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Articles By Bhisma Kukreti - श्री भीष्म कुकरेती जी के लेख

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 26, 2009, 12:54:53 PM

Bhishma Kukreti

हौंसि हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा




                                  पत्नी के  दिल में भी खयाल  आता है !







                                  चबोड्या: भीष्म कुकरेती




(s=-माने आधी अ )




      वैदिन  घरवळि  बुलण लगि बल," तुम से बढ़िया त वो फिलम वाळ राकेश इ ठीक छौ।"

"कु फिलम वाळ?" मीन पूछ

वींन बोलि," जु तुम से पैलि मि तैं दिखणो ऐ छौ। क्या बुलबुला छा, क्या स्टाइल छे वैबरि वैकि, वैक समणि  देवा नन्द बि  शरमांदो होलु।"

"त किलै नि कार वैक दगड़ पलाबन्द ? मि कैं मतबरौ नौनि लयांद , कुछ दहेज मा त मिलदो।"

   घरवळिs जबाब छौ," मि त तयार छौ पण बुबा जीक बुलण छौ बल जु दुसरो नकल करण वळु ह्वालो वों फिलम लैनम ऐक्स्ट्रा बि नि बौण सकुद।"

मीन वीं तैं चिरड़ाइ," हां वो ता जिंदगी फ़िल्मी स्ट्रगलर  रौंद अर त्यार बुबा जी तुम तै पळणो रौंदा।"

वींन बोलि," जब वूं तैं हिंदी फिल्मुंम ऐक्स्ट्रा क पाठ (रोल) खिलणो बि नि मिलदो त वो गढ़वळि भाषा प्रेमी ह्वै जान्दा"

मीन रुसैक बोलि," त्यार मतबल च जु हिन्दी साहित्य या हिन्दी  फिल्मोम फेल ह्वे जांदन वो इ गढ़वाली साहित्य या गढ़वाळि  फिल्मोंम आंदन।"

वा बुल्दि गे," जब हिंदी फिल्मोम कामयाब  नि होंदा  मिल्दो त वो राकेश गढ़वळि फिल्मो विकास अर संवर्धन का वास्ता बौलिवुड छोड़िक  हिलवुड याने  देहरादून ऐ  जांदा।"

मीन बोलि," नै या बात सै नी च बल हिलवुड याने गढ़वळि फिल्मो मा वी आंदन जु हिंदी फिलम उदयोगम  फेल ह्वे जांदन।"

घरवळि बुल्दि गे,"  उन त वो   बेकार से बेकार, फोर्थ ग्रेड से बि बेकार  गढ़वळि फिल्म बणान्दा पण  गढ़वळि लोग भावना क बल पर  फिल्म  देखि लींदा।"

मीन ब्वाल," हां   गढ़वऴयूं जोगम   फोर्थ ग्रेड से बि बेकार फिलम लिख्यां छन त आलतू -फालतू फिलम बौणलि"

वा बुल्दि गे," बुड्यांद दें राकेश  तै पश्चाताप होंद बल वैन अब तलक गढ़वळि संस्कृति दगड़ बदतमीजी ही  कार अर राकेश तिलु  तड़ीयलि पर फिलम बणान्दू ."

मीन बोलि," बस अब त लोक कथा अर लोक गीतों तै इ गढ़वळि संस्कृति माने जांदो बकै कलाओंक बाराम त लोग बौं हड़ पोड्याँ छन, सिंयाँ छन "

वींन मेरि बातुं पर ध्यान नि दे," अर फ़िर तीलू तडियालि अर अमरदेव गाथा पर राकेश फिलम बणान्दु ,"

मीन छिटगा  लगै," हजार चूहे खा के बिल्ली हज को चले।"

वा बुल्दी गे," वीं सांस्कृतिक फिलमम कुछ सीन तीलू तडियाली अर अमरदेव का  गंगा जी अर  नयार नदीम स्विमिंग का सीन रौंदा।"

मीन पूछि , "स्विमिंग सीन  स्विमिंग सूट  मा या स्यूं  कपड़ोमा ?"

वा बुल्दि गे "जब फिलम सेंसर से पास ह्वे जांदी अर रिलीज होणो ठीक एक दिन पैलि उत्तराखंड का मुख्यमंत्री फिलम तै बैन करी दींदा ,"

मीन बोलि," हैं गढवाली संस्कृति बचाण वळि फिलम तै कर मुक्त हूण चयाणि छे कि फिलम बैन हूण चयाणि छे ?"

वींको बुलण छौ," मुख्यमंत्री बयान  हूंदा बल इन सुणन मा आयि बल फिलम मा कुछ सेक्सी सीन छन  जो गढवाली संस्कृति का खिलाफ छन। ड्यारादूण म गढ़वाली संस्कृति बचावो संगठन फिल्म का विरोधमा घंटाघरम अंग्रेजी बैनरों लेकि धरना मा बैठि जांदा   "

मीन बोलि," त मुख्यमंत्री अर  गढ़वाली संस्कृति बचावो संगठन वाळुन पैलि फिलम देखि ह्वेली ?"

वा बुल्दि गे ,"ना फिलम कैन नि देखि ह्वेलि पण विरोध बड़ो होंदु। सब तै संस्कृति बचाणों चिंता जादा होंदी अर इन माँ सबि फिलम दिखणै बात नि करदा।"

मीन पूछ," इन कनो भै फिलम कैन नि देखि अर बगैर फिलम दिख्यां फिलम को विरोध?"

वा बुल्दि गे," भारत एक प्रजातांत्रिक देश च इख राजनैतिज्ञों , धर्मअर  संस्कृति  का ठेकेदारों डंडा न्यायपालिका अर कार्यपालिका से जादा असरदार च . फिर वा फिलम दिल्ली मा रिलीज होंदि "

मीन पूछ," दिल्ली माँ बि विरोध होलु ?"

वींको जबाब छौ," ना . उख त फिलम की बड़ी तारीफ़ होंदि। नयार अर गंगा जी मा अमरदेव अर तीलू तड़ीयाली माछ अर मच्छी रूप माँ तैरदन अर यो सीन गढ़वळि फिल्मो इतिहासम सबसे बढ़िया सीन होंदो।"

मीन पूछ,' फिर या फिलम देहरादून याने उत्तराखंडम रिलीज होंदि कि ना?"

वींन बोलि," किलै नि होंदि। मुख्यमंत्री तै पार्टी फंड अर संस्कृति बचाण वळ संगठनो तै फिलम रिलीज से पैलि चंदा दियॆ जांदो त फिलम को विरोध  बि नि होंद।"

मीन पूछ," त क्या जयललिता अर मुस्लिमो तथा कथित हितैषी मुस्लिम संगठनो न कमला हासन की फिलम विश्वरूपम फिलम को विरोध रुपया खाणों बाण करी होलु?"

वींन बोलि," कुज्याण ! लोग त इनि शक करणा छन .!"         



                                                   




Copyright@ Bhishma Kukreti 5/02/2013

Bhishma Kukreti

Nanda Jat Jagar: Awareness, wakeful Rituals about Goddess Nanda Devi -4
Notes on Birth of Nanda Devi and Yashoda finding Nanda Devi in Mines

          Internet Presentation: Bhishma Kukreti

[Notes on folk songs, folk rhymes; folk poems about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk songs, folk rhymes; folk poems about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda from Garhwal; folk songs, folk rhymes; folk poems from Chamoli Garhwal about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk songs, folk rhymes; folk poems from Rudraprayag Chamoli Garhwal about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk songs, folk rhymes; folk poems from about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk rhymes; folk poems from Uttarkashi , Garhwal about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk rhymes; folk poems from Dehradun, Garhwal about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk rhymes; folk poems from Pauri Garhwal about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk rhymes; folk poems from  Pithoragarh, Kumaun about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk rhymes; folk poems from Almora, Kumaun about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk rhymes; folk poems from Champavat, Kumaun about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk rhymes; folk poems from Nainital, Kumaun about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk rhymes; folk poems from Ranikhet , Kumaun about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda]
There are many version of birth of Nanda Devi one of the famous Goddess of Uttarakhand. The following version is popular in Chamoli Garhwal and Rudraprayag of Garhwal.


                 नंदा जात जागर -4
(s = आधी अ )
मूल संकलन - डा नन्द किशोर हटवाल , देहरादून

          यशोदा तै नंदा मिल्दि
                   (यशोदा को किस प्रकार नंदा मिलती है)

जब मैनावती ने अपनी कन्या को नन्दू के बैराट में मिटटी की खान में दबा दिया और अपने मायका आ गयी तो यशोदा मटखंडी जाती है और वहां उसे एक कन्या मिलती है। वः कन्या लहू में सनी थी। कन्या मंद मंद हंस रही थी। यशोदा उस कन्या को पोंछती है और गोद में रखती है। फिर यशौदा कन्या को अपने राजमहल ले आती है। अब कन्या के नामकरण की बारी आती है तो ?


मटखांड देखि पै ल्वैढाळि कनया
ल्वैढाळि कनया पै मूल मूल हैंसणि
कनया उठाई पै गोद मा धर्येल्यो
ब्वथायो बुथायि पै ये प्वोंजो मलाशी
पौंछि गे माता अपणा बैराठ
गोद मा धर्याली पै रिष्यों की लाडली
अब होंद कन्या को नामकरण?

                       Yashoda Finds Nanda Devi as girl

Yashoda comes to Matkhandi and finds a new born child.
The girl was smiling
The girl was into web of blood
Yashoda takes the child and cleans her blood
Yashoda took the child of Sage and brings the girl to her palace 
Now time comes for her naming ceremony

किस प्रकार कन्या का नामकरण होता है के लिए नंदा जात जागर ... 5 में पढ़िये
Copyright@ Bhishma Kukreti, for interpretation, 4/2/2013
Notes on folk songs, folk rhymes; folk poems about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk songs, folk rhymes; folk poems about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda from Garhwal; folk songs, folk rhymes; folk poems from Chamoli Garhwal about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk songs, folk rhymes; folk poems from Rudraprayag Chamoli Garhwal about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk songs, folk rhymes; folk poems from about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk rhymes; folk poems from Uttarkashi , Garhwal about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk rhymes; folk poems from Dehradun, Garhwal about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk rhymes; folk poems from Pauri Garhwal about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk rhymes; folk poems from  Pithoragarh, Kumaun about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk rhymes; folk poems from Almora, Kumaun about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk rhymes; folk poems from Champavat, Kumaun about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk rhymes; folk poems from Nainital, Kumaun about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda; folk rhymes; folk poems from Ranikhet , Kumaun about birth and finding of Nanda Devi by Yashoda to be continued....

Nanda Jat Jagar: Awareness, wakeful Rituals about Goddess Nanda Devi to be continued...5


Bhishma Kukreti

हौंसि हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा



                              पौड़ी कमिश्नरिम काम कराणो तरीका /नुक्शा           



                                                चबोड्या: भीष्म कुकरेती



(s=-माने आधी अ )

प्रिय भतिजो !

                    भलो च जु तु पौड़ी जाणो छे। अब चूँकि त्वेम समौ नी च त तू दिल्ली बिटेन सीधो पौड़ी जाणि छे अर उख गढ़वाल कमिश्नरीम जैक दाखिल खारिजो काम  पूरा करी देली। भगवान त्वे तै गढ़वाल कमिश्नरी कार्यलय का  ट्याड़ा -बांगा रस्तों पर चलणो हिकमत अर चकडैति, चतुर बुद्धि द्याओ या ही मेरि पैलि कामना च!

             अब जब तु पौड़ी पौंछलि अर पौड़ी कमिश्नरी पता  पूछलि त सूण जु बि मनिख  तेरि बात से हंसण बिस्यालो बींगी  ले, समजि ले कि वो हि पौड़ी रौण वाळ च अर जु तेरि बात सूणिक नी हौंसल त वैका मुख नि लगि वो पौड़ीक ह्वेइ नि सकुद।पौड़ी वाळ त्वे पर या कमिश्नरीs पता पुछण वाळ पर किलै हंसदन ? यांको उत्तर जब तू गढ़वाल कमिश्नरी क दफ्तर जैलि त त्वे तै पता चौल जाला कि पौड़ी का वासिन्दा किलै गढ़वाल कमिश्नरी आण वळ पर  खित खित कौरिक हंसदन।

          अब जब तु  कमिश्नरी दफ्तर जैलि त दरबान या चतुर्थ श्रेणी को एक मिलाजिम उख मीलल पण वै तै कुछ बि पुछ्लि त वो त्वै तैं भितर जाणों इशारा कारल किलैकि वैक मुख पर पानौ बुज्या किट्यूं  रालो। फिर भितर एक हैंको चतुर्थ श्रेणीक कर्मचारी से तेरि मुखाभेंट-मुखसौड़ होलु। तु वै तै कमिश्नरीम काम को बाबत पुछ्लि तो वो त्वै तै सलाह द्यालो कि भैर दफ्तरों तौळ एक एजेंट बैठ्यु च वै से काम कराइ द्यावो पण वेबरि त्वै पर अन्ना हजारे को भ्र्श्थीं भारत को दिवता आयुं रालो त तु वैकि सलाह नि मानलि अर वै से कणसों अधिकारी का बाराम पुछलि त वो एक कैबिनs तरफ इशारा कारल।

तु  कणसो अधिकारी कैबिनम जैलि अर वा कुठडि त्वै तै खालि मीललि।

यांमा तु चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से   पुछलि," भैजि! यि ऑफिसर कख होला?"

त वो जबाब द्यालो," साब देहरादून छन।"

तेरो सवाल होलो," किलै?"

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारीs जबाब द्यालो," वू क्या च साब इख पनिशमेंट का तौर पर भिजे गे छा। वूं पर छै सात करोड़ का घोटाला अभियोग लग्युं च त पनिशमेंट का तौर पर गढवाल कमिश्नरी भीजे गेन . अर वो पनिशमेंटो साब हफ्ता मांगन आठ दिन देहरादून पड्या सेक्रेट्रियेटम अपण ट्रांसफर देहरादून कराणों जुगतमा देहरादून ही डट्यां रौंदन।" 

फिर तू दुसर ठुलो साब याने सीनियर साब तै मिलणै इच्छा जाहिर करलि अर  कनिष्ठ कर्मचारी त्वै तै एक कैबिन को तरफ इशारा कारल अर उख जैक त्वै तै पता चौलल बल वा कैबिन बी अधिकारी विहीन च।

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारीs तेरी जिज्ञासा शांत कौरल,' यि साब प्रोबेसन पर इख गढ़वाल कमिश्नरीम भिजे गे छा। वूं तै पौड़ी आबहवा पसंद नि छे त वों भि देहरादून पड्यां छन अर अपण ट्रांसफर मैदानी इलाकाम करणों जुगत माँ रोज  सेक्रेट्रियेटम चक्कर लगाणा होला।"

अब तू वै प्रोबेसनरी अधिकारी से ठुल्लो  अधिकारी से मिलणों राड़ घाळलि त चपड़सि जी त्वै तै एक हैंकि कैबिन तर्फां इशारा कारल अर वा कैबिन बि त्वै तै खालि मीललि।

फिर  चतुर्थ श्रेणी कर्मचारीs तेरा ज्ञान चक्षु ख्वालल," बल वो साब प्रमोसन पर इख पठाये गे  छा अर वो बि इख कबि नि ऐन या कैबिन वूकी जगवाळम धिवड़ो (दीमक) जोग होइ गे"



  फिर तू प्रमोसनरी अधिकारी से सीनियर अधिकारी से मिलणो इच्छा जाहिर करिलो अर वूं अधिकारीs   कैबिन बि त्वै तै खालि मीललि।



यां पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारीs शंका समाधान कारल," यि अधिकारी परमानेंट अधिकारी छन अर परमानेंट अधिकारी उखि मिल्दो जख बड़ो साब होंदु।"



तू   पूछ्लि," त कमिश्नर साब से इ  मिलै द्यायो।"

त चपड़सि जी खुलासा कारल,' इख जू बि कमिश्नर आंदो वो चार्ज लीणों आँद अर फिर वो कबि बि पौड़ी तरफां नि दिखदो।"

  फिर तू पूछलि," त लिपिक वर्ग से ही काम कराए जावो।"

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जबाब द्यालो," अरे भै ! जब ग्वैर ही गोर मांगन गायब रालो त बखर बि त जगा मा नि मिल्दन कि ना ?"

अब तू समजी जैलि बल किलै पौड़ी वळ वै पर हंसदन जो पौड़ीम गढ़वाल कमिश्नरी पता पुछ्दन।

अब त्वै पर अन्ना हजारे भुत पिचास मिटी जालो अर  फिर तू अंतत: दलाल को पास जैलि अर वो त्वै मांगन  फीस ल्यालो अर वो देहरादून को दुसर एजेंटो पता दयालो।

फिर तू देहरादून ऐलि अर जो काम पौड़ीम गढ़वाल कमिश्नरीम करण छौ  वो देहरादूनम दलाल का मारफत कर्वेलु।       



शुभेच्छु

त्यार काका

Copyright@ Bhishma Kukreti 6/02/2013                       



(संवैधानिक चेतावनी -यह लेख कल्पना के आधार पर लिखा गया है। यदि यह बात सही पायी गयी तो लेखक उसका जुमेवार नही है कि  क्यों कर  लेखक ने कल्पना में सही बात लिख दिया?)   


Bhishma Kukreti

Nanda Jat Jagar: Awareness, wakeful Rituals about Goddess Nanda Devi -5
                   Notes on Naming Ceremony of goddess Nanda Devi
          Internet Presentation: Bhishma Kukreti
[Notes on Naming ceremony of goddess Nanda Devi in folk songs, folk verses, folk poetries; Naming ceremony of goddess Nanda Devi in folk songs, folk verses, folk poetries of Garhwal; Naming ceremony of goddess Nanda Devi in folk songs, folk verses, folk poetries of Uttarakhand ; Naming ceremony of goddess Nanda Devi in folk songs, folk verses, folk poetries of Mid Himalaya; Naming ceremony of goddess Nanda Devi in folk songs, folk verses, folk poetries of North India; Naming ceremony of goddess Nanda Devi in Indian  folk songs, folk verses, folk poetries; Naming ceremony of goddess Nanda Devi in Asian folk songs, folk verses, folk poetries; Naming ceremony of goddess Nanda Devi in Oriental folk songs, folk verses, folk poetries]
                   नंदा जात जागर -फड़कि (भाग) 5
(s = आधी अ )
मूल संकलन - डा नन्द किशोर हटवाल , देहरादून
                नंदा नामकरण हेतु नारद ऋषि को निमंत्रण

न्यूती कै ब्वोलाया , ह्वोलि बाली ह्वो
द्योब ऋषि नारद, ह्वोलु बाली ह्वो
ब्रह्मान गाड़ी ह्वोलु, बाली ह्वो
ग्रहमान गाडी गाडयेली ,ह्वोलु बाली ह्वो
धुऴयेटि पातड़ी, ह्वोलु बाली ह्वो
रूपेगी लिखणी,ह्वोलु बाली ह्वो


xxx
नन्द और यशोदा देव कन्या के नामकरण हेतु ऋषि नारद को निमंत्रण भेजते हैं
ब्रह्मा ने कन्या की जीवनी लिखी
नारद ऋषि ने जन्म पत्री बनाने का कार्य प्रारम्भ किया
अब नारद जी ग्रहचाल लिखने को तैयार हुए

Nand and Yashodaa invited the sage Narad.Brahma created life sketch of the girl. Narad started to write the Grahman of the child before naming ceremony but ....

Copyright@ Bhishma Kukreti, for interpretation, 6/2/2013
आखिर नंदा का नामकरण में क्या अडचने आई के लिए पढिये नंदा जात जागर -फड़कि ( भाग 6 )
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Bhishma Kukreti

 Pani: Humorously discussion about Humanity

Critical review of Garhwali satirical prose- 134
Critical Garhwali review of Satire by Great Garhwali Satirist Harish Juyal -7
'Pani' (Satire collection 'Khubsat', 2012) Garhwali Satire Prose by Great Garhwali satirist Harish Juyal (A review)

                            Review by Bhishma Kukreti
[Notes on Humorous discussion about Humanity; Humorous discussion about Humanity in Garhwali language; Humorous discussion about Humanity in Uttarakhandi language; Humorous discussion about Humanity in Mid Himalayan regional language; Humorous discussion about Humanity in Himalayan regional language; Humorous discussion about Humanity in North Indian regional language; Humorous discussion about Humanity in Indian regional language; Humorous discussion about Humanity in Asian regional language; Humorous discussion about Humanity in Oriental regional language]
Basically, Harish Juyal is poet of human causes. The present humorous article 'Pani' talks about various characters about water and its different uses too. At the end Harish specify that Human needs to be come water to save humanity. Harish also discusses the need of saving water for clean environment too.

Copyright@ Bhishma Kukreti 6/02/2013
   Critical review of Garhwali satirical prose to be ... 135
Critical Review of Satirical articles by Great Garhwali Harish Juyal to be continued...8
Notes on Humorous discussion about Humanity; Humorous discussion about Humanity in Garhwali language; Humorous discussion about Humanity in Uttarakhandi language; Humorous discussion about Humanity in Mid Himalayan regional language; Humorous discussion about Humanity in Himalayan regional language; Humorous discussion about Humanity in North Indian regional language; Humorous discussion about Humanity in Indian regional language; Humorous discussion about Humanity in Asian regional language; Humorous discussion about Humanity in Oriental regional language to be continued...

Bhishma Kukreti

गढ़वाली हास्य व्यंग्य
हौंसि हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा





                            कन बिजोग पोड़  ! जु  तौंकि  निंद  फिर खुलि गे     





                                चबोड्या: भीष्म कुकरेती


(s=-माने आधी अ )



                           कुज्याण कथगा सालों परांत सि दिखेन धौं! मिन क्या  हिन्दुस्तान का सबि हिन्दुउंन सोचि आल छौ अब सि सद्यानो समाधि जोग ह्वे गेन। हम सब्युं तैं अंथाज बि नि छौ सि अबि बि राम भक्त छन। हमन सोचि आल थौ अब सी शिव भक्त ह्वेक मथुरा-बृंन्दावनम पेड़ा चटकाणा होला या बनारसम शिव मंदिरों समणि भांग को भोग लगाणा होला!


पण कुनगस सि ब्याळि   सि  फिर दिखे गेन अर ये म्यार भुभरड़ ! सि एक चौबटम घ्याळ करणा छ्याइ या किराणा छया बल 'राम मन्दिर वहीं बनेगा'- 'राम मन्दिर वहीं बनेगा'.


सबि हिंदुउंन त समझि छौ बल राम मंदिर उखमि बौणि गे होलु त यि राम भक्त थक बिसौणो बाण फसोरिक से गे होला! अब जब यि लोग 'राम मन्दिर वहीं बनेगा' को हल्ला करणा छन तो हिंदुओं मा जाग ह्वे बल अबि तलक 'राम मन्दिर वहां नही बना'.

           

मीन एक राम भक्त तै पूछ," ये भै ! अबि तलक उखम राम मन्दिर नि बौण त तुम फिर कख छया?"

वूंन जबाब दे,"कखि बि ना?"

मीन पूछ," औ त तुम  ऊं तै अड़ाणौ  जयां रै ह्वेला जो अपण ब्वे-बुबों बुल्युं नि माणदन अर वूं तै राम को बतायों बाट पर चलण सिखाणा रै होला ?"

रामभक्तों उत्तर छौ," नै नै यो काम हमर नी च।"


मीन पूछ," तो फिर तुम वूं आधुनिक रावणों याने बलात्कार्युं तै जेल भिजवाणा रै ह्वेल्या जो जनान्युं तै कमोडिटी समजदन?"

राम भक्तो जबाब छौ।" यो बि हमर काम नी च "


  मीन पूछ," त फिर तुम रामक  आदर्श याने एक पत्नीवाद को पाठ लोगुं तै पढ़ाणा रै ह्वेल्या अर यांमा तुम 'राम मन्दिर वहीं बनेगा ' की बात बिसरि गे ह्वेल्या।"

राम भक्तन रुसेक बोलि," तुम लगता है कॉंग्रेसी हो। रामक  आदर्श की बात करणों हमर काम नी च।"


  मीन पूछ,"तो फिर आप हनुमानौ आदर्श याने भक्ति याने आध्यात्म की फुवार लोगुंम बंटणा रै ह्वेल्या?"

एक बजरंग दलीन उत्तर दे," हम अचकाल हिंदुओंम हथियारों से  रक्षा बात सरांदा (फैलांदा). भक्तिs बात करण हमर काम नी च"


मीन पूछ," ह्यां त तुम अब तलक  छया कख?"

एकान जबाब दे," हम वेलेंटाइन डे मनाण बंद कराणा छया।"

हैंकाक जबाब छौ," हम खामांखां शाहरुख खान या अमीर खान की फिल्म बंद कराणम व्यस्त छया।"

तिसरो जबाब छौ," हम एम् . ऐफ़ हुसैन तै देशनिकाला करण मा व्यस्त छया।"

इख पर मीन पूछ," पण फिर अचाणक तुम अच्काल राम मन्दिर वहीं बनेगा ' का नारा लगाणा छंवां?"

  कैन बि जबाब नि दे।

मीन ब्वाल," औ ! त चुनाव नजीक छन त तुम तै राम मन्दिर याद ऐ गे हैं ?"

पण ऊंन मेरी बातो उत्तर नि दे।

क्या काठे हांडी पर बार बार चुलुम खाणों   बणि सकदो? 






Copyright@ Bhishma Kukreti 7/02/2013

Bhishma Kukreti

गढ़वाली हास्य व्यंग्य
हौंसि हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा



                                                   बचपनs  सवाद



                                                  चबोड्या: भीष्म कुकरेती


(s=-माने आधी अ )



     बचपनौ कुछ स्वाद इन होंदन जु ज्युन्दिम त नि बिसर्याँदन अर   तबि  बिसर्यांदन जब मनिख वै जमानो चलि जांदु।

  अब सि द्याखो ना सुबेर सुबेर  सुबर बिजिक बगैर मुख धुयां अर बगैर दांत मंजायां बासी चुनै या ग्युंs रुटि गरम गरम चा मा खये जान्दि छे त अहा क्या सवाद आंदो छौ। अमृत त मीन नि चाखो पण मै लगद अमृतौ स्वाद चा मा बासि रुटि जन ही होंदु ह्वालु !

इख मुम्बैम पेल त घरवळि  बासि रुटि रौण नि दींदि (टुप उथगि  पकवांदि जथगा जर्वत च ), फिर माना एकाद रुटि बासि रै बि जावों त वा खाणि नि दॆन्दि बल लोक क्या ब्वालल बल भिषम जन मैनेजर बासि रुटि। अर हाथ पात जोड़ी वा बासि रुटि खाणों इजाजत दे बि द्यावो त चा छ्वटु कप क्या कपि पर नापि तोलि चा देलि अर वां से पैलि चौकसि कौरि लेलि बल मीन साबणन मुख धुयाल कि ना दांत मंजै ऐन कि ना। पण इ राम दां बासि रुटि अर चा वु स्वाद नि आंदु जु सुबेर सुबेर सुबर बिजिक बगैर मुख धुयां अर बगैर दांत मंजायांम आंदु छौ।


  फिर एक हैंको स्वाद च जु बिसरण चाण से बि नि बिसर्यांद अर वा च झाड़ा जाणो बाद कल्यो (नक्वळ/नास्ता). कल्योमा मीन बचपनम रोज चूनौ रूटळ इ खै होला अर मेरि घरवळिक हिसाबन चुनौ रुटि माने गरीबुं ब्रेकफास्ट त हमर इख चून आंदो इ नि छौ किलैकि मेरि घरवळिs हिसाबं मि मातबर छौं। अब जब डाइटिष्टोंन अमीरों खुण चूनौ  खाणक प्रिस्क्राइब करण शुरु कौरि बि आल त मेरि वाइफ़ चूनो रूटळ ना चूनो  फुलका दगड़ करेला  रस या गाजरौ रस दींदि। अब तुमि बथावो म्यार बचपनौ सवाद वापस मीलि सकुद क्या? अरे कख बचपनम  म्वाटो म्वाटो चूनौ रूटळ अर कख  चूनो फुलका! अर फ़िर चूनौ रूटळ घ्यू या सागम खये जांदो छौ। क्या मेरि उमरौ मनिख चूनो फुलका गाजरो रस या करेला रसौ दगड़ खै सकुद?

                               

फिर नक्वळ याने ब्रेकफास्टौ बाद मि द्वी घत पाणि लांदो छौ त इथगामा सौब जो बि खायुं ह्वावो वो पचि जांदो छौ अर तैबर तलक ग्विरमिलाक (गोर चराणों लिजाणौ बगत) बि ह्वै जांदो छौ अर तैबर तलक ब्वै (अब वा मेरि ब्वै नि रै गे माँ ह्वे गे) पऴयो या फाणु-बाड़ी या झन्ग्वर-कपिलु तयार करि दींदि छे। जू बि पक्युं होंद छौ वो सवादि होंद छौ। अब जब मि मुम्बै औं अर ब्वै सौरि मेरि माँ बि मुम्बै आयि त ब्वै अर घरवळिs हिसाब से हम सब अब सभ्य याने सिविलाइज्द ह्वे गेवां त फाणु, बाड़ी,पऴयो, झंग्वर,कपिलु आदि सभ्यता क भेंट चढ़ी गे।

परार मि परिवारौ दगड़ नागराजा पुजैम गौं जायुं छौ अर एक बोडिक इख जनि फाणु-बाडि  खाणों बैठि छौ कि ब्वै अर घरवळि द्वी ऐ गेनि अर दुयुंन मि तै असभ्य हूण से बचै दे। अब कुज्याण कबि फाणु, बाड़ी,पऴयो, झंग्वर,कपिलु मिलदो बि च कि ना धौं?

  अब जब फाणु, बाड़ी,पऴयो, झंग्वर,कपिलु खाणों  नि मिलदो त लिंगड़, खुंतड़, मूळाs थिञ्च्वणि, बसिंगू, कंडाळि   की बात इ क्या करण? कुछ सवाद निपांदो ( जो सुलभ ना हो या न मिलने के कारण) भेंट चढ़ अर कुछ सभ्यता भेंट चढ़।


कबि कबि मि गाणा गांदु बल "कोई लौटा  दे रे मेरे बचपन के दिन, कोइ वापस ला दे रे  मेरा बचपन का स्वाद" त मेरि गढ़वळि  घरवळि तून (ताना ) दींदि ," तुम गढ़वाली कभी नही सुधरोगे। मुंबई सरीखी जगह में रहकर भी आदि वासी रहना चाहते हो।"








Copyright@ Bhishma Kukreti 8/02/2013

Bhishma Kukreti

Nanda Jat Jagar: Awareness, wakeful Rituals about Goddess Nanda Devi -6
                   Notes on Naming Ceremony of goddess Nanda Devi part - 2
          Internet Presentation: Bhishma Kukreti
                नंदा जात जागर -फड़कि (भाग) 6
(s = आधी अ )
मूल संकलन - डा नन्द किशोर हटवाल , देहरादून
There are many folk stories and folk songs popular in Garhwal and Kumaun. The following folk song is popular in Upper Garhwal (Chamoli and Rudraprayag).
                 नंदा कु नामकरण-2
जब नारद नामकरण हेटी आये तो कहने लगे सारे खिड़की और दरवाजे बंद कर दो तभी ही कन्या का नामकरण होगा।

किन्तु कन्या धुआँ जाने के छेड़ से बाहर चली गयी। और चलते चलते अपना नाम अपने आप हे रख लेती है। इसके बाद रिषासौ पर दोष लग जाता है। पुछेर/भविष्यवक्ता से गणत निकालने पर मालुम हुआ कि नंदा का दोष लगा है। Hemant  और मैनावती समस्त रिषासू के लोग उत्साह पुर्बक नंदा को लाने चल पड़े। मैणा ने ल्हुयुक्त कन्या को पोंछा और उसे थपथपाया। मैणा पश्चाताप से झल रही थी कि उसने कन्या को मिटटी की खान में कैसे छोड़ा?



घणा रिषासाउ पै सुणा द्यब्ताओ
घणा रिषासाउ पै स्योलागो द्वाष
हमारा मूलक बै क्यगे ह्वालो द्वाष
तुमारो मूलक पै देबी ह्वोलो द्वाष
निर्धारि निर्पंखी बै छाया की चौरड़ी
ल्वैढाळी कनया पै तखी बैठि ह्वोलि
बड़ा बूडों रिस्यों पै छाया की चौरड़ी
हेमंत -मैना पै छाया की चौरड़ी
मैणान उठाइ पै गोद धरयाली
ये पोंछि पलासि पै रवथाई ब्वोथाइ
शरमक मारा पै तैं मैणा पातले
माटा खंडोलि पै मिन छ्वोडि ह्वोलि
Nand and Yashoda invited sage Narad for naming ceremony of girl they found in mine. Narad advised the couple to close down all the windows and doors at the time of naming ceremony. However, the girl escaped through smoke-chimney. The newly born girl named herself as Nanda.  The people of Rishisaura were ill and the future teller told that it is because of rage of Nanda. All people of Rishisaura including Hemant and Maina ran to take Nanda. They found Nanda on the path. Maina the mother of Nanda cleaned the she child and felt embarrassment for her leaving her newly  born girl child.

Copyright@ Bhishma Kukreti, for interpretation, 8/2/2013
नंदा का बचपन किस तरह बीता के लिए पढिये नंदा जात जागर -फड़कि ( भाग 7 )
Read in part -7 about childhood of Nanda


Bhishma Kukreti

गढ़वाली हास्य व्यंग्य

हौंस इ हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा



                           हे गोरिल, गोल्यु , ग्विल  ज्यू! अब तुमारो इ सारो (सहारा )  च



                             चबोड़्या-चखन्यौर्या: भीष्म कुकरेती


(s =आधी अ )



  हे ग्विल जी  !  उन त हमर देसौ संविधान अर न्याय-निसाब दीणों नियमुंम क्वी इन खामी नी च बल तुम तै तंग करे जावो अर तुम तै धरम संकटमा डाळे  जावो पण माराज ! कुछ लोगुं दुःख नि  दिख्याणु च त मेरि गुजारिश च बल तुम जरा थ्वडा देरो खुणि  उत्तराखंड छोडि  जरा भारत दर्शन बी करि  ल्याओ।


             अब द्याखो ना अपणि जया ललिता बैणि बिचारि कथगा परेशान च। बिचारि  सणि वीं पर लग्युं भ्रष्टाचार अभियोग छुड़ाणो बान बार बार बंगलौर कोर्टम आण पड़दो। अब तुमि निसाब कारदि बल एक विपक्षी दलै नेत्याणि बिरोध कारलि कि बंगलौर आलि? या जब वा मुख्यमंत्री रौन्दि त विचारि तमिल नाडूम लॉ एंड ऑर्डरs  बान विश्वरूपम जनि फिल्मों तै बैन लगालि या अफु पर लग्याँ भ्रष्टाचारो दाग मिटाणो बान इना उना दौड़लि? चलो आम लोग त न्यायम देरी झेल इ ल्याला पण जया  ललिता सरीखी नेत्याणि कथगा परेशानीम रौन्दि। मेरि प्रार्थना च बल हे न्यायो दिवता  यीं बिचारिक पेंडिंग लीगल केसुं आदरणीय न्यायाधीसों से बोलिक झटपट निर्णय दिलै द्यायो।  बिचारि तैं अनावश्यक तून सुणण पड़दन कि वा एक भ्रष्ट नेत्याणि च अर इन माँ बिचारि तैं लज्जाहीन राजनीतिग्य बणण पोड़द अब हे ! निसाबौ दिबता! हम लोगुं तै कथगा बुरु लगद, जिकुडि जळदि   जब जया ललिता सरिखा नेतौं तै न्यायम देरिs  वजै बेशरम बणन पोड़द। 


अब उत्तराखंड बणणो बाद  तुम त गढ़वाल अर कुमाऊंम भौति व्यस्त ह्वे गेवां। अब बात बि सै च  राज्य बणनो बाद ग्राम सभा से लेकि देहरादून तलक भ्रष्टाचार,अनाचार,  चोरी चपाटी, लुचाखोरि, लूट खसोट बढ़ण से तुमम काम बढ़ी गे अर तुम अति व्यस्त ह्वे गेवां। पण फिर बि तुम जरा एकाध दिनो खुण बिहार ह्वेक ऐइ जावो। जो बिचारो भारत कु प्रधान मंत्री लैक छौ वै मनिख पर फोकटम पिछला सोळा बरसों  से चारा घोटाला केस चलणो ह्वावो त इन मा लालू प्रसाद यादव की छवि खराब नि होन्दि? बिचारा लालू जीक इ हाल छन कि जब नेताओं पर भ्रष्टाचार विरोधी बिल लोकसभा या राज्य सभा मा लये जांदो त ऊं तै अनावश्यक रूपम वै बिलों विरोध करण पोड़द अर फोकटमा लालू जीक  पार्टीs सांसद तै बिल की नकल संसदम खुलेआम फाड़ण पोड़द। अब इखमा लालू प्रसाद जीक क्या गल्थी च? जब सोळा सालम लालू जी तै न्याय नि मीलल त लालू जीन चिरड्याण च अर इनमा वो कै बि बिलों विरोध कारल कि ना/? जै बिचारो तै सोळा बरसों बिटेन न्याय नि मीलल त वै पर क्या बीतलि यो त लालू जी से जादा को जाणल? इन मा लालू जीको न्यायपालिका पर भरवस खतम होलु कि ना?अब त हम तै बि लालू जी से सहानुभूति हूण बिसे गे कि इथगा बड़ो नेता क दगड़ बि समौ से न्याय नि होणु च।  त जरा एकाद दिनों बिहार जैक आदरणीय न्यायाधीसोंम बोलिक लालू प्रसाद यादव जीक केस को फैसला करै द्यावो।


  अब इनि भावी प्रधानमंत्री लैक मुलायम सिंह यादव की यातना, उठा-पौड़ी  बि नि सयाणी च। जब बि बिचारा मुलायम सिंह यादव जी जनता का हित मा तिसरो फ्रंट की बात करदन कि कोर्ट को समन ऐ जांद अर बिचारा अपण सि मुक लेकि तिसरो फ्रंट की बात बिसरि जांदन। में से मुलायम सिंह जीको तरास, टौरचर  नि दिखे जांदो। जरा आयकर विभाग  का अधिकार्युं, सी . बी . आई . का लोगुं  अर आदरणीय न्यायाधीसों से बोलिक मुलायम जीक  केसों निपटारा करी द्यायो। जन कि रॉबर्ट बाड्रा जी पर अभियोग लग त कन हरियाणा का अधिकार्युंन एक घंटाम बाड्रा जीक केसों निपटारा कार अर ऊं तै क्लीन चिट दे द्यायि। भगवन!  इनि फटाफट न्याय निपटारा मुलायम सिंह जी क बि करि द्यायो ना!


           न्याय निसाब की बात च। अब तुमि बथावदी बिचारा बीर  भद्र सिंह हिमाचल का मुख्यमंत्री  बौणि त गेन पण यूं पर लग्याँ भ्रष्टाचार का दाग त ऊनि छन कि ना? विचारि सोनिया जी अर राहुल गांधी तै कथगा बुरु लगदो होलु जब क्वी बि बोल्दो कि कौंग्रेस बात त भ्रष्टाचार मिटाणो करदी पण भर्स्ट नेता तै मुख्यमंत्री बणै दीन्दी। त हे ग्विल जी ! जरा बीर भद्र सिंह पर लग्याँ अरोपुं निपटारा चौड़ करै द्यायो जां से बिचारि सोनिया जी अर बिचारा राहुल जी तै शर्मशार नि होण पोडु! 



   हे न्याय-निसाब को दिब्ता ! भारतम हजारो नेता देरि से न्याय मिलणों कारण परेशान छन, रूणा छन, दुखि छन,  जरा आदरणीय न्यायाधीसों से बोलिक यूं नेताओं पर लग्यां केसों निपटारा त करावो। अब यि नेता लोग न्यायम देरी से  परेशान राला, रूणा राला, दुखि राला   त यूंन जन हित का काम कब करण? 

         


   उन त हरेक राजनीतिग्य चाणो च बल भारतम जुडिसियल रिफ़ॉर्म (न्यायिक सुधार ) आवो पण हरेक राजनीतिग्य जन हितs कामोमा इथगा व्यस्त छन कि न्यायपालिकाम सुधारों बाराम  वूं तै कुछ करणों क्या सुचणों बगत इ नि मिलणु च।त जरा तुम कुछ दिन उत्तराखंड न्याय विभाग से छूटि लेकि भारतम जुडिसियल रिफौर्म (न्यायिक सुधार) कराइ द्यायो भगवान !                                                                       




Copyright@ Bhishma Kukreti 10/2/2013

Bhishma Kukreti

गढ़वाली हास्य व्यंग्य

हौंस इ हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा



                     गैरसैण से  भौं भौं डाउ ( विभिन्न प्रकार के दर्द ) 



                    चबोड़्या-चखन्यौर्या: भीष्म कुकरेती


(s =आधी अ )



                         गैरसैण  उत्ताराखंडै  स्थाइ राजधानी ना सै रुड्यूं राजधानी त बौणि इ गे। पण कथगौं तैं डाs  बि दीणी च। अब चीमा जन पहाड़ अर पहाड़ी विरोधी नेता चैक बि गैरसैण की  स्थाइ राजधानी या परमानेंट कपिटल ना सै पण  रुड्यूं राजधानी,ग्रीष्म कालीन राजधानी, टेम्पोरेरी कपिटल या समर कैपिटल को ताज/पद नि लूठी सकदन। विजय बहुगुणाs निर्णयन  पहाड़ विरोधी लौबिक  मुख पर इन बुज्यड़ लगाइ बल चैक बि या  धुर पहाड़ विरोधी लौबि ये परमानेंट बुज्या तैं नि निकाळ सकदि। पहाड़ अर पहाड़ी विरोधी लौबि कथगा बि चूं-चां कौरलि अब या पहाड़ -पहाड़ी विरोधी लौबिम  एक बात स्वीकार करणों अलावा क्वी चारा नी च बल उत्तराखंडs आन्दोलन पहाड़ अर पहाड्यूं बान छौ। बिचारि पहाड़-पहाड़ी विरोधी लौबि बान गैरसैणौ कणसि राजधानी बणण छाती पर एक बड़ो गुल च, एक दर्द च। अर बिचारि पहाड़ -पहाड़ी विरोधी लौबि रोइ बि नि सकदि बलकणम यीं धुर पहाड़ विरोधी लौबि तै खुलेआम विजय बहुगुणा को निर्णयों तारीफ़ इ करण पड़नु च। 



                   गैरसैणों कणसि राजधानी बणन से भारतीय जनता पार्टी का नेता जन कि अजय भट्ट, वी . सी . खंडूरी, कोशियारी, डा. रमेश निशंक आद्यूं तैं बि नानिन्दिs बीमारि लग गे ह्वेलि बल "इ क्या कौंग्रेसन भलो काम करि दे। अब हम विरोध क्यांक करला? अब हम कौंग्रेस पर भगार क्या लगौला?" आजकाल क्वी बि प्रतिपक्ष नि चांदो कि राजकीय पार्टी जन हितमा क्वी फैसला ल्याउ! विरोधी पार्टी चान्दि बल राजकीय पार्टी जन विरोधी निर्णय ल्याओ अर वूं तैं सरकार तैं गाळी दीणो मौक़ा मीलि जावो। अब बिचारि भाजापा कणाणि च, दुखि च, खिन्न च,उदास च बल यि क्या कनै कौंग्रेसन जन-जजबातों, जन -भावना कदर  वाळो फैसला ली याल! पण समणि खुसिम दांत निपोड़ी हंसणि च। नाटक करणम भाजापा त कौंग्रेस से भौत अगनै च। जु भाजापा गैरसैण तै रूड्यूं राजधानी बणाण से खुसि जतांद त यूं तै पुछण छौ तुम इथगा सालोंम किलै सियां रौवां भै? पण बिचारा भाजापाई दुखि छन, सन्न छन त यूं तैं क्या पुछण बल जब आन्दोलन चलणो छौ त तुमन किलै नि ब्वाल बल पहाड़ी प्रदेश की राजधानी पहाड़ोंम ना मैदानम होलि?



  गैरसैणो कणसि राजधानी बणन से बनि बनि क  उत्तराखंड क्रांति दल का कथगा इ नेता त बेहोश पड्याँ छन बिचारोंम जनता तै बौगाणो एकि त नारा छौ अर विजय बहुगुणा वो नारा बि लूठिक ली ग्यायि।त यूं कंगाल नेताओंन बेहोश हूणि च।मै नि लगद यूं उत्तराखंड क्रान्ति दलौ नेताओं बेहोशी दूर ह्वेलि। अब यूंको ऑक्सीजन इ 'गैरसैण' छे त ऑक्सीजन को सिलिंडर त अब विजय बहुगुणा क पास च। हां एक बात च उत्तराखंड क्रांति दल का कै बि नेताक घौ, घाव, चोट, व्यथा, पर कैन बि मलम नि लगाण किलैकि अब कैको बि यूं कमजोर बेकार का नेतौं  पर कैको भरवस नि रै गे।

                                                     

   भितरै बात क्वी भैर नि लाणों ह्वालो पण कौंग्रेस का भौत सा नेता बि निरस्यां छन, अब क्वी बि जळतमार कॉंग्रेसी कनकैक सहन कारल कि दुसर कॉंग्रेसीs  बडै ह्वावो, प्रशंसा ह्वावो; त इन मा गैरसैण को उत्ताराखंडै स्थाइ राजधानी ना सै रुड्यूं राजधानी बणन से ज्याठा नेता बि निरास ही छन बल इन कनो  विजय बहुगुणा सरा क्रडिट अफिक ली जावो!  तुम इ सचि बथावदि बल क्या जनता द्वारा विजय बहुगुणा की प्रसशा  से अपणा सतपाल महाराज, हड़क सिंग रावत, गोविन्द सिंह कुंजवाल, हरीश रावत खुस, प्रसन्न ह्वाला  ?         

             

पण गैरसैणो कणसि  राजधानी बणन से   पहाड़ी जनता खुस च कि पूरो नि सै एक बाटो त खुलि गे।


Copyright@ Bhishma Kukreti 10/2/2013