Author Topic: Kumaoni-Garwali Words Getting Extinct-कुमाउनी एव गढ़वाली के विलुप्त होते शब्द  (Read 33160 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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निझरक्क  -  किस भी चीज की चिंता नहीं होना.! चिंता मुक्त

कपाव  -    सिर

ख्वर   -  सिर..

ब्रमांड   - खोपड़ी


Anil Arya / अनिल आर्य

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ढुवड - किसी पेड का खोखला भाग

Anil Arya / अनिल आर्य

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महिपाल दा , यो टोपिक मै तुम इकले लैगि रै छिया .. मैलि सुवेचि एकाद मै लै पोस्ट करौ !

Anil Arya / अनिल आर्य

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हमारे यहां
सिपाल (सिपाव) - किसी भी पेशे का विशेशग्य.
कोची - ओवर ईटिन्ग

आम बोलचाल की भाषा से विलुप्त होते कुछ शब्द

सिपाल    -    An expert of any friend

आंडकस्से  -   To be over exited for anythng. (This word is going to be disappeared)

दाल्दरी    -  बहुत जयदे खाने की लालसा फिर भोजन मिलने पर नहीं खा पाना ! अधीर

कोची     -    जल्दी जल्दी खाना..

 


Devbhoomi,Uttarakhand

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बर्मंड                      सर
कपाल                    सर
खोप्डू                     सर
गयार                     पेट
पोटगी                    पेट
हथ्गुली                  हथेली

Devbhoomi,Uttarakhand

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कुडू                            मकान
ओवरू                        मकान की नीचे वाली मंजिल का एक कमरा
कुख्डयासु                   जहां मुर्गे और मुर्गियों को रखा जाता है
फुन्ग्डू                       खेत
ख्ल्याण                     घर के आगे की जगह जिसे आँगन भी कहते है

Devbhoomi,Uttarakhand

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बाँदर                                   बन्दर
गौणी                                  लंगूर
कुकूर                                   कुत्ता
बिरालू                                  बिल्ली
गौडू                                    गाय
बल्द                                   बैल
भेन्सू                                  भेंस
बाखुरु                                बकरी
भेरू                                   भेड

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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हूंक  -  यह शब्द शायद अब काफी कम बोल चाल की भाषा में प्रयुक्त होता है! 

मुझे याद है बचपन में ... जब खेलते खेलते बच्चे आपस में लड़ते थे और किसी ने किसी को पीठ में मार दी और उसकी रोने की आवाज भी नहीं निकल रही हो तो, उसे कहते है इसे हूंक पड़ गया!

C.S.Mehta

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आखिर क्यों बिलुप्त हो रहे है इतने सारे उत्तराखंडी भाषा के सब्द..?
आप सभी लोग जानते है की जिस तरह से हिंदी भाषा को आज के लोग काफी इंग्लिश के सब्दो को मिलकर वार्तालाप कर रहे है उसी तरह हमारी उत्तराखंडी भाषा में भी काफी  हिंदी और इंग्लिश भाषा के सबदों का परकोप छा गया है इसी कारण आज हमारे उत्तराखंड में बोल चाल की भाषा में भी काफी मात्रा में लोग इन अलग सब्दो का प्रयोग  कर रहे है जिस के कारण से उत्तराखंडी भाषा के सब्द बिलुप्त हो रहे है
अब देखिए यहाँ लोग कैसे कर रहे है बात चीत.....?
पुरानी उत्तराखंडी भाषा और वर्तमान भाषा का अंतर-
पुरानी भाषा                                          वर्तमान भाषा
म्यार ब्युंत नि छु में न आ सकन-                                       म्यार टाइम नि छु मी न आ सकन (टाइम
त्यर किताब मेज मा छु                                त्यर किताब टेबल मा छु (टेबल)
आब चारपाय मा सी जणू                              आब बेड मा सी जणू (बेड)
देवता पड़ जणू हीटो                                   देवता मंदीर जणू हीटो (मंदीर)
अरे भोते जाड़ लगुडो                                  अरे भोते ठण्ड लगुडो (ठण्ड)
   





एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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निगरगंड - यह शब्द निर्लज आदमी के लिए प्रयुक्त होता था!

झरफर  -  नयी ताज़ी.. काम काज शादी विवाह आदि.

अलबलाट  - जल्दी बाजी.


 

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