Author Topic: Folk Songs & Dance Of Uttarakhand - उत्तराखण्ड के लोक नृत्य एवं लोक गीत  (Read 53238 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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चन्द्र सिंह राही थे नमन
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
कोरस : जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
खणो छ पपीता हो खणो छ पपीता
खणो छ पपीता हो खणो छ पपीता
पिछने छूटगे दगड्या साड़ी कू लपेटा
हाँ पिछने छूटगे दगड्या साड़ी कू लपेटा
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
कोरस: मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला जी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला जी
मि बिमार छों नगिना लि जादी
मि बिमार छों नगिना लि जादी
अर नगिना हॉस्पिटल मा एक्सरे करा दि
अ हाँ नगिना हॉस्पिटल मा एक्सरे करा दि
जर ठंडु चला दी जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
कोरस: मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी खून सुखी ग्याई बंबई ले जादी
मेरी खून सुखी ग्याई बंबई ले जादी
अरे अप्डी बंबई ले जैकी नाच कैरे दि
हाँ अप्डी बंबई ले जैकी नाच कैरे दि
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
कोरस: मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
कलसरी आंख्युं को काजल मंगे दया
कलसरी आंख्युं को काजल मंगे दया
अरे गोरी मुखडी को पावडर मंगे दया
सच गोरी मुखडी को पावडर मंगे दया
जर ठंडु चला दी जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
कोरस: मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
कोरस: मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
री चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
री चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
री चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
चन्द्र सिंह राही जी थे नमन
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
उत्तराखंडी भाषा को बढ़वा देने के लिये
उत्तराखंड मनोरंजन
बालकृष्ण डी ध्यानी
-देवभूमि बद्री-केदारनाथ
अब भोळ भेंट हुली जी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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कब बसंत अलो बोई

कब बसंत अलो बोई
म्यार पहाड़ा मा बोई ये उजड़ा मा

हिरी हिरी पाखी उड़दा आला
रंग बिरंगी बल तब यख फूल खिलाला

बिरला रंगों तब भूमि सजगे ले हुली
म्यार पहाड़ा मा बोई ये उजाड़ा मा

ब्योलि रूप मा वा रूपमती रुपेनि ऊ हुली
शृंगार रसों दगडी दगड़्यूं दगड सजैनी ऊ हुली

कब कुद्गेली लगेली यूँ नंगी खुठ्यूँ मा
म्यार पहाड़ा मा बोई ये उजाड़ा मा

जख द्याख तख तब मेरी तिस नि बुझेली
मेरी धरती तब मिथे चौदिशा बाटा मा भरमेलि

कन कख ऊ कब मेर यूँ वा नजरि मा समेली
म्यार पहाड़ा मा बोई ये उजाड़ा मा

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार

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वो भाना रंगीली भाना,वो भाना रंगीली
वो भाना रंगीली भाना,वो भाना रंगीली
भाना वो रंगीली भाना वो भाना रंगीली
वो भाना रंगीली भाना,वो भाना रंगीली
भाना वो रंगीली भाना बल वो भाना रंगीली
वो भीना रंगीलो भीना मोहना रंगीलो
मोहना रंगीलो भीना वो भीना रंगीलो
वो भीना रंगीलो भीना मोहना रंगीलो
वो भीना रंगीलो भीना बल मोहना रंगीलो
वो भाना रंगीली भाना,वो भाना रंगीली
वो भीना रंगीलो भीना मोहना रंगीलो
कोरस
वो भाना रंगीली भाना,वो भाना रंगीली
मोहना रंगीलो भीना वो भीना रंगीलो
हिमालय की थंडी हवा कुलैई की छया
कै दुन्या बत्वों हे भाना तेरी मेरी माया
हिमालय की थंडी हवा कुलैई की छया
कै दुन्या बत्वों हे भाना तेरी मेरी माया
कै दुन्या बत्वों हे भाना तेरी मेरी माया ... २
वो भाना रंगीली भाना,वो भाना रंगीली
भाना वो रंगीली भाना वो भाना रंगीली
पाणी को मसिक भीना पाणी को मासिक
तू भलुण भूल जैई मि भुलु कसिक
पाणी को मसिक भीना पाणी को मासिक
तू भलुण भूल जैई मि भुलु कसिक
तू भलुण भूल जैई मि भुलु कसिक ... २
वो भीना रंगीलो भीना मोहना रंगीलो
मोहना रंगीलो भीना वो भीना रंगीलो
कोरस
वो भाना रंगीली भाना,वो भाना रंगीली
मोहना रंगीलो भीना वो भीना रंगीलो
जिकुड़ीम बसीचा तेरी साची प्रीत माणी
येथे जों की ऊथे जों सोचों रात ब्याणी
जिकुड़ीम बसीचा तेरी साची प्रीत माणी
येथे जों की ऊथे जों सोचों रात ब्याणी
तुप्ते के जा बैठी जा तू मिरी सिराणी .. २
वो भाना रंगीली भाना,वो भाना रंगीली
भाना वो रंगीली भाना बल वो भाना रंगीली
धार मा गुल्ल बांज पोथल्युं को बांस
सुप्निया ना दिखो ना भीना लगी रैली आस
धार मा गुल्ल बांज पोथल्युं को बांस
सुप्निया ना दिखो ना भीना लगी रैली आस
झूठी तेरी माया मोहना कया तेरो विस्वास ...२
वो भीना रंगीलो भीना मोहना रंगीलो
मोहना रंगीलो भीना वो भीना रंगीलो
कोरस
वो भाना रंगीली भाना,वो भाना रंगीली
मोहना रंगीलो भीना वो भीना रंगीलो
ब्याखोनी को घाम हुलु घरमे की तूण
फुर फुर्र घिन्दुड़ी बणी ऐ जैई मिलण
ब्याखोनी को घाम हुलु घरमे की तूण
फुर फुर्र घिन्दुड़ी बणी ऐ जैई मिलण
सुपनियु मा इसई दी जैई समूण .. २
वो भाना रंगीली भाना,वो भाना रंगीली
भाना वो रंगीली भाना बल वो भाना रंगीली
घास कटी सौली मौली दतुड़ी रोखे मा
बाँसुरी बजै दे भीना डलियों का टुखे मा
मयादरा त्वै मिलण ओलों अद बटे मा ... २
वो भीना रंगीलो भीना मोहना रंगीलो
मोहना रंगीलो भीना वो भीना रंगीलो
कोरस
वो भाना रंगीली भाना,वो भाना रंगीली
मोहना रंगीलो भीना वो भीना रंगीलो
वो भाना रंगीली भाना,वो भाना रंगीली
मोहना रंगीलो भीना वो भीना रंगीलो
वो भाना रंगीली भाना,वो भाना रंगीली
उत्तराखंडी गीत है
उत्तराखंडी भाषा को बढ़वा देने के लिये
अनुवाद किया है उत्तराखंडी भाषा को बढ़वा देने के लिये
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ

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दिल्ली वालोँ सुनि लिंवा ये बात

दिल्ली वालोँ सुनि लिंवा ये बात
अप्डी जिकोड़ी को झकझायट
वै को रागरायट मनि लिंवा वै की बात
ऐ जावा अब त अपरा पहाड़ों मा......

धुँआ ही धुँआ ई दिल्ली खाणु रे
हे भुल्हा गढ़ छोड़ी की कख अब तिल जानू रे
शुद्ध हवा अब म्यारा पहाड़ों मा ही मिळाली
मिल ये मा भी एक दिन टैक्स लगाणु रे
तिल भी वैथे चुकनु रे

फस फुस ऊ तेरो फेफड़ो करनु लग्युं च
उकाळ छोड़ी ऊ फिर बी उन्दरु मा जनि लग्युं च
चैती जावा अब तक ना बिगड़ी बात
तुमि त ऐल्या कैल्या पैल सुरवात
ऐ जावा अब त अपरा पहाड़ों मा......

ना तेरो फिर घार रहलो ना तेरो मुल्क रालो
ये हवा को टैक्स चुकणु ना तेरो टाक्को रलो
फिर ते थे अपरी भूल समजली
तब तक भांड्या देर व्है गे हुली ईं देर हुन से पैल
ऐ जावा अब त अपरा पहाड़ों मा......

एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित


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अब टाटा सुमो मा बौजी मेरी सैर करदा
मोटर मा देर लगदी टैक्सी मा बल दैर लगदी ... २
बौजी बोल्दा मेरी बौजी बोल्दा
अब टाटा सुमो मा बौजी मेरी सैर करदा .. २
कोरस अब टाटा सुमो मा बौजी मेरी सैर करदा .. २
खिड़की वाली सीट पर बौजी जब बैठी जांद
डरवैर भैजी तब गर गाडी थे घुमंद ... २
जन्दी बगत बौजी मीकू टाटा कै जांदा
टाटा ....बय ...... बय
जन्दी बगत बौजी मिथे टाटा कै जांदा
अब टाटा सुमो मा बौजी मेरी सैर करदा .. २
कोरस अब टाटा सुमो मा बौजी मेरी सैर करदा .. २
तेडा-मेडा बैंडों मा जब गाडी सर सर जांदी
डरवैर भैजी तब डैक मा कैस्ट लगन्द .. २
गीत सुनि बौ मेरी रंगमत व्है जाँदा
कोरस मै नि जन्या नेपाल राम्रो लग्यु ये गढ़वाल मा ... २
गीत सुनि बौ मेरी रंगमत व्है जाँदा... २
अब टाटा सुमो मा बौजी मेरी सैर करदा... २
कोरस अब टाटा सुमो मा बौजी मेरी सैर करदा .. २
पिछने बैठ्यूं फ्जतु बौड़ा फक फक धुँआ उड़ान्दु
बीड़ी न प्यावा बौजी बोल्दा मेरो सरेल कबलांन्दु...२
अद बटा स्टेशन मा कैम्पा खोजंदा मेरी बौ
अद बटा स्टेशन मा कैम्पा खोजंदा
अब टाटा सुमो मा बौजी मेरी सैर करदा... २
कोरस अब टाटा सुमो मा बौजी मेरी सैर करदा .. २
अपणा गौं बजारा मा पौंछि बौजी मेरी उतरि जांद
परस लट कैकि बौजी बालू मा कांगी लगंद .. २
जांदी बगत डरवैर कू थैंक्यू बोल्दा
थैंक्यू डरवैर जी
जांदी बगत डरवैर कू थैंक्यू बोल्दा
अब टाटा सुमो मा बौजी मेरी सैर करदा... २
कोरस अब टाटा सुमो मा बौजी मेरी सैर करदा .. २
मोटर मा देर लगदी टैक्सी मा बल दैर लगदी ... २
बौजी बोल्दा मेरी बौजी बोल्दा
अब टाटा सुमो मा बौजी मेरी सैर करदा .. २
कोरस अब टाटा सुमो मा बौजी मेरी सैर करदा .. ४
अब टाटा सुमो मा बौजी मेरी सैर करदा
उत्तराखंडी गीत है उत्तराखंडी भाषा को बढ़वा देने के लिये
-बालकृष्ण डी ध्यानी
उत्तराखंडी गीत
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ

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चन्द्र सिंह राही थे नमन
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
कोरस : जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
खणो छ पपीता हो खणो छ पपीता
खणो छ पपीता हो खणो छ पपीता
पिछने छूटगे दगड्या साड़ी कू लपेटा
हाँ पिछने छूटगे दगड्या साड़ी कू लपेटा
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
कोरस: मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला जी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला जी
मि बिमार छों नगिना लि जादी
मि बिमार छों नगिना लि जादी
अर नगिना हॉस्पिटल मा एक्सरे करा दि
अ हाँ नगिना हॉस्पिटल मा एक्सरे करा दि
जर ठंडु चला दी जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
कोरस: मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी खून सुखी ग्याई बंबई ले जादी
मेरी खून सुखी ग्याई बंबई ले जादी
अरे अप्डी बंबई ले जैकी नाच कैरे दि
हाँ अप्डी बंबई ले जैकी नाच कैरे दि
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
कोरस: मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
कलसरी आंख्युं को काजल मंगे दया
कलसरी आंख्युं को काजल मंगे दया
अरे गोरी मुखडी को पावडर मंगे दया
सच गोरी मुखडी को पावडर मंगे दया
जर ठंडु चला दी जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
कोरस: मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
कोरस: मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
मेरी चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
री चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
री चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
री चदरी छूटगे पिछने जरा मठु चला दी
चन्द्र सिंह राही जी थे नमन
जर ठंडु चला द्या जरा मठु चला दी
उत्तराखंडी भाषा को बढ़वा देने के लिये
उत्तराखंड मनोरंजन
बालकृष्ण डी ध्यानी
-देवभूमि बद्री-केदारनाथ
अब भोळ भेंट हुली जी

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दादू मेरी उल्यारू जिकुड़ी दादू मी पर्वतों को वासी झम झमले
कोरस दादू मेरी उल्यारू जिकुड़ी दादू मी पर्वतों को वासी झम झमले
दादू मेरी सोंज्यड़या च काकू दादू मेरी गेल्या च हिलांसी झम झमले
कोरस दादू मेरी सोंज्यड़या च काकू दादू मेरी गेल्या च हिलांसी झम झमले
छायो मी बाजी को पियारो छायो मी मांजी को लाडूलो ...... २
छो मेरा गोला को हंसुलो दादू रे बोजी को बिटूलो !
कोरस झम झमले दादू मेरी उल्यारू जिकुड़ी दादू मी पर्वतों को वासी झम झमले
दादू मिन रोसल्युन का बीच बैठी की बांसुली बजैनी ...... २
... दादू मिन चैरी की चुलाखूयूँ चलखदा हुंयु चुला देखिनी !
कोरस झम झमले दादू मेरी उल्यारू जिकुड़ी दादू मी पर्वतों को वासी झम झमले
देखि मिन म्वआरयूँ को रुनाट दादू रे कौथिग का थाल ...... २
दादू रे बे पोतली देखिनी लेन मिन रेशमी रुमाल !
कोरस झम झमले दादू मेरी उल्यारू जिकुड़ी दादू मी पर्वतों को वासी झम झमले
दादू वो रूडी का कौथिग सुयुन्द सी सैंडा माँ की कूल...... २
दादू वो सोंज्यड़यों की टोल व्हेग्यायी तिम्ला को फूल !
कोरस झम झमले दादू मेरी उल्यारू जिकुड़ी दादू मी पर्वतों को वासी झम झमले
दादू रे उडमिला बुरांसुन लुछीन भोरों की जिकुड़ी...... २
दादू रे किन्गोडयों का बीच देखदी मिन हेन्स्दी फ्युन्लाड़ी !
कोरस झम झमले दादू मेरी उल्यारू जिकुड़ी दादू मी पर्वतों को वासी झम झमले
झुमकी सी तुड तुड़ी मंगरी मखमली हेरी से अंगडी...... २
हिल्वार्यों हल्क्दी धोपैली घुन्कदी लोंक्दी कुयेडी !
कोरस झम झमले दादू मेरी उल्यारू जिकुड़ी दादू मी पर्वतों को वासी झम झमले
कोरस दादू मेरी सोंज्यड़या च काकू दादू मेरी गेल्या च हिलांसी झम झमले
उत्तराखंडी गीत दादू मेरी उल्यारू जिकुड़ी दादू मी पर्वतों को वासी झम झमले
उत्तराखंडी भाषा को बढ़वा देने के लिये
उत्तराखंड मनोरंजन
बालकृष्ण डी ध्यानी
-देवभूमि बद्री-केदारनाथ
अब भोळ भेंट हुली जी

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गीत : अरे दीपा मिजात
एल्बम: अरे दीपा जींस टॉप वाली
गायक: फौजी ललित मोहन जोशी, मीना राणा
संगीत लेबल टी-सीरीज
हे दीपा मिजात दीपा मिजात तू सुणी दीपा
छोड़ी दियोंलो पहाड़ दीपा नेह जोंलो परदेश दीपा
हे दीपा मिजात दीपा मिजात तू सुणी दीपा
छोड़ी दियोंलो पहाड़ दीपा नेह जोंलो परदेश दीपा
तेरी माया दिले में दीपा बिंगे दियोंलो ये दिल दीपा
आँखि तेरी मयली दीपा नैनी ताले की झील दीपा
पनि को मासिक दीपा पनि को मसिक दीपा
तू भूल ना भूल जली मैं भुलु कसिक दीपा . .
पनि को मासिक दीपा पनि को मसिक दीपा
तू भूल ना भूल जली मैं भुलु कसिक दीपा . .
तेरी माया दिले में दीपा बिंगे दियोंलो ये दिल दीपा
आँखि तेरी मयली दीपा नैनी ताले की झील दीपा
नरिंगे कि दाणी दीपा नरिंगे कि दाणी दीपा
त्वेले मे कुबानी ले के न नख न बैठ दीपा . .
नरिंगे कि दाणी दीपा नरिंगे कि दाणी दीपा
त्वेले मे कुबानी ले के न नख न बैठ दीपा . .
तेरी माया दिले में दीपा बिंगे दियोंलो ये दिल दीपा
आँखि तेरी मयली दीपा नैनी ताले की झील दीपा
हाथे कि चुँडिये दीपा हाथे कि चुँडिये दीपा
तू मिके लगछे दीपा आज ले कुड़िये दीपा . .
हाथे कि चुँडिये दीपा हाथे कि चुँडिये दीपा
तू मिके लगछे दीपा आज ले कुड़िये दीपा . .

तेरी माया दिले में दीपा बिंगे दियोंलो ये दिल दीपा
आँखि तेरी मयली दीपा नैनी ताले की झील दीपा
रंगीलो मिजात दीपा रंगीलो मिजात दीपा
ने कर नि आज दीपा मेरो संग फ़्स्द दीपा .
रंगीलो मिजात दीपा रंगीलो मिजात दीपा
ने कर नि आज दीपा मेरो संग फ़्स्द दीपा .
तेरी माया दिले में दीपा बिंगे दियोंलो ये दिल दीपा
आँखि तेरी मयली दीपा नैनी ताले की झील दीपा
हे दीपा मिजात दीपा मिजात तू सुणी दीपा
छोड़ी दियोंलो पहाड़ दीपा नेह जोंलो परदेश दीपा
हे दीपा मिजात दीपा मिजात तू सुणी दीपा
छोड़ी दियोंलो पहाड़ दीपा नेह जोंलो परदेश दीपा
तेरी माया दिले में दीपा बिंगे दियोंलो ये दिल दीपा
आँखि तेरी मयली दीपा नैनी ताले की झील दीपा
तेरी माया दिले में दीपा बिंगे दियोंलो ये दिल दीपा
आँखि तेरी मयली दीपा नैनी ताले की झील दीपा
उत्तराखंडी गीत है
हे दीपा मिजात दीपा मिजात तू सुणी दीपा
उत्तराखंडी भाषा को बढ़वा देने के लिये
चल चित्र के निचे गीत लिखा है बस
उत्तराखंड मनोरंजन तुम थै कंण लग जी?
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ

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घोटे जालि  हींग ,   घोटे जालि  हींग
नौ रुप्या कु मोती ढांगs  , सौ रुप्या कु सींगs 
सबसे मयारू  मोती ढांगs
अरे बल - प्याज छन छांट छांट , प्याज छन छांट छांट
          नौ रुप्या कु मोती ढांगs, सौ रुप्या कु  फ्यूँफाट ,  सौ रुप्या कु  फ्यूँफाट।। 

old folk song

Bhishma Kukreti

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Uttarakhand Himalaya ke Chanchari Geet evam Nritya ‘Chanchari Jhamako’: Every Uttarakhandi should have the book
  Folk Literature Historian: Bhishma Kukreti
-
    Uttarakhandi are fortunate that there has been satisfactory works on collection, editing and publishing Folk Literature of Garhwal, Kumaon, Jaunsar, Jaunpur and Ravain regions. Yes! Off course little work is done for Malhas or Bhotiya folk literature.
 Nand Kishor Hatwal brought marvelous folk dance-songs collection book in 2009 as ‘Uttarakhand Himalaya ke Chanchari Geet evam Nritya ‘Chanchari Jhamako’.
     The present folk dance-songs collection is comprehensive collections of folk dance and songs from number of songs but translating them in Hindi too.
 There are six major sections on Uttarakhandi folk dance-songs in this book-
                               Chapters in Part -1
1-Introduction: learned scholar Hatwal defined Chanchari and explains names of Chanchari
2-  Chanchari Folk Songs Theme: In this section, Hatwal illustrates folklores, history , rituals, pathetic women positions, Khud, music instruments, nature and ecology, nationality in folk literature etc.   
3-Creation of Folk Dance –Songs: Dr. Nand Kishor explains the styles of various folk songs in this chapter
4-Ttile of folk dance- songs
5,6- Dance- Songs Forms
7- Music system in Folk dance-Songs
8-Expension of songs and ending
9, 10, 11 –Classification of Uttarakhandi Dance- Songs
12,13,-Folk songs facing time
-
                              Part -2
-
 This chapter has 11 subchapters explain occasions for folk dance –songs; mottos, stages, dancers, presentation, importance, females, preservation etc of folk dance- songs
             -  Part -3
-
   The renowned scholar Hatwal offered Uttarakhandi dance-folk songs as per classification
   There are 244 Uttarakhandi folk dance and songs in the present collection. Hatwal offered Hindi translation for each song and introductory notes for each folk song. Hatwal offered English translation of various songs translated by various folk song experts.
 Hatwal uses simple language for explanation. 
Nand Kishor is an artist too. He illustrated drawings for showing style and sequences of each major folk dance of Garhwal and Kumaun.
   The book is comprehensive collection of Kumauni, Garhwali folk dance and songs.
        Critics appreciate the work of Dr. Nand Kishor Hatwal for collection, editing, translating and classifying Folk dance-songs as people and critics appreciate works of Charles k. Wolfe; Lawrence Lee;   J.L. Campbell; Lomax; Vadim Prokhorov; N.C Burlin; D. Gorlin; Ann Buchnanan; A.M. Espinosa; C.Aonzo, C. Ponzoni and many .
  Every Uttarakhandi should keep the book in their personal library
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Detail-
Uttarakhand Himalaya ke Chanchari Geet evam Nritya ‘Chanchari Jhamako
Edited by: Dr. Nand Kishor Hatwal
Illustration Language: Hindi
Pages-551
Year of publication: 2009
Publisher: Winsar Publishing Company, 4, Dispensary Road Dehradun
Email- winser.nawani@gmail.com
Price- 395/-
Copyright@ Bhishma Kukreti, Mumbai, 2016

 

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