धार मां कु गेणुं पार देख ऐ गे
धार मां कु गेणुं पार देख ऐ गे…. ग्वैर चली गेनी तू याखुली रे गे…
ओ ए लछि घोर रुमुक पोड़ि गे-ओए लछि घोर रुमुक पोड़ि गे..
धार मा कु गेणु पार देख ऐ गे, ग्वैर चली गेनी तू याखुली रे गे..
ओए लछि घोर रुमुक पोड़ि गे-ओए लछि घोर रुमुक पोड़ि गे
जागि जा रे ग्यैल्या- मि ना छोड़ी जै, जागि जा रे ग्यैल्या- मि ना छोड़ी जै…
सेरा बोण हेरी गौरु नि मिलीनि, हाथ खुट्युं म्यारा कांडा बैठी गे नि.. २
कख जू खुज्योलू रात पोड़ी गे, जागी जा रे ग्येल्या- मि ना छोड़ी जै…
ओ ए लछि घोर रुमुक पोड़ि गे-ओए लछि घोर रुमुक पोड़ि गे..
दगड़ा का छोरो न गोरु चरेनी, तिन डाल्यूं मां भमोरा बुखैनी.. २
गोरु नि देखि नि छेलु बैठीं रे, ओए लछि घोर रुमुक पोड़ि गे…
जागी जा रे ग्येल्या- मि ना छोड़ी जै, जागी जा रे ग्येल्या- मि ना छोड़ी जै…
गौरु नि मिलला मिन घोर नी आंण, सेसुरियों तै मुख कनु के दिखाण.. २
जा तू जा रे ग्येल्या मी तैं छोड़ी दे, लछि मोरी ग्याई डेरा बोली दे.. .
ओ ए लछि घोर रुमुक पोड़ि गे-ओए लछि घोर रुमुक पोड़ि गे…
ना रो लछि त्यारा गौरु चलि गे नी, ग्वैरू छोरों न डेरा हके ऐ नी.. २
तू त खेलूँ मा मौरन बैठी गे,ओए लछि घोर रुमुक पोड़ि गे…
जागी जा रे ग्येल्या- मि ना छोड़ी जै.
ओ ए लछि घोर रुमुक पोड़ि गे…
जागी जा रे ग्येल्या- मि ना छोड़ी जै.
ओ ए लछि घोर रुमुक पोड़ि गे…
धार मां कु गेणुं पार देख ऐ गे
.....कण लाग जी आप थे जरूर बतवा जी
उत्तराखंडी गीत अनुवाद किया है उत्तराखंडी भाषा को बढ़वा देने के लिये
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बालकृष्ण डी ध्यानी
-देवभूमि बद्री-केदारनाथ