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उत्तराखंड पर कवितायें : POEMS ON UTTARAKHAND ~!!!

Started by Dinesh Bijalwan, August 05, 2008, 02:18:42 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
July 16 ·

एक क्लिक मा नाता बणदा
एक क्लिक मा नाता टूटदा
नया जमाना मा दगडू
दग्डया येथै ही बोल्दा
हथगुलियो मा सरकिणी
सर सर टच की दुन्या
टच ह्वैकी बि
अनटच सी स्या लोली दुन्या
अफ्हू रंग मा रंगी रांदी
सेल्फी दुन्या
मुखड़ी का म्यैला मा
ठगी कौथिगेर सी लगदी
स्या लोली क्लिक की दुन्या
रचना......................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
July 14 · Edited ·

चाँद से बतियाने का मजा रात मे है
ये बात तारे जानते है
पर घर मे जुगुनू और भी बहुत है
चाँद से बतियाने को
तारो को घर से निकलना पड़ता है
घर पर चाँद से डेटिंग हो सकती नहीं
तारे सब आवारा है
लेकिन संस्कार भरे इनमे बहुत
जानते है चाँद से बतियाना है
तो तारो को घर से निकलना पड़ेगा
वो लड़के जानते है
वो खुबसुरत लड़की कब नहाके
बालो को झटकने के लिये
छत पर कब आयेगी
इसलिये वो किताबो को
लेकर छत पर टहलते है
तारे सब होश्यार है जानते है
घर से चाँद की चाँदनी देखेगी नहीं
इसलिये चाँद से बतियाने को
तारो को घर से निकलना पड़ता है
रचना .......................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
July 12 · Edited ·

माया सी चार द्यब्ता सी
ह्वेकी बि दिखेंदी नि
माया भरम चा
स्या क्वी जादू
पिरेम माया कु बोल्दन
त पिरेम क्या माया चा
स्या बस ठगौणीया छवी
सबाल मन मा स्यु चा
माया मा मनखी ठगदू अफ्वी
स्या ठगांदु क्वी
माया जन भगवानै माया
हर कैका समझ मा नि आंदी
पर विकी माया सैरी दुन्या चल्दी
पिरेम माया बि इन्नी चा
हवेकी बि हर कैका बिंगणा मा
नि आंदी स्या माया
माया सी चार बिंग सकदु
वू ही ज्यू ठगै माया मा
अब्ब मैमा क्या पुछणा लग्या
विस्बास नि होंदु पुछ ल्या कै मायादार मा
रचना ............................शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बालकृष्ण डी ध्यानी
Yesterday at 2:53am · Edited ·

यंही पर किसी ने

यंही पर किसी ने मुझे आवाज दी थी कभी
जो मेरे कानों से अब भी टकरा रही है
यंही पर किसी ने..........

टूट रहे हैं छूट रहे हैं
पर्वत मेरे वो लूट रहे हैं
कभी बह रही थी वो माध्यम माध्यम
अब उफ़नों का वेग उसने लिया है
जब से हमने उसे बाँध दिया है

यंही पर किसी ने मुझे आवाज दी थी कभी
जो मेरे कानों से अब भी टकरा रही है
यंही पर किसी ने..........

कुछ ना रह जायेगा
देख तो अब भी अगर ना आयेगा
तमाशा गर मै बना जाऊंगा
तेर अस्तित्व भी खो जायेगा
फिर तू खुद को कैसे पायेगा

यंही पर किसी ने मुझे आवाज दी थी कभी
जो मेरे कानों से अब भी टकरा रही है
यंही पर किसी ने..........

एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

नेगी दा का जन्म दिवस मा मिल भी मने प्रेरणा दिवस डाला लगैकी...................शैलेन्द्र जोशी

तिन लगे डाली गीतू की
तिन लगे डाली बिचारो की
तिन लगे डाली संस्कीर्ति की
तिन लगे डाली लोकभासा की
आन बान शान की
ऐशू लगाला जलमदिबस मा
त्येरा नौकी डाली नेगी दा हम भि

रचना .........शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

कविता----------------- शैलेन्द्र जोशी
भै नरु
हरु करियु भारु करियु त्वेन गढ़ गीतों तय भै नरु
हे त्वे जनि गितैर नि ह्वे सक दू फेर
गढ़ कवी गढ़ रफ़ी गढ़ कविन्द्र हे नरेन्द्र सिंह नेगी
सब्दो कु कोठार चा गढ़वाली भासा खुनी मौलियार चा
भै नेगी महान छाया गढ़ गीतों की जान छ्या
गीतों की गंगा सदनी तयरा मुख बीटी बग दी
हैसदी हैसदी गा दी गीत मुड मा टोपला हाथ मा बाज़ा
बहुत स्वाणु लग दू जब गांदी जब कुई पहाड़ी गाना
जब तू ढौल मा ऐकी ढौलैर हुवीकी
यु गीतों की छालार बैकी डैरो डैरो पौंच जादी
उत्तराखंड की समस्या मा रचय बस्य तयारा गीत
त्यरा नयु कैसीट जब बाज़ार मा अन्दु ता धरा धडी बिक जादू
त्यरा नया गीतों की जग्वाल मा लूग रैदन
जनि गीत बाज़ार मा अदन ता समलोणीया ह्वे जादन
कालजय गीतों कु रचनाकार गढ़वाली गीतों कु सिंगार
मखमली भोंन कु जादूगर भै नेगी
हिवाले संसकिरती तय हिवाला ऊँचे देंन वाला अपणु तोर कु कलाकार
गढ़ गीतों कु हीरा भी तू छे नवरतन छे तू गढ़ कु गढ़ रतन छे तू
बात बोदू गढ़ की मन की गढ़ गौरव छे तू
नौसुरिया मुरली जनि सुरीली गौली छा तेरी
गंगा जनि शीतलता चा तेरा गीतों मा
मायालु गीत तेरा मायालु भोंण चा
गीतों कु बाट की लेंन पकड़ी की गीतों का बटोई बणी की
गीतों का बाट ही बणी ग्या
ये मुलुक का सुर सम्राट बनी ग्या
गीतों कु पियूष जुगराज रया सदनी संसकिरती पुरुष

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Khyali Ram Joshi


रात्ती रात्ती पर जिन्दगीक सुरुवात हैं
क्वे आपणा दगा बात होतो खास हैं
हँसि बेर दोस्तों कें सुप्रभात बुलाओ
तो आपणे आप खुशियोंक बरसात हैं

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Garhwali Classes "गढ़वाली छुई"
November 21 at 1:24pm ·

प्रकृति कु बहुत कुछ दियुं हमथेन,
अपणा ही बणी गेनी मेरा बिराणा,
सहेज नि साकु त क्या कन तब,
पुरखों की धरती बगणीच आज,
ज्वानि,जवानी भगणीच आज,
सहेज नि साकु त क्या कन तब,
रुन्दु नवालु धै लगान्दु तुम्हारी धरती सुखणीच आज।
"मैती"

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
July 22 ·

पानी की पीड़ा
पीड़ा मे पानी
तरसा गला एक बूंद पानी
पानी की पीड़ा
पीड़ा मे पानी
प्रकृति प्रक्रिया थी जो पिघलते थे
हिमालय से गिलेशियर गल गल
गंगा बहे घर घर पहुंचे पानी
ये सब हो जाये गी बीती कहानी
आप्राकृतिक हो गया मानव
धर लिया रूप उस ने दानव
काट डाले वन कैसे करे झरने छन छन
मन मे रह गया पानी स्रोत सब सुखे
विश्व शव हो रहा पानी
बचे कैसे पानी अभी तो घर मे थी लड़ाई
तैयार खड़ा विश्व युध पानी
मुखडे से पानी छीन लेगे पडोसी
ज़रूरत है सब को पानी
जाहा देखेगे पानी पागल हो जायेगा आदमी
तस्वीर मे भी देखेगे नदी झरने सागर
फाड़ देगा चीर देगा
दीवाना हुआ जो पानी के लिये आदमी
पानी पानी सारे कषट कालेष घुम रहे है पानी
सारी सुख संपदा है पानी
रचना शैलेन्द्र जोशी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Shailendra Joshi
July 16 ·

एक क्लिक मा नाता बणदा
एक क्लिक मा नाता टूटदा
नया जमाना मा दगडू
दग्डया येथै ही बोल्दा
हथगुलियो मा सरकिणी
सर सर टच की दुन्या
टच ह्वैकी बि
अनटच सी स्या लोली दुन्या
अफ्हू रंग मा रंगी रांदी
सेल्फी दुन्या
मुखड़ी का म्यैला मा
ठगी कौथिगेर सी लगदी
स्या लोली क्लिक की दुन्या
रचना......................शैलेन्द्र जोशी