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Articles By Bhisma Kukreti - श्री भीष्म कुकरेती जी के लेख

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 26, 2009, 12:54:53 PM

Bhishma Kukreti

Nanda Jaat Jagar-8: Awareness Folk Song Engagement between Nanda Devi-
Shankar
               Internet Presentation: Bhishma Kukreti

[Notes on Engaging  Nanda Devi with Shankar in Folk Songs; Notes on Engaging  Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Chamoli Garhwal; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Rudraprayag Garhwal; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Pauri Garhwal; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Tihri Garhwal; Notes on Engaging  Nada Devi with Shankar in Folk Songs from Uttarkashi, Garhwal; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Dehradun, Garhwal; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Kumaun; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Ranikhet, Kumaun; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Nainital, Kumaun; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Almora, Kumaun; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Bageshwar, Kumaun; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Champawat, Kumaun; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Dwarhat, Kumaun; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Pithoragarh, Kumaun; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Udham Singh Nagar, Kumaun]



   The folk songs about Nanda Devi differ from area to area.
The following folk song is sung in Jagar in Chamoli Garhwal and Rudraprayag regions.

नंदा जात जागर -फड़कि भाग-8
(s = आधी अ )
मूल संकलन - डा नन्द किशोर हटवाल , देहरादून
शिव और पार्वती मांगणि -जांगणि प्रसंग
रिसासौ मांग छ्वाड़े पयाणों
कैलाश मांग जननी जोत
तुमार घौर अगरे च च्येला
तुमारा घौरोगो जल्ल नि प्योन
तुमारा घौरो आसण नि ल्योलो
तुमारा घौरोगों भोजन नि खौलो
रिसासौ माग गौरा द्येबी
गौरीशंकरेगी जुगती जुड़ोलो
वर्मा लोक छवोड़े पयाणो
रिसासौ माग गौरा द्येबी
तुमारा घौर अगरे च कन्या
अगरी घौरो को पाणि नि प्योनु
आगरा हाथों को कवा कोलो नि खान
आगरे हाथों को भोजन नि कन
आगरे घौरो जल्ल नि प्योलू
अगिंड़ो नारद पछिन्ड़ो ह्वैग्यी
आपणा कन्यै की जुगती दे द्यावा
तुमारी कन्या को मंगण्या ह्वै रौलो
जना कनो को द्योना नी च
कन्या सरीखा पौना नी च
कन्या सरीखा बर ख्वोज्युलू
कैलाश मांग भोले शम्भूनाथ
रिसासौ मांग गौरादेवी
गौरीशंकरेगी जुगती जुड़ोलो
घर हीण देइ बर हीण नि देइ

In this folk song, there is description of about talk about searching groom for Nanda Devi or Gauradevi. There is clear glimpse about the parent's desire for marrying their daughter to competent groom.
सर्वारम्भ प्रसंग हेतु पढ़ेंनंदा जात जागर -फड़कि भाग-8

Notes on Engaging  Nanda Devi with Shankar in Folk Songs; Notes on Engaging  Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Chamoli Garhwal; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Rudraprayag Garhwal; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Pauri Garhwal; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Tihri Garhwal; Notes on Engaging  Nada Devi with Shankar in Folk Songs from Uttarkashi, Garhwal; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Dehradun, Garhwal; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Kumaun; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Ranikhet, Kumaun; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Nainital, Kumaun; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Almora, Kumaun; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Bageshwar, Kumaun; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Champawat, Kumaun; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Dwarhat, Kumaun; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Pithoragarh, Kumaun; Notes on Engaging   Nanda Devi with Shankar in Folk Songs from Udham Singh Nagar, Kumaun to be continued...

Bhishma Kukreti

गढ़वाली हास्य व्यंग्य

हौंस इ हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा



                                           किकबैकs मजा 


                                          चबोड़्या-चखन्यौर्या: भीष्म कुकरेती

(s =आधी अ )



मेरि घरवळिन झस्कैक बोलि," तुम से बढ़िया त वो इ ठीक छौ।"

मीन पूछ," कु ?"

म्यार भतिजन जबाब दे," जु  बोडि तैं तुम से पैल दिखणो ऐ छौ।"

"अरे  पण को च ऊ?" मीन पूछ

वींन बथाइ," ऊ जंगळु ठेकौं दलाल छौ। वो खटीमाम च ।"

मीन पूछ," अरे त कैन रोकि विक दगड़ ब्वौ करण से?"

म्यार भतिजो बुलण छौ,' बोडी पढ़ीं लिखीं छे अर वू जंगळु दलाल  पांच पास बि नि छौ।"

मीन पूछ," ह्यां पण ! सुबर सुबर ये जंगळु दलालs बात कखन आइ?"

म्यार नौनौन  जबाब दे," आज सुबर बिटेन ममी हेलिकोप्टर चौपर की खबर इ बंचणि च।"

मीन पूछ," तो ?"

भतिजोन तून देकि ब्वाल," त क्या तुम अर बुबा जी बि दलाल हूंदा त .."

मीन बि तनकेक ब्वाल," त ? जु हम द्वी भै मैनेजर छोड़िक दलाल ह्वे जांदा तो क्या ह्वे जांदो ?"

नौनन बोलि," आप द्वि भै सनै सनै कौरिक दल्ला गिरि छोड़ि दींदा।"

मीन पूछ," त फिर हम द्वी भै क्या करदा?"

घरवळिs बुलण छौ," फिर तुम द्वी भै आर्म डीलर ह्वे जांदा।"

मीन बोलि," आर्म डीलर या दल्ला गिरिम क्या फर्क च?"

नौनौन समझाइ," दल्ला हिंदी शब्द च अर आर्म डीलर अंग्रेजीक शब्द च। दलाल गिरि निकृष्ट काज च अर आर्म डीलरशिप बडो रिस्पेक्टेड जॉब च।"

भतिजोs  बुलण छौ," इंग्लिश  टाइटल हैज मोर रिस्पेक्ट दैन हिंदी टाइटल। फॉर इक्जान्पल  डैड वर्ड हैज मोर रिस्पेक्ट दैन बुबा जी वर्ड ।"

घरवळिन बात अग्वाड़ी बढ़ाइ,' तुमारो सम्पर्क भैर देशों हथियार निर्माताओं से हूंद अर फिर तुम दिल्लीम अधिकार्युं अर नेताओं सम्पर्क मा ऐ जांदा।"

नौनन ब्वाल," फिर तुम इन्डियन आर्मी कुण बनि बनि हथियार सप्लाई करणों बान अधिकार्युं अर नेताओं अर उंका रिस्तेदारों मौज मस्ती इंतजाम इख अर विदेशोंमा करदा।"

भतिजन ब्वाल," तुम नेताओं अर सरकारी अधिकार्युं  तै  पटान्दा अर इन्डियन आर्मी तैं विदेशी  हथियार बिकवांदा।"

  घरवळिन पुळेक ब्वाल,' तुम एक अकाउंट स्विटजरलैंडक बैंक मा खुलदा। विदेशी हथियार निर्माता किकबैक कु पैसा तुमर जेनेवा को बैंक अकाउंटम जमा करि दींदा।"

नौनन बिंगाई," फिर तुम वै पैसा तै मौरिसिसम एक क्या दस दस नकली ब्यापारिक संस्थानु बैंक अकौन्टोम ट्रांसफर करान्दा।"

भतिजोन समझाई," फिर मौरिसिस से फौरेन  इन्वेस्टमेंट को नाम पर तुम अपण पैसा इख इण्डियाम ट्रांसफर करवांदा। फिर वै पैसा तै तुम नेताओं अर सरकारी अधिकार्युंम बांटदा।"

घरवळिन पुळेकइ  ब्वाल," फिर वै अरबों रुपया से हम सौब परिवार वाळ मजा करदा।"

नौनन उत्साहम ब्वाल," हमम अलग अलग शहरोंम कथगा इ मकान होंदा अर कथगा इ गाड़ी हूंदा।"

भतिजोन अति उत्साहम ब्वाल,' हमम दुनियाक तमाम सुख-सुविधा हूंदा  अर हम मजा करदा।"

मीन पूछ," अर  जब टाइम्स या इक्स्प्रेश अखबार पोल खुलदा त क्या होंदु?"

घरवळिन बोलि,' सरकार इनक्वारी कमिसन बिठांदी।"

नौनन ब्वाल," पैल त इनक्वारी से कुछ नि होंद  ..."

भतिजन ब्वाल," अर खुदानाखास्ता इनक्वारी पूरी ह्वे जांदी त तुम जीवन भर जेल माँ हूंदा।"

मीन जोर से ब्वाल," अरे पर जिन्दगी भर जेल जाण क्वी बढिया काम च ?"

घरवळिन बोलि,' ह्यां पण जेल त तुम द्वी भाइ जांदा ना ? हम परिवार वाळ अर हमारि सात पुस्त त मजा ही मजा करदा ना?"

मीन ब्वाल," वाह ! हम त जिन्दगी भर  जेलम हूंदा अर तुम परिवार वळा सात पुस्तों तलक मजा करदा हैं?

नौनु अर भतीजो जबाब छौ," हां ! जू बि भ्रष्टाचारी बुरु काम करदो वो तो जेल ही जांद अर वैको परिवार  वळा इ त मजा करदन।"

मीन ब्वाल," इन पैसा से भलो त रूखी सूखी रुटी ही ठीक च।"

घरवळिन बोलि,' तबि त मीन ब्वाल बल तुम से त भलो लकड़ी दलाल इ ठीक छौ जु तुम से पेल मि तै दिखणो ऐ छौ।"     


       



Copyright@ Bhishma Kukreti 17/2/2013

Bhishma Kukreti

Nanda Jat Jagar: Awareness, wakeful Rituals about Goddess Nanda Devi -9
                   Notes on Joyful atmosphere/ambiance on the occasion of Marriage of goddess Nanda Devi
          Internet Presentation: Bhishma Kukreti
                नंदा जात जागर -फड़कि (भाग) 9
(s = आधी अ )
मूल संकलन - डा नन्द किशोर हटवाल , देहरादून

[Notes on folk songs about Joyful atmosphere/ambiance on the occasion of Marriage of goddess Nanda Devi; folk songs from Garhwal about Joyful atmosphere/ambiance on the occasion of Marriage of goddess Nanda Devi; folk songs from Chamoli Garhwal about Joyful atmosphere/ambiance on the occasion of Marriage of goddess Nanda Devi; folk songs from Rudraprayag Garhwal about Joyful atmosphere/ambiance on the occasion of Marriage of goddess Nanda Devi; folk songs from Pauri Garhwal about Joyful atmosphere/ambiance on the occasion of Marriage of goddess Nanda Devi; folk songs from Tihri Garhwal about Joyful atmosphere/ambiance on the occasion of Marriage of goddess Nanda Devi; folk songs from Uttarkashi Garhwal about Joyful atmosphere/ambiance on the occasion of Marriage of goddess Nanda Devi; folk songs from Lansdowne Garhwal about Joyful atmosphere/ambiance on the occasion of Marriage of goddess Nanda Devi; folk songs from Dehradun Garhwal about Joyful atmosphere/ambiance on the occasion of Marriage of goddess Nanda Devi]

        सर्वारम्भ

रिसासोऊ मांग सर्वारम्भ दीन
दाळ ध्वयेगी चौंळ छ्णेगी
कैलाश बर्मान छ्वोड़े पयाणो
रिसासौ मांग जागनी जोत
रिसासो माग दिनपट्टा बांच्येगे
रिससोऊ मांग मिठे बाटेगे
रिसीगा घौर बढ़ाई बजीग्ये
सर्वारम्भ

रिसासो गाँव में सर्वारम्भ शुरू हो गया है
पकोड़ों के लिए दाल धुल गयी है, अर्षा के लिए चावल छाने गये हैं
कैलाश में वर्मा जी ने सूचना दी है
रिसासो में जोत जगा ली गयी है
रिसासो में दिनपट्टा पढ़ लिया गया है
रिसासो में मिठाई बाँट दी गयी है
रिसी के घर बाजे बजने लगे हैं
Sarvarambh or Beginning

There is beginning of marriage ceremony of Nanda Devi
Pulses are ready for Pakodis, rice is soaked for sweet
Varma jee informed from Kailash
The earthen lamp is lit in Risaso village
The daily agenda's chart for marriage is already read
The sweet is distributed
The musical instruments are being played in Risaso

     वेदी चिण्याण

न्यूता कें ल्यावा बौड़ा कू चेल्यू
बौड़ कु च्योलू बेदि चिणलो
म्येटी कें ल्यावा कटुवा पत्थर
कटुवा पत्थरन ब्येदि चिणलो
न्यूती कें ल्यावा मठ्याणा की माटी
मठ्याणाs माटीन ब्येदि लिप्यालो
न्यूती कें ल्यावा क्योंळू क्वंळै
क्योंळू क्वंळै अस्ताम्भ घैंटेल्या

वेदी निर्माण

बौड़ा के चेले को न्योता भेजा
बौड का चेला बेदी बनाएगा
वेदी चिनने के लिए कटुवा पथर आ गये हैं
वेदी लीपने के लिए मठ्याणा की मिटटी लाई गयी है
स्तम्भ बनाने के लिए चीड की शाखाएं आ गयी हैं
            Vedi  (alter)Building
Vedi or marriage alter is being built
The disciple of Baud has been invited
The disciple of baud will build the alter
The Katuva stone are called for building marriage alter
The special clay is brought from the clay mine for smudging the marriage alter
Pine branches for making Stambh are brought
Copyright@ Bhishma Kukreti, for interpretation, 17/2/2013

गौराs खऴका(मंगल स्नान ) बांचो -- नंदा जात जागर -फड़कि (भाग)- 10
Read more about Mangal snan (auspicious bath) by Nanda in part 10
Notes on folk songs about Joyful atmosphere/ambiance on the occasion of Marriage of goddess Nanda Devi; folk songs from Garhwal about Joyful atmosphere/ambiance on the occasion of Marriage of goddess Nanda Devi; folk songs from Chamoli Garhwal about Joyful atmosphere/ambiance on the occasion of Marriage of goddess Nanda Devi; folk songs from Rudraprayag Garhwal about Joyful atmosphere/ambiance on the occasion of Marriage of goddess Nanda Devi; folk songs from Pauri Garhwal about Joyful atmosphere/ambiance on the occasion of Marriage of goddess Nanda Devi; folk songs from Tihri Garhwal about Joyful atmosphere/ambiance on the occasion of Marriage of goddess Nanda Devi; folk songs from Uttarkashi Garhwal about Joyful atmosphere/ambiance on the occasion of Marriage of goddess Nanda Devi; folk songs from Lansdowne Garhwal about Joyful atmosphere/ambiance on the occasion of Marriage of goddess Nanda Devi; folk songs from Dehradun Garhwal about Joyful atmosphere/ambiance on the occasion of Marriage of goddess Nanda Devi to be continued...

Bhishma Kukreti

Kukreti Community Stories -5
                 Where and how Kukretis settled down?
                        By Bhishm Kukreti
              Historian Harikrishan Raturi stated in Garhwal Ka Itihas that Kukreti came from Bilhat (Gujrat) around 1340 and settled in Kukarkata. Guru Prasad Ji was first Kukreti to settle there. The village Kukarkata in fact, is Jaspur. Jaspur is a village in Malla Dhangu, Ganga Salan , Dhangu Block, Tahseel –Lansdowne ,  electoral constituency –Yamkeshwar,now dist Kotdwara ( Pauri Garhwal), Uttarakhand. When I was child, I asked this question to my elders who said that our first person came as a pilgrimage from Taul Und '(south of Garhwal).     
There is no sign that Kukretis came from Kumaun and were Upreti
  Jaspur seems to be a paradise village for settling down in hills of thirteenth -fourteenth centuries. When, anybody would settle in hills on that time. The first priority would be that the  land would be  very Taili (sunny ), water would be very near as vessels even clay pots were not available easily on that time. Jaspur is on a flat Plato at the height of 3000-3500 feet. There was a water source (Chwaya) in village. However, around 1875 or so, there was a huge land slide.  The western part of Jaspur slipped   away and water source dipped down now in Saud village. There were signs of canals in the village till my Dadi came after her marriage.  Before the land slide, the original people of Jaspur were on western part. However, after land slide, those original settlers are settled in eastern part. Now Bahugunas are in extreme western part of Jaspur.
  The whole land of Malla Dhangu was occupied by Kukretis and the proof are  villages of Kukreti at all periphery of Malla Dhangu say- Kathud Bada in western Malla Dhangu, Khaman and Gatkot around south Malla Dhangu and Mal Dabad in eastern Malla Dhangu.
  We have a few folk community stories about Kukreti of Jaspur. 
                              Kukreti Vanshvalai or Family tree
Gurpati---- Nidhiram ----- Giridhar Ji -------Pareshar Ji ----- 1- elder son Brishabh ji  settled in Gweel 2 –younger son remained in Jaspur
1-GuruPati the first person settled in Jaspur. Nidhiram was his son and his son name was Giri Ji . 
2-  Shri Chakradhar Kukreti informs in Kukreti Vanshavali that  Giridhar ji was son of  Nidhiram ji.
3-According to Shri chakradhar ji Pareshwar ji was son of Giridhar ji . Pareshwar had two sons one remained in jaspur and other son Brishabh Ji settled in Gweel  (the original gausla (caw shed)  of Jaspur).
4- Before or around Gorkhyani, one brother migrated to Barsudi near Langur Bhairav , near Dwarikhal . He took Devi idols in night to Barsudi. From that day, Kukreti never built Devi temple in Jaspur or Gweel. All the Kukretis have Devi temples in their villages barring Jaspur and Gweel.
5-It  is sure that Gweel as village did not exist in Gorkhyali  regime because on Gorkha revenue record, there is no tax collection from Gweel  but from Jaspur Kathud, ,Bareth
6- Gweel got Padhanchari  or jamindaari only just end of nineteenth century or so (Gweel used to collect revenue from Malla Dhangu and some villages of Bichhla Dhangu)
7- A folk story from Jaspur tells that Mani ram ji was great Tantrik and his brother Randev ji was great Tantrik too. It seems Mani ram ji was great grandfather of Brishabh ji and t brother of Brishabh ji . Rrandev jee became Dallya guru and settled in Raneth just a mile away from Jaspur- Gweel. From that day, no Kukreti of Jaspur and Gweel took tantric profession till date.
8- Gudud jee or his brother was forefather of Baud taulka - Sheesh ram Ji and his cousins, Amba data Ji, Raghubar Datt ji (my grandfather). It seems Gudud jeeor his father had house in western part which was washed away in great land slide. The cousin of Gudud jee was grandfather of Ganga datt ji and Ganga Ram ji. There are two branch lets i.e offspring of Gudud jee and ganga datt and gnagram are rela original Kukretis in Jaspur.
9-Other Kukretis re-migrated from Dhangal  (forefathers of Ghoghadram ji, raghubar datt ji etc) and Khaman (forfather of Bhajan datt ji etc)
10- Rama Nand ji migrated from Jaspur to Banchuri and then Dhangal. Udyogpati Kukreti family of and a politician Digambar Kukreti are from Dhangal. The pitrwada of Dhangal, Gweel and Jaspur is in Jaspur. One son of rama nand ji migrated from Dhangal to Kheda Udaypur.
There is  Amadi  near kheda a Dalya village and those must be converted from Kukreti only
11- Though Chakrdhar ji states that Garibaa ji migrated from Gweel to Khamana but is illogical. As there was land (Kabjedar) in Jaspur and a family from Khaman returned back from Khaman to Jaspur as sated above by me.  Logically nobody would migrate from Gweel as it is the fertile most land in Malla Dhangu. Mahant Indiresh Ji (Shridhar Kukreti) belonged to Kahamana. There is Dalyan in Khaman as ranesh is is in the territory of Jaspur.
12- Chakrdhar ji states that Purna ji migrated from Jaspur to Kasani (udaypur).
13- Kukreti offered land to Jakhmolas perhaps as Ghar Jamain  in Mitrgram in Malla Dhangu. Kanddwals (from Kimsar, Udaypur patti) and Badols of Thantholi are ghar jawaains of Kukreti families)
14- Kukretis migrated to Dyusi –Gheedi , Manyarsyun from Barsudi  and from there to other places as in Sitaunsyun.
15- Kukretis from Barsudi also migrated to village Lakhwad, Jiyalgaon and villages of Langur and Sheela Pttis  .
16- Kukretis are in Chamyan, Malinya, Mooni, Badyun, Kudkind, Awai, Bubai,Kimoli, harsu, Jaurasi,  in Chunna, maheda, kimasar, Thangar, Damrada, Kandai, Bhumyasar, banwad,  Bukendi , Dyuli, Udaypur and Ajmer Pattis etc
17- Kukretis of Masan (near Dev Prayag, on the Rishikesh- Dev Prayad road, Tihri) were migrated from Jaspur long back.
18- Kukretis of Bedhi village near Forest research Institute, Dehradun) were migrated from Jaspur before 1900 due to cholera.
19- The Shilpkar family of Bhana ji and Symud ji settled with Gurupati ji in Jaspur. Jaspur had been famous for iron smith work and metal works in Shrinagar Darbar and Tihri Darbar as well.
20- Kukreti brought a young Bahuguna – Chaitram Ji son of Bhawani Datt ji of Bugani for performing religious rituals.
21- Kukretis of Jaspur, Gweel and Dhangal do not celebrate Bagwal but celebrate Godhan as a family member expired on Bagwal.
All Kukretis are requested to their family history.
bckukreti@gmail.com
                                A Brief about Kukretis of Jaspur
1-Late Daya Ram ji was first Graduate of the area and was first Tahsildar of area too.
2-Rram Charan Kukreti ji is first Post Graduate of Jaspur. He is first of Jaspur for travelling in North East frontier, Sikkim and Bhutan
3- Bhishm Kukreti is first Science Post Graduate of Jaspur
4- Mahesh Chandra Kukreti ji is first from Jaspur for choosing journalism
5-Hemant Kukreti Ji is first PhD from Jaspur. Hemant Kukreti is famous Hindi poet. His grandfather late Ishwari Prasad Kukreti is first Kukreti of Jaspur for taking government job in Delhi. Perhaps Hemant ji is also first Kukreti of Jaspur for marrying a non-Garhwali girl.
6- Among Kukretis of Jaspur, Bhishm Kukreti seems to be first who travelled abroad. However, late Narayan datt Jakhmola  ji is first person of Jaspur for visiting abroad.
7- Ahswin Kukreti is first Kukreti of Jaspur for completing B.E and MBA
8- Chakradhar Kukreti Ji is first Kukreti of Jaspur to put foot in Mumbai. Narayan Datt Jakhmola ji was first Jaspurian to come to Mumbai.
9-Chhawanu Ram ji is first Kukreti of Jaspur to settle down in Desh or Maidan.
10- It seems that late Bhairav Datt Kukreti is first person among Kukreti who bought land in Dehradun (Dobhalwala) . Though, late Brahma Nand Jakhmola ji is first person from Jaspur to buy land in Dehradun (Sayyad Muhalla) .
11- Ganesh Kukreti ji is credited first Kukreti of Jaspur for getting Shashtri degree.
12- Vijaya nand Kukreti ji  is first person among Kukretis of Jaspur for settling in Chandigarh
13- Late Ishwari Prasad Kukreti son of shri Ambadatt ji Ji is first Kukreti of Jaspur to put foot in Kolkatta
14- Manish Kukreti ji is first of Jaspur for taking job abroad (UAE)
14- Sadhu ram ji is first Kukreti of Jaspur joining Arm forced. Late Narayan Datt Jakhmola was first person of Jaspur for joining British army.
15- Hriday ram Kukreti ji was famous Hotelier of Dugadda
16-Kailash Kukreti ji is first Kukreti of Jaspur for opening schools/College in Kotdwara
xxx- Compiled by Bhishm Kukreti
गढ़वाळ का भगवान्(स्वर्गीय) पत्रकार/संपादक- १
Great Jounalists/Editors of Garhwal of Past - 1

३- सदा नन्द कुकरेती (ग्वील, मल्ला ढानगु, पौ. १८८६-१९३७): पैल टीरी रियासत मा काम कार पण उख घूसखोरी
रास नि आये त पौड़ी आयें अर सन १९१३-१९१५ तक 'विशाल कीर्ति' का संपादन कार. लिखण मा चुटीली शैली
अर व्यंगात्मक ब्युंत का बान प्रसिद्ध. अख्बराऊ संपादकत्व मा अंग्रेजी हकुमत से झगड़ा बि ह्व़े.

भग्यान /स्व.मधुर (कुकरेती) शास्त्री(चंपा, अजमेर, पौ.ग.१९०५-स्वर्गीय) भग्यान मधुर शास्त्री स्वतंत्रता सेनानी .
लिखवार, पत्रकार अर संपादक छया. मिलाप, अर्जुन, शक्ति, गढ़वाळी का खबरची रैन अर 'समृद्ध भारत'
हफ्तावार पत्र का संपादक रैन

भग्यान/स्व. राधा कृष्ण कुकरेती (तल्ला नौगाँव, उदयपुर, पौ.ग. १९३५- भग्यान) मार्क्सवाद- बामपंथ को धड्वे,
हिंदी का पर्वतीय ज्वीवन का कथाकार भग्यान राधा कृष्ण कुकरेती न बीस सालुं से बि जादा दिन तलक
देहरादून बिटेन 'नया जमाना साप्ताहिक' को प्रकाशन अर संपादन कार.


Bhishma Kukreti

गढ़वाली हास्य व्यंग्य

हौंस इ हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा



                 काश ! मि पुलिसौ इन्कौन्टर ऐक्सपर्ट हूंद !



                      चबोड़्या-चखन्यौर्या: भीष्म कुकरेती


(s =आधी अ )



बुबा जीन अखबार बिटेन नजर हटैक  हड़कांद बोलि,"बुजर्गों बुल्युं नि मानो त पैथर पछताण पोड़द।"

मीन पूछ," कनों?"

बुबा जीन बोलि ," अरे तू अपण ददा जी बुल्युं मानिक पुलिसम भर्ति ह्वे जांद त क्या से क्या ह्वे जांदो।"

मीन बोलि," पण वैबरी तुमनि ब्वाल  बल पुलिसै नौकरी बेकार च।"

बुबा जीन दुखि ह्वेक बोलि," वैबरी मी फर भक्त दर्शन जीs  इमानदारी वळु  भूत लग्युं छौ त मीन अपण बुबा जीक विरोध कार अर त्वै तै पुलिसम भर्ति हूण से रोकि। औंळौ स्वाद अर बुजर्गूं बुल्युं पैथर इ याद आंद।"

"कनो आज कैको भूत लगी गे जु तुम तै पछतावा हूणु च बल मि पुलिसम भर्ति किलै नि हों ?" मीन पूछ

" आज मै  फर रमेश निशंक, सुखदेव सिंह नामधारी, ए . राजा, सुरेश कलमांडी, अशोक चौहान, लालू यादव, जय ललिता , यदुरप्पा जन व्यवहारिक राज नेताओं नेताओं जिंदी हंत्या चढीं च।"बुबा जीन खुलासा कार।

मीन पूछ,"  जु मि पुलिसम भर्ति ह्वे जांदो त क्या ह्वे जांद?"

बुबा जीs  उत्तर छौ," अरे इन बथादि क्या नि ह्वे जांद? घ्वाडोंम भौरिक ड्यार घूसौ रूप्या आंद अर तु पुलिसै नौकरिम  डुलण भौरिक हीरा -जेवरात ड्यार लांदो। हम सौब  रुपयोंमा सींदा अर हीरा जवारात खांदा।"

  मीन बोलि," रूपयों क्या करदा?"

बुबा जीs जबाब छौ," कथगा ही शहरोंम जमीन जायजाद होंदि । कथगा इ गाड़ी-घ्वाड़ा होंदा। पांच छै जगा तेरि रखैल होंदि  अर रुप्यों छळाबळि मा मेरि बि एकाध रखैल होंदि। अर हफ्ता द्वी हफ्तों मा हम एक हेंकाकी  रखैलुं संट्वरा -बंट्वरा बि करदा       "

  मीन घंघड़े   बोलि," क्या ?"

बुबा जी बुल्दा गेन,"  ब्यटा जब इन रूप्या आला त थ्वड़ा क्या ! बाब बेटा बीच शरम-ल्याज थुका  रै  जान्दि।"

मीन अचकचैक ब्वाल," ए मेरि ब्वे !"

बुबा जी बुल्दा गेन," तू  इनकौन्टर एक्सपर्ट ह्वे जांदो। पैल तू अपराध्युं पर हाथ साफ़ करदि अर धीरे धीरे त्यार संबंध माफिया  गैंग से ह्वे जांदो, तु पुलिसम रैक बि एक गैंगमा भर्ति ह्वे जांदो  अर तब तू अपण गैंग को बुल्युं मानिक दुसमन गैंगक अपराध्युं इनकौंटर मा हत्या करदी अर हत्या करांदि ।"

मीन ब्वाल," इ क्या क्या घड़्याणा (सुचणा) छंवां तुम?"

बुबा जी बुल्दा गेन," फिर तू माफिया बुलण पर पुलिसै नौकरी छोड़ी दॆन्दि अर माफिया का एक एरिया को सरदार ब्वालो  सूबेदार ब्वालो हवे  जान्दि।"

"ए मेरि ब्वे" म्यार मुखन आइ

बुबा जी बुल्दा गेन," तेरि बवे बि मजा करदि,रोज किटी पार्टी  करणी रौन्दि।, फिर तू लोगुं तै मारणों सुपारी लींदी अर लोगुं हत्या करदी। खूब धन दौलत कमाणि  रौन्दि "

मीन ब्वाल," अब त बंद कारो यो बकबास।"

  बुबा जीन बोलि," मि बकबास नि छौं करणु। तीन समाचार नि बांचि बल नवी मुंबई मा एक घाघ रिटायर्ड इनकौन्टर एक्सपर्ट सैमुअल अमोलिक कनो अंडरवर्ल्ड याने  माफियों कुण काम करदो छौ।"

   मीन ब्वाल," क्वी बुबा अपण नौनो बान इन सुचदो क्या?"

बुबा जीक जबाब छौ," जै देसम रक्षक भक्षक बौणि जाला त वै देसम ब्वे बाब अपण नै साखि (जनरेसन) तै अपराधी बणानम नि शरमांदि।"   

                                 

   

         



Copyright@ Bhishma Kukreti 18/2/2013

Bhishma Kukreti

 गढ़वळि बाल साहित्य -5


साग- भुज्युंम विटामिन !                 

साग- भुज्युं राजा को च ?- खांडि ( भाग) -2

                       भीष्म कुकरेती


(s=-माने आधी अ )



(यां से पैलौ फाड़ी/खांडि म आपन पौढ़ बल कन साग भुज्युं मा राजा बणनो बान प्रतियोगिता ह्वे। एक बुडड़ि तै छाण-निराळ करणों बोले गे। पेल ड्यूरेबिलिटी/जादा उम्र को हिसाबन  प्याज अब्बल आई अर खीरा (कद्दू ) दुसर नम्बर पर आई । अब अग्वाड़ि बांचो ...)

         

बुडड़ि - उमरो या ड्यूरेबिलिटी हिसाब से त प्याज भुज्युं महाराजा अर खीरा राजा ह्वाइ।
सबि - न्है ! न्है ! यो न्याय-निसाब ठीक नी च, कै माँ क्या क्या विटामिन , क्या मिनरल च यांको बारं बि सूत भेद लिये जाण चयेंद।

बुडड़ि - ठीक च। अब तुम एकैक कौरिक बथावो बल तुमम  क्या क्या विटामिन छन अर यि विटामिन क्या क्या काम आन्दन।

सबि- नै नै पेल हम तैं  निस्तार करण पोड़ल बल कु विटामिन क्या क्या कम आंदो।

  बुडड़ि - हां या बात बि सै च। जरा बथावदि बल कथगा विटामिन होंदन अर यूंक  क्या गुण होंदन।   

च्यूं -अब तलक तेरा विटामिनु बाराम पता हुयुं च।

बुडड़ि - बिलकुल सै  बात। हां ये लिंगड़ ! इन बथादि बल विटामिन ए -A की कमि से क्या होंद अर बिंडी विटामिन A  की मात्रा से क्या नुक्सान हूंद?

लिंगड़- विटामिन ए की कमि से रतौंधी ,हाइपरकिरोटिसिस अर किराटोमालेसिया जन बीमारी ह्वे सकद। जु बिंडी विटामिन A की मात्रा ह्वेलि त हाइपरवितामिनोसिस A की बिमारी ह्वे सकद।

बुडड़ि - शाबाश। बिलकुल सही उत्तर। हे खुंतड़ इन बथादी बल विटामिन A  का सोर्स क्या छन या विटामिन A कै कै  साग भुज्जी अर खाणो से मिल्दो?

खुंतड़- नारंगी,पीला पक्याँ फल,हरा पत्तों साग ,पळिन्गु, खुंतड-लिंगड़, हौरु बसिंगो, गाजर,खीरा (कद्दू ) ककड़ी . अर ढिबर-बखरो फेफड़ों से विटामिन A मिल्दो।

बुडड़ि - सही उत्तर। हाँ ये गाजर ! इन बथादी बल विटामिन बी1 क्या च?

गाजर- विटामिन बी1 माने थियामाइन अर विटामिन बी1 की कमि बेरी-बेरी (जलोदर जन ),वर्निके-कोर्साकोफ सिंड्रोम की बिमारी  सकद। अर जाद्तिन मांश पेशी क बिमारी 

बुडड़ि -  विटामिन बी1 को सोर्स क्या छन/

गाजर- जौ,भूरो चौंळ, जुंडळ, हरी सब्जी,  च्यूं, अलू गोभी, मटर, हरो लुब्या-सूंट, गोभी, सुखा मेवा, , अंडो  आदि से विटामिन बी1 मिल्दो।

  बुडड़ि - वाह, बहुत सही जबाब! हाँ त हे खीरा  जरा विटामिन बी2 क बाराम बथादी   

खीरा-विटामिन बी2 माने रिव्लोफ्लैविन। विटामिन बी2 की कमी से ऐरिबोफ्लैविनोसिस हूंद।विटामिन बी2  दूध,क्याळा,भुज्यां मुंगरी,हरा लुब्या -सूंटो, बंसक्यळ    आदि से मिल्दो

बुडड़ि -या हवे ना बात ! राईट  आनसर।  हां त ये मूळा जरा इन बथादी बल विटामिन B3 क्या च ?

मूळा-  विटामिन B3 को मतलब हूंद नियासिन ।विटामिन B3 की कमि से पेलाग्रा याने चमड़ा फटणै बिमारी होंद त विटामिन B3 की जादतीन यकृत खराब हूंद।

बुडड़ि - त्वे तै ज्ञान च। अब बथादी विटामिन B3 का स्रोत्र क्या क्या छन?

मूळा-   विटामिन B3 का स्रोत्र खजूर, टमाटर,हरी भुजि,गाजर, शकरकंदी,दाणेदार  अनाज, दलहन,च्यूं,शिकार, नट्स-अखोड़ , काजू   आदि छन। 

  बुडड़ि - होसियारों हुसयार छे रे तू। अच्छा ! हे पिंडाळु ! विटामिन B 5 को बाराम   बथादि 

पिंडाळु-विटामिन B 5 माने पैंटोथिनिक ऐसिड। विटामिन B 5 की कमिन  पारेस्थिसिया रोग हूंद त जादतिन डीएसटी हवे जान्दन।उन सबी खाणों चीजुंम  थ्वड़ा-थ्वड़ा विटामिन B 5मिलदो पण   शिकार अर अनाजों छुक्यलम जादा मिलद।

  बुडड़ि -  तीन बि सही जबाब दे भै !  ये भै मर्सू जरा  विटामिन B 6 क बाराम बथादि

   मर्सू -विटामिन B 6 माने पाइरिदौक्सिन आदि। यो विटामिन अलग अलग  अनाज . भुज्युंम पाए जांदो।  विटामिन B 6 की कमिन  एनीमिया, नर्वस सिस्टमम खराबी हूंद अर इनि जादतीन बि नर्वस सिस्टमम खराबी ऐ जंद।विटामिन B 6 शिकार, कळेजि,अनाजों दाणम,  भुज्युंम जनकि -गाजर, गोभी, मुंगरी , प्याज, ,दूध, अल्लू , ककड़ी, क्याळा, काफळ, डंफु    आद्युंम पाए जांद अर खाणों गरम करण से विटामिन B 6की मात्राम कमी आन्द जांद।

बुडड़ि - छे त तू छ्वटु सि पण छे तु ज्ञान से भरपूर। ये कंडाळि !  विटामिन B H/7 को बाराम तू  क्या जाणदि?

कंडाळि !  विटामिन B H या 7 माने बिओटिन। विटामिन B H या 7 काचो अंडाक पीलो भागम, कळेजि, कुछ भुज्युंम पाए जांद।

बुडड़ि -भलो! भलो! सही उत्तर। हे! सिमळो  घ्वागा! जरा विटामिन B 9 क बाराम बथादि।

सिमळो घ्वागा- विटामिन B 9 कुणि फोलिक एसिड बुल्दन अर यांक कमि से मैगालोबलास्ट क अलावा गैबण  जनान्युंम फोलिक एसिड की कमी से बच्चा जनम पर फर्क पोड़द।  विटामिन B 9 हरा पत्तों भुजि,अनाज, रुटि, कळेजिम मिल्दो।

बुडड़ि- मान गये उस्ताद। हां भै तैड़ू ! जरा विटामिन B 12 क बाराम  खुलासा करदि   

   तैड़ू-  विटामिन B 12 कुण कोबेलामिन बि बुल्दन। विटामिन B 12 शिकार अंडा अर कुछ बैक्टीरियाओंम मिल्द।   

बुडड़ि- सही जबाब। हे बसिंगू !तू विटामिन Cक बाराम क्या जाणदि?

बसिंगू-  विटामिन Cक नाम ऐस्कौरबिक एसिड बि च। विटामिन C की कमिन स्नायु रोग हूंद .विटामिन C सेव, आड़ू, क्याळा,अन्गूर, काफ़ुळ,लिंबु,नारंगी, लीची, आम, खीरा, टमाटर, गोभी,ककड़ी, तोरी,च्यूं,  प्याज, मटर,अल्लु,मूळा,पळिङ्गॊ,भट्टा,लुब्या-सूंटक फ़ोळिम, हौरो मर्च, भिंडी,पिंडाळु,शलगम, तैडू,खुंतड-लिंगड़, हौरु बसिंगो आद्युम मिल्दो 

बुडड़ि-राईट आनसर। हां भै राइ  विटामिन D क बाराम  क्या च ?

राइ-   विटामिन D तैं कोलेकैलसिफिरोल बुल्दन अर च्यूं, अंडा,कळेजिम खूब पाये जांद।विटामिन Dक कमिन रिकेट्स जन बिमारी अर ज्यादतीन हाइपरविटामिनोसीस हूंद।

बुडड़ि-लाजबाब जबाब। गुदड़ी जरा विटामिन E पर प्रकाश डाऴदि।

गुदड़ी- विटामिन E कुण टोकोफिरोल्स बुल्दन।विटामिन E की कमि से  नुक्सान कबी कबि ही हूंद।विटामिन E गाजर, बंसक्यल, गोभी, मुंगरी, ककड़ी परिवार, भट्टा,हरो मर्च,हरी फली,भिंडी,प्याज, खीरा  आलू , मटर ,  हरी भुजि आदिमा मिल्द

बुडड़ि- गुदड़ी के लाल ! हे च्यूं ! जरा इन बथादी बल विटामिन K क्या च?

  च्यूं-  विटामिन K माने फिलोक्विनोन अर विटामिन K का मुख्य स्रोत्र छन -हरी सब्जी अंडा,  कळेजि आदि।

  बुडड़ि- भौत बढिया उत्तर ! अब तुम सौब इन बथावो बल क्या विटामिनो आधार पर साग भुज्युं राजाक पछ्याणक ह्वे सकद ?

सबि - नै नै ! कै ना कै भुजिम  एक महत्वपूर्ण विटामिन त होंदि च।

  बुडड़ि- त क्या करे जावु?

     

सबि - मिनरल्स अर प्रोटीन आदि क हिसाबन  छाण-निराळ हूण चयेंद।

बुडड़ि- ठीक च भोळ मिनरल्स अर प्रोटीन आदिक हिसाबन छाण-निराळ होलू की क्वा भुजि राजा च।   

                       

 





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साग- भुज्युं राजा को च ?- खांडि ( भाग) -3 म बाँचो ......

Bhishma Kukreti

                   गढ़वळि  नै जमानौ स्वांगुं (नाटकुं  )सौ सालै जात्रा



                        भीष्म कुकरेती



                     सद्यनि बिटेन गढ़वाळ विलखछणि   धर्म,संस्कृति, ब्यूंत, कौंळ(कला), अर भुगोल्या स्थितिs बान प्रसिद्ध च. लोक स्वांग ब्यून्तो/ तरीकोंम   बि गढ़वाळ बिलखणि छौ। बादी-बादण व्यवसायिक स्टार पर अर समाज हरेक स्थिति मा लोक-नाटकों तै समौ, जगा, जाति (वर्ग याने क्लास ) को हिसाब से बढ़ाणम कामयाब रैन। अब समौ मांग से बादी अपन जातीय व्यवसाय छुड़णा छन अर एक हिसाबन  सै बात बि च। 

       

        नै जमानो स्वांगुं प्रचलन ब्रिटिश शिक्षा से इ आयि।

आजौ स्वांगों तै समौ हिसाब से बंटण कठण च, किलैकि एकी समौ पर एकि परविरती नि मिलदी     

  गढ़वळि स्वांग भौं भौं किसमौ छन जन कि -

-समाज का लोगुं  बीच स्वांग

-धार्मिक स्वांग

-इतायासो अधारो स्वांग

-ख़ास दिखणेरूं बान खिले गे स्वांग   

-परिवार्या (पारिवारिक ) स्वांग

-कै ख़ास परम्परा वळु स्वांग

-कळकळो या   तरास दिखांद स्वांग/करुण रसीय नाटक




-सम्भोग श्रृंगारिक नाटक

-विप्रलंभ श्रृंगारिक नाटक

-संबंधियों से प्रेम आधारित नाटक

-प्रहसन या हास्य नाटक

-प्रहसन युक्त व्यंग्यात्मक नाटक

-निखालिस व्यंग्यात्मक नाटक

- वात्सल्य मूलक नाटक

-प्रति वात्सल्य मूलक नाटक

-वीर रस युक्त नाटक

-भक्ति या स्वामी भक्ति पूर्ण आधुनिक नाटक

-अपराधिक नाटक व जासूसी नाटक

-संवेदन शील नाटक

-रहस्यात्मक या भूत आदि नाटक

-न्याय पूरक नाटक

-प्रेरणा दायक नाटक

-बाल नाटक

-हौर किसमौ नाटक 



जख  तलक नया जमानो स्वांगों  सवाल च भवानी दत्त थपलियालन जागर कथाs अडसारो लेकि (आधारित)  'जय विजय 'नाटक लेखिक  गढ़वळि नै जमानौ स्वांगुं पवाण लगै पण पैल ऊंको लिख्युं स्वांग 'भक्त प्रल्हाद' छ्पी (१९१२).

'बाबा जीक कपाळ क्रिया' अर 'फौन्दार कि कछेड़ी'  प्रहलाद नाटको भाग हूंदा बि मंचनो हिसाब से बिगऴयां स्वांगोंम गणे जांदन। आज बि यि स्वांग अपण चबोड़, चखन्यो, क्रूर राजनीति, क बान उथगा इ नै छन जथगा  १९१२-१ ३ म छ्या।

 

  १९३०म पौड़ीs नामी गिरामी वकील घना नन्द बहुगुणान 'समाज' नाटक लखनऊ बिटेन छपाइ।   

विश्वम्बर दत्त उनियालs  गां -गौळो( सामाजिक) स्वांग   'बसंती' १९३२म  देहरादूनम खिले ग्याइ।

सत्य प्रसाद रतूड़ी , देवी दत्त नौटियाल, विद्या लाल नौटियाल, मढ़कर नौटियाल (चार मित्र सूखक) लिख्युं अर विजय रतूड़ीs लिख्यां गीत वळु  नाटक 'पांखु'  १९३२म टिहरीम खिले गे।

इश्वरी दत्त जुयालs लिख्युं स्वांग  'परिवर्तन' १९३४म  कराचीम छप। 

भगवती प्रसाद पांथरी रच्युं 'अध : पतन' (१९४०-४१) गां -गौळो( सामाजिक) स्वांग च अर .पांथरीs रच्युं दुसरु  नाटक 'भूतों कि खोह'(१९४०) च। .

.भगवती प्रसाद चंदोलाs रच्युं  श्रमदान पर व्यंग्य करदारो  नाटक 'आज अळसो छोड़ देवा' देहरादूनम  मंचित ह्वे।

जीत सिंह नेगी द्वारा लिखित गीत-गद्य नाटक 'भारी भूल ' १९५५-५६ मंचित ह्वे अर  १९५७म  प्रकाशित ह्वे।

  जीत सिंह नेगीs छप्यां-अणछप्यां  स्वांग जीतू  'जीतू बगडवाल' , 'राजू पोस्टमैन', 'रामी बौराणी' सबि  खिले गेन अर 1987 बिटेन 'मलेथा की कूल' नृत्य नाटिका  कु मंचन बिजां दें होंद गे।

डा. गोविन्द चातकs सात स्वांगुं खौळ (नाट्य-संग्रह ) 'जंगली फूल' 1957म छप।  'ब्वारी वहू प्रताड़ना विषयी  स्वाग च, 'द्वी हजार कि द्वी आंखी' जनानी  मनोविज्ञानs  कि कथाच; 'घात ''अंधविश्वास विरोधी, 'जंगली फूल' सामाजिक नाटक; केर(मानव अधिकार संबंधी) ; मुंडारो (अनमेल विवाह) ; 'नौनु हुंद तो' (पुत्र लालसा) वळ स्वांग छन। यी सबि गढ़वाली नाट्य विधाका गैणा (तारे) छन।

  .

अबोध बंधु बहुगुणाs  'छिलाs  छौळ ' बादी बादण भौणेर (शैली)  स्वांग १९५९म  ' उत्तराखंड साप्ताहिक'म छप। 

ललित मोहन थपलियालs  सबि  नाटक १९५५का पैथर खिले गेन। 'खाडू लापता' एक हंसोड्या अर चबोड्या स्वांग च (  हसी व्यंग्य मिश्रित सामाजिक नाटक); 'अन्छरियों का ताल' एक रहस्यात्मक व दार्शनिक नाटक च, 'एकीकरण' सामजिक संस्थाओं पर चमकताळ  लगन्देरू स्वांग च,  ; 'घर जवें' एक हास्य व्यंग्यात्मक नाटक च त है; 'चमत्कार' अंधविश्वास विरोधी नाटक च। 

सन अस्सी से पैलि  देहरादूनम  दामोदर थपलियालs   नाटक -मनखि, औंसी क रात, तिब्बत विजय व प्रायश्चित मंचित ह्वेन। जांमादे  मनखि व औंसी क रात' प्रकाशित हुयां छन। 


पाराशर गौड़ लिख्युं  नाटक 'औंसी कि रात'  1962म दिल्लीम मंच्याई अर पैलि दै जनान्युन कै गढ़वाळी स्वांगम पाठ ख्याल।   

जगदीश पोखरियालs रच्युं  देश भगति स्वांग  'नाची नरसिंग'  (1963)दिल्लीम मंच्याई।

मुंबईम  १९६२-६३म   दीन दयाल द्विवेदी रच्युं सामाजिक नाटक 'जागरण' मंचित्यायि।



लौर्ड डुनसाने कृत, उन्ना देसी (विदेशी) नाट्कौ अनुदित  'चट्टी की एक रात' (१९७०) स्वांग कु निर्देशन विश्व मोहन बडोलान कार। भीष्म कुकरेतीन येयी स्वांगो अनुवाद 'ढाबा मा एक रात' (२०१२) से कार अर  इंटरनेट माध्यमम छपायि। 

राजेन्द्र धष्मानाs रच्युं  सामजिक संस्थाओं पर चोट करदारो  'जंकजोड़ ' (१९७०) ' नाटक च त  ' अर्धग्रामेश्वर' नवाड़ी ब्यूंतदारी स्वांग ( आधनिक शैली का नाटक ) 'अर्ध ग्रामेश्वर ' (1976) सामयिक ग्रामीण व्यवस्था व प्रवासियों को  खटकरम दिखांदो।

सन १९७०-71म भीष्म कुकरेती व सम्पूर्ण बिष्ट द्वारा प्रेम चंद कृत 'कफन' को  रूपांतरित नाटक भंडारी बाग़, देहरादूनम  मंच्यायि।  .कफन पर  १९८०म  कुसुम नौटियाल द्वारा रूपांतरित नाटक दिल्लीम खिले गे।

सन 1970-71म ही भीष्म कुकरेती अर सम्पूर्ण सिंह बिष्ट को रच्युं व्यंगात्मक नाटक 'ए  ब्वे दारु पिलै दे' भंडारी बाग़, देहरादूनम मंच्यायि। 

१९७१ बिटेन  सन अस्सी तक किशोर घिल्डियाल (काली प्रकसाद घिल्डियाल) का  नाटक- 'दूणो जनम' (छुवाछूत विषयक ) ; 'रग ठग '(पुत्र-पुत्रीहीन दम्पति का संघर्ष) व 'कीडू क ब्व़े '(स्त्री त्याग व संघर्ष)  दिल्लीम खिले गेन। 

 
१९७१म  पाराशर गौड़s लिख्युं 'चोळी' (महत्वाकांक्षा सम्बन्धी ) स्वांग दिल्लीम  मंचित ह्वै।.

मदन थपलियालs अनुदित   कश्मीरी नाटक का रूपांतरित नाटक 'नाटक बन्द करो' कु मंचन दिल्ली ( १९७३)म ह्वे।

नित्यानंद मैठाणीs लिख्याँ हंसोड्या-चखन्योर्या स्वांग 'चौडंडि'च तो  'छुट्या बल्द ' (१९७५) युवा शक्ति जागरण वळु   रेडिओ नाटक च.; . 'च्यूं ' लोक कथा ब्यूंतदर्या  ( शैली) स्वांग च।; मैठाणीs हौरि  'फुलमुंडी सासू ' वहु प्रताडन विषयक;  ; 'खौल्या' (गरीबी, कुपोषण ); ना थीड माई तै (पुत्र लालसा संबंधी ), टॉम (शराब विरोधी) नामी गिरामी छन(सभी नाटक १९७५ का छन).   

चिंता मणि बडथ्वालs लिख्युं  ' टिन्चरी ' स्वांग  दिल्लीम  १९७६म  मंचित ह्वे। 



डा. पुष्कर नैथाणी द्वारा लिख्युं  नाटक 'अभिज्ञान शाकुंतलम' (१९७८-७९) कालिदास कु संस्कृत नाटकs उमदा अनुवाद च।.



स्वरूप ढौंडियालs लिख्युं नवाड़ी ब्यूंतदारी  नाटक 'अदालत' कति दें  मंचित ह्वे  (१९७९) अर स्वांग  पलायन विभीषिका दर्शान्दो  असलियत वादी नाटक च।

 

कन्हयालाल डंडरियाल द्वारा लिख्युं अर  राजेन्द्र धष्माना द्वारा रूपांतरित नाटक 'कंशानुक्रम' १९७९म  दिल्लीम मंच्यायि।.

इनि  दिल्लम  १९७० बिटेन  १९७५ तक मंचित वीरेन्द्र मोहन रतूड़ीs  'एक जौ अगने' व गिरधारी लाल कंकालs रच्युं  नाटको कु आधुनिक  गढ़वाली नाटकुंम बड़ी जगा च।



वैदराज गोविन्दराम पोखरियाल को संयुक्त परिवार कि विभीषिका दिखान्दो  'बंटवारो ' नाटक अस्सी कु  दशकम  प्रकाशित ह्वे।

१९८० से पैलि ब्रज मोहन कबटियाल द्वारा लिखित , निर्देशित धार्मिक गीतेय नाटक 'किष्किन्धा काण्ड' कथगा दें कोटद्वारम मंचित ह्वे।  सन 1980 से पैल ब्रज मोहन कबटियालन   'वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली', 'गंगू रमोला' 'जीतु बगड्वाल', 'बीर बाला तीलु रौतेला', 'ओड का झगड़ा' , व 'अनपढ़' जन  ऐतिहासिक व सामाजिक विषयी नाटक लिखेन  व कोटद्वारम खिले बि गेन।

डा. हरिदत्त भट्ट का  नाटक 'नौबत, 'दिवता नचा', 'ब्यो  कि बात', 'छि कख क्या'  १९८० से पैलि  प्रकाशित व मंचित ह्वेन अर  मूलत : यि  नाटक सामजिक व हसी व्यंग्य वळ स्वांग छन।   

डी.डी. सुंदरियाल लिखित ज़ात-पंत विरोधी 'जौंळ -बुरांश' (१९७९)म  चंडीगढ़म मंच्यायि।


सुरेन्द्र बलोदी द्वारा लिखित व निर्देशित नाटक 'ब्यखनि क घाम" (१९८०) एक दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व प्रेरणादायक नाटक च।

 



एन. डी. लखेड़ा लिखित शराब विरोधी नाटक घुंघटो ' १९८०म  चण्डीगढ़म खिले गे।



डी.डी. सुंदरियाल लिखित बाल प्रताडन आधारित 'औंसी कु चांद' नाटक चण्डीगढ़म  १९८०म  मंच्यायि। 




पलायन विभीषिका आधारित ,डी.डी. सुंदरियालs लिख्युं   'खंद्वार ' स्वांग  १९८०म  चंडीगढ़म खिले गे। 



शांति स्वरुप उनियालs लिख्युं  स्त्री वीरता विषयी 'विधवा ब्योली' नाटक कु   प्रकाशन १९८० मा ह्वे अर मंचन बि ह्वे।

एई दौरान शारदा नेगी द्वारा लिखित शाहुकारी विरुद्ध नाटक ' चक्रचाळ ' मंचित ह्वे।



मदन बल्लभ डोभाल लिखित नाटक 'खबेस' अनेक विषय उठांदो नाटक दिल्लीम  मंचित ह्वे।

चंडीगढ़म  मंचित , १९८१ डी.डी. सुंदरियाल लिखित 'दानु दिवता बुडू केदार' द्वी  दगड्याण्यु टकराव की कहानी दर्शान्दि।

प्रसिद्ध लोक कथा 'तैड़ी तिलोगी ' पर आधरित सुंदरियाल द्वारा रूपांतरित 'धौळि का आंसू ' १९८०-१९८३ का  बीच ५-६ दें  पंजाबम खिले गे।



पंजाबम अस्सी का  दशकम  में एन.डी. लखेड़ा लिखित नाटक 'जग्वाळ ' (अंध विश्वास विरोधी) व 'आस निरास' (संयुक्त परिवारों का टूटना ) ; डी.डी. सुंदरियाल लिखित 'रत व्योणा'(विधवा विवाह समर्थन ), 'सरगा दिदा पाणि पाणि' (ग्रामीण भ्रस्टाचार) व तीलु रौतेली (लोक गाथा), 'जथगा डाड डाड' (सड़ी गली शिक्षा विरोध) और बलवंत रावत लिखित 'अर सपना सच ह्व़े ग्याई' नाटक पंजाबम  मंचित ह्वेन।

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सचिदानंद कांडपालs लिख्युं स्वांग  ' मीतु रौत '(1982) जो चंडीगढ़म   मंचित ह्वे यु  एक वीर रस युक्त ऐतिहासिक व लोक कथा आधारित नाटक च। 

मोहन सिंह बिष्ट द्वारा रचित अपसंस्कृति व दहेज़ कुप्रथा का  रोग आधारित 'औडळ' (१९८२) नाटक दिल्लीम मंच्याइ। 

चन्द्र शेखर नैथाणी लिखित विकलांग समस्या का नाटक ' मांगण ' १९८२ मा  दिल्लीम खिले गे।



कन्हया लाल डंडरियालs  दहेज़ पर चोट करदो   'स्वयंबर' नाटक १९८३म  में दिल्लीम मंचित ह्वे।

आयि

ब्रज लाल शाह द्वारा रचित 'महाभारत' नृत्य नाटिका १९८४म  दिल्लीम  मंचित ह्वे।

.

पाराशर गौड़s रच्युं  प्रायोगिक नाटक 'आन्दोलन' उत्तराखंड राज्य संघर्ष पर लिख्युं नाटक च  जो १९८०-१९८५ का बीच मंचित ह्वे। . गौड़ कु  'रिहर्सल' नाटक एक रोमांचकारी नाटक च जु दिल्लीम  मंच्यायि।

प्रेम लाल भट्ट कु   जातीय संघर्ष का 'खबेस लग्युं च रे खबेश' (१९८५) नाटक दिल्लीम खिले गे। 

अबोध बन्धु बहुगुणा लिखित (सभी नाटक १९८६म चक्रचाळ संकलित ) मा   'अंद्र ताल' नाटक प्रवासी गढ़वालियों के करूँ कथा बखान करदो  , बहुगुणा द्वारा ऐतिहासिक नाटक 'अंतिम गढ़'; गढ़वाल सभा देहरादून द्वारा मंचित ह्वे।. बहुगुणा लिखित 'चक्रचाळ' एक रेडिओ नाटक च; दुघर्या'मा विधवा पुर्नार्विवाह समर्थन च ; 'फरक '. जात पांत विरोधी, 'जीतू हरण' लोक गाथा आधारित पद्य-गद्य नाटिका; 'जोड़ घटाणो ' प्रवासियों के आत्मिक व भौतिक संघर्ष आधारित; 'कचबिटाळ' प्रवासी व वासी गढ़वालियों मध्य अन्तराल, 'काठे बिराळी ' (प्रवाशियो कि समस्या प्रधान ) ; 'किरायेदार' (खोय पाया विषय) ; कुलंगार (कुत्सित प्रवृतियों पर चोट ) ; माई को लाल (श्री देव सुमन बलिदान) , नाग मयूर (ऐतिहासिक); नौछमी नारायण (कृष्ण का  नौ रूप); सृष्ठी संभव (दार्शनिक ); 'तिलपातर' ( बदलाव) नाटक संकलित छन। 

ब्रजेन्द्र लाल शाह द्वारा लिखित नाटक 'जीतू बगडवाल' १९८६म  दिल्ली म मंचित ह्वे। 

प्रेम लाल भट्टs लिख्युं  पारिवारिक नाटक ' बडी ब्वारी' दिल्लीम मंच्यायि।

१९८७म  पुरुषोत्तम डोभाल कृत 'टिल्लू रौतेली' नाटक प्रकाशमा आयि। 

१९८६-८७मा   कुसुम नौटियालs लिख्युं , लोक कथा आधरित 'लिंडर्या छ्वारा' नाटक मंचित ह्वे।

हरीश थपलियालs लिख्युं व निर्देशित पलायन विभीषिका विषयs  स्वांग  'हौळ कु लगाल?" (१९८७) अर हंसौड्या-चबोड़्या  नाटक 'मेरी पैलि चोरी '(१९८९) भरा नाटक 'मुंबईम मंच्यायि। .

 

दिनेश भारद्वाज व रमण कुकरेती द्वारा लिखित हास्य व्यंग्यात्मक नाटक ' बुड्या लापता' १९८५- ८७ का  बीच मुंबईम खिले गे।

भीष्म कुकरेती द्वारा लिखित 'द्वी पळया' (गढ़ ऐना, १९८९) नाटक  कंदुड़ोन   सुणनम   अर आंख्युंन दिखणम भेद बतान्दो   प्रेरणात्मक नाटक च। 

गोविन्द कपरीयालs लिख्युं अंध विश्वासों पर चोट करदारो नाटक ' मेरो नाती' (१९८९) गैरसैणम  मंचित ह्वे।.

ललित केशवानs रच्युं  ऐतिहासिक नाटक ' हरि हिंदवाण ' १९८९म दिल्लिम खिले गे। 

दिनेश भारद्वाज द्वारा लिखित लोक गाथा आधारित गीतेय  नाटक 'तिल्लु रौतेली' मुंबईम  १९८९ मा  मंचित ह्वे।

भीष्म कुकरेती द्वारा 1985म लिख्युं  राजनैतिक व्यंग्यात्मक नाटक 'बखरौं ग्वेर स्याळ' रंत रैबार (२००५) मा  प्रकाशित्यायि (प्रकाशित हुआ)। 

भगवती प्रसाद मिश्र द्वारा लिखित धार्मिक नाटक 'बाल नारायण' गढ़ ऐनाम ( मई , १९९०) छप। 

गढ़ ऐना के मई, १९९० , अंकोंम  नागेन्द्र बहुगुणा द्वारा लिखित स्थानीय शराब माफिया की पोल खोलदो  'चंदन' नाटक प्रकाशित्यायि।

मुंबईमा  सोनू पंवारs रच्युं  नाटक ' बख्त्वार बाड़ा ' १९८९- १९९० को  करीब मंचित्यायि(मंचित हुआ)।

प्रेम लाल भट्ट लिखित, गरीबी व ऋण विषयी नाटक 'नथुली' १९९०म खिले गे। 

धाद (जन. १९९१)म  डा. नरेंद्र गौनियाल को  शराब विरोधी नाटक 'शराबी' प्रकाशित्यायि। .

राजेन्द्र धष्मानाs  मराठी नाटक को  रूपान्तर 'पैसा ना ध्यला नाम च गुमान सिंग रौतेला ' कु  मंचन दिल्लीम  १९९२मा ह्वे।.

१९९२म  मंचित व ओम प्रकाश सेमवालs लिख्युं  'गरीबी' (१९९२) नाटक जो चाहो वही पाओ विषय युवाओं कुणि प्रेरणात्मक नाटक च , 'दैजू' (१९९५म  मंचित ) नाटक दहेज प्रथा को नकारने वळु नाटक च. ओम प्रकाश सेमवाल कु  नशा विरोधी नाटक 'नशा '१९९३म  मंचित्यायि।

  स्वरुप ढौंडियालs लिख्युं 'मंगतू बौळया' (१९९३) ग्रामीण आर्थिक दशा दरशान्दो असलियतवादी नाटक च। 

कुला नन्द घनशालाs रच्युं 'निखी बाग़ (१९९३) प्रशाश्कीय लाल फीताशाही , भ्रष्ट तन्त्र पर डंडा लगांदो  नाटक च।

सुरेन्द्र बलोदी द्वारा लिखित व मंचित (१९९४) नाटक ' सुरमा' स्त्री उत्पीडन व त्रास पर आधारित नाटक च अर  शराब माफिया विरोधनी टिंचरि बाई पर आधारित बलोदी कु नाटक ' ब्व़े तु फिर ऐ' १९९५म मंचित्यायि।



शराब की बुराईयों पर आधारित , ओम प्रकाश सेमवालs लिख्युं  नाटक ' ब्यौ' १९९५म   मंच्यायि।

ओम प्रकाश सेमवालs लिख्युं  ज़ात पांत व्यवस्था पर चोट करदारो नाटक 'भात' १९९६म मंच्याइ।.

पर्यावरण बचाणम  बौणौ   जानवरों तैं बचाण बौणै आग रुकण जन विषय  पर आधारित ओम सेमवाल कु  नाटक ' कखि लगीं आग अर कखि लग्युं बाग़' १९९७म मंचित्यायि(मंचित हुआ)। 

सेमवाल द्वारा पुत्र जन्म को महत्व व व पुत्री जनम को महत्वहीन की मान्यता पर आधारित नाटक 'पुत्रजन्म और नामकरण' १९९७म खिले गे। 

ओम प्रकाश सेमवालs लिख्युं गां-गौळौ विषयी (   सामाजिक)  नाटक 'दगड़ी' १९९८म मंच्यायि।

वन संरक्षण पर आधारित कुला नन्द घनशालाs  लिख्युं स्वांग  'रामू पतरोल' १९९८म  मंचित ह्वे।.

ओम प्रकाश सेमवालs लिख्युं अपणो  ही रिश्तेदारों को लुठणो  विषयौ  'नौकरी'स्वांग  १९९९म मंचित्यायि(मंचित हुआ)।

भारतीय शिक्षा कु लमडदो स्तर तै दिखांदो कुलानन्द घनशालाs लिख्युं  स्वांग  कंप्लेंट (२००० )म छप।


'पागल' (ओम प्रकाश सेमवाल, २०००म मंचित ) अंधविश्वास पर चोट करदारो  नाटक च।

डा. डी.आर. पुरोहित, सचिदा नन्द कांडपाल व कृष्णा नन्द नौटियालs लिख्युं  'चक्रव्यूह ' (२००१) स्वांग क महाभारत कथा पर आधारित नाटक च जू कथगा दें मंचित ह्वे।

ओम प्रकाश सेमवाल लिखित चुनावी धांधली आधारित 'चुनाव नाटक २००१म खिले ग्यायि। 

२००१म डा. डी.आर . पुरोहित लिखित ऐतिहासक नाटक 'पाँच भै कठैत ' मंचित हवे।

डा.डी.आर . पुरोहितs लिख्यां  'नंदा देवी जातरा (२००२), एक्लू बटोही (२००४) , इलेक्सनम  कृष्ण '(२००८) , 'गांधी बुड्या आइ (२००९), गीत औफ़ गुटका ईटर (२००९), रूपकुंड (नेशनल जिओग्राफी हेतु) नाटक प्रसिद्ध ह्वेन।   

ओम प्रकाश सेमवालs  बाल शिक्षा सुधार आधारित नाटक 'धौंस' २००२म  मंचित्यायि।

कुला नन्द घनशालाs रच्युं लिखित गढ़वाली नाटक 'सुनपट्ट' (२००२) एक हंसौण्या-चखन्यौर्या स्वांग च।   



गढ़वाळम  स्वास्थ्य सेवाओं की बिगडती दशा दर्शांदो  कुला नन्द घनसालाs लिख्युं  नाटक 'डाक्टर साब' २००४म  प्रकाशित्यायि।

महावीर सिंग कु लिख्युं  नाटक 'मुरख्या बुड्या' (२००४) एक हास्य व्यंग्यात्मक नाटक मुंबईम  मंचित्यायि।

नन्द लाल भारती टीम रचित 'पांडव गाथा ' जौंलसारी भाषा का नाटक २००५म  देहरादूनम मंचित हवे।

2005म रण बीर सिंह चौहानों लिख्युं नाटक 'हंत्या' छप।

२००५म  ओम बधानीs लिख्युं लोक गाथा नायकों -बीर भड़ नरु और बिजुला आधारित गीतेय नाटक 'डांड्यू क मैती' देहरादूनम  मंचित्यायि। 

२००५ में नवांकुर नाट्य समूह पौड़ी द्वारा रचित व भूपनेश कुमार द्वारा निर्देशित वीर गाथा आधारित नाटक 'वीर बधू देवकी' को  मंचन देहरादूनम ह्वे।

दिल्लीम   दिनेश बिजल्वाण लिखित द्वी  नाटक 'पल्टनेर चन्द्र सिंग' (२००५) व 'कैकु ब्यौ कैकु क्यौ' मंचित हुयां छन। अर 'रुमेलो' (शेक्शपियर के ओथेलो का रूपान्तर ) व 'तिल्लू रौतेली' अणछ्प्यां छन।   

मनु ढौंडियाल व हरीश बडोला लिखित 'गंगावतरण' धार्मिक आख्यानो व पर्यावरण विषयक नाटक २००७म लखनऊम खिले गे।   

डा. डी. आर. पुरोहित लिखित 'बूढ़ देवा' ,२००७म  मंचित नाटक एक मास्क लोक नाट्य रूपांतरित नाटक च। 

प्रमोद रावतs लिख्युं  'तिलाड़ी एक बिसरीं याद' नाटक को  २००७म  मंचन ह्वे।

दिनेश गुसाईं एवं दगड्यों द्वारा रच्युं 'गंगू रमोला' धार्मिक गाथा पर आधारित नाटक २००७म  देहरादूनम  मंचिते। .

ओम बधानी द्वारा लिखित वीर भड़ विषयी गीत -गद्य नाटक 'राणा घमेरू' को  मंचन २००७म  देहरादूनम ह्वे।



भै-बैणि प्रेम पर लोक कथा आधारित, अरविन्द नेगी द्वारा लिखित व मंचित 'अम्बा बैनोळ' (२००८) गढ़वाळि  नाटक च।

'छत्रभंग' शाक्त ध्यानी द्वारा रचित राजनैतिक,  व्यंग्यात्मक व गढ़वाळी  को पैलो  प्रतीतात्मक नाटक २००९म  मंचित ह्वे। 

कुला नन्द घनशाला द्वारा रचित व मंचित 'चिंता' (२०११) राजनैतिक खेलों पर करारो व्यंग्यात्मक नाटक च।  .कुलानन्द घनसाला रचित नाटक 'अब क्या होलु' उत्तराखंड राज्य आन्दोलन विषयक नाटक च। ; 'क्या कन तब 'हास्य व्यंग्य मिश्रित नाटक व फिल्म को विषय शक की बुराई च। 

गिरीश सुंदरियाल कृत स्वांग -खौळ ( नाटक संकलन ) 'असगार ' २०११म  प्रकाशित्यायि, जामा   'ऐली मेरी पौड़ी ' (२०११) सरकारी दफ्तरोंम  लाल फीताशाही पर कटाक्ष करदो  व्यंग्यात्मक नाटक च,  'भर्ती' बेरोजगारी व युवा समस्या विषयक नाटक च,  'पाँच साल बाद' एक राजनैतिक हंसोड्या नाटक च,  'शिल्यानाश' एक अडंदेरु ( प्रेरणादायक )नाटक च, अर 'असगार' पलायन कि विभीषिका दिखांदो नाटक च। .

ललित केशवान द्वारा संकलित नाट्य संग्रह (२०११)मा  'भस्मासुर' पुराण विषयी नाटक च, ;'एक मंथरा हैंकि' शराब विरोधी स्वांग च, 'जय बद्रीनारायण' धार्मिक; 'खेल ख़तम' भू माफिया व भू-चोरो पर आधारित ; 'लालसा' .एक सामजिक स्वांग च।



मुंबईम बलदेव राणा को  गीत गद्य नाटक 'माधो सिंग भंडारी ' कति दें  मंचित ह्वे।  बलदेव राणान  दस का करीब नाटक मंचित करिन अर यामादे ' नंदा ज़ात यात्रा (२००९ बिटेन बरस्कुल ) एक अभिनव प्रयोग माने जांदो।

इनि  मुंबईम  कुंदन सिंग नेगीन बि  पर्वतीय नाट्य मंच (१९८६ बिटेन अब तक) कुणि  नाटक लेखिन अर दिखणेरूं तै    'लाटो ब्यौ' और 'मामा बाबु' खूब पसंद ऐन।

श्रीनगर व अन्य स्थानों में मंचित 'जयद्रथ वध' /कमल व्यूह' भी अपण आपम  एक जण्यु-मण्यु    नाटक च।

डा. नन्द किशोर हटवालs द्वी नाटक मंचित ह्वेन।

कुलानन्द घनसालाs 'उज्याड़' नाटक मंचित हवे गे। 

औजी समाज की खस्ता हालात अर ख़तम हुन्दि गढ़वाळि  संस्कृतिव  अपसंस्कृति को आण  पर विचार करदारो गिरीश सुंदरियालs स्वांग 'कब खुललि रात' सन 2012म छप।   

यूं नाटकों अध्ययन से साफ़ च बल गढ़वाळि नाटक  गढ़वाळि साहित्यम कविता से बि बड़ो असरदार साहित्य च। सन 1912 बिटेन पवाण लगांदी गढ़वाळि नाटक विधा एक महत्वपूर्ण विधा च। गढ़वाळि नाटकुंम भौं-भौं विषय, बावन त्रेपन  भाव पाए गेन। नाटक रचंदेरून सामयिकता अर नाट्य साहित्यौ दगड़ पूरो तालमेल  कार।  सबि ना सै पण जादातर नाटककारोन प्लौट, थीम, चरित्र चित्रण, विचार, प्रतीकों से बिम्ब बणाण, बचऴयाण (बात चीत), समय , वर्ग, रस अर भावो  आदि पर  पूरो ध्यान दे।           


Copyright@ Bhishma Kukreti 18 /02/2013


सन्दर्भ: भीष्म कुकरेती द्वारा 150 से जादा गढ़वाळि नाटकों की समीक्षा

http://www.merapahadforum.com/uttarakhand-language-books-literature-and-words/information-about-garhwali-plays/60/





Bhishma Kukreti

Nanda Jat Jagar: Awareness, wakeful Rituals about Goddess Nanda Devi -10
Auspicious Bath of Gaura Devi before marriage
                             Internet Presentation: Bhishma Kukreti
(Notes on folk songs about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Garhwalabout auspicious bath by Nanda Devi; folk songs Chamoli Garhwal about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Rudraprayag Garhwal about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Pauri Garhwal about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Uttarkashi Garhwal about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Dehradun about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Kumaun about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Udham Singh Nagar Kumaun about auspicious bath by Nanda Devi;  folk songs from Ranikhet Kumaun about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Almora Kumaun about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Champawat Kumaun about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Bageshwar Kumaun about auspicious bath by Nanda Devi;  folk songs from Pithoragarh Kumaun about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Nainital Kumaun about auspicious bath by Nanda Devi]   
              To take an auspicious bath is mandatory in Hindu marriage. Gaura Devi also takes auspicious bath before marriage. The following folk song narrates all the necessary rituals at the time of bride taking auspicious bath. 

नंदा जात जागर -फड़कि भाग-10
(s = आधी अ )
मूल संकलन - डा नन्द किशोर हटवाल , देहरादून

गौराs खऴका(मंगल स्नान )
रिसासौउ मांग मंगल स्नान
गौरा जीs मंगल स्नान
न्यूती के ल्यावा सिद्ध गणेश
न्यूती के ल्यावा बर्मा जी को च्यालो
बर्मा कु च्यालो बेद पढ़ोलू
न्यूती के ल्यावा तिलबाड़ी का तील
न्यूती के ल्यावा जौबाड़ी का जौ
न्यूती के ल्यावा जौ सार्य़ा का जौ
न्यूती के ल्यावा ऐरवाऴया च्येली
गौरा को खळका बैठाला जी
गौरा को खळकु नायेणु
ल्यो मेरी जिया तांबा की रै बारी
ल्यो मेरी जिया तातु तत्वाणी
ल्यो मेरी जिया स्योळु पाणी
गौरा इसूर को खळकु अस्नान
डांडा लै कुयेड़ी सर्ग लै बादल
कख बिटे आया पाणि का बूँद
अब ह्वे गे खळकु अस्नान जी
गौरा को खळकु नायेणु जी
अब ल्यावा बराई लाणु
अब ल्यावा बार पैरावा जी
को द्योउ खळका द्यों
इसुर खळका बैठालो द्यो
न्यूती लीयाया बामण को च्येलो
बरमा को च्येलो खळका करलो
बरमा को च्येलो बान द्योलु
न्यूती के मंगाया न्यूती के मंगाया
एरवाल्या च्येली
एरवाल्या च्येली मंगल लगाली
गौरा का मंगल स्नान
सभी औरतें मंगल गीत गा रही हैं --
रिसासु में मंगल स्नान होगा
गौरा जी का मंगल स्नान होगा
सिद्ध गणेश को निमंत्रण भेजा जाएगा
बर्मा जी के शिष्य को निमंत्रण भेजा जाएगा
वर्मा जी का शिष्य वेदपाठ करेगा
तिल्वाड़ी से तिल मंगाए जायेंगे
जौबाड़ी से जौ मंगाए जायेंगे
जौ साड़ी से हरे जौ के पौधे मंगाए जायेंगे
मंगळेरी की चेली को निमंत्रण भेजा जाएगा
गौरा को स्नान हेतु चौकी पर बिठाया जाएगा
ताम्बे की बर्तन में स्नान हो रहा है
गर्म पानी से स्नान हो रहा है
ठंडे पानी से स्नान हो रहा है
गौरा व इश्वर का स्नान हो रहा है
इसी समय पर्वत कुहरा लेकर आये हैं , इसी समय आकश बादल ले आये हैं
गौरा जी को ब्योली के वस्त्र पहनावों
दिया जलावो
इश्वर को भी स्थान पर बिठावो
ब्राह्मण के शिष्य को निमंत्रण दो
ब्राह्मण का शिष्य मंगल स्नान के बाद मन्त्र पढ़ेगा
ब्रह्मा का शिष्य बाने देगा
मंगळेरी की चेली मांगळ गीत गायेगी

    Auspicious Bath by bride Gaura Devi

There is auspicious bath by bride Gaura in Risasau
There is auspicious bath by bride Gaura
Please Invite Sidh Ganesh for auspicious bath by bride Gaura
Please invite Barma's disciple for ritual performances
Pl bring sesame from Tilwada(field of sesame)
Pl bring barley seeds from Jauvada
Pl bring barley plants from field
Pl invite auspicious singers
Gaura is sitting on the bath chauki
Gaura would take auspicious bath
The water is in copper vessel
There is warm water
There is cold water
The hills bring fog
The sky brings cloud
The auspicious bath is over
Now take dress for bride Gaura
The disciple of Brahman will chant rituals
The disciple of Brahma will perform Khlka
The disciple of Brahma will perform ban
The woman will sing auspicious songs


Copyright@ Bhishma Kukreti, for interpretation, 19/2/2013
Read more on dressing, make up for bride Nanda Devi in Nanda Jat Jagar-11
Notes on folk songs about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Garhwalabout auspicious bath by Nanda Devi; folk songs Chamoli Garhwal about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Rudraprayag Garhwal about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Pauri Garhwal about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Uttarkashi Garhwal about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Dehradun about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Kumaun about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Udham Singh Nagar Kumaun about auspicious bath by Nanda Devi;  folk songs from Ranikhet Kumaun about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Almora Kumaun about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Champawat Kumaun about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Bageshwar Kumaun about auspicious bath by Nanda Devi;  folk songs from Pithoragarh Kumaun about auspicious bath by Nanda Devi; folk songs from Nainital Kumaun about auspicious bath by Nanda Devi to be continued...

Bhishma Kukreti

गढ़वाली हास्य व्यंग्य

हौंस इ हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा



                                  कुत्ता भुकणो  त वै तै हड्डी दे द्यावा 



                                  चबोड़्या-चखन्यौर्या: भीष्म कुकरेती


(s =आधी अ )



" ए मेरि ब्वे मोरी ग्यों।पुटकुंद भारी पीड़ा होणि च।"

" ह्यां ! त डाक्टरम जादि'

" गे त छौ।"

" त क्या ब्वाल डाक्टरन?"

"क्या बुलण छौ। डाक्टरन बोल बल  पिस्युं धणिया मा घ्वाड़ो लीद, जीरो मा जंगली बीज, काळी मर्चम पपीता बीज, लाल मरचम कुज्याण को कैमिकल मिलायुं मसालों से म्यार पेट दुखणु च। डाक्टर बुलणु च बल मसालोंम मिलावटन ऐपेडिमिक ड्रोप्से हूणों पूरा अवसर छन।"

" हे नागराजा! नि खैन भोळो बग्वाळ यी   ब्यापारी जु साफ़ मसालोंम अंट संट चीज मिलाणा छन।"

" हे बुबा मोरी ग्यों। नि बचदो मी। सांस रुकणी सि च।"

" ह्यां किलै छे कराणि?"

" अरे जु दूध पीन्दो छौ  वैमा बल यूरिया मिलायुं छौ अर मि मिलावटी दूध पेकि बीमार पोड़ी ग्यों। वैद जी तै  अंदेसा च बल ह्वे सकुद च मी तै इनक्रीज्ड साल्वेसन,उन्द-उब (उलटी-दस्त ),अबडोबिनल क्रैम्प,बार बार तीस लगणों अंदेसा बि च।"

" बांजि पोड़ि जैन यूंकि कूड़ि जु दूध मा यूरिया अर भौं भौं सिंथेटिक दूध मिलांदन। बजर पोड़ि जैन यूंकि कूड़िउंद जु यी घीमा, चीजमा, पनीरमा, खोयामा   कोलतार डाइज जन केमिकल  मिलान्दन, दहीमा  अर लोगुं जिन्दगी से खिलवाड़ करदन।"

" अरे यी कथगा लोग  अस्पताल किलै जाणा छन?"

" यी सबी एकि दुकान बटी रासन खरीददा छा अर अब पता चौल बल ग्यूं-चौंळम सुफेद पथर, बजरीम बळु मिऴयुं रौंद छौ या फंगस इन्फेक्टेड ग्यूं -चौंळ,खाणों  तेलम रेनसीड तेल, दाळुम लथाइरस सैटिवास जन विषैली दाळ मिलीं रौंद छे"

"तो?" 

" तो क्या, क्वी डाहिरिया को रोगी ह्वे गे, कै पर लथाइरिज्म की बीमारी ह्वे ग्यायि अर कै पर लकवा बि ह्वे गे।"

" जा तड़म लगी जैन यूं कुनेथ्युं पुटकी। ये मेरि ब्वे थ्वड़ा सि नफाs बान मनिखों जिन्दगी लीणा छन यी राक्षस ?"

" अरे या लोगुं बड़ी लंग्त्यार कख जाणि च?"

  " यी सुब मिलावटी फल या भुजि खैक बीमार हवे गेन।ब्यापारी फल अर साक भुजी उमर  बढाणो बान फलों या सबज्युं पर इंजेक्सन दीन्दान अर वांसे इन भुजि खाण वळ  लोग भौं भौं बीमारीन ग्रसित ह्वे गेन।"

" घाम लगि जैन यूं ब्यापार्युंकी मौ ! जो इन दुष्कर्म करणा छन।"

" ये मेरि ब्वे ! ये मड़घटम चारोंतरफ न सौ द्वी सौ मुर्दा किलै आना छन/"

" कुछ लोग मिलावटी दारु पेक मोरी गेन अर कुछ लोग विषैलो शिकार-मटन-मच्छी खैक मोरी गेन।"

' ये मेरि ब्वे ! त सरकारी अधिकारी क्या करणा छन?"

" कुत्तों तें हड्डी दे द्यायो त कुत्ता बि भुकण बंद कौरि दीन्दो।"

"मतबल?"

"मतबल या च बल अधिकारी रिश्वत खैक मिलावट करण वाळु तै खुलि छूट दीणा छन त इन मा मिलावट रुकी नि सकदी।"

" हे भगवान मेरो भारत को यी हाल?"

" हां! सोमनाथ मन्दिर जब लुट्याणु छौ त हथियार उठाणों जगा भारतीय भगवान तै यि त याद करणा छया।"

"तो हथियार इ एक विकल्प बच्युं च ?"

" मि क्या बोलुं ? यो त भारतीयों तै इ सुचण कि क्या सै च अर क्या गलत च " 





Copyright@ Bhishma Kukreti 20/2/2013

Bhishma Kukreti

Nanda Jat Jagar: Awareness, wakeful Rituals about Goddess Nanda Devi -11
              Ornamentation of Gaura Devi (Nanda Devi)
                             Internet Presentation: Bhishma Kukreti
[Notes on customary rituals/folk songs from about ornamentation of Goddess Nanda Devi; customary rituals/folk songs from Chamoli Garhwal region about ornamentation of Goddess Nanda Devi; customary rituals/folk songs from Rudraprayag Garhwal about ornamentation of Goddess Nanda Devi; customary rituals/folk songs from Pauri Garhwal about ornamentation of Goddess Nanda Devi; customary rituals/folk songs from Tihri Garhwal about ornamentation of Goddess Nanda Devi; customary rituals/folk songs from Uttarkashi Garhwal about ornamentation of Goddess Nanda Devi; customary rituals/folk songs from Dehradun Garhwal about ornamentation of Goddess Nanda Devi; customary rituals/folk songs from Pithoragarh  Kumaun about ornamentation of Goddess Nanda Devi; customary rituals/folk songs from  Almora Kumaun about ornamentation of Goddess Nanda Devi; customary rituals/folk songs from  Nainital Kumaun about ornamentation of Goddess Nanda Devi; customary rituals/folk songs from  Ranikhet Kumaun about ornamentation of Goddess Nanda Devi; customary rituals/folk songs from Champawat  Kumaun about ornamentation of Goddess Nanda Devi; customary rituals/folk songs from  Bageshwar Kumaun about ornamentation of Goddess Nanda Devi; customary rituals/folk songs from  Udham Singh Nagar Kumaun about ornamentation of Goddess Nanda Devi]

नंदा जात जागर -फड़कि भाग-11
(s = आधी अ )
मूल संकलन - डा नन्द किशोर हटवाल , देहरादून

        गौराs सिंगार

ल्यो जिया रेशमी रुमाल जी
ल्यो जिया कमरी पटुवा जी
ल्यो जिया मखीमल आंगी जी
ल्यो जिया शाल दुश्वाला जी
ल्यो जिया बार बैगौंणा जी
ल्यो जिया पायो प्वोलिया जी
ल्यो जियाबारा झंवोरा जी
अब ल्यावा हाथ्यों पौंछी जी
अब ल्यावा सोना की चूड़ी जी
ल्यो जिया सिरम्वोरी नथ जी
ल्यो जिया टाटू तिमण्या जी
ल्यो जिया झालूर्या बेसर जी
ल्यो जिया कानूं कुंडल जी
अब पैर्या बारा बारा जेवर जी

         गौरा का श्रृंगार

मेरी जिया के पास रेशमी रुमाल जी
मेरी जिया ने पहना कमर का पटुवा जी
मेरी जिया ने पहना मखमली अंगरखी जी
मेरी जिया ने ओढ़ा शाल दोशाला जी
मेरी जिया ने पहना बाढ़ बैंगाणा जी
मेरी जिया ने पहना पावों की पायजीब जी
मेरी जिया ने पहना बढ़ झंवोरा जी
मेरी जिया ने पहना हाथों की पौंछी जी
मेरी जिया ने पहना सोने की चूड़ियाँ जी
मेरी जिया ने पहना सिरमोरी नाथ जी
मेरी जिया ने पहना टाटू तिमन्या जी
मेरी जिया ने पहना झालरदार बेसर जी
मेरी जिया ने पहना कानो के कुंडल जी
अब मेरी जिया ने बढ़ जेवर पहने जी

   Ornamentation of Gaura or Nanda Devi
My darling Gaura keeps silk hand kerchief
My darling Gaura puts on Patuva on waist
My darling Gaura puts on a top or  upper garment
My darling Gaura puts on Shawl-Dushwal
My darling Gaura puts on twelve biangana
My darling Gaura puts on Payal ornament for foot
My darling Gaura puts on twelve Jhanvora
My darling Gaura puts on Paunchi ornament for hands
My darling Gaura puts on gold bangles
My darling Gaura puts on Srimaurri nose rings
My darling Gaura puts on Tatu Timanya ornament
My darling Gaura puts on Beasr an ornament
My darling Gaura puts on ear ring ornaments
My darling Gaura puts on twelve ornaments
Copyright@ Bhishma Kukreti, for interpretation, 20/2/2013
नंदा जात जागर -फड़कि भाग-12म बाँचो कैलाशम ब्यो तयारी
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