Author Topic: Garhwali Poems by Balkrishan D Dhyani-बालकृष्ण डी ध्यानी की कवितायें  (Read 151751 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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कण भाग

कण भाग माण मेरु
कण दुओड़ तन मेरु
ऊँचा पहड़ छुडकी मेरु
कण भाग भग्या मेरु
कण भाग माण मेरु ...............

हे हीमाला हे माया भुमी
ऊँचा कैलाश को थाना
है बद्री हे केदार बाबा
जुग जुग बाटी तेरु बखान
कण भाग माण मेरु ...............

गो गुल्युओं का मेरु रटाण
बाटा सड़की छुड़ कखक भगण
मन परदेस मा कखक लगण
टका की माया भुलंह अब सब भूलहण
कण भाग माण मेरु ...............

बीता दीणु की लगी रैन
बरखा बरसी अन्ख्न्युं का घेण
ये परदेस मी यकुली यकुली रैण
बाबा भुली बौई की याद अब बस आईण
कण भाग माण मेरु ...............

कण भाग माण मेरु
कण दुओड़ तन मेरु
ऊँचा पहड़ छुडकी मेरु
कण भाग भग्या मेरु
कण भाग माण मेरु ...............

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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जओंला

चल दगडी जओंला
पहड़ घूमी ओंला
म्यार गों गोंल्युनो फिरी ओंला
अपड़ा पराया भेंटी ओंला

वख नारंगी की रसीली दाणी
कीन्गोड काफल की डाली
घुघूती हीलंस जाणी पंखी
उजड़ा पड़यूँ देख म्यार गड की झांकी
चल दगडी जओंला

सड़की मोडे गैनी
पर म्यार आपड़
अब तक णी मोडे णी
चखाल बनके कखक उड़े गैनी
चल दगडी जओंला

मील णी जाणी
खैरी की कमाणी
नीसड़ो बाटों गै
की जा कै हरची
चल दगडी जओंला

चल दगडी जओंला
पहड़ घूमी ओंला
म्यार गों गोंल्युनो फिरी ओंला
अपड़ा पराया भेंटी ओंला

बालकृष्ण डी ध्यानी
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काण बोलो

माया लगी रे
काण बोलो
मुख खोंलो
मेरी माया बींगा दे छुरी
आंखी की यूँ साणी ण रे
माया लगी रे

हीमाला टुक देखो रे
गदनीयुं संग बोगो रे
हीशोंओल टीप दे
काफल चख दे छुरी
तेर संग मेरी अब
माया लगी रे

उकालू उन्दारू बाटा रे
ओ सड़की ओ घाट रे
पडैगी जा मनख्यूं का बाता रे
गहशरीयुं गीतों गुंजता डंडा रे
छुची तो भी गीत लगा माया का रे
माया लगी रे

दागडीयूँ को साथ रे
करले मेर दगडी बाता रे
जवाणी को दुई घड़ी को साथ रे
पखड़ ले अब मेरा हाथा रे
जीवण भर हम लागोंला माया रे
माया लगी रे

माया लगी रे
काण बोलो
मुख खोंलो
मेरी माया बींगा दे छुरी
आंखी की यूँ साणी ण रे
माया लगी रे

बालकृष्ण डी ध्यानी
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बुरांश २०११

बुरांश खिली आज यख
लगणी च कीले उदास वख
हम भूलगे बुरांस थै या
बोरंस भुल्गे आज वख
बुरांश खिली आज यख

हर कबीता छन्दा गीतो मा खिली
पहली बार उपन्यास मा छपी
मी थै भी लेलो अंग्वाल अब
तुम्हरू च बस मेरु सरू अब
बुरांश खिली आज यख

हिमाल की विपदा च मेरी
देवभूमी की कथा च मेरी
रीटा डंडा रडद मनख्यूं सी
हेरत आँखों की दशा च मेरी
बुरांश खिली आज यख

यकुली सी मी यख लगुली
कण लगदी बल कदगुली
नंगी खुठ्यों मा देख छुची
अब काँटों की वो कच्बोली
बुरांश खिली आज यख

बुरांश २०११ को अब साथ
राजेन्द्र सिंह कुँवर 'फरियादी'को साथ
और आप लोगों को प्यार
जीवंत रहली देवभूमी की बोरंस
बुरांश खिली आज यख

विषय - उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति पर केन्द्रित स्मारिका बुरांश 2011 के सन्दर्भ में .
प्रतिष्ठा में
धन्यवाद जी और बधाई आपको .................

बालकृष्ण डी ध्यानी
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उत्तरखंड चुनवा

कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा
नेता जी अब घूम घुमा नेताजी अब घुमा
चुनवा की अब आयीं न्यारा अब आयीं न्यारा
म्यार गड देश देखा जी अब नेताओं की भरमार
कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा .....

कमल हाथ बेकार हाथी लालटेन ना ची तेल
अपक्ष उमेदवार को मची च कण देख अँधेरा
कण लगदा ये अब पहाड़ मा फेर शाम सवेर
बस मची सत्ता की भुख अब तू भी भूलह देख
कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा .....

भुख तीस मयारू गढ़वाल युंको उजडु सरू
पानी ना दे सकी पिणाकुंण दारू की च रेल पेल
टुंडा कैकी चुनवा जीतता जीती की फुन्ड दूर फैंका
कैन करना अब विश्वास पैला काई हमरु घात
कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा .....

अब विचार मी छु पड़यूँ कै थै अब की बार की थै जीतावों
को करलो म्यार गढ़ की सेवा को खीलालो मी थै पैड
भ्स्ताचार को दूर भगलो जन लोक पल बिल को लालो
म्यार गैर-सैण थै म्यार पहाड़ की राजधनी बनोलो
कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा .....

सब थै एक थाली का चटा बाटा खाकी मा णा अब जंचता
भरग्या युंक का नोटों का बस्त्ता मंहगे दगडी युंक रिश्ता
अब मी क्या करूँ ये मेरा देबता तू ही बता दे अब रास्ता
मयारू गड देश को हर एक बच्चा ध्यै लगदु अब तिथै आजा
कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा .....

कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा
नेता जी अब घूम घुमा नेताजी अब घुमा
चुनवा की अब आयीं न्यारा अब आयीं न्यारा
म्यार गड देश देखा जी अब नेताओं की भरमार
कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा .....

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ना बचा मेरा कबीता

ना बचा ना बचा मेरा कबीता ..........(२)
को पड़लु मेर कबीता ठेस पुहंचाली
आँखों बाटा भटैक भूलह भूली
गंगा जमुना सी बहैली
ना बचा ना बचा मेरा कबीता ..........(२)

पहाडा टुका बैठी मेर कबीता
गादनीयुं छाल बीछी मेर कबीता
बंजा पुंगड़ सी बंजा पडी मेर कबीता
रीटा डंडा का सी हल सी मेर कबीता
ना बचा ना बचा मेरा कबीता ..........(२)

गों गोल्युं मा गूंज मेर कबीता
उन्दरी उकाला सी खैर मेर कबीता
ग्श्यरीयुन गीतों थै गाती मेर कबीता
बंसरी धुन मा नाचती मेर कबीता
ना बचा ना बचा मेरा कबीता ..........(२)

कै घार माया लागुदी मेर कबीता
कै घार आलोचना सहती मेर कबीता
चुप चाप कबैर खडी मेर कबीता
कबैर हौअल्ल मचादी मे कबीता
ना बचा ना बचा मेरा कबीता ..........(२)

ऊँचा हीमाला सी मेर कबीता
उदस मनख्यूं मां बसी मेर कबीता
की थै खोजनदी मेर कबीता
बटा देख हेरती मेर कबीता
ना बचा ना बचा मेरा कबीता ..........(२)

माँ भगवती ध्यै लगदी मेर कबीता
माँ नंदा को मैत बुल्दी मेर कबीता
ढोल दामो बजन्दी मेर कबीता
नरशिँगा सी गरजती मेर कबीता
ना बचा ना बचा मेरा कबीता ..........(२)

जन चेतना फैलती मेर कबीता
दारू का बाटा भुलाती मेर कबीता
नारी सम्मान सेखादी मेर कबीता
मील जुली का पाठ पड़ती मेर कबीता
ना बचा ना बचा मेरा कबीता ..........(२)

सीयाँ सरकार जगदी मेर कबीता
लोगों थै सचेत करदी मेर कबीता
देहरादुन माँ स्प्नीयाँ देखदी मेर कबीता
गैरसैंण मा क्रांतीकारीयुं शपथ भूलती मेर कबीता
ना बचा ना बचा मेरा कबीता ..........(२)

मेर कबीता मेर उत्तराखंड च
मेर कबीता मेर तन मन च
मेर कबीता देवभूमी क दर्पण च
मेर कबीता अब तेरा कबीता च ?
बचा बचा अब मेर ना अब तेर कबीता च .......(२)

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उत्तरखंड चुनवा
 
 कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा
 नेता जी अब घूम घुमा नेताजी अब घुमा
 चुनवा की अब आयीं न्यारा अब आयीं न्यारा
 म्यार गड देश देखा जी अब नेताओं की भरमार
 कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा .....
 
 कमल हाथ बेकार हाथी लालटेन ना ची तेल
 अपक्ष उमेदवार को मची च कण देख अँधेरा
 कण लगदा ये अब पहाड़ मा फेर शाम सवेर
 बस मची सत्ता की भुख अब तू भी भूलह देख
 कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा .....
 
 भुख तीस मयारू गढ़वाल युंको उजडु सरू
 पानी ना दे सकी पिणाकुंण दारू की च रेल पेल
 टुंडा कैकी चुनवा जीतता जीती की फुन्ड दूर फैंका
 कैन करना अब विश्वास पैला काई हमरु घात
 कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा .....
 
 अब विचार मी छु पड़यूँ कै थै अब की बार की थै जीतावों
 को करलो म्यार गढ़ की सेवा को खीलालो मी थै पैड
 भ्स्ताचार को दूर भगलो जन लोक पल बिल को लालो
 म्यार गैर-सैण थै म्यार पहाड़ की राजधनी बनोलो
 कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा .....
 
 सब थै एक थाली का चटा बाटा खाकी मा णा अब जंचता
 भरग्या युंक का नोटों का बस्त्ता मंहगे दगडी युंक रिश्ता
 अब मी क्या करूँ ये मेरा देबता तू ही बता दे अब रास्ता
 मयारू गड देश को हर एक बच्चा ध्यै लगदु अब तिथै आजा
 कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा .....
 
 कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा
 नेता जी अब घूम घुमा नेताजी अब घुमा
 चुनवा की अब आयीं न्यारा अब आयीं न्यारा
 म्यार गड देश देखा जी अब नेताओं की भरमार
 कण सजी च देहरदुण कण सजी च देखा .....
 
 बालकृष्ण डी ध्यानी
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तेर बोई क्या गोंती

घुघूती बासूती
तेर बोई क्या गोंती
बारमॉस मॉस ग्याई
मेरु जी घरु णी आई
घुघूती बासूती

सात भईओं एक बीरा भैण
सी बाडी बाडी
मेरी भी खुठी मा चुभी ये
भुल्हों काणडी काणडी
घुघूती बासूती

बुरांस प्योंली की हमजोली
मी यकुली सी किले होली
रामी बुहराणी सी मेर गाथा
जसी जैसी पतीवार्ता माता
घुघूती बासूती

म्यार गढ़वाल म्यार पासा
मी कीले चूं आज उदासा
येगी जग्वाल घारा घारा
स्वामी परदेश मी यकुली धारा
घुघूती बासूती

घुघूती बासूती
तेर बोई क्या गोंती
बारमॉस मॉस ग्याई
मेरु जी घरु णी आई
घुघूती बासूती

बालकृष्ण डी ध्यानी
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मेरी माया

आज लगाणु गीत मी
बल कण लगदु प्रीत ई
मन ही मन हर्श्यणु मी
बल की थै खोज्याणु आज मी

मी थै माया ये ऊँचा हीमला
मी थै घेरा ये मेरा कैलाशा
झर झर ये गंगा की धारा
थांडु ये म्यार पाणी का धारा
बल की थै खोज्याणु आज मी

मी थै प्यार ये पुंगडा हमारा
लाल्या कल्या बल्दुं का सारा
ऊँचा डंडा मेरे जीकोड़ी का फैरा
निसा रोल्युं गदयानुँ का पल-छाला
बल की थै खोज्याणु आज मी

भटकी भटकी जीवण मयारू
बुरांस प्युओंली की च अब घरु
कीन्गोड़ काफल की लगी बयार
देख ले तू मेरु ये छूटु संसारु
बल की थै खोज्याणु आज मी

गड़ देश म्यार लगी अंग्वाल
पहुंचा दे म्यरु भी अब जग्वाल
बद्री -केदरनाथ को खंड मयारू
सब से नयारू उत्तराखंड हमरु
बल की थै खोज्याणु आज मी

रंयाँ कखक भी बस तेरु ख्याल
तू ही मयारू पैलू तो ही मेरु मान
तेरा बाण मी थै आयी अभिमान
भारत देश भी काई तेरु गुण गान
बल की थै खोज्याणु आज मी

आज लगाणु गीत मी
बल कण लगदु प्रीत ई
मन ही मन हर्श्यणु मी
बल की थै खोज्याणु आज मी

बालकृष्ण डी ध्यानी
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जुगराज रयां नेता जी

जुगराज रयां नेता जी इन कम करी दी (२)
मेर गढ़वाली बोली थै भाषा बाण दे
राज्य सभा लोक सभा मा ये प्रस्तवा माणड़ दे (२)
मेर माय बोली थै भाषा बाण दे

जुगराज रयां नेता जी इन कम करी दी (२)
दस साल हुग्यानी राज्य बाणीकी अस्थाई राजधानी बाणीकी
गैरसैण को मेरी पहाडा की स्थाई राजधानी बाण दे
क्रांतीकरीयुं के संग हमरी भी प्रीत नीभै दे
मेर गढ़वाली बोली थै भाषा बाण दे

जुगराज रयां नेता जी इन कम करी दी (२)
दस साल मा जिलों की देख कण बाड़ आय्नींचा
प्रगती का नामा पर दारू का ठेखा बीका छान
उनको राद्द कारकी बेटी बव्वारी की विपद हरी दे
मेर गढ़वाली बोली थै भाषा बाण दे

जुगराज रयां नेता जी इन कम करी दी (२)
बंजा पुन्गाडा रीटा डाँडो की रीट लगया छन
माटा कूड़ा मा देख कण अब माया ईट लगया छन
परदेस गया भै भुल्युं की दाणी आंखी बाटा हेर लगया छन
मेर गढ़वाली बोली थै भाषा बाण दे

जुगराज रयां नेता जी इन कम करी दी (२)
मेर गढ़वाली बोली थै भाषा बाण दे
राज्य सभा लोक सभा मा ये प्रस्तवा माणड़ दे (२)
मेर माय बोली थै भाषा बाण दे

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