Author Topic: Bal Krishana Dhyani's Poem on Uttarakhand-कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी  (Read 26414 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
March 8
बोल हरी बोल केदार

ऐसूं साल जौंला बद्री-केदार कु धाम
पड़ी ऊंला माथा ऊंचा गढ़ कु धाम
ऐसूं साल जौंला बद्री-केदार धाम

बोल हरी बोल केदार
वख ही मिळाला म्यारा भगवान

मनखी ना कैर चिंता ना डैर
हरी हराला दयाला मुक्ति
भक्ति कि तेर च शक्ति
देंण खुटी त
तू भैर धैर

ऐसूं साल जौंला बद्री-केदार कु धाम
पड़ी ऊंला माथा ऊंचा गढ़ कु धाम
ऐसूं साल जौंला बद्री-केदार धाम

बोल हरी बोल केदार
वख ही मिळाला म्यारा भगवान

माँ गांगा हरणि
पाप अपरा दगड़ी बोगनि
सच्ची श्रद्धा राखी
कलयुगी भक्ति त्यागी
अब त चलदी

ऐसूं साल जौंला बद्री-केदार कु धाम
पड़ी ऊंला माथा ऊंचा गढ़ कु धाम
ऐसूं साल जौंला बद्री-केदार धाम

बोल हरी बोल केदार
वख ही मिळाला म्यारा भगवान

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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हिन्दी गीता कु ये च गढ़वाली बोळ संस्करण तुम थै कंण लग जी
May 7
 
 
ऐजा ऐगे मौल्यार

ऐजा ऐगे मौल्यार जीयु छे बेकरार
औ मेरु राजकुमार तेरु बिगर रैई नि जैई

बथों से जबरी बि, चली ये बथऊँ
सरीर मेरु टूटी ऐ ई अंगदेई
जीयु ते थे बारी बार , तेरु हेर
औ मेरु राजकुमार तेरु बिगर रैई नि जैई

जीयु मा ऐकि मिन तेरी बांसुरी
नाचि मि चम चम बजनि पैजनी
जीयु कु ये उल्ल्यार तेरु धै ल्गानु
औ मेरु राजकुमार तेरु बिगर रैई नि जैई

पाणि की मछरि पाणि मा तिसी
कुसी का ऐ दीण फिर बि उदेसी
लेजा मेरी माया ऐ जा अब कि बारी
औ मेरु राजकुमार तेरु बिगर रैई नि जैई

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
8 hours ago
डाली ये

डाली डाली खुदेणी डाली ये
म्यारा अपरू कि खुद लगाणी डाली ये
डाली डाली खुदेणी डाली ये

डाला टूक चढ़ी भुंया फाल मारी ये
ले झम्पा यख ऐ बारी वख वै बारी ये
डाली डाली खुदेणी डाली ये

घाम घम पाड़ा छैन दे डाली ये
खानु खै नींदि ऐ भोरी डाला तौली ये
डाली डाली खुदेणी डाली ये

रिस्ता जम्युं नात ते दगड डाली ये
जामी रै ऐ पाड़ा मा तैमा बैठी घघुति बासी ये
डाली डाली खुदेणी डाली ये

एक उत्तराखंडी

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कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
May 8
बस इनि मा ही गैई

बस इनि मा ही गैई
म्यार मुल्का का लोक ,म्यार मुल्का का लोक
घुमी घुमी सड़की
घूमे कैकि ले गेनि दूर ऊ सड़की छोर,ऊ सड़की छोर
बस इनि मा ही गैई

पैल दोई खुटीन हिटदा जाँदा
अबै दा लागि चार पाईयों को जोड़ ,चार पाईयों को जोड़
कैमा कया लगाण
ते थे कया रैगे दिखाण रीता रीता गौंऊ,रीता रीता गौंऊ
बस इनि मा ही गैई

सुधि कया मिसाण
कैल कुल देब्तों कु निशाँण उठन,कैल निशाँण उठन
ढोल दामू अब हर्ची
नरसिंगा कैल तेर जै कार लगाण,कैल जै कार लगाण
बस इनि मा ही गैई

बस इनि मा ही गैई
म्यार मुल्का का लोक ,म्यार मुल्का का लोक
घुमी घुमी सड़की
घूमे कैकि ले गेनि दूर ऊ सड़की छोर,ऊ सड़की छोर
बस इनि मा ही गैई

एक उत्तराखंडी

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बालकृष्ण डी ध्यानी
45 minutes ago
माँ मेरी माँ

एक धागा तू माता
हर मणि से तेरा नाता माता
माँ मेरी माँ

पग तेरा धो लूँ माता
अब उस अमृत को पी लूँ माता
माँ मेरी माँ

किरणों कि छवि है तेरी
वैसी माया हर तरफ फैली तेरी
माँ मेरी माँ

करुँ क्या बखान माता
मै बालक तू सदा मेरी माता
माँ मेरी माँ

एक उत्तराखंडी

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बालकृष्ण डी ध्यानी
May 9 · Edited
पहाड़ा का इंतजार कब खत्म होगा

अब भी इतंजार है देख तुमसे इन्हे कितना प्यार है
छोड़ ते वक्त देखे थे तुमने इन्हे तब से ये आँखें चार है

ध्यानी

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पाडे मा चकबंदी

पाडे मा चकबंदी
किले हम जाण शैर मा,
पाडे मा चकबंदी पाडे मा चकबंदी
जागि बुरंस अब ऐ पाडे मा
पाडे मा चकबंदी पाडे मा चकबंदी

अब ना व्हाला हाल ,
पाडे मा चकबंदी पाडे मा चकबंदी
हर गौंऊँ व्हालु हैर भैर
पाडे मा चकबंदी पाडे मा चकबंदी

पुंगडा दगडी नाता लागलु ,
पाडे मा चकबंदी पाडे मा चकबंदी
सुप्निया पुरु चकबंदी करेली
पाडे मा चकबंदी पाडे मा चकबंदी

ना उजड्ली स्यारी पुंगड़ी ,
पाडे मा चकबंदी पाडे मा चकबंदी
पाडे मा ही रलु अब ज्वाण
पाडे मा चकबंदी पाडे मा चकबंदी

गरीबी थे स्वास आली ,
पाडे मा चकबंदी पाडे मा चकबंदी
खुठ दगडी खुठा हिटला
पाडे मा चकबंदी पाडे मा चकबंदी

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May 9
डाली ये

डाली डाली खुदेणी डाली ये
म्यारा अपरू कि खुद लगाणी डाली ये
डाली डाली खुदेणी डाली ये

डाला टूक चढ़ी भुंया फाल मारी ये
ले झम्पा यख ऐ बारी वख वै बारी ये
डाली डाली खुदेणी डाली ये

घाम घम पाड़ा छैन दे डाली ये
खानु खै नींदि ऐ भोरी डाला तौली ये
डाली डाली खुदेणी डाली ये

रिस्ता जम्युं नात ते दगड डाली ये
जामी रै ऐ पाड़ा मा तैमा बैठी घघुति बासी ये
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कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
May 7
घाम पड़यूँ च पाड़ा मा

घाम पाड़ों मा तजी गे वहलू
अपरुँ कि गिची दगडी ऊ अबरी बचाणु वहलू
घाम पड़यूँ च पाड़ा मा

ऊ बोबा ये बार खुभ घाम पौड़ी गे पाड़ों मा
कया मरणा कु घाम छे रे बाबा

गद्न्यान न्यारों थे बिस गे वहलू
म्यार अपरुँ गलौड़ी से तिसे कै गे वहलू
घाम पड़यूँ च पाड़ा मा

बांज पड्यां छन पुंगडा
बांज पड़ी यख मेरी कुटुम्बदरी
ना टक्का छीन ना क्वी यख अपरू
सब लगया छन माया की तिमदरी
घाम पड़यूँ च पाड़ा मा

कण बीस गैनी सब का कंठ
कण सूखे गैनी सबुका बिचार अ
कण झोल आई घाम कु क्ख्क भ्तेक
नि रैगे वैका सिवा क्वी यख ओर अ
घाम पड़यूँ च पाड़ा मा

एक उत्तराखंडी

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ऊ मथा

ऊ मथा
म्यरु घौर चा .... २
डेरा कबि म्यारु वख
तब म्यारु मौज छा
ऊ मथा
म्यरु घौर चा .... २

तेड़ा-मेड़ा ऊं बाटों स्यारी
उकाली मा मुंड मा चड़ी भारा
ऊंदारु दौड़ी संघारु
चे चै मारी वख फाली
ऊ मथा
म्यरु घौर चा .... २

दूर गदनी बगेनी
सर सर बथों सर सरनि
तिमला औ आरु का डाळा
आल छाला पल छाला
ऊ मथा
म्यरु घौर चा .... २

समलौणया ऊ सब वहैगेनी
दिस ऐनि बस जि अब दिस गेनी
कबि बस्या छन वख बल
अब हम चार दिवारी कैद छन
ऊ मथा
म्यरु घौर चा .... २

ऊ मथा
म्यरु घौर चा .... २
डेरा कबि म्यारु वख
तब म्यारु मौज छा
ऊ मथा
म्यरु घौर चा .... २

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