता नि लगाण दे कि आखिर चीन हम पर आक्रमण की तैयारी कथगा सालो से करणु च . काण्ड लागल ये विदेशी हाथ पर जु अदिखळ इ रौंद.

  पाकिस्तान कि लड़ाई उपरांत अपण  लाल बहादुर शास्त्री रूस मा भग्यान  ह्वेन . कथगा इ लोग आज बि खोज करणा छन कि लाल बहदुर शास्त्री कि मिरतु मा कवी उन्ना देसी हथ छौ अर कुछ बुल्दन बल देसी हथ छौ.

  फिर जब जब कम्युनिस्ट पार्टी केन्द्रीय सरकार तै सहयोग दीन्दी छे त वु हाथ कमाक हूंद था पण जनि कम्युनिस्ट पार्टी केन्द्रीय सरकार तै फटकार लगाण मिस्याओ या केन्द्रीय सरकार का विरुद्ध ह्वाओ त कुज्याण फटाक से कवी उन्ना देसी हथ जनम ल़े लीन्दु छौ. उ त भलो ह्वाई कि रूस अर चीन मा बामपंथी क्रांति रुक ग्याई निथर कुज्याण रोज  इ हमारा नेता हम तै क्वी ना कवी उन्ना देसी हाथ कि याद दिलान्दा धौं !

  जय प्रकाश नारायण जब मैडम इंदिरा गांधी क विरोधी ह्वेन त इंदिरा गांधी तै इखम विदेशी हाथ इ दिख्याई उ बिगळि बात च वैबरी भारत अ जनता अपण भूरिण हाथ दिखदी छे अर वीं जनता क समज मा नि आंदो छौ कि अपण इ हाथ उन्ना देसी हाथ कनकैक ह्व़े ग्याई.

  फिर रोज जब बोफोर का तोपुं मा घूस कि बात चल त फिर बुले ग्याई कि घूस कि बात उड़ाण  मा क्वी उन्ना देसी हाथ च. जनता आज बि घंघतोळ मा च बल घूस मा उन्ना देसी हाथ छ्याओ  कि घूसक  बात करण वाळुक हाथ उन्ना देसी  छयाई .

  अब जब  आतंकवाद्यू न  अपण डेरा, डिसाण भारत मा लगाई त   तब त जब बि आतकवादी अपघात ह्वाओ त बात उन्ना देसी हाथ पर ख़तम ह्व़े जांदी . अपघात मा भारतीय मोरी जान्दन अर हमारा नेता उन्ना देसी हाथ कि बात कौरिक अपण  उत्तरदायित्व की इति श्री कौरी दीन्दन. उ नेता उन्ना देसी  हाथ कि बात कौरिक से जान्दन, जनता बिचारी बि उन्ना देसी हाथ से  डौरिक से जांदी अर अबि बि बिजां उन्ना देसी आतंकवादी हाथ भारत मा जगा जगा नाचणा छन. पण कुज्या ण हम तै इ हाथ नि दिख्यान्दन?.

नक्सलवाद अर माओ वाद का अपघातों मा  बि नेताओं तै उन्ना देसी हाथ दिख्यांद .

कुछ दीन पैल तामिल नाडु मा न्यूक्लियर प्लांट  का विरुद्ध मा लोग खडा दिकेहं त हमारि सरकार न बोल बल इखमा क्वी उन्ना देसी हाथ च . ह्वाल

ठीक च उन्ना देसी हाथ च पण जनता क बिंगण मा आज तक इ णि आई कि यू उन्न देसी हाथ ग्वारो च कि काळो या भूरिण च?

जनता इ बि पता नि लगै सकणि च कि यू उना देसी हाथ कथगा लम्बो च अर कथगा छ्वटु च . यू विदेसी हाथ म्वाटो च कि बरीक च ?

जनता पुछदी बि च कि यू उन्न देसी हाथ कथगा मजबूत च ? पण कुनगस  च कि जनता तै कुछ पता इ नि चलुद  कि यू उन्ना देसी हाथ कु गात क्वा च?

फिर जनता अफु तै पुछणि रौंद कि हम तै तबि किलै पता चलद कि उन्ना देसी हाथ भारत मा ऐ ग्याई जब क्वी अपघात ह्व़े जान्दो.

फिर जनता अपण आपस मा बचळयांदी बि च बल जब यू उन्ना देसी हाथ छें च त ये हाथ तै तोड़ी द्याओ, ये हाथ तै काटी द्याओ , ये हाथक बुगचा किलै नि बणान्दा हम?

फिर जनता बेहोश ह्व़े जांदी कि हमर इख जब  RAW , सी बी. आई , आई.बी बि छन त इ लोग हम तै पैल किलै नि बथान्दन कि भैरों उन्ना  देसी हाथ आण वाळ च  .

फिर जनता अपण  आपस मा इ बात करदि  बल अच्छा जब अपघात ह्व़े जांद त फिर वै उन्ना देसी हाथक हमारि सरकार क्या करदि ?

अखबार बि उन्न देसी हाथ कि छ्वीं वैबरी लगान्दी जब अपघात हूँ अर फिर अखबार बि उन्ना देसी हाथ छोड़िक उन्ना देसी इन्वेस्टमेंट/निवेश का पैथर पोड़ी जान्दन.

पण अब  समौ ऐ ग्याई कि हम अपघात से  पैलि इ ये उन्ना देसी हाथ तै छिंडार  देवां अर जड़ समेत काटी देवां.


Copyright@ Bhishma Kukreti 14/8/2012

विदेसी हाथ और व्यंग्य; विदेसी हाथ और गढ़वाली व्यंग्य;विदेसी हाथ और उत्तराखंडी व्यंग्य; विदेसी हाथ और मध्य हिमालयीभाषाई व्यंग्य;विदेसी हाथ और हिमालयी भाषाई व्यंग्य;विदेसी हाथ और उत्तर भारतीय भाषाई व्यंग्य;विदेसी हाथ और भारतीय भाषाई व्यंग्य;विदेसी हाथ और एशियाई भाषाई व्यंग्य लेखमाला जारी ...

Bhishma Kukreti

Critical History of Garhwali Satire Prose -11
Critical Review of Representative Satire Prose created by Bhishma Kukreti – 7
          Reviewer- Bhishma Kukreti

[Critical history of Satire literature; Critical history of Garhwali Satire literature; Critical history of Satire Uttarakhandi literature; Critical history of Mid Himalayan local language Satire literature; Critical history of Himalayan  local language Satire literature; Critical history of North Indian local language Satire literature; Critical history of Indian local language Satire literature; Critical history of SAARC Countries local language Satire literature; Critical history of Asian  local language Satire literature]
Salesman ar Deli Allouns (Garh Aina 25/5/1989)—Bhishma Kukreti had been in sales and marketing profession. Therefore, he heard many stories about selling community. In this column, Kukreti tells about corrupt methods of salesman applying in tour plan and not going as per travel plan, desires of different mentalities, travelling bills  et as when a salesman becomes a king of new territory and tells to his prime minister
सेल्समैन न महामंत्री क कंदुड़म ब्वाल," यार महाम्मंत्री जलूस मा मी पैदल चलि लीन्दु . हाँ ! खजाना बिटेन हाथी क खर्चा ल़े ल्योला. जु बि फैदा होलु आधा आधा बांटी ल्योला..."
Dyaradun ku Ghantghar (Garh Aina 16/5/1989) : there is a clock tower in Dehradun. Kukreti lived in Dehradun for many years. Bhishma Kukreti discusses the cultural and social importance of Clock tower of Dehradun humorously and satirically as
ड्याराडूण मा एक एक ठौ घंटाघर च . मतबल ड्याराडूण सचमुच मा एक शहर च. यू याँ से बि सिद्ध होंद कि सोलापुर, मेरठ , सहारन पुर, जलगाँव मा बि घंटाघर छन. गनीमत या च कि अबि तलक इथगा सालुं बिटेन यू खड्या खड़ी च . याँ से साफ़ पता चल्दु कि यू घंटाघर अन्ग्रेजू चिण्यु च
Number game (Garh Aina, 17/6/1989) – There was false, confusing or constitutionally right advertisements by various television brands as BPL, Crown and Weston television brands and every brand claiming for number one brand of India. Kukreti satirizes the mentality of television brands claiming their first position in television industry.
Pragati path Jatra in five parts (Garh Aina 30 June to 4 July 1989) - Providing examples of development of his village, Bhishma Kukreti shows that there is no practical development but the government files or sign bords boost about rural development as following lines speak about the false promises by political leaders of Garhwal-
मीन बौड़ (आश्वासन बट बृक्ष) क डाळ फर कर्क्रू नजार लगाई त भक्त दर्शन, हेमवती नंदन बहुगुणा , सुंदरियाल, भैरव दत्त धुलिया, जगमोहन सिंह नेगी , ..रौथाण, चन्द्र मोहन सिंग आदि कि नाम कि कुटरी टंग्याँ छया.
करै न समजाई, " सबसे बड़ी कुटरी भक्त दर्शन सिंह जीक च. बीसेक सेर कि कुटरी होली. बीस साल से वु गढ़वाल तै आश्वाशन दीणै रैन त उंकी कुटरी सबसे बडी कुटरी च

References-
1-Abodh Bandhu Bahuguna, Kaunli Kiran
2-Dr Anil Dabral, 2007, Garhwali Gady Parampara 
3- Hilans, Dhad, Garh Aina, Paraj publications.
Copyright @ Bhishma Kukreti, 14/8/2012
Critical history of Satire literature; Critical history of Garhwali Satire literature; Critical history of Satire Uttarakhandi literature; Critical history of Mid Himalayan local language Satire literature; Critical history of Himalayan  local language Satire literature; Critical history of North Indian local language Satire literature; Critical history of Indian local language Satire literature; Critical history of SAARC Countries local language Satire literature; Critical history of Asian  local language Satire literature to be continued...

Bhishma Kukreti

Parivartan: Story about Class discrimination in the society
(Review of Garhwali Story collection 'Katha Kumud' by Abodh Bandhu Bahuguna)
Let us Celebrate Hundredth Year of Modern Garhwali Fiction!

                             Bhishma Kukreti
[Notes on Stories of Class discrimination; Garhwali Stories of Class discrimination; Uttarakhandi Stories of Class discrimination; Mid Himalayan Stories of Class discrimination; Himalayan Stories of Class discrimination; North Indian  Stories of Class discrimination; Indian Stories of Class discrimination; South Asian Stories of Class discrimination; Asian Stories of Class discrimination]

Bahuguna took various subject and style for his Garhwali stories. In Parivartan story, he takes the subject of Savarn and Harijan. Jithi ma (Savarn Class) adopts Duanni a Harijan girl as her daughter. Such subject was very controversial before sixties. Bahuguna takes the reads in the past about the different attitude and discrimination towards different classes in Garhwali society.
Reference-
1-Abodh Bandhu Bahuguna, Gad Myateki Ganga
2-Dr Anil Dabral, 2007 Garhwali Gady Parampara
3-Bhagwati Prasad Nautiyal, articles on Durga Prasad Ghildiyal l in Chitthi Patri
4-Dr. Nand Kishor Dhoundiyal, Garhwal Ki Divangat Vibhutiyan
5-Notes of Prem Lal Bhatt on the Stories of Durga Prasad Ghildiyal
6- Gaytri Bwe, 1985 Gadh Bharati Sanstha, Delhi,
Copyright@ Bhishma Kukreti, 15/8/2012
Notes on Stories of Class discrimination; Garhwali Stories of Class discrimination; Uttarakhandi Stories of Class discrimination; Mid Himalayan Stories of Class discrimination; Himalayan Stories of Class discrimination; North Indian  Stories of Class discrimination; Indian Stories of Class discrimination; South Asian Stories of Class discrimination; Asian Stories of Class discrimination to be continued...
Let Us Celebrate Hundredth Year of Modern Garhwali Fiction!

Bhishma Kukreti

गढ़वाली हास्य व्यंग्य साहित्य


                                 आजादी क फैदा 


                       चबोड्या - भीष्म कुकरेती

( स्वतन्त्रता  दिवस पर हास्य- व्यंग्य; स्वतन्त्रता दिवस पर गढ़वाली हास्य- व्यंग्य;  स्वतन्त्रता दिवस पर उत्तराखंडी हास्य- व्यंग्य;स्वतन्त्रता दिवस पर मध्य हिमालयी  हास्य- व्यंग्य;स्वतन्त्रता दिवस पर हिमालयी  हास्य- व्यंग्य;स्वतन्त्रता दिवस पर उत्तर भारतीय हास्य- व्यंग्य;स्वतन्त्रता दिवस पर भारतीय हास्य- व्यंग्य;स्वतन्त्रता दिवस पर दक्षिण एशियाई  हास्य- व्यंग्य;स्वतन्त्रता दिवस पर एशियाई हास्य- व्यंग्य लेखमाला ]


          भारत वासिन्दा फ़ोकट मा रुणा रौंदन बल आजादी हूणो  परांत बि आजादी फैदा नी च   .

मी बुल्दु बल हम अजादी क खूब फैदा उठाणा छंवां       

अब द्याखो ना जु हमारा उद्योगपति  शराब  ब्रैंड कु  खुले आम विज्ञापन नि दे सकदन    त क्या व्हाई ? अरे पाणी, ताश, सोडा क नाम से त शराब कु विज्ञापन दे इ सकदन कि ना ? याँ से बडी आजादी क्या चयाणि च हम तैं कि हम सरकार अर सरकारों नियमों खुले आम धज्जी उडै सकदवां , भई !  ये त आजादी च कि हम प्रजातंत्र कु हम मखौल उडै  सकदवां सकद्वां .

. हम मथिनो मंज्यूळ  मा रौंदवां त हम तै तौळ खौड़- कत्यार, गमलों क पाणी तौळ चुलाणै  पूरी आजादि च ।

रस्ता मा जखम चाओ हम थूक सकदवां  इन इना उना थुकणो आजादि प्रजातन्त्र आर भारत जन देस मा  इ ह्वे सकदि !

स्कूल आर कौलेज क ठीक समणि हम बीडी सिगरेट अर शराब बेचीं सकदवां . अब बथाओ शिक्षा संस्थान क समणि जब आप खुले आम बीडी सिगरेट अर शराब बेचीं सकदवां त याँ से आजादी से जादा क्या फैदा चयांद भै ?

हम अपण  ड्यारो या दुकानों  कचरा बीच  सडक मा फेंकी सकदवां अर फिर म्युनिस्पाईलिटी तै गाळि बि दे सकदवां कि म्युनिस्पाईलिटी बेकार च कुछ नि करदी. बीच सडक मा अपण कचरा चुलाण से बडी आजादी क्या ह्व़े सकदी भै ?

हम नियम विरुद्ध अपण ड़्यार चार चार गैस सिलिंडर धौरी सकदवां . भै याँ से बडी आजादी क्या चयाणि च कि हम नियम विरुद्ध काम कौरी सकदवां .

हम नियमु खिल्ली , मसखरी उड़ैक बस स्टौप या रेलवे प्लेटफारम पर  बीडी सिगरेट पे सकदवां .य़ी  त आजादी क असली फैदा छन कि हम नियमों खुले आम मसखरी उड़ाई  सकदवां .

नियम छन कि आप प्लास्टिक थैली प्रयोग नि  कारो पन हम आजादी क घमंड मा पर्यावरण विरुद्ध अपणो इ नुकसान करदां . त ये माराज याँ से बडी आजादी क्या ह्व़े सकदी कि हम अपण नुकसान अफिक कौरी  सकदवां .

हम बड़ी इज्जत से बस,  रेल की टिकेट  लाइन तोड़ी सकदवां अर फिर सरकार पर भगार बि लगै सकदवां कि सरकार अनुशाशन रखण मा भौत  इ  ढीलि च . अफु गुनाह कारो अर इल्जाम सरकार पर लगाओ से बड़ी आजादी क्या ह्व़े सकद ?

हम अपण फैदा बान सरकारी जमीन पर कूड़ चीणि सकदवां . यांखुणि त आजादी बुल्दन.

हम बिजलि- पाणि क मीटर खराब कौरिक या हैंको ढंग  से बिजलि- पाणि चोरी कौरी सकदवां अर फिर खुले आम सरकार पर भगार बि लगै सकदवां कि लुंज च, सरकार बेकार च ज्वा बिजलि- पाणि बढ़ाणो बान असमर्थ च. या इ हमारि आजादी च.

हम तै आजादी च कि हम अपण नौन्याळो तै परीक्षा मा पास हूणो बान नकल कि पर्ची बणौवां अर दगड़ मा अखबारों मा शिकायत बि करदवां कि शिक्षा क स्तर दिन ब दिन कम होणु च . अपण गुनाहों गू हम कै हौरू पूठ फर लगै सकदवां . याँ से बडी आजादी क्या चयाणि च ?

हम अफु से कमजोर तै थपडे सकदवां . अफु से कमजोर तै पित्याणै  आजादी  मिलिं त  च हम तै.

सरकारी मुलाजिम नकली मेडिकल बिल से अपण नौनु तै विदेश मा पढाई लिखै सकुद त फिर हम किलै रून्दा बल  हम तै आजादी क कवी फैदा नी च ?

हम सरकारों कूल से रात या दिन पाणि तोड़ीक या चोरिक  अपण पुंगड़ कुले  सकदवां त फिर क्यांकि चिंता कि हम तै आजदी क फैदा नी होणु च ?

हम संबिधान को उल्लंघन खुले आम करी सकदवां अर फिर सरकार पर लांछन बि लगी सकदवां कि सरकार अनुशाशन का मामला मा किदलु जन मरियल  च . अजादी क  यो इ त मतबल  च कि हम संबिधान का मखौल  उड़ावां  फिर आजादी  से बोलि दीन्दा कि सरकार कड़क क़ानून  नि लाणि च .

हम चुनावूं  बगत पर नेताओं क शराब पींन्दां अर फिर ऐड़ाट भुभ्याट करदवां कि विधान सभा या लोकसभा मा भ्रष्ट राजनेता पौंची गेन . पैल गुनाह अफु कारो अर फिर राजनेताओं पर गू लपेड़ो .इनी आजादी  क त फैदा हम उठाण गीजी गेवां .

हमर बान  आजादी क मतलब च कि हमारो अधिकार सुरक्षित रावन अर जब हम तै हमारो कर्तब्य कि याद दिलाये जाव त हम समजदवां कि आजादी मा व्यवधान ऐ ग्याई


Copyright @ Bhishma Kukreti 15/8/2012 


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Bhishma Kukreti

Critical review of Garhwali Satire Literature -12
Critical review of Garhwali Satire Literature by Parashar Gaur -4

                         Bhishma Kukreti
Puruskar Kail Kaithe de—Parashar gaur humorously states that if there is writer it is his desire to get award.
However, if the award donor is corrupt there might be a problem.
Pitai- paitai is one of fine satires by Parashar Gaur. The write up criticizes changes in the behavior of students who beat the teachers.
Copyright @ Bhishma Kukreti 15/8/2012