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Articles By Bhisma Kukreti - श्री भीष्म कुकरेती जी के लेख

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 26, 2009, 12:54:53 PM

Bhishma Kukreti

  दांतु टुपला (Crown )
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चखन्यौर्या  स्वांग : भीष्म कुकरेती
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दांतु डाक्टर -हेलो
दांतु मरीज - हेलो
दांतु डाक्टर - क्या हाल छन ?
दांतु मरीज -सामन्य अर कन।
दांतु डाक्टर -बढ़िया , बढ़िया , गनीमत च। अच्छा तुम दांत ब्रश्यांद छा कि ना ?
दांतु मरीज - ब्रश्यांद ?
दांतु डाक्टर - अरे गढ़वाली म ब्रश करणो कुण ब्रश्याण इ त बुले जाल कि ना ?
दांतु मरीज - हैं मि त समजदो छौ बल तुम दांतु डाकट छा पर तुम गढ़वाली व्याकरण का डाक्टर ज्यादा लगदा। 
दांतु डाक्टर - मि पुछणु छौं बल तुम रोज ब्रश करदा छा कि ना ?
दांतु मरीज - तुमर मतबल मि दांतु टुपला ब्रश करदो छौ कि ना ?
दांतु डाक्टर - हाँ हाँ टीथ क्रॉउन ब्रशिंग
दांतु मरीज - ह्यां तुमर बदौलत म्यार क्वी बि दांत नी बच्यूं सब दांत त तुमन टुपलों से रिप्लेस कौर आलिन।
दांतु डाक्टर - ः पर तुम नकली टुपला ब्रश करदा छा कि ना ?
दांतु मरीज - ह्यां पर वो तो धातु टुपला छन कौन सा सड़ जाल जु मि ब्रश कौरुं !
दांतु डाक्टर - फिर बि ब्रश करण इ चयेंद।
दांतु मरीज - ह्यां पर किलै ?
दांतु डाक्टर - ब्रश त   .. खैर जरा तुमर जिबाड़ मतबल जबड़ा चेक करण पोड़ल।  जरा जबड़ा ख्वालो। ये मेरी ब्वे ? हे ब्वे ! ओ  माई गॉड
दांतु मरीज - ह्यां क्या ह्वाइ ?
दांतु डाक्टर - भौत सा टीथ क्रॉउनु शेप खराब ह्वे गे।
दांतु मरीज -मतबल बदलण पोड़ल ?
दांतु डाक्टर -हाँ पर कनै पता चल ?
दांतु मरीज  (आपरी मन म ) - पूछेर म जावो तो दिबता द्वेष बताल ही दांतु डाक्टर म जावो तो दांत रिप्लेसमेन्ट  की बात होली ही।
दांतु मरीज - जी बस अंथाज
दांतु डाक्टर -अच्छा टीथ क्राउनुं रंग कन पसंद च ?
दांतु मरीज - जबड़ा म चार पांच दांत त बच्यां छन त कटना रंग ?
दांतु डाक्टर - द्याखौ पील दांत तो तुम सफेद रंगौ टुपला से रिप्लेस कारो।
दांतु मरीज - अर सफेद दांत ?
दांतु डाक्टर -पीला टुपला से रिप्लेस करण ठीक च।
दांतु मरीज - ह्यां पर मीम इथगा पैसा नीन। अर  दांतुं कुण इंस्युरेन्स स्कीम बि नी।
दांतु डाक्टर - क्वी बात नी मीम मंथली इंस्टालमेंट की स्कीम बि च बस द्वी टका सालाना ब्याज ज्यादा च।  नो फॉर्म फाइलिंग फॉर्मलिटीज।
दांतु मरीज - अर जु मि इन्स्टालमेन्ट नि भरल तो ?
दांतु डाक्टर -  हर मैना त इख आणि पोड़ल तो इन्स्टालेंट उगाई ल्योल।
दांतु मरीज - मतबल तुमर हथ हर मैना म्यार जेब पुटुक राल ही ?
दांतु डाक्टर - इखम द्वी राय नी।  एक दै जु तुम नर्सिंग  ठौ  अपर भीतर  धारो त हर साल पुजण इ पोड़ल।  ऊनि एक दैं दांतु डाक्टर म आवो तो हर मैना दक्षिणा दीणो आण इ पोड़ल।
दांतु मरीज - अच्छा त सब दांतु टुपला बदली कर द्यावो इन्स्टालमेन्ट स्किम म।
दांतु डाक्टर - वेरी गुड।  भैर रिसेप्सन से अगला हफ्ता टुपनणा रिप्लेसमेंट का अप्वाइंटमेंट ले ल्यावो। 
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प्रशिक्षण हेतु एक विदेशी मनोलॉग  कु  अनुवाद





Bhishma Kukreti

 

रुड़ी :  फलुं  बान डबखणो मौसम (संस्मरण)
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खुदेर : भीष्म कुकरेती
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  मुंबई म जंगळौ नजीक ड्यार हो तो क्या बुन तब ! मि अब नेशनल पार्क याने राष्ट्रीय जंगल उद्यान का बिलकुल बगल म रौंद।  हमर बिल्डिंग अर पार्क मध्य सड़क अर सरकारी दिवाल च बस। सड़क क नजीक सरकारी मुलाजिमों भरस्टाचार मानसिकता , झुग्गी निर्माताओं लाभ प्रवृति से अनऑथराइज्ड बस्ती बस   झुग्गी छह , मुंबई म जगा नी त यु हूण इ छौ।  झुपड़ी दूर दूर छन बीच बीच म बण्या डाळ बूट छैं छन।  बेर या केर का कंटीली झाड़ी  बि छन।  मि तै जब बि मौक़ा लगद मि जंगळ दिखण लग जांदु।  ब्याळि  दुफरा म भैर  भयंकर दुफरा घाम छौ मि एयर कंडीशंड रूम या कुठड़ी से भैर राष्ट्रीय वन तै दिखणु छौ।  अपर ड्यार म मि अर मेरी ब्वे नेशनल पार्क तै दिखणम बिगरौ समजदा।  हम द्वी अबि तक गंवड्या ही छंवां बाकी सब अर्बन मेंटेलिटी इ न अर्बन जनम्या छन  ।
दुफरा म चटीलो घाम म मीन द्याख बल तीन चार बच्चा बेर या केर का डाळ म चढ़िन , ऊंन बेर तोड़ीन , फिर हैंक बेर का तरफ गेन।  डाळम चढ़िन , बेर तोड़ीन अर तिसर डाळ तरफ चल गेन।  उना कुछ हौर डाळ बि छा तो नि दिख्यायि बल ऊंन कथगा डाळ ुं बिटे बेर तोड़िन धौं। 
   मि तैं गाँव याद ऐ गे।  रुड्युं दिन छुट मा जब तक हमर उमर तास चौपड़ खिलण जोग नि ह्वे (मतलब वयस्क हम तै अपर दगड़ नि बैठांद छा ) तब तक हम बच्चा दुफरा म घर बार म सीणो जगा  पुंगड्युं पुंगड़ी डबखणां रौंद छा।  रुड़ी मतलब गढ़वाळम फलुं मौसम।  सबसे पैल सौंग छौ गांव  नजीक या दूर कच्चा आम टिपण या तुड़ण , खुट्या आम खाण अर बकै कच्चा आमुं तै अपर अपर  चिन्हायीं जगा म खड़्यार दीण  फिर कुछ समय बाद यदि आम पक गे तो खाई लींद छा बिंडी ह्वावन त ड्यार बि लये आंद छ।  हमर गाँव म द्वी तरां आम छा क्या छन  एक बड़ा बड़ा आम याने राजापुरी अर दुसर छुट आम याने बड़ हड्यल /गुठली वळ आम।  बड़ा आम पर सामूहिक गांव वळुं हक्क छौ जु पकण पर बंटे जांद छौ।  बकै छुट आम पकण से पैलि बच्चा या बड़ों गीच चल जांद छा।  कुछ आम एक मुंडीत क बगीचों म बि छा  , यूं आमुं चोरी कठिण छौ किलैकि ऊक जोगी ददा जी रात बि  जग्वाळ करदा छा। 
   कच्चा आम ज्यादा नि खै सकदा छा किलैकि हर साल एक या द्वी नौन -नौनी तै काटण लगदी छौ अर ऊंका दुःख ही शिक्षण संस्थान छौ बल बिंडि  कच्चा आम नि ख़ांण। 
   आम का बाद  बेडु तिमल पर हमला की बारी हूंदी छे।  कच्चा फलूं से शुरू ह्वेक गळगळा फल तक यात्रा हूंदी छे।  जन जन रुड़ी अगनै सरकदी  छे बेडु तिमल पकण प्रक्रिया शुरू हूंदी छे।  रुड़युं अंतिम पड़ावम तिमल पर नेक्टर'सफेद शहद जन  आण लग जांद छ तो हमर डबखण म ऑवर बि गति ऐ जांद छे।  बेडु बारा म आम धारणा छे अब ज्यादा खाण से काटण लगद त हम बच्चों का जोर तिमलों पर बिंडी हूंद छा। अर तिमलों बान  एक दिन म दुफरा म दूर दूर दु दु तिन तिन  मील भ्रमण ह्वेई जांद छौ।  कबि कबि दुसर गाँव चौहद्दी म बि चल जांद छौ पर जंगली फल खाण , लिजाण चोरी नि मने जांद छौ। बड़ा डाळ म चढ़दा छा छुट सिखदा छा। 
हमर गांवम नजिक हिसर  कम था तो हम तै दुसर गांव याने ग्वील वळुं पुंगड़ु पुंगड़ ढंढकण पड़द छौ।
पणया या भ्यूं काफळ कुण डबखण नि पड़द छौ।  मथि पंद्यरम जावो खाणै त खावो नि खाणै त नि खावो कौन सा बसंती का टैक्स दीण छौ।   
  जैक गाँव म बांज बि नि होला वै गाँव म काफळो डाळ खुज्याण इनि छौ जन बिरळौ औंर खुज्याण।  त पता नि बल बच्चा काफळ कन टिपदा या कलेक्ट करदा छ।
  किनग्वड़ , फळिंड , मेळू आदि बरसात का ही फल छ तो यूं तै कट्ठा करणो काम बरसात म इ हूंद थौ। 
  एक बात जो अमूनन हूंद छे बल लड़का या नौन त फल अफु खै जांद छा घर नि लांद छा  किन्तु चार साल की लड़की बि कुछ फल अवश्य घर लांदी इ छे।  लड़की चार साल म इ ब्वै ददि रूप ले लींदन। 


Bhishma Kukreti

   
चाइनीज होटलम जैन मापो टोफू विदाउट स्प्रिंग अनियन
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मजाक मसखरी : भीष्म कुकरेती
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सि  वै  दिन ग्रेट  संघाई चाइनीज होटलम भोजन छौ।    उन मि चाइनीज , इटालियन , मैक्सिकन कुजीन भौत पसंद करदो किन्तु दुसरा मौणी मा अपर जेबन ना।   अपण  खीसा से विदेशी भोजन म मजा  त नि आन्दु ।  हाँ त तै बगत दसेक लोक रै होला। तौं मादे छै शाकाहारी छ अर यूं मादे चार जैन छ द्वी अबि अबि वेज बणीन त जोर जोर से वेटर पर किराणा छा कखि नॉन वेज करी मिक्स नि ह्वे जाव् हाँ।  चार पक्का हिंदी छा जु आज सुंगर याने पोक का पूरा मजा लीण चाणा छा तो द्वी मुसलमान पोक से दूर इ रौण चाणा छा।
   जब शुरू ह्वे त वेटरन ड्रिंक्स बाराम पूछ त सब्युंन चाइनीज टी की फरमाइश करि।  जबकि अमूनन हिन्दू हो , हिन्दू जैन हो , सिख हो या मुसलमान हो हिन्दुस्तानी भजन से पैल चाय पीण त छोड़ो दिखण बि पसंद नि करदो केवल चाइनीज होटलम भोजन से पैल चायपान  ।  मीन लिम्बु पाणी मंगै दे , वेटर त ना पर बकै सब भोजन प्रेमी आश्चर्य म चली गेन जन बुल्यां मीन  जैन मंदिर आहाताम नॉन वेज मंगाई दे हो। 
स्टार्टर आयी तो एक बिरळs तरां गुर्राणु छौ बल मी तै चिली गार्लिक प्राउन नि चयाणु छौ।  त एक शाकाहारी न स्टार्टर कुछ बि नि खायी , किलैकि वींक कौस्मैटोलिगिस्टन में मीनू खाणै सलाह जि दियीं छे।
कुछ देर बाद बातचीत भोजन अर भारतीय संस्कृति पर अटक गे।
क्वी रुणु थौ बल इडली बड़ा साम्भर से   पाचक ब्रेकफास्ट क्या होलु किन्तु हम चाइनीज डॉजियांग , टंगबाओ गीजी गेवां। फिर चाइनीज भोजन की प्रशंसा गीत लगण मिसेन।
जैन महिला न बोली - कबि म्यार ड्यार आवो तो मि असली जैन भोजन , जैन मक्खन उसल खलौल।
इथगा मा एक नॉन वेज महिला न बोली - म्यार ड्यार ऐला तो  मि नली निहारी खलौल।  सब नॉन भेज नली निहारी की प्रशंसा चौंफळा लगाण मिसे गेन। जैन लोगुं कुण नो गार्लिक , नो अनियन। 
जब में कोर्स आयी त वेटरों होसियारी दिखण लैक छै , मुस्लिम का आस पास पोक /सूअर का मांस नि आण चयेंद , जैन लोगन पास क्वी बि नॉन वेज का अंस नि दिखेण चयेंद।  तो हिन्दू नॉन वेज टेरियन का पास बीफ नाम नि आण चयेंद।
   असली भारतीय संस्कृति दर्शन दिखणो मिलणु छौ।  अलग अलग भोजन शैली किन्तु सामंजस्य ह्वे जांद। 

Copyright @ Bhishma Kukreti मई 2019

Bhishma Kukreti

Gaun Gali: A Garhwali Short Story illustrating hard hitting changes in rural Garhwal
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(Chronological History and Review of Modern Garhwali Short Stories series)
(Review of Short story Collection 'Meru Pahar 'written by Rakesh M. Thapliyal-1)
(Review of 'Ganv Gali a short story written by Rakesh M. Thapliyal )
Review by: Bhishma Kukreti (Literature Historian)
   'Gaun Gali' is first Garhwali short story of story collection 'Meru Pahar ' by Rakesh Mohan Thapliyal (born in Tehri, 1954) . Rakesh Mohan is famous for penning down memoir of sunken Tehri or the sunken capital of Tehri Riyasat too.
      Gaun Gali is the story of a migrated Garhwali visiting his village after many years  narrated through dialogues. The migrated Garhwali toured his village for attending a marriage party .The writers illustrate all changes happening through dialogues between two or many characters. The liquor consumption has become very common and the Hero tastes every bit of liquor in the marriage as soon as he gets down from the bus to his village bus stop. The story takes the readers back thirty years and compares the today's situation. The changes frustrate the hero or Migrated Garhwali that there are good comfortable physical changes but many unavoidable changes now dangerous for the society. The story writer is himself the migrated Garhwali and plays a neutral man role for narration the situation. 
  Story teller also shows now , cold relationship between him(Migrated one) and his parents due to his ignoring them due to unknown conditions. Thapliyal nether praises the new situation nor criticizes but the story tells that the story teller is injured and heartbroken
  The style is definitely different that the narration is through dialogues but story writer did not use inverted coma or name of dialogues.   
    The language has Tehri dialects but is not hurdle in speed for story. The dialogues are s per character and readers enjoy each dialogue.
   Sanjay Kothiyal the editor of Yogvani rightly states that the readers feel the charcters as seen by their own eyes.
This author enjoy the story .
Copyright@ Bhishma Kukreti
 
 
     


Bhishma Kukreti

 Teelu Rauteli: Drama illustrating Sacrifice by Teelu for her motherland

(Chronological History and Review of Modern Garhwali Dramas series )
(Review of Garhwal Drama 'Teelu Rauteli')
(Review of Garhwali Dramas created by Dr Ranvir Singh Chauhan )
Review by: Bhishma Kukreti (Literature Historian)
      In fifteenth century, Teelu Rauteli had been famous brave girl of Garhwal that fought for human freedom and destroying terrism in Garhwal border by Katyri Thakur. Famous Historian Dr Ranvir Singh Chauhan wrote one act fine drama on the basis of story of Teelu Rauteli.
  Teelu Rauteli was daughter of Bhopu Gurla Rawat of Bungi Jamindar /Thokdar . The nearby Katyri Jmindar used to invade Garhwal and used to loot the people of Garhwal. Thokdar used to make planning for taking Katyuris out far from Garhwal. Katyuris killed Boongi Thokdar and his sons. Then, Teelu Rauteli  and her associates fought with Katyuri sardar. However, when she was taking bath , the nemies killed her by deceptive methods.
Dr Chauhuan used prose and poems and lyrics for dramatization of famous folklore of Garhwal. Dr Ranveer has been successful in dramatizing the story .
  Dr Chahuhan used the common folk songs and created lyrics by himself too
ओ कांडा का कौथिग उर्यो
                   ओ तिलु कौथिग बोला
                   धका धे धे   तिलु रौतेली  धका धै धै
                  द्वी बीर मेरा रणशूर ह्वेन
                   भगतु पत्ता को बदला लेक कौतिक खेलला
                 धका धे धे तिलु रौतेली धका धै धै
                 अहो रणशूर बाजा बजी गेन रौतेली धका धै धै
                बोइयों का दूध तुम रणखेतु बतावा  धका धै धै
                तीलु रौतेली ब्वादा रणसाज सजावा धका धै धै
                इजा मैणा यूं बीरूं टीका लगावा , साज सजावा ,धका धै धै
                 मै तीलु  बोदू जौंका भाई होला , जोंकी बैणि होली
                                                 ओ रणखेत जाला धका धै धै
                 बल्लू प्रहरी टु मुलक जाइक धाई लगै दे धका धै धै
                                           बीरों के भृकुटी तण गे धका धै धै
                                           तीलु रौतेली धका धै धै
                ओ अब बूड़ी सलाण नाचण लागे धका धै धै
                 अब नई जवानी आइगे धका धै धै
                 बेलू देबकी द्वी सखी संग चली गे धका धै धै
                 ओ खैरा गढ़ मा जुद्ध लगी गे धका धै धै
                  खड़कु रौत तखी मोरी गे  धका धै धै
                                       तीलु रौतेली धका धै धै
                   ओ काण्ड को कौतिक उर्यो गे धका धै धै
                   तीलु रौतेली तुम पुराणा हथ्यार पुजावा धका धै धै
                   अपणि ढाल कटार तलवार सजावा धका धै धै
                   घिमंडू की हुडकी बाजण लगे धका धै धै
                  ओ रणशूर साज सजीक ऐगे तीलु रौतेली धका धै धै
                   दीवा को अष्टांग करी याल धका धै धै
                    रण जीति घर आइक गाडुल़ो छतर रे धका धै धै
                    धका धे धे तीलु रौतेली  धका धै धै
                   पौंची गे तीलु रौतेली टकोली भौन धका धै धै
                    यख बिद्वा कैंत्युरो मारियाले धका धै धै
                   तब तीलु पौंची गे सल्ड मादेव धका धै धै
                     ओ सिंगनी शार्दूला  धका धै धै
                   धका धे धे तीलु रौतेली धका धै धै
                   येख वख मारी कैकी बौडी गे चौखाटिया देघाट धका धे धे
                     बिजय मीले पण तीलु घिरेगे धका धै धै
                    बेल्लू देबकी रणखेतुं मा इखी काम ऐन
                   इथगा मा शिब्बू पोखरियाल मदद लेक आइगे धका धै धै
                   अब शार्दूला लड़द पौंची कालिंकाखाळ
                सराइंखेत आइगे घमासान जुद्ध ह्व़े धका धै धै
                शार्दूला की मार से कैंत्युरा रण छोडि भाजी गेन धका धै धै
                रण भूत पितरां कल तर्पण दिंऊला  धका धै धै
                यख शिब्बू पोखरियाल तर्पण देण लग्ये  धका धै धै
                सराईखेत  नाम तभी से पड़े धका धै धै
                यख  कौतिक तलवारियों को होलो  धका धै धै
                ये तें खेलला मरदाना मस्ताना रणवांकुर जवान धका धै धै
                सरदार चला तुम रणखेत चला तुम धका धै धै
                धका धै धै  तीलु रौतेली धका धै धै
                ओ रणसिंग्या रणभेरी नगाड़ा बजीगे  धका धै धै
                ओ शिब्बू ब्वाडा तर्पण करण खैरागढ़ धका धै धै
                अब शार्दूला पौंची गे खैरागढ़ धका धै धै
                यख जीतू कैंत्युरा मारी , राजुला जै रौतेली अगने बढी गे धका धै धै
                 रण जीति सिंगनी दुबाटा मा नाण लगे धका धै धै
                  राजुलात रणचंडी छयी अपणो काम करी नाम धरे गे धका धै धै
                  कौतिका जाइक खेलणो छयो खेली याला
                   याद तौंकी जुग जुग रहली धका धै धै
                   तू साक्षी रैली खाटली के देवी धका धै धै
                   तू साक्षी रैली स्ल्ड का मादेव धका धै धै
                   ओ तू साक्षी रैली पंच पाल देव
                    कालिका की देवी लंगडिया भैरों
                    ताडासर देव , अमर तीलु, सिंगनी शार्दूला  धका धै धै
                    जब तक भूमि , सूरज आसमान
                     तीलु रौतेली की तब तक याद रैली
                     धका धे धे तीलु रौतेली धका धै धै
The drama is suitable for staging the play . Chauhan is scussful in characteriszation of associates of Teelu Rauteli as we knew from folk lore.
Drama: Teelu Rauteli (One Act)
From Hantya a A Garhwali Drama collection (2003)
By :Dr Ranvir Singh Chauhan
Pub by Radhika Prakashan  , Kotdwara Garhwal

Copyright@ Bhishma Kukreti




Bhishma Kukreti

Chinta: A satirical Garhwali Stage play (Skit) based on Political games [/b]

(Chronological History and Review of Modern Garhwali Stage Plays)
(Stage Play 'Chinta' written by Kula Nand Ghanshala: A Review  )


Review by: Bhishma Kukreti (Literature Historian)

  Kula Nand Ghanshala is credited for writing, publishing and staging height numbers of Modern Garhwali dramas till date in the history of Modern Garhwali Dramas. Madan Duklan rightly states that Kula Nand is University for Garhwali drama students.
         'Chinta' a  small satirical stage play is  one of fine drama of Drama collection 'Rangchhol' by Kula Nand Ghanshala.
   There are only three characters in the Chinta skit and has sharp criticism of present electoral system . Stage Playwright Ghanshala is successful in showing rotted election process and the way .politicians even in small village exploit the rooted system of uses of caste, money, threats, groupism , liquor and what not .
Dialogues are sharp and create stir the readers for changing the rotted system.

Copyright@ Bhishma Kukreti, May 2019
Satirical Political Game based Garhwali Stage Play (Skit) from Pauri Garhwal, South Asia; Satirical Political Game based Garhwali Stage Play (Skit) from Chamoli Garhwal, South Asia; Satirical Political Game based Garhwali Stage Play (Skit) from Rudraprayag Garhwal, South Asia; Satirical Political Game based Garhwali Stage Play (Skit) from Tehri Garhwal, South Asia; Satirical Political Game based Garhwali Stage Play (Skit) from Uttarkashi Garhwal, South Asia;







Bhishma Kukreti

           
कौन कमबख्त गम हटाने को पीता है...  हम तो
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चबोड्या स्किट : भीष्म कुकरेती
s = आधी अ
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घराती प्रौढ़ - ये बख्तारु ! स्यु म्यार स्याळs नाक लाल किलै ?
स्याळ - जीजा जी ! तुमर मरखुड्या समदीन ल्वाड़न म्यार नाक थींच दे।
जीजा - नै नै समदि जी  त गौ रूप छन च।  जरूर कुछ त ह्वे ह्वाल।
स्याळ -मरखुड्या च तुमर समदी।
जीजा - पर समदी जी त मथि ख्वाळ  रमेशा इख आराम करणो जयां  छा तू कख मीलि ?
स्याळ - हाँ हाँ सूबेदार रमेश जीजान इ हम तै बिठाळ दे जख तुमर मरखुड्या समदी पड़्युं छौ।
जीजा - हां पर समदी जी तो पींद इ नि छन तो।
स्याळ -सूबेदार जीन भौत प्रेम से मिन्नत कार अर हम तिन्न्युंन  अदा अदा घटकै दे।  निखालिश घ्वाड़ा ब्रैंड रम।   रम माने रम।
जीजा - तो ?
बखत्वारु - त क्या येन हौर बि पे दे।
स्याळ -किसी के बाप की पी थी क्या ?सूबेदार जीजा ने पिलाई थी। 
जीजा - अरे पर तीन प्यायी त समदी जीक ले क्या ?
बख्तवारु - जरा बिंडी चढ़ गे त घ्याळ बि ह्वे गे।
जीजा - पर समदी जी त कम सुणदन तो इखम हल्ला कम पे  या बिंडी पे क्या फरक पड़दो ?
बख्तवारु -  जरा नीट रम बिंडी इ ह्वे गे छे  त तै बिंडी चढ़ गे छे।
स्याळ - अरे दुख  तो होगा ही ना।  जीजा मुझसे ज्यादा सम्मान मेरे बड़े भय्यिये को देते हैं
जीजा - अबे सम्मान का बच्चा समदी जीन त्यार नाक किलै   थींच ?
बख्तवारु -  ह्यां तैन उलटी कर दे छे। 
जीजा - उलटी कार तो भी समदि जीन ?  क्या एन समदी जीक मथि  उलटी कर दे छे क्या ?
स्याळ -हां पर मीन क्या समज मि सै जगा उल्टि  करणु छौं।
जीजा - एक त ऊंक मथि उल्टि करणो क्या जरूरत छे ? अर उल्टि ह्वे बि गे छे त बि साफ़ सूफ कर दींदा।
बख्तवारु -  उल्टिन तुमर समदी जीक सरा मुख भोरे गे छौ तो ऊँ तैं गुस्सा ऐ गे अर ऊंन थांतन एक नाक थींच दे।
जीजा - ह्यां पण उल्टि करणो म्यार समदी क मुक इ मील ? क्या बै क्वी इन उल्टि करदो क्या ? भैर जांद पश्वाउन्द उल्टि करदो।
स्याळ - अब तुमर समदीs   गिच्च  इथगा  चौड़ खोल्यूं  छौ तो मीन समज पश्वा च अर  अर    ....
बख्तवारु -  अर एन पश्वा जाणी तुमर समदीक गिच्चुंद  उल्टी कर दे
जीजा - अबे  क्वी मुंगर लावो मि एक रही सही हड्डी बी तोड़दु। 

Copyright @ Bhishma Kukreti
जसपुर गढ़वाल से शराब संबंधी व्यंग्य व जोक्स; ढांगू गढ़वाल से शराब संबंधी व्यंग्य व जोक्स; द्वारीखाल ब्लॉक गढ़वाल से शराब संबंधी व्यंग्य व जोक्स; यमकेश्वर विधान सभा गढ़वाल से शराब संबंधी व्यंग्य व जोक्स; गढ़वाल से शराब संबंधी व्यंग्य व जोक्स;




Bhishma Kukreti

Prashant Mamgain: A future Potential Garhwali Poet
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(Chronological History and Review of Modern Garhwali Poetry series)

By: Bhishma Kukreti (Literature Historian
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     Born in 1987, in Kimoli village of Aswalsyun ,Pauri Garhwal ,Prahsant mamgain published a couple of Garhwali poems . However, by reading his couple of poem s, Editor and critic Madan Duklan stated to this author that Madan regrets for not getting Mamgain's poem for historical Garhwali Collection 'Angwal'.
Dhad Editor Gani also appreciated Mamgain and said Mamgain has great future in Garhwali poetry world. A regular reader Girish Dhoundiyal compares Prashant Mamgain with Mahdevi verma for life sketch through poetry. 

          ब्वे  (कविता )

कवि :   प्रशांत ममगाईं  (जन्म  1987 , ग्राम किमोळी , असवाल स्यूं , पौड़ी गढ़वाल )
Poetry by : Prashant Mamgain (Kimoli, Aswalsyun , Pauri Garhwal )
(Chronological History of Garhwali Poem, verses) -285 
s = आधी अ
( विभिन्न युग की गढ़वाली कविताएँ श्रृंखला - 285   )
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इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या : भीष्म कुकरेती
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पट अंग्वाळ बोटी निंद ऐ जांदि
हे ब्वे तु निंद कख बिटेन लांदि
स्वीणा सुपन्यौ मी ल्हि जांदि
हे ब्वे तु निंद कख बिटेन लांदि 
बिनसरी बिटि पुंगड़ौं मा पसीना बगांदि
कुटुमदारि  कि गाणी स्याणी पुर्यांदि
दाना बुड्यो कि खैरि बि त्वी खांदि
हे ब्वे तु निंद कख बिटेन लांदि
कैमा बि तु अपणि बिपदा नि लगान्दि
आंसू लुक लुकि लुकांदि
मी देखि फेर सर्र हैंसी जांदि
हे ब्वे तु निंद कख बिटेन लांदि 
कबि बौण कबि पंदेरा म जांदि
अफु नीना पेट अर मेरी पुटुगी भोरि जांदि
दिन भर धाण कैरी त्वै खैरी नि आंदि
  हे ब्वे तु निंद कख बिटेन लांदि

Curtsy : Dhad magazine May 2018 )
Copyright@ Bhishma Kukreti, May 2019

History and Review of Modern Garhwali Poems, folk songs from PauriGarhwal; History and Review of Modern Garhwali Poems, folk songs from Chamoli Garhwal; History and Review of Modern Garhwali Poems, folk songs from Rudraprayag Garhwal, South Asia; History and Review of Modern Garhwali Poems, folk songs from Tehri Garhwal, South Asia; History and Review of Modern Garhwali Poems, folk songs from Uttarkashi Garhwal, South Asia; History and Review of Modern Garhwali Poems, folk songs from Dehradun Garhwal, South Asia;











Bhishma Kukreti

Teeri Dam: A Garhwali Fiction witnessing pain of Sinking Tehri City

Chronological History and Review of Modern Garhwali Short Stories/Fiction  series)
(Review of Short story Collection 'Meru Pahar ' (Stories written by Rakesh M. Thapliyal-1)
(Review of 'Teeri Dam' a short story (story written by Rakesh M. Thapliyal )

Review by: Bhishma Kukreti (Literature Historian)

Tehri  city had been important town or city in literature of Garhwal. Dr Mahavir Prasad Gairola wrote a couple of stories surrounding Tehri (now sunk). Many Garhwali poets illustrated the pain of sinking Tehri for development making (modern India) . Rakesh Mohan Thapliyal is First Garhwali fiction writer that penned down as a witness the stories of sinking Tehri once the capital of Garhwal Kingdom. Yes! The Story 'Teeri Dam' contains tens of small stories. In Fact, Rakesh Mohan tried condensing the  subject of a standard novel into 7000 words short story.
The story starts from an old women visiting (frustratingly) to land settlement department and then opens a panorama of characters by characters telling the incidents; there are pains of people displaced or would be displaced, there are pains of getting compensations from settlement office, there are nepotism, corruption, lethargy in settlement office and various principles about dam constructions in the said story Teeri dam by Rakesh. Rakesh takes the readers to the history of Tehri city and also introduces with Chipko Hero Sundar Lal Bahguna and his sayings about Dam.
     The biggest back draw of the story is that there are many subjects in short story and in reality the plot is suitable for novel .A common reader likes story with one single or double aim and subjects.
The subjects of the story are still live for discussion among politicians, administrators, anthropologists, environmentalists and societies too.
  The story is narrated through dialogues that also makes complex situation for readers understanding the characters.
Rakesh Mohan tried his best to capture the scene of 100 years of picture of Tehri history and ten years of Dam construction. He is successful in illustration his aim.
Dialogues are as per characters, time and place. Rakesh uses successfully similes and metaphors for speeding up the story line too. This author never visited Old Tehri but by reading the said story, this author could easily view the Old Tehri, the beloved Tehri and constructing the Dam on Reverend Rivers Bhagirathi –Bhilangana confluence. 
  The language is from Tehri region and does not make any difference for  a reader from Dhangu, (South Pauri Garhwal), Rath (upper Pauri Garhwal or Neeti (China border Chamoli) for understanding the language. Rakesh proved failed the supporters of standard Garhwali is the only alternate for Garhwali literature.
Copyright@ Bhishma Kukreti
Modern Garhwal Fiction /short stories from Uttarkashi Garhwal, South Asia; Modern Garhwal Fiction /short stories from Tehri Garhwal, South Asia; Modern Garhwal Fiction /short stories from Pauri Garhwal, South Asia; Modern Garhwal Fiction /short stories from Rudraprayag Garhwal, South Asia; Modern Garhwal Fiction /short stories from Dehradun Garhwal, South Asia; Modern Garhwal Fiction /short stories from Garhwal, South Asia; Modern Garhwal Fiction /short stories from Haridwar Garhwal, South Asia;


Bhishma Kukreti

 
असली भीष्म कुकरेती क्वा च ?


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चबोड़म आत्ममुग्ध साहित्य  : भीष्म कुकरेती
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  ब्याळि दिनिम सुपिन दिखणु छौ बल न्यूआर्क  टाइम्स , बि 'फॉर गढ़वाली रीडर्स 'एडिसन' म  रोज गढ़वाली व्यंग्य छपण बिसे गे।   कुछ गढ़वाली का महान व्यंग्यकारों जीवनी बि न्यू आर्क टाइम्स कंटेंट एजेंसी ( नेटवर्क ) मि छपद जन कि अखिलेश अलखणिया , पारशर गौड़  , हरीश जुयाल  आदि , मेरी जीवनी इन दियीं च न्यूआर्क टाइम्स का राइटर गिल्ड म -
   जसपुर , गढ़वाल म जन्मयुं भीष्म कुकरेती का जन्म तिथि यद्यपि द्वी अप्रैल 1952 बताये जांद , यू  पी बोर्ड त इनि बतांद पर जन जनरल (रि ) वी के सिंह की जन्म तिथि म लोगुं तैं संशय च तनि कुछ कॉंग्रेसी कार्यकर्ताओं तै अंदेशा च बल या जन्म तिथि सही नी।  भीष्म कुकरेती का परिवार पंडित किशन दत्त कंडवाल की बणाइं  ओरिजिनल जन्म पत्री  दीणो तयार नीन।  सन 52 से भीष्म कुकरेती दिन प्रतिदिन सरैल  से अवश्य बड़ हूणु च किन्तु गौक सौं बुद्धि माँ क्वी वृद्धि नी  हूणी च।  सिद्ध हूंद बल  फिरोज  जहांगीर गांधी परिवार म इ बुड्या निर्बुद्ध, ,  मूर्ख , लाटा  नि हूंदन , गुदड़ जी कुकरेती का  खानदान म बि  कमबुद्धि ,  कम अकली, नॉनसेंस   बुड्या ह्वे सकदन।
                    भीष्म कुकरेती तैं आधारिक विद्यालय से लेकि उच्च माध्यमिक तक हर साल ' बेस्ट जोकर ऑफ़ दि  क्लास ' अवार्ड मिल्दो गे। असलम जन आंत विहीन , दांत विहीन बुड्यों तैं 'वरिष्ठ नागरिक ' या सीनियर सिटीजन 'बुले जांद उनि  सबसे बड़ो काला , लाटा, मूर्खा कुण  बेस्ट जोकर उपाधि छे।  भीष्म कुकरेती यां से कबि नराज नि  ह्वाई , जु छात्र हाइ स्कूल म गणित माँ सबसे ब्रिलियंट स्टूडेंट  हो अर इंटर म गणित छोड़ि जीव विज्ञान विषय चुनाव कारल तो वै तै हर साल सबसे बड़ो मूर्ख याने बेस्ट जोकर उपाधि से बड़ी उपाधि क्या ह्वे सकद छे ? बाद म ग्रेजुएशन अर पोस्ट ग्रेजुएशन म भीष्म कुकरेती तै सबसे सीधो छात्र की उपाधि मिलदी गे।  सीधो मतलब बकौल हरिशंकर प्रिशायी -एक बेचारा गधा '.   
   
      मुंबई म रैक बि भीष्म कुकरेती न अंग्रेजी या हिंदी म लिखण छोड़ि  अर जु गढ़वाली म ल्याखो अर प्रकाशित कारो वे से बड़ो मूर्ख तो फिरोज जहांगीर गांधी पौत्र बि नि ह्वे सकद।  इटालियन बहू सोनिया गांधी भी पुळयाणि रौंदी बल म्यार नौनु से बि बड़ा प्रौढ़ मूर्ख भारतम पैदा हूणा रौंदन। भीष्म कुकरेती की सबसे बड़ो लेखक हूणो सबसे बड़ो  सबूत या च आज तक मिसेज भीष्म कुकरेती न भीष्म का  एक बि लेख या कथा नि पौड़।  सुकरात महान इलै छौ किलैकि सुकरातौ वाइफन  सुकरात का लिख्युं कबि नि पौढ़ ना ही सुकरात की औकात समज । 
    भीष्म कुकरेती कबि बि अकल से प्रौढ़ नि ह्वे यांक सबूत म लखनपाल का भूतपूर्व मैनेजिंग डाइरेक्टर , मर्फी इणिडया का एमडी जतिन कोठरी (JMK )  , केनस्टार का सीईओ राहुल सेठी को कत्ति वक्तव्य छन बल रे कुकरेती  ! नाउ यू आर सीनियर मैनेजर सो बिहेव फॉर्मल टाक  एंड फॉरगेट इनफॉर्मल टॉकिंग विद बॉसेज। 
     भीष्म कुकरेती क जोकर याने महा मूर्ख हूणो एक और प्रबल  प्रमाण च बल।  आज तक भीष्म कुकरेती से अधिक पर्वतीय उत्तराखंड म कैन नि  लेखी, आज की तारीख म भीष्म से अधिक पाठक कै बि उत्तराखंडी लिख्वारौ  नि  छन  किन्तु पुस्तक का नाम पर द्वी या तीन ही पुस्तक छपीं छन।   
    भीष्म कुकरेती वास्तव म एक सीधो साधो बेचारा जेंटलमैन च अर यांक सबूत च बल नवानी अर अर्जुन सिंह गुसाईं पुरुष्कार का अलावा क्वी पुरुष्कार नि ले साको। 
भीष्म कुकरेती का मूर्खतापर्ण व्यवहार पर हर रोज सूचना दिये जाली। 
Copyright on Retarded  behavior of  an old man is reserved  with Bhishma Kukreti and a politician  ..... (?)
जसपुर गढ़वाल से गढ़वाली हास्य व्यंग्य , जोक्स; मल्ला ढांगू गढ़वाल से गढ़वाली हास्य व्यंग्य , जोक्स; द्वारीखाल ब्लॉक गढ़वाल से गढ़वाली हास्य व्यंग्य , जोक्स; सलाण  गढ़वाल से गढ़वाली हास्य व्यंग्य , जोक्स; दक्षिण गढ़वाल से गढ़वाली हास्य व्यंग्य , जोक्स; यमकेश्वर विधान सभा गढ़वाल से गढ़वाली हास्य व्यंग्य , जोक्स;