Author Topic: Kumauni & Garhwali Poems by Various Poet-कुमाऊंनी-गढ़वाली कविताएं  (Read 515393 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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आज बग्‍त यनु ऐगि,
हमारु पहाड़ भारी ऊदास,
घौ हमारा हि दिन्‍यां छन,
तौ भी वेका मन मा आस......

हमारा पित्रुन प्‍यारा पहाड़ कू,
हातु सी श्रृंगार करि,
स्‍वर्ग मा छन आज ऊ,
हम्‍न कुछ भि नि करि......

सोचा मन मा अपणा दगड़यौं,
पहाड़ प्‍यारु घैल छ,
हम निपल्‍टदा परदेशु मा,
मन मा हमारा मैल छ.....

जल्‍मभूमि त्‍यागि दगड़यौं,
घर कूड़ी बांजा डाळिक,
नौट कमै नौट्याळ बणिक,
क्‍या पाई मन मारिक.....

देब्‍ता दोष लगला जब,
तब्‍त अपणा मुल्‍क जैल्‍या,
रखा रिस्‍ता गौं मुल्‍क सी,
तख की सब्‍बि धाणि पैल्‍या....

बिंगणा नि छौं आज हम,
मन सी भौत पछतौला,
अक्‍ल आलि हम्‍तैं तब,
जब घर घाट का नि रौला....

जल्‍मभूमि मां हमारी,
चला हे दगड़्यौं पहाड़ जौला,
तख सब्‍बि धाणि ह्वै सकदु,
जिंदगी सुख सी बितौला......
-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु, सर्वाधिकार सुरक्षित, दिनांक 24.9.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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 उत्‍तराखण्‍ड....


भारी रौंत्‍याळु हमारु,
उत्‍तराखण्‍ड छ,
ऊंचा डांडौं मा,
बांज बुरांस का बण मा,
बथौं अर ठण्‍ड छ.....

ज्‍यु पराण सी प्‍यारु,
हमारु उत्‍तराखण्‍ड छ,
जैकी सुंदरता फर हम्‍तैं,
भारी घमण्‍ड छ......

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
दिनांक 17.9.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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 पांच भै कठैत......
श्रीनगर मा जबरि,
जियाजीकनकदेई कू,
राणी राज थौ,
सादर सिंग कठैत का,
पांच बलशाली नौना,
भगोत सिंग, राम सिंग,
उदोत सिंह, सब्‍बल सिंग,
सुजान सिंग सब्‍बि अपणि,
कठैत गर्दी चलौन्‍दा था,
जौन प्रजा फर मुंडकरा लगाई,
जब राज परिवार मा क्‍वी,
स्‍वर्गवासी होन्‍दु थौ,
जू वेकु मुंड नि मुडौन्‍दु थौ,
तब मुंडकरा देन्‍दु थौ,
कठैतुन मुंडकरा उगाई,
राजकोष मा जमा न करैक,
अफु हि हत्‍याई......

कठैतुन पुरिया नैथाणी कू जवैं,
शंकर डोभाळ हाथी मू मराई,
भगोत सिंग न डोभाळ की लाश,
सैडा श्रीनगर मा घुमाई,
सोचि थौ पुरिया तैं गुस्‍सा आलु,
पर पुरिया नैथाणी जिन,
वे हाथी का महावत तैं,
इक्‍यावान कळ्दार दीक,
वे पिठैं लगाइ्र,
अर अति खुशी जताई,
बोलि भाण्‍जा भगोत सिंग न,
शंकर डोभाळ जी तैं मरैक,
भौत भलु काम करि.......

वेका बाद वजीर भगोत सिंग न,
पुरिया नैथाणी बुलाई,
पुरियाजिन पांच रुप्‍या मुछ्याळि,
एक सौ एक रुप्‍या नजर भेंट करि,
तब भगोत सिंग भारी खुश ह्वै,
अपणु जरवफ्त निकाळिक,
पुरिया का गौळा मा डाळी,
शौल भी प्‍यार सी ओढाई,
पुरिया आज बिटि तू मेरु मामा,
वे फर भारी भरोंसु जताई,
कुछ समय बाद,
भगोत सिंग न पुरिया तैं बताई,
तू चांद पुर बधाण का,
खस्‍यौं, बड़ घुत्‍या अर,
ऊंका नेता भागू सौंटियाळ,
भागू झंगोरया तै पकड़िक,
झंजीर फर बांधिक ल्‍हौ,
त्‍वैकु मैं कई सौ ज्‍यूला,
अर जागीर त्‍वैकु द्यौलु,
तब पुरियान बताई,
मी बड़ी जगा कू नि छौं,
पुरिया मेरु नौं,
अर झंगोरया छ मेरु गौं......

पुरिया नैथाणी तैं भगोत सिंग न,
पगड़ी पैराई शौल ओढाई,
एक हजार कळ्दार नकद दिनि,
पुरिया न श्रीनगर बिटि प्रस्‍थान करि,
तीन दिन बाद ऊ चांदपुर बधाण पौंछी,
वख जैक सयाणा भकलैन,
तुम मैं दगड़ि श्रीनगर चला,
तुमतैं खूब जागीर द्यौला,
जब कठैतु कू अंत करि देला,
कमला, त्‍यूंखी, घोत्‍या लोग,
लैंजा लगैक पुरिया का पैथर ऐन,
सब्‍बि श्रीनगर का सुकता सैण मा,
ब्‍याखुनि बग्‍त कठ्ठा ह्वैन,
पुरिया न बोल्‍िा अब आप,
मेरा लत्‍ता कपड़ा फाड़ा,
तब बौळ्या सी बणिक पुरिया,
भाण्‍जा भगोत सिंह का पास,
रात मा आई,
देख भाण्‍जा ऊंन मेरी,
क्‍या दुर्गति करयालि,
मैं ऊं तैं भकलैक ल्‍हेग्‍यौं,
अब तू ऊंक गर्दन उड़ैदि,
भगोत सिंग न बोलि,
मामा तू अबरि चलि जा,
भोळ सुबेर ऊंकी खबर ल्‍यौला.....

पुरिया वापस लौटी,
श्रीनगर पौलिटेक्‍निक का धोरा,
रात मा खोदेगि खाई,
सुबेर सब्‍बि लोग ऐन,
अर कठैतु मा कोठा घेरी,
कठैत बिंगिग्‍यन हम दगड़ि,
भारी धोखा ह्वैगि,
कोठों का द्वार बंद करिक,
कठैतुन अपणा परिजन,
बेरहम ह्वैक कत्‍न करयन,
जैकु बोल्‍दन शाका,
बाद मा ऊंन भागू सौंटयाळ,
बेरहमी सी कत्‍ल करि,
दुश्‍मनुन ऊंका कोठों फर,
आग लगाई,
पांच भै कठैत मारे गेन,
भगोत सिंह की धर्मपत्‍नी,
जू गर्भवती थै,
वींन छेमी मा झाड़ नीस,
लुकिक जान बचाई,
वींकु नौनु छेम सिंह कठैत ह्वै,
वेका द्वी नौना मंगल सिंग,
अर होशियार सिंग ह्वैन,
बतौन्‍दन ऊंका वंशज,
बढियारगढ़, धारकोट धण्‍जी मा छन,
पांच भै कठैतु का मुंड,
पांच भै कठैतु की चौंरी मा,
खांकरा, रुद्रप्रयाग का पास,
पांच भैया खाळ मा रखेग्‍यन........

-जगमोहन सिह जयाड़ा जिज्ञासु
सर्वाधिकार सुरक्षित
दिनांक10.8.2015

http://jagmohansinghjayarajigyansu.blogspot.in/2015/08/blog-post.html

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 देव्‍तौं का धाम मा......

देव्‍तौं का धाम मा देखा आज,
प्रकृति की मार छ,
मनखि जू भी सोचणा होला,
प्रभु की लीला अपार छ......

सबक लिन्‍युं चैन्‍दु सब्‍यौं तैं,
धरती कू श्रृंगार करा,
धौळ्यौं का धोरा घर बणैक,
सुख की आस ना करा.....

सब कुछ अपणा हात छ,
मन मा, जरा विचार करा,
आफत तैं, न्‍यूतु न देवा,
धरती का जख्‍म भरा......

केदार धाम की आफतन,
जौंकु ज्‍यु पराण हरि,
कवि नजर सी याद करदु,
प्रभु तौंकु कल्‍याण करि.....

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
दिनांक 3.7.2015
या कविता मैंन दिनांक 4.7.2015 सांय चार बजि
गांधी शांति प्रतिष्‍ठान, नई दिल्‍ली मा होण वाळी केदार आपदा श्रद्धाजंलि कार्यक्रम का खातिर रचि

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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 कुमाऊं की बारदोली.....


सल्‍ट भारी बीहड़ इलाकु थौ,
अर ऊंचा नीसा डांडा,
फैसला ह्वै,
जब भी क्‍वी बैठक होलि,
रणसिंगा बजैये जालु,
अंग्रेज बोल्‍दा था,
बल यू पहाड़ कू,
खतरनाक टेलीफोन छ......

पटवारी पेशगार तैं,
घूस देणु बंद करेगे,
अब ऊं तैं हर चीज,
मोल ल्‍हीक खाण पण्‍नि थै,
20 सितम्‍बर, 1930 कू,
नयेड़ नदी का छाला,
नरसिंग गिरी का बगड़ मा,
एस.डी.एम. हबीबुर्ररहमान कू,
पुलिस कैम्‍प लगि,
सैडु डंगूला गौं घेरेगि,
गौं मा जू मनखि था,
ऊं फर भारी मार पड़ि,
बचे सिंह जी का घर की,
कुड़कि करेगी,
पुलिसन खूब लूट पाट करि,
घोड़ा दौड़ेक फसलपात,
बरबाद करेगि......

खुमाड़, टुकनोली, चमकना,
जब खबर पौंछि,
रणसिंगा बजि,
कई सौ मनखि,
नयेड़ का छाला कठ्ठा ह्वैन,
फसल कु हर्जानु,
वसूल करेगे,
एस.डी.एम. मजबूर ह्वै,
वापस लौटिगे.....

मौलेखाळ मा सभा ह्वै,
फैसला करेगे,
अत्‍याचारु सी बचण का खातिर,
नेता गिरफ्तार होला,
ठेकेदार पान सिंह पटवाळ,
सबसि पैलि गिरफ्तार ह्वैन,
येका बाद खुमाड़ मा,
पुरुषोत्‍तम जी का यख,
बैठक कू आयोजन ह्वै,
तय करेगे जौंका खिलाफ,
वारंट जारी होयां छन,
अपणि गिरफ्तारी देला,
लक्ष्‍मण सिंह अधिकारी जिन,
आंदोलन कू संचालन करि....

30 नवम्‍बर, 1930 कू,
मोहान डाक बंगला फर,
सत्‍याग्रहियौं कू जत्‍था पौंछि,
डंडा की बरसात ह्वै,
सब्‍बि जेल मा कैद करेग्‍यन....

सिलसिला जारी रै,
चार पांच सिंतम्‍बर, 1942 कू,
खुमाड़ मा भारी भीड़ जमा ह्वै,
गोबिन्‍द सिंह ध्‍यानी जिन,
पुलिस अर एस.डी.एम. कू,
बाटु रोकिक विरोध करि,
जानसनन गोळी चलाई,
गंगाराम अर खिमानंद कांडपाल,
चूड़ामणि अर बहादुर सिंह मेहरा,
शहीद ह्वैन, कुछ लोग घायल ह्वैन,
सल्‍ट की बहादुरी देखिक,
महात्‍मा गांधी जिन,
कुमाऊं की बारदोली की,
पदवी प्रदान करि........

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु,
सर्वाधिकार सुरक्षति,
दिनांक 30'.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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 तिलाड़ी आन्‍दोलन.......


30 मई, 1930 कू,
तिलाड़ी का मैंदान मा,
जनता की बैठक होणी थै,
धौळी यमुना शांत बगणि थै,
सब लोग बेखबर,
बैठक की कार्रवाई,
ध्‍यान सी सुण्‍ना,
अर देखणा था.....

रज्‍जा की फौज न,
बिना चैतेयां मैदान फर,
चौतरफा घेरु मारिक,
निहत्‍थौं फर गोळी चलाई,
मनखि यथैं वथैं,
जान बचौण का खातिर,
डाळौं मा चड़्यन,
यमुना मा कूद्यन,
कयौं की जान गै,
कई घैल ह्वैन.....

दीवान चक्रधर जुयाळन,
बौळ्या बणिक,
जनता फर गोळी चलवाई,
बेकसूर मनख्‍यौं फर,
अत्‍याचार करवार्इ,
लूटपाट मचवाई,
हजारों लोग कैद करयन,
कई मनख्‍यौं तैं,
कैम्‍प मा ल्‍हेक,
ऊंकी जीवन लीला,
खत्‍म करिक,
ऊंकी लाश यमुना मा,
अपणा पाप लुकौण,
अर ढकौण का खातिर,
बेदर्द ह्वैक बगाई,
यमुना आज भी,
मूक गवाह छ,
वे अत्‍याचारी दिन की.....

यथगा होण का बाद,
कै मनख्‍यौं फर,
मुकदमा चलाई,
बीस साल की कैद,
अर जुर्मानु लगाई,
जैजाद कुड़की करि,
राजशाही का अंत की,
यख बिटि शुरुवात,
शुरु ह्वै थै.......

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासु
दिनांक 30.6.2015

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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कविता उत्तराखंड की बालकृष्ण डी ध्यानी
September 26 at 8:17pm ·

कन बरखा पोड़ली ,कब बरखा पोडाली

कन बरखा पोड़ली ,कब बरखा पोडाली
ना तोड़ा दीदा,ना इन यूँ कटा ,यूँ डलियुं …… २

बरखा नि पौडी बल देबता रुस्युं चा
ऐ बार पाणि बिस्युं चा बल देबता रुस्युं चा
बांज पौड़ी धरती बल देबता रुस्युं चा
अपरू घार अपरू देश तिसालु बल देबता रुस्युं चा

नि मानी मिल मेर गलती बल देबता रुस्युं चा
बस मेर च ये हलगर्जि बल देबता रुस्युं चा
बस चल ल मेर यख मर्जी बल देबता रुस्युं चा
बस मि छों और्री कोई ना बल देबता रुस्युं चा

बल चेत जा रे अभी कख देबता रुस्युं चा
तेर निकल जाल रे सब गरमा कख देबता रुस्युं चा
जब तिसलु व्है जाली ये धरती कख देबता रुस्युं चा
बस मोरी जालू तब प्राणी कख देबता रुस्युं चा

बालकृष्ण डी ध्यानी
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देखी छे क्या तिन

देखी छे क्या अ अ अ तिन न न अ
इन मौल्यार कख बी इन उल्यार कख बी
देखी छे क्या तिन

मुखडी विंकी बात कैनी देख,मेरु जीकोडी दख-दख्याट रे
मेरु जीकोडी दख-दख्याट रे
कैल नि बिंगी माया विंकी, मेरु माया कु रगरायट रे
मेरु माया कु रगरायट रे
मैसे ही तो बात कैर मैसे ही तू भेंट कैर
सुबेर सुबेर तू मैसे ही तू सुरवात कैर
देख ना तू कै और्री मेरो आँखा दगडी अपरू आँखा चार कैर

नि राई जियु मेरु पास ,कख लुक्युं हुलु वो आज रे
कख लुक्युं हुलु वो आज रे
उजाली रूप तेरु चाँद जनि ,चकोर सी किलै हुग्युं आज रे
चकोर सी किलै हुग्युं आज रे
मि मी नि राई कख हर्ची गयुं मि आज रे
खोजणा मि थे मेरा अपरा पराया
नि रेंगयुं मि अपरू का पास रे, नि रेंगयुं मि अपरू का पास रे

बालकृष्ण डी ध्यानी
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व्हैग्याई डिजिटल

व्हैग्याई डिजिटल
देश व्हैग्याई डिजिटल
फेसबुक अपरा मुखडी
मुखडी देख रंग ग्याई
व्हैग्याई बल डिजिटल … २

पाणी नि मिल्नु
बिजली नि अब तक ऐई
बांज पौड़ी गे सारी पुंगड़ी
बल कैल चरण ये मा हैल
व्हैग्याई बल डिजिटल … २

भूख नंगा अब भी छिन
रोजगार क्ख्क च जरा बोल्दिन्
बेरोजगारों की फौज खड़ी
स्मार्ट मोबाईल हौस बड़ी
व्हैग्याई बल डिजिटल … २

मिल त कुछ नि बोलण
अब त डिजिटल ही चलण
देखा मुखडी अपरी अपरी सजै
कन देखेणु भुलु मि भी बतै
व्हैग्याई बल डिजिटल … २

बालकृष्ण डी ध्यानी
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भुल्दा मनखी

जिकोड़ो दियू ये माया संभाले ना
जुनि थे ये बाटा भाये ना …… २

दूर बाटा खूब भागी ये सहेरा कू …… २
मन नि लागि यख अखेरा कू

उड़ दा चखुला बल उड़ा दा जा
तिल संसार कथये न समझी पायो रे

भुल्दा मनखी बल तू भुल्दा जा
तिल अपरू परायु नि जनि पायो रे …… २

द्वि दिना की ये दुनिया रे …… २
फिर बी अक्ल दाढ़ तेरी नि आये रे

बगदा पानी बल बगदी जा
कैल तेथे यख ना समझी पायो रे

बालकृष्ण डी ध्यानी
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