Author Topic: Tribute To Gopal Babu Goswami - गोपाल बाबू गोस्वामी(महान गायक) की यादे  (Read 38290 times)

पंकज सिंह महर

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हाई तेरी रुमालाऽऽऽऽऽऽऽ
हाई तेरी रुमाला, गुलाबी मुखड़ी,
के भली छाजी रै, नाखे की नथुली,
हाई तेरी रुमालाऽऽऽऽऽऽऽ

गावै गलोबन्द, हाथे की धागुली,
चम-चम चमकी रै, कपायी बिन्दुली,
हाई तेरी रुमालाऽऽऽऽऽऽऽ

सनीलै घाघरी, मखमली आंगड़ी,
कि भली छाजी रै, रंगीली पिछौड़ी,
हाई तेरी रुमालाऽऽऽऽऽऽऽ

तेरी गाव जंजीरा, हाथु की पौंचियां,
छन-छन छनकी रे, कलाई चूडि़यां,
हाई तेरी रुमालाऽऽऽऽऽऽऽ

Risky Pathak

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बखता तेरी ब्ले  ल्ह्यून

दूध हरायो, घ्यू हरायो, छा हराई नोणी
दूध हरायो, घ्यू हरायो, छा हराई नोणी
दै हरायो, पराई हारई, भदयाओ पुरानी

गौर भैसी कसाई ल्ही जाछा, हौ बै काणि बल्दा
गौर भैसिन को शराप लाग गो यो पहाड़ मे जा

सोयाबीन  पोडर   दूध चली गो पहाड़ा
बाँझ है गई भैसिनक थाना , गोरु का गोठ्येरा

कि हैरो आजकल सुनो


ओ घर घर आज है ग्ये चहा चूसा चूस
ओ घर घर आज है ग्ये चहा चूसा चूस
डोकुआ पुसुली ब्ये रे, ठ्येकी भानी मूस
डोकुआ पुसुली ब्ये रे, ठ्येकी भानी मूस

हे घर घर आज देखो  चहा चूसा चूस
हे घर घर आज देखो  चहा चूसा चूस

हे होसिया, चहा की घुटुक मारी, दुर्गा रुक कसी
चहा की घुटुक मारी, दुर्गा रुक कसी
चहा का दगर लगे गुडा की कटुकी
आँख  बुझे बुड  मारू चहा की सुडुकी
आँख  बुझे बुड  मारू चहा की सुडुकी

जूठ चहा आपुन बुन  की डूबी रे छे बुडी
अरे दूध हरायो नान्तिना लिजी
ओ चहा  चूसा चूस
ऐ  सुखी रे मुखडी देखो चहा  चूसा चूस

ओ आजकल घर  है ग्ये चहा चूसा चूस
डोकुआ पुसुली ब्ये रे, ठ्येकी भानी मूस
डोकुआ बिराई  ब्ये रे, ठ्येकी भानी मूस

घर घर आज देखो  चहा चूसा चूस
घर घर आज देखो  चहा चूसा चूस

हे नान्तिना बीच,  घर घर  देखो आज  चहा चूसा चूस
डोकुआ बिराई  ब्ये रे, ठ्येकी भानी मूस

दस पाँच पड़ी च्येल ब्वारी कूनी हम ज़िम्दारी ने कूना
च्येली च्येला पगली  रई नोकरी पछिला
फैशनु व्यसनु माजा आजकल जोरा
बिगदन लागी आजकल लौंडा
टीवी ऐ गे पहाड़ मे, अब गोनु कोनु माजा
टीवी का सामणि बैठी, तानि रूनी आँखा
टीवी का सामणि बैठी, तानि रूनी आँखा

रे घर घर आज देखो चहा चूसा चूस
रे घर घर आज देखो चहा चूसा चूस
ऐ  डोकुआ लाछुली  ब्ये रे, ठ्येकी भानी मूस
ऐ  डोकुआ पुसुली  ब्ये रे, ठ्येकी भानी मूस

ऐ बखता तू कस देखो रे, देख्नु जानी कसे
ऐ बखता तू कस देखो रे, देख्नु जानी कसे
ऐ  डोकुआ लछुली  ब्ये रे, ठ्येकी भानी मूस
ऐ  डोकुआ लछुली  ब्ये रे, ठ्येकी भानी मूस
ऐ  डोकुआ लछुली  ब्ये रे, ठ्येकी भानी मूस
ऐ  डोकुआ बिरायी   ब्ये रे, ठ्येकी भानी मूस

यो  ठ्येकी भानी मूस
यो  ठ्येकी भानी मूस
यो  ठ्येकी भानी मूस
यो  ठ्येकी भानी मूस
यो  ठ्येकी भानी मूस
यो  ठ्येकी भानी मूस
यो  ठ्येकी भानी मूस
यो  ठ्येकी भानी मूस

Risky Pathak

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ॐ सर्व मंगल मंगल, शिव सर्वार्ध सादिके, शरणे  अम्बिके गौरी, नारायणी नमुस्तते

देवी वराही मेरी सेवा लिहा वर देणे होया
देवी वराही मेरी सेवा लिहा हो....

देवी वराही मेरी सेवा लिहा वर देणे होया
 
अक्षत चंदन फूल पाति
अक्षत चंदन फूल पाति
दियो न बाति
दियो न बाती मेरी सेवा लिहा हे

देवी वराही मेरी सेवा लिहा वर देणे होया
देवी वराही मेरी सेवा लिहा हो....

तुमेरी शरण आयू...
भेट ओ की क्या लायु
शाल हरिया
शाल हरिया मेरी सेवा लिहा हे......

देवी वराही मेरी सेवा लिहा वर देणे होया
देवी वराही मेरी सेवा लिहा हो....

हम मागनी भया
जनम मागन रया
तुम दानी होया
तुम दानी होया मेरी सेवा लिहा हे.......

देवी वराही मेरी सेवा लिहा वर देणे होया
देवी वराही मेरी सेवा लिहा हो....

तुमेरी सरन आयू
पांच देव म्येरा
किरपा करिया
किरपा करिया  मेरी सेवा लिहा हे.......

देवी वराही मेरी सेवा लिहा वर देणे होया
देवी वराही मेरी सेवा लिहा हो....

पंकज सिंह महर

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रुपसा रमोती घुंघुर नि बाजा छम....
छुमा जागी जा, माठु-माठु जौलां, किलै जांछी छुम...
छमा रुपसा रमोती, घुंघुर नी बाजा छम्मऽऽऽऽ।

हेऽऽ रुपसाऽऽऽऽऽऽ
निगाव की मानी, तू सेव की जसी डाणीऽऽऽ,
निकर-निकर भागी, तू मेरी नी खानी, नी खालीऽऽऽऽ मैं के टोकली,
झंवर नी बाजा छम्म, छमा रुक जा माठु-माठु जौंला
किले जांछी, छमा,  
ओ रुपसा रमोती घुंघुर नी बजा छमऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ।

हे परुलीऽऽऽऽऽऽ
जौलजीबे म्यावा नि जा, इकेली रुपसाऽऽऽऽ।
तु कैं सटका ली झालो क्वै गोरखिया-भोटिया, जागी जा,
फरकी बे नि चा, घुंघुर नी बजा छम्म....
रुक जा माठु-माठु जौला, किलै जांछी छम्म,

रुपसा रमोती घुंघुर नि बाजा छम....
छुमा जागी जा, माठु-माठु जौलां, किलै जांछी छुम...
छमा रुपसा रमोती, घुंघुर नी बाजा छम्मऽऽऽऽ।

हुक्का बू

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धन शाबास......!
  धन शाबास रे नान्तिनो, भौते भल काम करनोछा तुम लोग, लागी रओ पोथियो,

जी रया, जारी रया।

Risky Pathak

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ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली
मेरी नानि नानि भौ स्कूल जाली
ओ बाबा ठुमका लगाली
ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली
ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली

अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ ओ औ अं अः
अरे ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली
अरे ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली
मेरी नानि नानि चेली स्कूल जाली
ओ बाबा ठुमका लगाली
ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली
ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली

a b c d e f g h i j k l m n o p q r s t u v w x y z
अरे ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली
अरे ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली
मेरी नानि नानि चेली स्कूल जाली
ओ बाबा ठुमका लगाली
ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली
ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली

अ माने अमरुद, आ माने आम
इ माने इमली, उ माने उखल
ऐ माने ऐनक
अरे ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली
अरे ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली
मेरी नानि नानि चेली स्कूल जाली
ओ बाबा ठुमका लगाली
ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली
ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली

a for apple, b for bat
c for cat, d for dog
अरे ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली
अरे ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली
मेरी नानि नानि चेली स्कूल जाली
ओ बाबा ठुमका लगाली
ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली
ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली

अब बनली डोक्टारा तू या फ़िर इंजिनियर
अरे ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली
अरे ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली
मेरी नानि नानि चेली स्कूल जाली
ओ बाबा ठुमका लगाली
ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली
ठुमका लगाली बाबा, ठुमका लगाली
ठुमका लगाली चेली ठुमका लगाली

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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ONE OF THE FAMOUS SONG OF GOPAL BABU GOSWAMI JI. THIS SONG IS DESCRIBING THE BEAUTY, INTEGIRITY ETC OF UTTARAKHAND.

हिमाला को.........
हिमाला को....
हिमाला को उंचा डांडा, प्यारो मेरो गांव,
छबीलो गढ्देश मेरो, रंगीलो कुमाऊं ।
छबीलो गढ्देश मेरो, रंगीलो कुमाऊं॥   हिमाला को.....हिमाला को..

यो भुमि जनम मेरा, माधोसिंह मलेखा
यो भुमि जनम मेरा, माधोसिंह मलेखा,
गबर सिंह, चन्दर सिंह, आजादि का पैदा.
मिटायो जुलम तैको, दिखायो उजायो
मिटायो जुलम तैको, दिखायो उजायो..
छबीलो गढ्देश मेरो, रंगीलो कुमाऊं॥   
छबीलो गढ्देश मेरो, रंगीलो कुमाऊं॥    हिमाला को.....हिमाला को..

गोरिया अवतारि देवा, द्वि भाइ रमौला
हिट्ज्यु भुमिया देवा, भोलू गंगनाथा
जनमि अवतारि नंदादेबि रे कल्याणू
छबीलो गढ्देश मेरो, रंगीलो कुमाऊं॥   
छबीलो गढ्देश मेरो, रंगीलो कुमाऊं॥    हिमाला को.....हिमाला को

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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गोस्वामी जी यह मधुर गाना

सुन सुन सुना -२ मेरी मोहनी
दिन -२ तेरो जोभन जाण ला रो

माया -२ माया-२ मेरी मेरी मोहनी
दिन -२ तेरो जोभन जाण ला रो

अरे ने गेछो दिना धारो माजा
मन यो मेरो उदासी आ गियो

माया -२ माया-२ मेरी मेरी मोहनी
दिन -२ तेरो जोभन जाण ला रो 

Sorry. I am not able to recollect all lines of this song but would try later.

राजेश जोशी/rajesh.joshee

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गोपाल बाबू गोस्वामी जी जैसा महान गायक, गीतकार, सन्गीत्कार तथा सुरों का धनी गायक होना असम्भव है।  बड़े दु:ख की बात है कि ऎसे महान गायक को बहुत कम उम्र में काल ने अपने पाश में समा लिया।

प्रहलाद तडियाल

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ोपाल बाबू गोस्वामी ने उत्तराखण्ड के लोकसंगीत को सरल भाषा व लोकवाद्यों के साथ जनता के सामने रखा. वह अकेले नही तो सर्वप्रथम गायक हैं जिन्होने कुमाऊँनी-गढवाली दोनों आंचलिक भाषाओं में गाने गाये. गोपाल बाबू गोस्वामी ने अपने मीठे कंठ और सुमधुर संगीत से सजे कुमाऊनी-गढवाली गानों की बदौलत उत्तराखण्ड और देश के अन्य भागों में भी खासा नाम कमाया. जो निर्वात गोस्वामी जी के असमय निधन से उत्पन्न हुआ वो इतने साल बाद भी भरा नही जा सका है. गोपाल दा का जन्म अल्मोडा जनपद के पाली पछाऊँ तहसील, पट्टी गेवाड चौखुटिया, ग्राम चाँदीखेत में 2 फरवरी 1941 को हुआ. परिवार में पिता श्री मोहन गिरी , माता श्रीमती चनुली देवी और एक बहन राधा देवी थीं.  5वीं कक्षा चौखुटिया से ही पास की लेकिन 8वीं पास करने से पूर्व ही पिता का देहावसान हो गया. गोपाल को युवा होने से पहले ही पहाडी बेरोजगारों की परम्परानुसार दिल्ली में नौकरी के लिए भटकना पडा. प्राइवेट नौकरी की.  अस्थायी कर्मचारी के तौर पर डी.जी.बी.आर. में नौकरी की. नौकरी पक्की नही हो सकी. वापस गांव आकर खेती-बाडी करने लगे. 1970 में गीत और नाटक प्रभाग का एक दल चौखुटिया गया.गोस्वामी जी उनके सम्पर्क में आये. नैनीताल में साक्षात्कार हुआ और 1971 में गीत और नाटक प्रभाग में नियुक्ति मिल गयी. गोस्वामी जी तब कुमाऊँनी गाने गाते थे लेकिन शोहरत से दूर थे. प्रभाग के मंच पर आकर उन्होने आकाशवाणी लखनऊ में अपना पहला गाना "कैले बजै मुरुली ओ बैणा, उंचि-निचि डांन्यू मां" गाया, जो लोकप्रियता के उच्चतम शिखर को छू गया. उनके आकाशवाणी अल्मोडा और नज्ञीबाबाद से प्रसारित होने वाले गानों का लोगों को बेसब्री से इन्तजार रहने लगा. मित्रों द्वारा प्रोत्साहित करने पर 1976 में पहली कैसेट एच.एम.वी. से निकली.  उनकी काफी कैसेट रिलीज हुई, जिन्हें लोगों ने बहुत अधिक पसन्द किया. उनके गानों में पहाड का सौन्दर्य था, तो सामान्य जनमानस की सोच तथा सामाजिक मुद्दों पर भी वो चुटकियां लेते थे. गोस्वामी जी का कन्ठ के मधुरता गजब की थी. उनकी यह भी विशेषता थी कि वह ऊंचे पिच के गानों को भी वह बडी सहजता से गाते थे.   उनके द्वारा गाये गये गीत विदेशों तथा मैदानी इलाकों में रहने वाले उत्तराखण्डी लोगों में भी बेहद लोकप्रिय हुये. गोपाल दा द्वारा गाये गये गानों की एक लंबी सूची है. इनमें से कुछ ये हैं बेडू पाको बारामासा , जै मैया दुर्गा भवानी , रुपसा रमौति घुंघुर नि बजा छुम-छुमा , भुर-भुर उज्यावो हैगो , मालुरा हरयाला डांड का पार , आखि तेरि कायी-कायी , नै रो चेली नै रो , हिमाला का ऊंचा डांडा आदि गोस्वामी जी ने हिन्दी तथा कुमाउनी में कुछ किताबें भी लिखीं. जिनमें दर्पण , राष्ट्रज्योति , जीवनज्योति (हिन्दी) , गीतमाला ( कुमाउनी ) प्रमुख हैं. एक पुस्तक उज्याव अप्रकाशित है. गोपाल दा की पूरी जिन्दगी उतार-चढाव के बीच गुजरी. उन्हें ब्रैन ट्यूमर हो गया, AIIMS में सर्जरी हुई लेकिन अन्ततः 26 नवम्बर 1996 को गोपाल दा ने शरीर त्याग दिया. लेकिन अपने गानों के साथ गोपाल दा आज भी उत्तराखण्ड के हर निवासी के अन्दर जिन्दा हैं. गोपाल दा की कमी आज भी खलती है.

 

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